PM Modi 1 अक्टूबर को RSS के शताब्दी समारोह में लेंगे भाग, जानें क्या है पूरा कार्यक्रम

नई दिल्ली, 30 सितंबर, 2025 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अक्टूबर, 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister’s Office – PMO) के अनुसार, यह कार्यक्रम नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में सुबह 10:30 बजे आयोजित किया जाएगा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर, प्रधानमंत्री राष्ट्र निर्माण में RSS के योगदान को दर्शाने वाला एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी करेंगे। इसके बाद वे वहां उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे।
“मन की बात” में भी PM मोदी ने की थी RSS की सराहना
इससे पहले, रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने RSS के 100 साल पूरे होने को एक “अभूतपूर्व और प्रेरणादायक” यात्रा बताया था।
1. PM मोदी ने कहा: “यह विजयादशमी एक और कारण से बहुत खास है। इस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। एक सदी की यह यात्रा अद्भुत, अभूतपूर्व और प्रेरणादायक है।”
2. स्थापना का उद्देश्य: प्रधानमंत्री, जो स्वयं एक पूर्व RSS प्रचारक रह चुके हैं, ने याद दिलाया कि संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के शुभ अवसर पर परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। उस समय देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और एक पहचान के संकट से जूझ रहा था।
3. ‘राष्ट्र प्रथम’ का सिद्धांत: PM मोदी ने RSS की ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा की प्रशंसा करते हुए कहा कि संघ के स्वयंसेवकों के हर कार्य में यह सिद्धांत सर्वोपरि रहता है। उन्होंने आपदा के समय राहत कार्यों में संघ के योगदान की भी सराहना की।
RSS की एक सदी की यात्रा
1. स्थापना: RSS की स्थापना 1925 में नागपुर, महाराष्ट्र में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना था।
2. लक्ष्य: संघ का अंतिम लक्ष्य भारत का “सर्वांगीण उन्नति” है, जिसके लिए प्रत्येक स्वयंसेवक खुद को समर्पित करता है।
3. योगदान: पिछले 100 वर्षों में, RSS ने शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान RSS के स्वयंसेवकों ने राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लिया है।
यह शताब्दी समारोह न केवल RSS की ऐतिहासिक उपलब्धियों का सम्मान करता है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा में इसके स्थायी योगदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी उजागर करता है।
