प्रमुख खबरें

टैरिफ भी न रोक सका रफ्तार: हमारी अर्थव्यवस्था फिर रच रही नया इतिहास

टैरिफ भी न रोक सका रफ्तार: हमारी अर्थव्यवस्था फिर रच रही नया इतिहास
  • PublishedSeptember 16, 2025

हमारे देश की अर्थव्यवस्था इस समय ऐसी रफ़्तार पकड़ चुकी है, जिसने न केवल देश के भीतर बल्कि दुनिया भर में विश्लेषकों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वैश्विक अनिश्चितताओं, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक तनावों और अमेरिकी टैरिफ़ जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास दर लगातार उम्मीद से अधिक दर्ज हो रही है। यह तस्वीर बताती है कि भारत ने अपनी आर्थिक संरचना को इतना मजबूत बना लिया है कि बाहरी झटके भी उसके आत्मविश्वास को हिला नहीं पा रहे। मोदी सरकार के अडिग फैसलों के चलते घरेलू मांग, सेवाओं का निर्यात और निवेश की निरंतरता ने मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।

जीडीपी में लगातार उछाल और उसके मायने

पिछले कुछ दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताई गईं। कभी कहा गया कि महामारी के बाद देश की खपत क्षमता घटेगी, तो कभी यह शंका उठाई गई कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक तनाव भारतीय निर्यात को कमजोर कर देंगे लेकिन हालिया आंकड़े इन सभी आशंकाओं को गलत साबित कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2024–25 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे तेज़ वृद्धि रही। यह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं बल्कि इस बात का सबूत है कि भारत की बुनियादी आर्थिक ताकत अपेक्षा से कहीं अधिक गहरी है।

प्राइवेट फाइनल कंजप्शन एक्सपेंडिचर (PFCE) में भी 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिसने यह साबित किया कि भारतीय उपभोक्ता अब भी बाज़ार में सक्रिय हैं और उनकी खरीद क्षमता मजबूत बनी हुई है।

भविष्य की मजबूत नींव

भारत के विकास की असली ताकत केवल खपत में नहीं बल्कि निवेश और पूंजी निर्माण में भी निहित है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 7 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। यह संकेत देता है कि निवेशक भारत को एक सुरक्षित और आकर्षक बाज़ार मान रहे हैं। सरकार द्वारा पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी ने भी इस दिशा में अहम योगदान दिया है। बुनियादी ढांचे, सड़क, रेलवे और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किए जा रहे निवेश ने निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहित किया है।

दूसरी ओर, शेयर बाज़ार ने भी अलग तस्वीर पेश की। निफ्टी और सेंसेक्स बढ़त के साथ खुले और निवेशकों ने संकेत दिए कि उन्हें भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं में सुधार की उम्मीद है जिसके परिणाम आने भी शुरू हो गए हैं। यह भी दर्शाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा है और वे इसे वैश्विक घटनाओं से परे देखते हैं।

भारतीय ताकत की झलक

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर हमेशा कहा जाता है कि यह सर्विसेज पर आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है। मौजूदा आंकड़े इस दावे की पुष्टि करते हैं। जबकि सामान का निर्यात स्थिर रहा, सेवाओं का निर्यात 13 प्रतिशत की दर से बढ़ा। इसका मतलब है कि भारत के आईटी, वित्तीय सेवाओं और बिज़नेस प्रोसेस मैनेजमेंट सेक्टर ने वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली है।

सेवाओं के निर्यात में यह मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को एक संतुलित मॉडल की ओर ले जा रही है। कुल निर्यात में भी लगभग पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

बैंकिंग प्रणाली की मजबूती और वित्तीय स्थिरता

आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू वित्तीय स्थिरता होती है। मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अपने बैंकिंग क्षेत्र को सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। परिणामस्वरूप आज बैंकिंग प्रणाली कहीं अधिक अनुशासित और स्थिर है। उधारी में संयम और जोखिमों के प्रति सावधानी ने यह सुनिश्चित किया है कि वित्तीय क्षेत्र अब किसी बड़ी गड़बड़ी का शिकार न हो।

इसके साथ ही चालू खाता घाटा लगभग शून्य के करीब है। यह स्थिति बताती है कि भारत का बाहरी लेन-देन संतुलित हो रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है और भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से बची हुई है।

अमेरिकी टैरिफ भी नहीं रोक सका राह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा हाल ही में लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ़ ने वैश्विक व्यापार में हलचल मचा दी। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। शुरुआती आशंका यह थी कि इन टैरिफ़ का भारतीय निर्यात पर गहरा असर पड़ेगा और जीडीपी वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ट्रंप द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ़ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ गति से आगे बढ़ती रहेगी। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने भी भारत की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को पहले से अधिक कर दिया है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी मज़बूत है कि यह झटका लंबे समय तक असर नहीं डाल पाएगा।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की राय

भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर केवल सरकार ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी सकारात्मक नजरिया रखती हैं। फिच रेटिंग्स ने अपने पूर्वानुमान को संशोधित कर भारत की विकास दर को 6.9 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि घरेलू मांग और सेवाओं की ताकत भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती दे रही है।

फिच का यह फैसला उस समय आया है जब कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी टैरिफ़ और डॉलर की मज़बूती से जूझ रही हैं। इसके बावजूद भारत पर निवेशकों का भरोसा कायम है और विदेशी एजेंसियां मानती हैं कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास दर स्थिर और मजबूत बनी रहेगी।

PM मोदी की सामंजस्यपूर्ण समाधान नीति के परिणाम

अमेरिकी टैरिफ़ ने निश्चित रूप से वैश्विक व्यापार को हिला दिया है लेकिन भारत पर इसका असर सीमित और अस्थायी ही है। हालिया आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी तेज़ रफ्तार से बढ़ रही है। निवेश, खपत, सेवाओं का निर्यात और वित्तीय स्थिरता ने मिलकर इसे मजबूती दी है।

यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भारत को लेकर आशावादी बनी हुई हैं। जिस तरह से मोदी सरकार संरचनात्मक सुधारों को और गहराई से लागू कर रही है और वैश्विक चुनौतियों का सामंजस्यपूर्ण समाधान निकालने में कामयाब हो रही है उससे स्पष्ट है कि भारत न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बरकरार रखेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था का यह आत्मविश्वास और मजबूती ही वह कारण है कि आज दुनिया इसे वैश्विक विकास के इंजन के रूप में देख रही है।