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- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा जमुनिया भोर के अंधेरे में ही महुआ बीनने निकल पड़ी थी, जबकि सारी रात उसे तेज बुखार रहा था | मगर महुआ नहीं बीनेगी तो खायेगी क्या...? भूखो मरना पड़ेगा | घर में कोई दो पैसे कमाने वाला भी तो नहीं | पिछले साल तक सब ठीक ठाक चल रहा था | एक दिन पति रामआसरे जंगल गये तो फिर लौटकर ही न आये |…
-ओम प्रकाश उनियाललापरवाहियों का नतीजा कितना भयानक होता है। यह जानते हुए भी हर बात पर आदमी लापरवाही बरतता है। लापरवाही को हरेक ने अपने जीवन में इस कदर रचा-बसा लिया है कि छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करता फिरता है। हर कोई लापरवाही कर अपने जीवन को तो खतरे में डालता ही है दूसरों की जिंदगी से भी खिलवाड़ करता है। हरेक ने इसे एक आदत बना डाला है। मुंबई…
-आशुतोष, पटना बिहारबात ऊन दिनों की है जब मै छोटा था, और शहर में किराये की मकान में अपने पिताजी के साथ रहता था।मेरी उम्र लगभग दस ग्यारह वर्ष की होगी मेरे पड़ोस में एक नेताजी रहते थे।वो मुझे अक्सर प्यार से छोटू कहा करते थे। वे बहुत ही मिलनसार और लोगो से घुले मिले रहते थे। मैने कभी उनको अकेले नहीं देखा था।अक्सर लोग उन्हें दुआये देते रहते थे।…
भवानीमंडी (हम हिंदुस्तानी)- साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा चार मार्च 2019 को शिवाराधना ऑनलाइन विडीओ कवि सम्मेलन में प्रतिभागी सभी रचनाकारों को नीलकण्ठ सम्मान से शुक्रवार को सम्मानित किया। सम्मान समारोह के संचालक आशीष पांडेय जिद्दी ने बताया कि जिन कवि कवयित्रियों ने भगवान शिव के लिए भक्तिमय काव्य स्वर साधना के माध्यम से श्रेष्ठ प्रस्तुति दी उन्हें नीलकण्ठ सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में संस्थान के राष्ट्रीय…
-डॉ प्रदीप उपाध्यायफिर समय आ गया है जब तुम्हें अग्नि परीक्षा देना होगी।पहले की तरह ही लोग तुम्हारे चरित्र पर ऊंगलियाँ उठायेंगे।वैसे सभी जानते हैं कि इसमें कहीं कोई तुम्हारा दोष नहीं है लेकिन फिर भी यह इंसानी फितरत है कि बिना किसी को दोष दिये काम चलता ही नहीं है।तुम कर भी क्या सकती हो,जब आज के रावणों की कुटिल चालें और कुदृष्टि तुम्हें निशाना बनाए हुए है ।तुम्हारे…
-सलीम रज़ा हमारे देश का राजनीतिक सिस्टम पूरी तरह से बीमार नजर आ रहा है। खैर बीमार होना तो एक बहाना ही है लेकिन इसके पीछे का सत्य और भी ज्यादा खतरनाक है। आज के दौर में सियासत का जो रूख है वो बेहद ही खतरनाक है। आज सत्ता चाहत इस कदर हावी है कि हर पार्टी दूसरी पार्टी के मुकाबले अपने आप को पम्बर वन साबित करने की ज्रग…

एक होली ऐसा भी

-आशुतोष, पटना बिहार बचपन के ऊन दिनों की बात है होली का त्योहार आने वाला था। बसंत अपने पूरे शबाब पर था पूरवईया हवा खेतो में फसलों की लहड़ाती बालिया, बागो में फूलो की महक और पीली सरसो के फूल आम के छोटे छोटे फल उस पर कोयल की मीठी मीठी संगीत मानो हर्षोउल्लास के वातावरण में मन को प्रसन्नचित कर रहे हों। मेरे पिता साधारण सी नौकरी करते थे।…
गौरव मौर्या, सामाजिक विचारक, भारत एक ऐसा देश है जहां रिश्तों, संस्कारो और परम्पराओं को सबसे बढ़कर माना जाता है। इन्ही रिश्तों में एक रिश्ता है पति-पत्नी का,जिसे भारत मे केवल महिला और पुरुष के बीच हुए करार से अलग दो परिवारों का मिलन माना जाता है।यहाँ रिश्तों को अगले सात जन्मों तक जोड़कर रखे जाने की बात होती है। कितनी ही अन-बन क्यों न हो लेकिन ये रिश्ता जन्म-जन्मांतर…
-अमित डोगरा, पी एच.डी (शोधार्थी) भारतीय परंपरा में हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का त्यौहार मनाया जाता है। होली को धुलेंडी,धुरखेल या धूलिवंदन के नामों से भी जाना जाता है। राग-रंग का यह लोकप्रिय त्यौहार बसंत का संदेशवाहक माना जाता हैं। संगीत अर्थात् राग और रंग तो इसके प्रमुख अंग है ही पर इनको उत्कृष्टता तक पहुंचने वाली प्रकृति भी इस समय रंग बिरंगे यौवन…
-डॉ प्रदीप उपाध्यायइस बार भी वे मिले तो वही रोता हुआ चेहरा लेकर!बोले- “यार,इस बार भी वही फीकी होली।”मैंने कहा- 'क्यों,फीकी क्यों?'वे बोले- "अरे यार, अब वह अपने वाला टाइम कहाँ रहा।न वैसी हुड़दंग और न वैसे तीज-त्यौहार।बस त्यौहार आते नहीं कि पटाखों पर प्रतिबंध, हुडदंग नहीं, यह नहीं, वह नहीं।फिर त्यौहार का मजा ही क्या।अभी होली पर पीछे पड़ गए हैं कि पानी बचाओ।जल ही जीवन है,जल की एक-एक…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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