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--सुरेश हिन्दुस्थानी(वरिष्ठ स्तंभकार और राजनीतिक विश्लेषक)- भारत एक लोकतांत्रिक देश है, लोकतंत्र का स्वस्थ होना भी जरुरी है, लेकिन देश में कुछ राजनीतिक दल सत्ता के प्रभाव में लोकतांत्रिक सिछांतों का पूरी तरह से गला घोंटते हुए दिखाई दे रहे हैं। हम जानते हैं कि लोकतांत्रिक सिद्धांत के अनुसार देश के सभी राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ऐसा कुछ भी दिखाई…
-दीपक गिरकर (स्वतंत्र टिप्पणीकार)यह तो जग जाहिर है कि जितनी राशि ऋण वसूली करके सरकारी खजाने में नहीं आती है उससे कई अधिक राशि उसे वसूलने में खर्च हो जाती हैं. किसानों को प्याज के कारण जो आँसू आए थे उन्हें पोछने के लिए सरकार ने किसानों से जो प्याज ख़रीदकर गोदामों में रखा था, उन गोदामों का किराया गोदामों में रखे गये प्याज के मूल्य से अधिक हैं. किसानों…
-रमेश सर्राफ धमोरा (स्वतंत्र पत्रकार) मजदूर दिवस यानि मजदूरों का दिन। कहने और सुनने में कितना शकुन देता है यह शब्द। लेकिन इस शब्द के मायने, शायद उन मजदूरों के लिए कुछ भी नही जिनके नाम पर इसे दुनिया में मनाया जा रहा है। वो बेचारे तो इस दिन भी अपनी रोजी रोजी के लिए कमर तोड़ पसीना बहा रहे होते हैं। यदि नहीं बहाएंगे तो उनका परिवार भूखा ही…
-जावेद अनीस भारतीय लोकतंत्र के दो आधार स्तंभों के बीच की टकराहट अपने चरम पर पहुंच चुकी है और फिलहाल इसके थमने का आसार नजर नहीं आ रहा हैं, विधायिका और कार्यपालिका के बीच की हालिया टकराहट भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गयी यह टिपण्णी कि “सरकार अब न्याय पालिका को अपने कब्जे में करना चाहती है और कार्यपालिका न्याय पालिका को…
सुप्रीम कोर्ट के 17 अप्रैल 2018 के आदेशानुसार बीते मंगलवार को अतिक्रमण को तोड़ने का कार्य कर रही टीम पर एक होटल मालिक ने अपना रौद्र दुस्साहस दिखाते हुए निहत्थों पर गोलियों की बौछार कर दी। सोलन के कसौली स्थित नारायण गेस्ट हाउस एवं होटल के संचालक के बेटे विजय सिंह की गोलियों ने यहां एक कर्मठ अधिकारी शैल बाला को बेमौत मौत के घाट उतार दिया। दोपहर बाद हुई…
-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार)भारत की राजनीति में मधु लिमये स्वच्छ,सादगी,ईमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता के प्रबल पक्षधर के रूप में सर्व विख्यात रहे है। उन्होंने दो बार अपने विचारों और सिद्धांतों से समझौता किया जिसका पश्चाताप ताजिंदगी उन्हें खलता रहा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से अपने वैचारिक मतभेद वे कभी छिपाते नहीं थे। उनके नेता डॉ राम मनोहर लोहिया कांग्रेस को सत्ताच्युत करने के लिए शैतान से भी…
-डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्माअंतरराष्ट्र्ीय श्रम संगठन आईएलओ की हालिया रिपोर्ट ना केवल चेताने वाली है वहीं दुनिया के देशों को बेरोजगारी पर अंकुश लगाने और श्रमिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर विचार करने को मजबूर कर देती है। आईएमएफ की सालाना बैठक में दुनिया के 70 करोड़ से अधिक श्रमिक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। रिपार्ट के अनुसार प्रतिदिन 3.70 डाॅलर प्रतिव्यक्ति आय के दायरे के…
-सुशील दीक्षित 'विचित्र' यह बात कहने में बिल्कुल भी गुरेज नहीं होना चाहिए कि बालात्कार जैसे घृणित कृत्य पर राजनीति हो ,किन्तु यह बात सोचना अपने देश में महज कोरी कल्पना ही होगी | कठुआ काण्ड और उन्नाव काण्ड में कैंडिल मार्च निकालने वाला गिरोह अब कहाँ चला गया है ? इन मामलों से देश का सर नीचे हुआ की घोषणा करने वाले बताएँगे कि देश का सर कितना ऊँचा…
-जावेद अनीस मध्यप्रदेश में कांग्रेस भी चुनावी मोड़ में आ गयी है. चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं और आखिरकार प्रदेश कांग्रेस में करीब दो साल से टाला जा रहा बहुप्रतीक्षित बदलाव हो गया है. लेकिन इसके इसके बावजूद भी ये पहेली भी हल नहीं हो पायी है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की तरफ से शिवराज के खिलाफ मुख्यमंत्री पड़ का चेहरा कौन होगा कमलनाथ या सिंधिया? दरअसल…
-ओम प्रकाश उनियाल(स्वतंत्र पत्रकार)29 अप्रैल को दिल्ली में कांग्रेस की 'जन आक्रोश रैली' का आयोजन राजघाट से रामलीला मैदान तक किया गया। जिसमें विभिन्न राज्यों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। आक्रोश भाजपा की नीतियों के खिलाफ। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व अध्यक्ष कांग्रेस सोनिया गांधी समेत अन्य शीर्ष नेताओं ने जमकर अपनी भड़ास निकाली। रैली का उद्देश्य भ्रष्टाचार, बेरोजगारी,महिला अपराध, किसानों की समस्याअों समेत कई…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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