सूरीनाम की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं जेनिफर गीरलिंग्स-साइमंस, आर्थिक संकट के बीच संभालेंगी देश की कमान

दक्षिण अमेरिका के छोटे परंतु सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश सूरीनाम को उसकी पहली महिला राष्ट्रपति मिल गई है। 71 वर्षीय अनुभवी चिकित्सक और सांसद जेनिफर गीरलिंग्स-साइमंस को बीते रविवार को संसद से दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद राष्ट्रपति चुना गया। यह चुनाव मई में हुए आम चुनाव के बाद हुआ, जिसमें कोई स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। उनके चुनाव के पीछे एक महत्वपूर्ण गठबंधन समझौता था, जिसने उन्हें बिना किसी विरोध के राष्ट्रपति पद तक पहुंचाया।
गीरलिंग्स-साइमंस, जो नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख हैं, 16 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। उन्होंने अपने एक भाषण में कहा, “मैं जानती हूं कि यह कार्य अपने आप में कठिन है और यह जिम्मेदारी इसलिए भी भारी है क्योंकि मैं पहली महिला हूं जिसे यह अवसर मिला है।” उनके साथ ग्रेगरी रूसलैंड उपराष्ट्रपति के रूप में काम करेंगे। दोनों को देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति से निपटना है, जिसमें सब्सिडी में कटौती, कर्ज पुनर्गठन और सख्त आर्थिक सुधारों के चलते जनता में असंतोष बढ़ा है। पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी की सरकार ने IMF से समर्थन लेकर आर्थिक स्थिरता लाने की कोशिश की थी, लेकिन इससे जुड़े सख्त कदमों ने देशभर में विरोध-प्रदर्शन भड़का दिए थे।
सूरीनाम, जिसकी आबादी करीब 6.46 लाख है और जो सांस्कृतिक रूप से अफ्रीकी, आदिवासी, भारतीय, इंडोनेशियाई, चीनी और डच मूल के लोगों से बनी है, दक्षिण अमेरिका के सबसे गरीब देशों में से एक है। ऐसे में गीरलिंग्स-साइमंस के सामने देश को स्थिर करना और विकास की राह पर ले जाना एक कठिन कार्य होगा। उन्होंने खासतौर पर कर संग्रह में सुधार करने और अवैध छोटे स्तर के सोना खनिकों से कर वसूली बढ़ाने का संकल्प लिया है ताकि राजस्व में वृद्धि की जा सके।
वहीं सूरीनाम को 2028 से समुद्र के भीतर तेल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। साथ ही देश चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से 2019 से जुड़ा है, जिससे आर्थिक साझेदारी को और बल मिलेगा। इस साल नवंबर में सूरीनाम आजादी की 50वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। ऐसे समय में देश को पहली महिला राष्ट्रपति से नई उम्मीदें हैं कि वह इस ऐतिहासिक अवसर को एक सकारात्मक मोड़ में बदलेंगी।
