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सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के साथ पीएनजी पर भी दे रही जोर : पीएम मोदी

सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के साथ पीएनजी पर भी दे रही जोर : पीएम मोदी
  • PublishedMarch 24, 2026

राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर सरकार की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार ईंधन के किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है और घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के साथ-साथ पीएनजी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

ऊर्जा स्रोतों में विविधता पर सरकार का फोकस

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और हाल के वर्षों में इस गति को और तेज किया गया है। साथ ही एलपीजी के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास भी लगातार जारी हैं, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

आत्मनिर्भरता पर जोर, विदेशी निर्भरता घटाने की पहल

उन्होंने कहा कि सरकार का लगातार प्रयास रहा है कि हर क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम हो और भारत आत्मनिर्भर बने। मौजूदा समय में देश का 90% से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों पर निर्भर है, जो किसी वैश्विक संकट में चुनौती बन सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए ‘मेड इन इंडिया’ जहाज निर्माण के लिए करीब 70 हजार करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया गया है।

शिपिंग और रक्षा उत्पादन में बढ़ी क्षमता

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग और मेंटेनेंस-ओवरहॉलिंग जैसी सुविधाओं के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। बीते वर्षों में हुए प्रयासों का परिणाम है कि देश अब अपनी जरूरत के अधिकांश हथियारों का निर्माण खुद कर रहा है।

दवाओं और खनिजों में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

उन्होंने कहा कि एक समय भारत जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर था, लेकिन अब देश में ही एपीआई इकोसिस्टम विकसित करने के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। इसी तरह रेयर अर्थ मिनरल्स में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

वैश्विक संकट के बीच सतर्क सरकार

प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और इससे उबरने में समय लगेगा। भारत पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप कर रहा निगरानी

उन्होंने बताया कि सरकार ने एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन किया है, जो नियमित रूप से बैठकर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़ी चुनौतियों का आकलन करता है। सरकार शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीतियों के तहत हालात पर नजर बनाए हुए है।