Delhi Blast मामला: LG ने Police को दिए सख्त निर्देश! अब ‘इस’ चीज की बिक्री का रखना होगा पूरा रिकॉर्ड

नई दिल्ली, 21 नवंबर, 2025 : दिल्ली के लाल किला क्षेत्र के पास हुए भीषण विस्फोट के बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उपराज्यपाल (LG) ने पुलिस को अहम निर्देश दिया है। उन्होंने आदेश दिया है कि शहर में अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate) जैसे खतरनाक रसायनों की एक निश्चित सीमा से अधिक बिक्री होने पर उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाए।
यह कदम भविष्य में ऐसी किसी भी आतंकी घटना को रोकने और विस्फोटकों की आसानी से उपलब्धता पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।
मौलवी कर रहा था डॉक्टरों की मदद
जांच में सामने आया है कि फरीदाबाद (Faridabad) स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) से चल रहे ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का दायरा बहुत तेजी से बढ़ रहा था। अगर सुरक्षा एजेंसियां थोड़ा और वक्त लेतीं, तो यह नेटवर्क कई गुना फैल सकता था।
मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल (Dr. Muzammil), डॉ. उमर (Dr. Umar) और डॉ. शाहीन (Dr. Shaheen) इस नेटवर्क को फैलाने में लगे थे। इस काम में इलाके का मौलवी इश्तियाक मोहम्मद (Maulvi Ishtiaq Mohammad) उनकी खुलकर मदद कर रहा था और उसने 10 से ज्यादा स्थानीय लोगों की मुलाकात इन डॉक्टरों से करवाई थी।
2900 किलो विस्फोटक और ‘हवाला’ का पैसा
इस पूरे मॉड्यूल में डॉ. मुजम्मिल सबसे अहम भूमिका निभा रहा था। वही सीधे पाकिस्तानी हैंडलर (Pakistani Handler) के संपर्क में था और हवाला (Hawala) के जरिए पैसे मंगवाता था। विस्फोटक और हथियार इकट्ठा करके उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर छिपाने की जिम्मेदारी भी उसी की थी।
पुलिस को धौज (Dhauj) और फतेहपुर तगा (Fatehpur Taga) गांव में जो 2900 किलो विस्फोटक मिला, उसे छिपाने के लिए कमरे भी मुजम्मिल ने ही किराए पर लिए थे।
मोबाइल रिपेयर के बहाने खरीदीं SIM
जांच एजेंसी एनआईए (NIA) ने धौज के रहने वाले सब्बीर (Shabbir) को हिरासत में लिया है, जिसकी मोबाइल की दुकान है। करीब 8 महीने पहले मुजम्मिल अपना फोन ठीक कराने वहां गया था और दोस्ती करके उसने वहीं से कई फर्जी सिम कार्ड खरीदे थे। इसके अलावा, उसने एक अन्य स्थानीय व्यक्ति इकबाल मद्रासी (Iqbal Madrasi) से बिना आईडी दिए कमरा किराए पर लिया था, जिससे उसकी मुलाकात अस्पताल में दवाई लेने के दौरान हुई थी।
लड़कियों को जोड़ने का प्लान हुआ फेल
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी डॉ. शाहीन ने इस आतंकी नेटवर्क में लड़कियों को शामिल करने का भी प्लान बनाया था। उसकी डायरी में कुछ लड़कियों की लिस्ट भी मिली है और यह भी जिक्र है कि किसे कितने पैसे देने हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि शाहीन अपनी इस साजिश में कामयाब नहीं हो पाई और वह यूनिवर्सिटी की किसी भी महिला डॉक्टर, स्टाफ या छात्रा को इस नेटवर्क में शामिल नहीं कर सकी।
