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न रुकूंगा न थकूंगा..चरैवेति..चरैवेति

न रुकूंगा न थकूंगा..चरैवेति..चरैवेति
  • PublishedSeptember 15, 2025

न रुकूंगा न थकूंगा..चरैवेति..चरैवेति…यानी 75 नॉट आउट.. जी हां, यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर 2025 को 75 वर्ष के हो जाएंगे। जब भी उनका जिक्र होता है तो ऋग्वेद की यह पंक्तियां याद आती हैं..”चरैवेति.. चरैवेति..” यानी जीवन कभी ठहरने का नाम नहीं है। कठिनाइयां आएंगी, रुकावटें मिलेंगी, लेकिन निरंतर आगे बढ़ते रहना। सफलता हो या असफलता, दोनों ही स्थिति में रुकना नहीं, बल्कि अनुभव से सीखकर और मजबूत बनकर आगे बढ़ना ही असली जीवन है।

प्रधानमंत्री की यह निरंतरता हमें लगातार नई प्रेरणा देती है

प्रधानमंत्री की यही निरंतरता हमें नित नई प्रेरणा देती है। लोग कहते हैं पीएम मोदी की कुंडली में बाधाओं पर विजय पाने का प्रबल योग है। दरअसल उनका कर्मयोग ही यह प्रबल योग है। आसान नहीं होता किसी प्रधानमंत्री का नरेंद्र मोदी बन जाना। तभी तो पीएम नरेंद्र मोदी लगातार साल दर साल दुनिया के सबसे लोक प्रिय नेता बने हुए हैं। जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र होता है तो रॉबर्ट फ्रॉस्ट की ये पंक्तियां याद आ जाती हैं..

“The woods are lovely, dark and deep, But I have promises to keep, And miles to go before I sleep, And miles to go before I sleep.” यानी 75 नॉट आउट। पीएम मोदी सितंबर में 75 वर्ष की आयु को पार कर लेंगे, खास बात यह कि 75 वर्ष कि आयु में भी ऊर्जा युवाओं जैसी। इस कर्मयोगी का मिशन राष्ट्र की उन्नति है और यही इनका विजन भी है।

मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष उपलब्धियों से परिपूर्ण रहे हैं

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर (जिला मेहसाणा) में हुआ था। जरा सोचिए आमतौर पर 50 वर्ष की आयु तक पहुंचते पहुंचते व्यक्ति अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर होता है और रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू कर देता लेकिन यहां नरेंद्र मोदी जी ने तो सही मायने में करियर की शुरुआत 50 वर्ष की आयु के आसपास की जब उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के पिछले 25 वर्ष उपलब्धियाें से भरे रहे हैं और उपलब्धियां बिना चुनौतियों के नहीं होती। इस लिए पीएम नरेंद्र मोदी की बड़ी उपलब्धियों का जिक्र करने से पहले उनके सामने आईं बड़ी चुनौतिया का जिक्र करना जरूरी है।

भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती थी कोरोना महामारी

भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती थी कोरोना महामारी। हम भाग्यशाली थे कि उस समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। यह तथ्य भी इतिहास में दर्ज हो चुका है कि देश की 140 करोड़ आबादी का बहुत ही कम समय में सफलता पूर्वक कोविड टीकाकरण कर पीएम मोफी ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया। इसके अलावा दुसरे देशो को भी कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराई। इसी तरह 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम नर संहार के बाद मई 2025 में सफल आपरेशन सिन्दूर भी पीएम मोदी की एक बड़ी उपलब्धि है। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी के सामने कई बड़ी चुनौतियां आईं। इनमें से कुछ चुनौतियां का यहां जिक्र जरूरी है-

भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 2014 से अब तक की कुछ प्रमुख उपलब्धियां:

– जन धन योजना- करोड़ों बैंक खाते खोले। स्वच्छ भारत मिशन- शौचालय निर्माण और जागरूकता। उज्ज्वला योजना -गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन। मेक इन इंडिया – उद्योग व उत्पादन पर जोर। डिजिटल इंडिया – डिजिटल भुगतान व सेवाओं को बढ़ावा। आयुष्मान भारत – विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लागू करना फिर उसमें संशोधन। सर्जिकल स्ट्राइक व एयर स्ट्राइक- राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत। अनुच्छेद 370 हटाना- जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण। सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) पारित। आत्मनिर्भर भारत अभियान – लोकल उत्पादन पर बल।

G20 शिखर सम्मेलन की शानदार मेजबानी

G20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी। COVID-19 वैक्सीन अभियान- तेज और व्यापक टीकाकरण। ऑपरेशन गंगा, कावेरी व सिंदूर- विदेशों से भारतीयों की सुरक्षित वापसी। चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसी ऐतिहासिक अंतरिक्ष उपलब्धियों का नेतृत्व। आपरेशन सिन्दूर। गुजरात के मुख्यमंत्री (2001–2014) के रूप में। वाइब्रेंट गुजरात समिट की शुरुआत वैश्विक निवेश आकर्षित किया। नर्मदा डैम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया, जल आपूर्ति व सिंचाई बेहतर हुई। 24×7 बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की, ज्योति ग्राम योजना लागू। गिर अभयारण्य संरक्षण- एशियाई शेरों की संख्या बढ़ी।गुजरात स्टेट हाईवे डेवलपमेंट प्रोग्राम- सड़क नेटवर्क मजबूत। ई-गवर्नेंस मॉडल लागू किया। कृषि विकास – “कृषि महोत्सव” से उत्पादन और आय में वृद्धि। औद्योगिक कॉरिडोर और SEZs की स्थापना।

गुजरात सोलर पार्क से नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़त, समग्र शिक्षा अभियान से साक्षरता में वृद्धि

गुजरात सोलर पार्क- नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी। समग्र शिक्षा अभियान से साक्षरता दर में वृद्धि। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने पर भूकंप से तबाह राज्य का पुनर्निर्माण करना। 2002 के दंगों के बाद सामाजिक समरसता और प्रशासनिक छवि पर लगे आरोपों से निपटना। गुजरात मॉडल को विकसित कर राज्य को तेज़ औद्योगिक विकास की राह पर लाना। गुजरात से बाहर राज्यों में भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना और संगठन खड़ा करना।विकास बनाम धर्मनिरपेक्षता की बहस के बीच खुद को मजबूत प्रशासक साबित करना।प्रधानमंत्री बनने तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक छवि को सकारात्मक बनाए रखना।

मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रहते प्रशासन, विकास, सुरक्षा व भारत की वैश्विक छवि को ऊंचाई दी

इस तरह मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पदों पर प्रशासन, विकास, सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को नई ऊंचाई दी। महंगाई पर नियंत्रण, जीडीपी में वृद्धि और उद्योग जगत को नई ऊर्जा- जीएसटी 2.0 केवल टैक्स सुधार नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”

नीचे डिफेंस सेक्टर और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी कुछ प्रमुख उपलब्धियां बिन्दुवार दी गई हैं, जो इस प्रकार हैं:

डिफेंस सेक्टर की उपलब्धियां:

रक्षा उत्पादन में वृद्धि=2014 से अब तक रक्षा उत्पादन में लगभग 174% की वृद्धि हुई है। रक्षा उत्पादन 2023-24 में करीब ₹1.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया। रक्षा निर्यात (Exports):रक्षा निर्यात में वृद्धि झांकी है — लगभग 34 गुणा बढ़ के 2024-25 में ₹23,622 करोड़ की सीमा पार हुई।अब भारत कई देशों को हथियार, मिसाइल, रक्षा उपकरण आदि निर्यात कर रहा है। स्वदेशी रक्षा प्रणालियां:Akash मिसाइल सिस्टम, BrahMos मिसाइल आदि जैसे स्वदेशी (indigenous) हथियारों व प्रणालियों का उपयोग और विकास बढ़ रहा है। DRDO द्वारा विभिन्न परियोजनाएं स्वदेशी उत्पादन को मजबूत करने के लिए मंजूर की गईं।

उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना की गई है

रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर:उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना की गई है। इससे निवेश आकर्षित हुआ है, कई MoU हुए हैं, उत्पादन केंद्र स्थापित हो रहे हैं। मॉडर्नाइजेशन और सुधार: रक्षा खरीद नीति (Defence Procurement Procedure, DPP) में सुधार किया गया है ताकि स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहन मिले। Chief of Defence Staff की भूमिका स्थापित की गई, जिससे सेनाएं (Army, Navy, Air Force) अधिक समन्वित तरीके से काम कर सकें। Theatre command की अवधारणा पर विचार और रूपरेखा बनी है। नारी सहभागिता एवं संवैधानिक सुधार:रक्षा बलों में महिला अधिकारियों की संख्या तीन गुना बढ़ी; 11,000+ महिला अधिकारी हो गई हैं। महिलाओं को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) प्रदान किया गया।इसलिए कहा गया है- आग का दरिया है तैर के पार कर जाना.. आसान आसान नहीं होता किसी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बन जाना।