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-इति शिवहरेआज गौरी कोचिंग जाने के लिए घर से निकली ही थी कि तभी देखा कि एक आलीशान बंगले से काफी जोर जोर से आवाज आ रही थी ।देखा तो पता चला कि जन्मदिन की पार्टी हो रही थी। तभी वह आगे बढ़ने ही वाली थी कि अचानक उसकी नजर एक बच्चे पर पड़ी जो काफी गौर से देख रहा था। वह उसके पास गई और पूछा कि आप ऐसे…
-सुरेन्द्र कुमार (लेखक एवं विचारक) हिम के आँचल में बसा हिमाचल भौगोलिक दृष्टि से बेहद कठिन प्रदेश है। यहाँ की कुल आबादी 68 लाख 64 हजार 602 है। जिसमें आधी जनसंख्या युवाओं की है। लेकिन युवाओं को बीते कुछ वर्षों से यहाँ बढ़ती बेरोजगारी की समस्या प्रमुखता से झकझोर रही है। इस विकराल समस्या ने हमारे शिक्षित युवाओं के दिन का चैन और रात की नींद को हराम कर रखा…
-रमेश सर्राफ धमोरा (स्वतंत्र पत्रकार) राजस्थान में त्यौहारों, पर्वो एवं मेलों की अनूठी परम्परा एवं संस्कृति है वैसी देश में अन्यत्र कहीं मिलना कठिन है। यहां का प्रत्येक मेला एवं त्यौहार लोक जीवन की किसी किवदन्ती या किसी ऐतिहासिक कथानक से जुड़ा हुआ है। इसलिए इनके आयोजन में सम्पूर्ण लोक जीवन पूरी सक्रियता से भाग लेता है। इन मेलों में राजस्थान की लोक संस्कृति जीवन्त हो उठती है। इन मेलों…
-प्रकाश दर्पेचौधरी जी नितांत सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले व्यक्ति थे।अक्सर एक ही लिबास में रहते गोया उनके पास एक मात्र यही एक कपड़े की जोड़ी हो। बिना शेविंग के कई दिन गुज़ार देते । थोड़ा पैसा बचाने के चक्कर में दिनभर दौड़ धूप करते नज़र आते। सस्ता राशन व साग सब्ज़ी के लिए दूर दूर तक भटकना उनकी दिनचर्या में शामिल था। एक निहायत पुराने मकान में परिवार के साथ…
-अब्दुल रशीदगरीब किसान के अमीर नेता जब सुबह अपने मखमली बिस्तर पर बैठकर रेशमी चादर ओढ़े गर्म चाय की चुश्की ले रहे होते हैं तब किसान अपने खेतों में फसलों की रोपाई निराई कर रहा होता है ताकि गन्ने की मिठास से चाय मीठी हो सके, दूध जिसमें चायपत्ती डाल कर उबाली गई है। उस दूध को देने वाली गाय के चारे का इंतजाम हो या फिर चाय की पत्ती…
-डॉ प्रदीप उपाध्याय त्यौहारों का मौसम हो या फिर चुनाव का,आदमी चकरघिन्नी हो जाता है।कभी-कभी लगता है कि ये त्यौहार आते ही क्यूँ हैं!या फिर यह भी कि ये चुनाव करवाये ही क्यूँ जाते हैं।त्यौहार की अपनी आचार संहिता है तो चुनाव की अपनी।और फिर इनमें निषेधात्मक आज्ञाओं को लेकर मैं भी परेशान सा हो जाता हूँ। पटाखे फोडऩे की भी समय सीमा है।समय कब शुरू होता है और कब…
-इं. ललित शौर्यनरेंद्र, राघव और ओजस तीनों में गहरी दोस्ती थी। तीनों ही कक्षा आठ के विद्यार्थी थे। ये तीनों पढ़ने में बहुत होशियार थे। स्कूल की हर गतिविधि में तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। चाहे पन्द्रह अगस्त हो, स्कूल का स्थापना दिवस हो या फिर छब्बीस जनवरी के कार्यक्रम नरेंद्र, राघव और ओजस की तिकड़ी ही सबकुछ संभालती थी। तीनों में अच्छी मित्रता के बावजूद, उनके बीच एक…
- योगेश कुमार गोयल(राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार)भारतीय क्रिकेट जगत में ‘भगवान’ माने जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जब अपने कैरियर में पूरे फॉर्म में थे, तब अक्सर सवाल उठता था कि सचिन जिस प्रकार नए-नए कीर्तिमान बनाते हुए पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर रहे हैं, सचिन के बाद क्या भारतीय क्रिकेट में कोई अन्य खिलाड़ी उनकी जगह ले पाएगा? दरअसल सचिन ने अपने दो दशक लंबे टेस्ट और वनडे…
-तनवीर जाफ़री गत् 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित नोटबंदी के दो वर्ष पूरे हो गए। आशा थी कि अपनी मामूली सी भी उपलब्धि का डंका बजाने में माहिर भारतीय जनता पार्टी अपनी इस तथाकथित 'महान उपलब्धि' का जश्र ज़रूर मनाएगी। यह भी उ मीद थी कि सरकार की ओर से प्रधानमंत्री अथवा देश के वित्तमंत्री प्रत्येक वर्ष नोटबंदी के दिन जनता के समक्ष आकर अपनी इस महान…
-बाल मुकुन्द ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) आबोहवा के बाद अब हरी और पत्तेदार सब्जियां भी मानव स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो रही है। बच्चे से बुजर्ग तक विभिन्न बीमारियों के दौरान चिकित्सक हरी और पत्तेदार सब्जियों को जीवनदायी बता कर सेवन करने की सलाह देते है मगर यही सब्जियां अब हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही है। मिर्च मसाले, दालें, अनाज और खाने पीने…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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