19वां मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 संपन्न, गोल्डन कोंच पुरस्कार पोलिश डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘सिल्वर’ को मिला

19वां मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ 2026) रविवार को संपन्न हुआ। इसमें फ़िल्म निर्माता, फ़िल्म प्रेमी, इंडस्ट्री के पेशेवर और युवा क्रिएटिव लोग उत्साह के साथ शामिल हुए, ये सभी सिनेमा, कहानी कहने की कला, कलात्मक कार्यों और क्रिएटिविटी के प्रति अपने जुनून से एकजुट हुए थे।महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा 19वें एमआईएफएफ के समापन समारोह में मुख्य अतिथि थे।
एमआईएफएफ 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्शन और एनिमेशन फिल्मों के लिए समर्पित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में से एक के रूप में इस महोत्सव की उल्लेखनीय यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तीन दशकों से अधिक समय से, एमआईएफएफ रचनात्मक प्रतिभाओं, कहानीकारों और दूरदर्शी लोगों के लिए एक जीवंत मंच के रूप में कार्य कर रहा है, जो एक राष्ट्रीय आयोजन से विकसित होकर कलात्मक उत्कृष्टता, सांस्कृतिक विविधता और सार्थक कहानी बताने वाले एक वैश्विक उत्सव में बदल गया है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच संस्करणों में देखी गई महत्वपूर्ण वृद्धि, एमआईएफएफ की बढ़ती प्रासंगिकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान को दर्शाती है।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 1 मई 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए पहले ‘वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट’ (वेव्स) का भी उल्लेख किया। मीडिया, मनोरंजन, एनिमेशन, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए एक ग्लोबल प्लैटफ़ॉर्म के रूप में परिकल्पित, इस समिट ने “कनेक्टिंग क्रिएटर्स, कनेक्टिंग कंट्रीज” की थीम के तहत 90 से अधिक देशों के क्रिएटर्स, निवेशकों, नीति निर्माताओं और इंडस्ट्री लीडर्स को एक साथ जोड़ा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वेव्स ने “क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड” के विजन को आगे बढ़ाते हुए क्रिएटिव इकॉनमी और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के लिए भारत को एक ग्लोबल हब बनाने की महत्वाकांक्षा को और मजबूत किया है।
सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए गोल्डन कोंच और 10 लाख रुपये (फिल्म के निर्देशक और निर्माता के बीच समान रूप से साझा किया जाएगा) का पुरस्कार पोलिश डॉक्यूमेंट्री फिल्म सिल्वर को मिला। पोलिश इंस्टीट्यूट की मिनिस्टर प्लेनिपोटेंशियरी और डायरेक्टर, मालगोरज़ाता वेजिस-गोलेबियाक ने फ़िल्म की डायरेक्टर नतालिया कोनियार्ज़ और प्रोड्यूसर मैसी कुबिकी की ओर से यह सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त किया।
सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय शॉर्ट फ़िक्शन फ़िल्म के लिए ‘सिल्वर कोंच’ पुरस्कार और 5 लाख रूपए का नकद इनाम ईरानी फ़िल्म ‘अंडर द स्नो’ को मिला। फ़िल्म के प्रोड्यूसर में से एक, दीपांकर प्रकाश ने फ़िल्म की डायरेक्टर नफ़ीसे ज़ारे और दूसरी प्रोड्यूसर कोट्टुकाथिरा प्रकाश की ओर से यह पुरस्कार लिया।
सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय एनिमेशन फ़िल्म के लिए ‘सिल्वर कोंच’ पुरस्कार और 5 लाख रूपए का नकद इनाम (जिसे फ़िल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के बीच बराबर साझा किया जाएगा) जर्मन एनिमेशन फ़िल्म ‘मायाज़ सॉन्ग’ को मिला। यह पुरस्कार लीड एनिमेटर और स्टूडियो की प्रतिनिधि सानिका कुलकर्णी ने फ़िल्म की डायरेक्टर और प्रोड्यूसर फ्रांज़िस्का शोनेनबर्गर और जयकृष्णन सुब्रमण्यन की ओर से लिया।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फ़िल्म के लिए ‘सिल्वर कोंच’ पुरस्कार और 3 लाख रूपए का नकद इनाम तमिल भाषा की एनिमेशन फ़िल्म ‘आर्मस्ट्रांग फ्रॉम अंगालम्मन टेम्पल स्ट्रीट’ को मिला। डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भुवनेश एम. कुमार ने ‘सिल्वर कॉच’ पुरस्कार और नकद इनाम लिया।
सर्वश्रेष्ठ भारतीय शॉर्ट फ़िक्शन फ़िल्म के लिए ‘सिल्वर कोंच’ पुरस्कार और 3 लाख रूपए का नकद इनाम फ़िल्म ‘स्मॉल क्लाउड्स’ को मिला। एफटीआईआई द्वारा बनाई गई इस फ़िल्म के लिए पुरस्कार एफटीआईआई के वाइस चांसलर धीरज सिंह और डायरेक्टर शुभम सुमित ने लिया।
सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म के लिए ‘सिल्वर कोंच’ पुरस्कार और 5 लाख रूपए का नकद इनाम (जिसे फ़िल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के बीच बराबर साझा किया जाएगा) डॉक्यूमेंट्री ‘वाई’ को मिला। डायरेक्टर साईनाथ एस. उसकैकर और प्रोड्यूसर भरतबाला गणपति की ओर से जवाहर शर्मा ने यह पुरस्कार लिया।
वहीं, अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफर का पुरस्कार भारतीय डॉक्यूमेंट्री ‘टर्टल वॉकर’ के लिए कृष्ण मखीजा को मिला।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ एडिटिंग का पुरस्कार रूस की शॉर्ट फिक्शन फिल्म ‘अबाउट द काउ’ के लिए एवगेनी स्मिरनोव और श्री मैक्सिम स्मिरनोव को मिला। डायरेक्टर एंटन सिमुखिन ने एडिटिंग करने वाली इस जोड़ी की तरफ से पुरस्कार लिया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ साउंड डिज़ाइनर का पुरस्कार फिल्म ‘देवा आज पान व्हाय’ के लिए अभय रुमडे (पर्पल हेज़ स्टूडियो) को मिला।
“विकसित भारत/वंदे मातरम के 150 वर्ष/भारत@2026” विषय पर सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार ‘द लास्ट शेल्टर’ ने जीता। यह पुरस्कार भरत अरोड़ा और राजेश भाटिया ने लिया। सबसे इनोवेटिव/एक्सपेरिमेंटल फिल्म के लिए प्रमोद पति स्पेशल जूरी पुरस्कार ताइवानी फिल्म ‘द होर्डर्स’ को मिला और इसे डायरेक्टर चुआन-यिंग लियाओ ने लिया।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ साउंड डिज़ाइन पुरस्कार फिल्म ‘कोवार्टी’ के लिए बिग्यना दहल को मिला। राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ एडिटिंग पुरस्कार फिल्म ‘मेडे’ (MAYDAY) के लिए अखिल कृष्णन को मिला। डायरेक्टर सरथ अंबाट ने एडिटर अखिल कृष्णन की तरफ से पुरस्कार लिया।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफर का पुरस्कार फिल्म ‘स्मॉल क्लाउड्स’ के लिए रणधीर बिस्वास को मिला। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म क्रिटिक्स द्वारा शुरू किया गया FIPRESCI इंटरनेशनल क्रिटिक्स प्राइज़ प्रदीप केनचनुरु को उनकी फिल्म ‘द हग ऑफ एम्प्टिनेस’ के लिए दिया गया।
सर्वश्रेष्ठ स्टूडेंट फिल्म के लिए आईपीडीए पुरस्कार मिलन कुमार को फिल्म ‘द ओल्ड बुल नोज़, ऑर वन्स न्यू’ के लिए मिला। सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर के लिए दादा साहब फाल्के चित्रनगरी पुरस्कार पूजा टोलानी को उनकी फिल्म ‘राज़ा’ के लिए मिला।
