नए जीएसटी सुधारों से खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगी राहत

केंद्र सरकार ने 3 सितम्बर 2025 को हुई 56वीं GST काउंसिल बैठक में खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए बड़े सुधारों की घोषणा की है। इन सुधारों का उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए खाद्य पदार्थों को सस्ता बनाना, उद्योगों को प्रतिस्पर्धी करना और परिवहन-लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है। केंद्र सरकार ने ज्यादातर खाद्य पदार्थों को 5% या शून्य (NIL) टैक्स स्लैब में लाकर टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाया है, जिससे उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होगा।
वहीं केंद्र सरकार ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे दूध, पनीर,छेना, पराठा, परोट्टा, खाखरा, चपाती,रोटी और पिज्जा ब्रेड को पूरी तरह GST से मुक्त कर दिया है। पहले इन पर 5% से 18% तक कर लगता था। इसी तरह पैक किए गए स्नैक्स, नमकीन, भुजिया, इंस्टेंट नूडल्स, पास्ता, सॉस, पेय पदार्थ, कॉफी, बटर, घी, आइसक्रीम, चॉकलेट, बिस्कुट और जूस जैसे उत्पादों पर कर 12% या 18% से घटाकर अब केवल 5% कर दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलेगी और छोटे-बड़े सभी स्तर पर खाद्य उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
पैकेजिंग की लागत घटाने के लिए पैकिंग पेपर, केस और क्रेट पर भी GST घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और छोटे निर्माताओं को राहत मिलेगी। वहीं, ट्रकों और डिलीवरी वाहनों जैसे वाणिज्यिक वाहनों पर कर 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। भारत की सप्लाई चेन का 65-70% हिस्सा ट्रकों पर निर्भर है, ऐसे में यह कदम सीधे माल ढुलाई दरों को कम करेगा और कृषि उत्पादों से लेकर सीमेंट, स्टील, FMCG और ई-कॉमर्स डिलीवरी तक सभी क्षेत्रों में लागत घटाएगा। इसके अलावा, माल ढुलाई वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर GST भी 12% से घटाकर 5% (ITC के साथ) कर दिया गया है।
भारत सरकार खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) जैसी योजनाएं चला रही है। PMGKAY के तहत 27 जून 2025 तक 81.35 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न मिल रहा है और यह योजना जनवरी 2024 से अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, भारत दाल और भारत चावल जैसी योजनाओं के जरिए भी आवश्यक वस्तुओं को सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
इन सुधारों से न केवल उपभोक्ताओं का घरेलू खर्च कम होगा बल्कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, डेयरी सहकारी समितियां, छोटे और मध्यम उद्यम (MSMEs), खुदरा व्यापारी और निर्यातक सभी को लाभ होगा। साथ ही, यह सुधार पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के उद्देश्यों को भी मजबूत करेंगे। –
