दिल्ली के हरित अभियान को नई दिशा देने की पहल, औषधीय पौधों के रोपण पर केंद्रीय मंत्री प्रताप राव का विशेष जोर

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने दिल्ली सरकार की ओर से दिल्ली रिज इकोसिस्टम के संरक्षण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान की सराहना की है। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में जाधव ने कहा कि दिल्ली में 70 लाख से अधिक स्वदेशी एवं जलवायु-अनुकूल पेड़ लगाने, 70 से अधिक जल निकाय विकसित करने और लगभग 6,000 हेक्टेयर भूमि को वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना राजधानी के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा कि यह अभियान शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने में सहायक होगा। केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से दिल्ली रिज क्षेत्र में विलायती किकर और बाबूल जैसी आक्रामक प्रजातियों को हटाकर पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन और जामुन जैसी देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने के निर्णय का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी वृक्ष प्रजातियों का विस्तार दिल्ली के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएगा और रिज क्षेत्र को शहर के “फेफड़ों” के रूप में और अधिक प्रभावी बनाएगा। पर्यावरण संरक्षण के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए जाधव ने सुझाव दिया कि दिल्ली में प्रस्तावित आठ वनों में कम से कम 20 प्रतिशत क्षेत्र औषधीय पौधों के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह संभव न हो तो कम से कम दो वनों को पूरी तरह समर्पित औषधीय वन के रूप में विकसित किया जाए। जाधव ने कहा कि औषधीय वन आयुष क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का स्थायी स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं। साथ ही, वे जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक बहाली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली की कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए औषधीय पौधों की एक सूची भी साझा की। इसमें अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, ब्राह्मी, शतावरी, आंवला, अर्जुन, अशोक, नीम, बेल और जामुन जैसी प्रजातियां शामिल हैं। प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष मंत्रालय औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली का यह अभियान शहरी वनीकरण, पारंपरिक चिकित्सा और पर्यावरण प्रबंधन को एक साथ जोड़ने वाला देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।
