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-इं.ललित शौर्यसितम्बर आते ही हिंदी का हड़कंप शुरू हो जाता है। सरकारी विभागों से लेकर, नेता ,अभिनेता, अंग्रेजी स्कूल हिन्दी के गुणगान करने के लिए गोष्ठियां आयोजित करने लगते हैं। वैसे ये हिन्दी को वार्षिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम होता है। लेकिन कार्यक्रम को इस तरीके से मैनेज किया जाता है कि लगता ही नहीँ की अगला श्रद्धांजलि कार्यक्रम करवा रहा है। इस दिन हिन्दी वीरों की खूब पूजा होती है। जिन…
-प्रभुनाथ शुक्ल (स्वतंत्र पत्रकार)समाज की अगड़ी जातियों की तरफ से 06 सितम्बर को दलित कानून के खिलाफ भारत बंद मोदी सरकार के गले की फांस बन गया है। सरकार को यह कत्तई उम्मीद नहीं थी कि सोशलमीडिया का गुस्सा सड़क पर इतना कारगर और सफल हो सकता है। अगड़ी जातियों की नाराजगी 2019 में उसके लिए भारी पड़ सकती है। भाजपा और कांग्रेस ने वोट बैंक और सत्ता के लिए…
-डॉ नीलम महेंद्र(Best editorial writing award winner) भारत शुरू से ही एक उदार प्रकृति का देश रहा है, सहनशीलता इसकी पहचान रही है और आत्म चिंतन इसका स्वभाव।लेकिन जब किसी देश में उसकी उदार प्रकृति का ही सहारा लेकर उसमें विकृति उत्पन्न करने की कोशिशें की जाने लगें, और उसकी सहनशीलता का ही सहारा लेकर उसकी अखंडता को खंडित करने का प्रयास किया जाने लगें,तो आवश्यक हो जाता है कि…
-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ) पिछले हफ्ते सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की बढ़ोतरी को लेकर अच्छी खबर आई।चालू वित्त वर्ष के प्रथम तिमाही में जीडीपी विकास दर अनुमान से कहीं अधिक 8.2% रही।लेकिन इस ऐतिहासिक विकास दर के दौरान रोजगार के आँकड़े चिंतनीय रहे।इसी दौरान रोजगार में 1% की कमी आई है।तिमाही की जीडीपी संगठित क्षेत्रों के प्रदर्शन पर आधारित होती है।दूसरी तिमाही में भी रोजगार में तेजी…
-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ) भारतीय रिजर्व बैंक की जारी वार्षिक रिपोर्ट काफी हद तक सरकार की नोटबंदी की कवायद पर नतीजे पेश करती है।सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये की तत्कालीन मुद्रा बंद करने की घोषणा की थी,जो कुल प्रचलित मुद्रा का 86 फीसदी थी।रिजर्व बैंक के अनुसार नोटबंदी के समय देशभर में 500 और 1000 के कुल 15 लाख 41 हजार करोड़ रुपये…
बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) दुनिया से निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यूनेस्को ने 17 नवंबर, 1965 के दिन 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस साक्षरता और कौशल विकास विषय के साथ दुनिया भर में मनाया जाएगा।साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल…
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा दरोगा उदय प्रताप सिंह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे | शहर के नामचीन डाक्टरों से दवा ले चुके थे, परन्तु स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो रहा था | थकहार कर वे दिल्ली चले गये | वहाँ शरीर की पूर्ण जाँच की गई |डा. अजय ने अफसोस जताते हुए दरोगा जी को बताया कि उन्हें एड्स हो गया है | अब सिर्फ दवाईयों के…
-डॉ प्रदीप उपाध्यायउन्होंने कहा है तो सच ही होगा।यदि अनुशासन में किसी को लायेंगे तो तानाशाह तो कहलायेंगे ही।घर हो,परिवार हो,दफ्तर हो,सदन हो,समाज हो या देश हो सब अपने अनुरूप हो,सभी अपने अनुसार चलें,शायद यही तो अनुशासन है।लेकिन व्यवस्था सुधारने या व्यवस्था करने के नाम पर अनुशासन लागू कर भले ही हम इसे अनुशासन पर्व का नाम दे दें,चंगेजी घोड़े कहाँ मानने वाले!घर में मुखिया की अनुशासन की हुकूमत तभी…
-निर्मल रानीप्राचीन समय में मुहावरों तथा कहावतों की रचना निश्चित रूप से हमारे पुर्वजों द्वारा पूरे चिंतन-मंथन,शोध तथा अनुभवों के आधार पर की गई होगी। ऐसे ही शोधपरक मुहावरों व कहावतों में सास-बहू की लड़ाई तथा सौतेली मां का ज़ुल्म जैसी बातें भी शामिल हैं। कभी हमने यह नहीं सोचा कि ऐसी कहावत आ ि़ार क्यों नहीं गढ़ी गई कि ससुर दामाद में पटरी नहीं खाती या सौतेला बाप अत्याचारी…
स्टिंग मामले में दो साल बाद फिर गर्मायी सियासत - योगेश कुमार गोयल विधायकों की खरीद-फरोख्त संबंधी उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीब ढ़ाई साल पुराने स्टिंग का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकल आया है। उल्लेखनीय है कि 26 मार्च 2016 में प्रदेश में हरीश रावत का एक स्टिंग सामने आया था, जिसमें एक न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ के मालिक उमेश शर्मा और रावत को विधायकों की…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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