भ्रष्टाचार मिटाने वाली संस्था Lokpal खरीदेगी 7 Luxury BMW कारें! टेंडर जारी,

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2025 : देश की एंटी-करप्शन वॉचडॉग (Anti-Corruption Watchdog) लोकपाल ऑफ इंडिया इन दिनों अपने एक नए कदम को लेकर सुर्खियों में है। संस्था ने 7 लग्ज़री BMW 3 Series Li कारों की खरीद के लिए टेंडर (Tender) जारी किया है। प्रत्येक कार की अनुमानित कीमत लगभग 70 लाख रुपये बताई जा रही है, जिससे कुल खरीद मूल्य 5 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
यह टेंडर 16 अक्टूबर 2025 को लोकपाल की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी हुआ। इसमें लिखा गया है कि प्रतिष्ठित सप्लायर्स से इन वाहनों की आपूर्ति के लिए ओपन टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। यह गाड़ियाँ लोकपाल के चेयरपर्सन और सदस्यों को दी जाएंगी।
लक्ज़री BMW कारों का टेंडर – क्या है पूरा मामला
इस टेंडर के अनुसार प्रत्येक सदस्य को एक-एक BMW 330 Li (Long Wheel Base) दी जाएगी।
1. टेंडर की वैधता (Validity) 90 दिन तक निर्धारित की गई है।
2. इच्छुक आपूर्तिकर्ता (Suppliers) 7 नवंबर से पहले अपनी बोली जमा कर सकते हैं।
3. बोली मूल्यांकन (Bid Evaluation) की प्रक्रिया 7 नवंबर से शुरू होगी।
लोकपाल की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस खरीद का उद्देश्य संस्थान के प्रशासनिक और ट्रांसपोर्ट (Transport) व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाना है, ताकि उच्च अधिकारियों की सरकारी यात्राएं (Official Mobility) सुरक्षित और प्रभावी तरीक़े से की जा सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम भी होगा शामिल
टेंडर की एक विशेष शर्त यह है कि BMW कंपनी इन वाहनों की डिलीवरी के बाद लोकपाल के ड्राइवरों और कर्मचारियों के लिए सात दिन का प्रशिक्षण (Training Program) आयोजित करेगी।
इस ट्रेनिंग में निम्नलिखित बिंदु शामिल होंगे:
1. वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक और सुरक्षा सिस्टम की जानकारी।
2. गाड़ियों के तकनीकी परिचालन (Operational Handling) की प्रक्रिया।
3. आपात स्थिति (Emergency Condition) में सुरक्षा मानकों का पालन।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन लग्ज़री वाहनों का उपयोग सुरक्षित, टिकाऊ और सरकारी मानकों के अनुरूप हो।
आलोचना और विवाद – एक्टिविस्टों ने उठाए सवाल
हालांकि जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। कई कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने एक एंटी-करप्शन एजेंसी द्वारा लग्ज़री गाड़ियाँ खरीदने पर आपत्ति जताई।
सामाजिक कार्यकर्ता और वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए कहा —
“सरकार ने लोकपाल संस्था को कमज़ोर कर दिया है और अब इसके सदस्य खुद लग्ज़री में डूबे हुए हैं।”
कई यूज़र्स ने भी सवाल उठाए कि जब भ्रष्टाचार निरोधक संस्था स्वयं के लिए इतने महंगे संसाधन खरीद रही है, तो यह जनहित और सादगी के सिद्धांतों से मेल नहीं खाता।
क्या है लोकपाल? समझिए इसकी भूमिका
लोकपाल भारत का एक स्वतंत्र भ्रष्टाचार निरोधक प्राधिकरण (Anti-Corruption Authority) है, जिसकी स्थापना लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 (Lokpal and Lokayukta Act, 2013) के तहत हुई थी।
1. यह संस्था अन्ना हजारे (Anna Hazare) के जन लोकपाल आंदोलन (Jan Lokpal Movement) के बाद अस्तित्व में आई।
2. वर्तमान में इसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय माणिकराव खानविलकर हैं।
3. लोकपाल प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकता है।
4. इसके अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में वे संगठन भी आते हैं जो संसद अधिनियम के तहत स्थापित हैं, केंद्र सरकार से वित्तपोषित हैं या 10 लाख रुपये से अधिक की विदेशी सहायता प्राप्त करते हैं।
राज्यों में लोकायुक्त की भूमिका
राष्ट्रीय स्तर पर जहां लोकपाल कार्य करता है, वहीं राज्यों में इसी तरह की जांच-पड़ताल लोकायुक्त (Lokayukta) करते हैं। लोकपाल और लोकायुक्त प्रणाली मिलकर यह सुनिश्चित करती है कि देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई (Anti-Corruption Action) राष्ट्रीय और राज्य, दोनों स्तरों पर प्रभावी रहे।
