अमित शाह ने वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम कार्यशाला का शुभारंभ किया, सीमांत गांवों को सशक्त बनाने का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज मंगलवार को नई दिल्ली में दो दिवसीय वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP) कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यशाला का आयोजन गृह मंत्रालय के बॉर्डर मैनेजमेंट डिवीजन ने किया। इस अवसर पर अमित शाह ने कार्यक्रम का लोगो भी लॉन्च किया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार, गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, बॉर्डर मैनेजमेंट सचिव, सीमा राज्यों के मुख्य सचिव, सुरक्षा बलों के महानिदेशक और संबंधित जिलों के जिलाधिकारी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस दौरान अमित शाह ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम तीन मुख्य बिंदुओं पर आधारित है-पहला, सीमांत गांवों से पलायन रोकना; दूसरा, हर नागरिक को केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का 100% लाभ दिलाना; और तीसरा, इन गांवों को राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का साधन बनाना। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब इस कार्यक्रम की परिकल्पना की थी तो यह तय हुआ था कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके तहत सीमांत गांवों को सभी सुविधाओं से लैस किया जाएगा और इन्हें देश की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में इस योजना के लागू होने के बाद कई सीमा गांवों की आबादी बढ़ी है, जो एक सकारात्मक संदेश है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हर गांव में होम स्टे जैसी योजनाओं का विस्तार हो और राज्य सरकारें बुकिंग की व्यवस्था करें तो सीमा गांवों का कोई भी घर खाली नहीं रहेगा और रोजगार भी बढ़ेगा। उन्होंने जिला कलेक्टरों से अपील की कि वे डेयरी सहकारी समितियां बनाकर सीएपीएफ और सेना को सीधे दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करें। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन अपने आप रुक जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि सीमा गांवों में दूरसंचार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्यक्रम केवल सरकारी योजना न रहकर प्रशासन की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने मनरेगा के तहत तालाब निर्माण, गहन वृक्षारोपण और स्थायी ढांचे बनाने जैसे कामों पर भी ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय बदलाव (demographic change) हमारे लिए चिंता का विषय है सीमा जिलों के कलेक्टरों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा क्योंकि यह देश की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। शाह ने यह भी कहा कि कम से कम 30 किलोमीटर सीमा क्षेत्र तक सभी अवैध धार्मिक अतिक्रमणों को हटाया जाना चाहिए। गुजरात ने इस दिशा में सराहनीय काम किया है, जहां समुद्री और स्थलीय सीमाओं पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाए गए हैं।
गृह मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि सीएपीएफ स्वास्थ्य, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में भी सीमा गांवों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि अरुणाचल में आईटीबीपी ने दूध, सब्जियां, अंडे और अनाज जैसी दैनिक जरूरत की चीजें स्थानीय गांवों से खरीदकर एक सफल प्रयोग किया है, जिसे पूरे देश के सीमा गांवों में लागू किया जाना चाहिए।
