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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारतरत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारतरत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
  • PublishedFebruary 27, 2026

समाज सुधारक और प्रबुद्ध राष्ट्र सेवक भारतरत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में पुष्पांजलि अर्पित की।

अंत्योदय की सोच और संपूर्ण क्रांति में भूमिका

उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि नानाजी देशमुख अंत्योदय की सोच में पूरा यकीन रखते थे और उन्होंने अपना जीवन समाज के आखिरी व्यक्ति की भलाई के लिए समर्पित किया। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में “संपूर्ण क्रांति” आंदोलन में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य किया।

ग्रामीण विकास और राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पण

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि नानाजी देशमुख को ग्रामीण विकास, सामाजिक बदलाव और राष्ट्र-निर्माण के प्रति उनके आजीवन समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने किया नमन

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य और भारतरत्न नानाजी देशमुख ने अपना संपूर्ण जीवन ग्रामीण भारत के उत्थान, शिक्षा के प्रसार और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के लिए समर्पित किया। उनके अनुसार, समाज सेवा नानाजी के लिए विचार नहीं, बल्कि साधना थी और उनका जीवन आज भी राष्ट्रनिर्माण के पथ पर प्रेरणा देता है।

जी. किशन रेड्डी ने बताया दूरदर्शी समाज सुधारक

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नानाजी देशमुख ने ग्रामीण विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भर गांवों के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जीवन अंत्योदय की भावना का सशक्त उदाहरण है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की श्रद्धांजलि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नानाजी देशमुख का जीवन नि:स्वार्थ सेवा और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान की अमिट प्रेरणा है। उन्होंने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि लोक-कल्याण और शुचिता का मार्ग बनाया।

ग्रामोदय से राष्ट्रोदय का संदेश

उन्होंने कहा कि सक्रिय राजनीति के शिखर पर रहते हुए नानाजी देशमुख ने अपना जीवन ग्रामीण भारत के स्वावलंबन के लिए समर्पित कर दिया। ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ का उनका दृष्टिकोण देश को आत्मनिर्भरता की नई दिशा देता है और उनका सादगीपूर्ण जीवन जनसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।