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सरकार ने नेशनल डेंटल कमीशन का किया गठन, दंत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में आएगी गुणवत्ता

सरकार ने नेशनल डेंटल कमीशन का किया गठन, दंत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में आएगी गुणवत्ता
  • PublishedMarch 20, 2026

देश में दंत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने नेशनल डेंटल कमीशन (एनडीसी) का गठन किया है, जो अब देश में दंत शिक्षा और पेशेवर मानकों के नियमन का प्रमुख निकाय होगा। इसके साथ ही डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया को समाप्त कर दिया गया है। इस संबंध में अधिसूचना 19 मार्च 2026 को जारी की गई और उसी दिन से नई व्यवस्था लागू हो गई।

यह सुधार दंत शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्ता-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नई व्यवस्था में चुनाव आधारित संरचना के स्थान पर विशेषज्ञों द्वारा संचालित नियामक ढांचा स्थापित किया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पेशेवर बनेगी।

नेशनल डेंटल कमीशन के तहत तीन स्वायत्त बोर्डों का गठन किया गया है, जो दंत शिक्षा, संस्थानों के मूल्यांकन और पेशेवर आचरण से जुड़े कार्यों को देखेंगे।

इनमें अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डेंटल एजुकेशन बोर्ड दंत शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा, डेंटल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड संस्थानों के मूल्यांकन और मान्यता का कार्य करेगा, जबकि दंत शिक्षा और पेशेवर मानकों दंत चिकित्सकों के पंजीकरण और आचार संहिता की निगरानी करेगा।

कमीशन और उसके बोर्डों के नेतृत्व के लिए अनुभवी और प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है। डॉ. संजय तिवारी को एनडीसी का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि डॉ. मौसुमी गोस्वामी को अंशकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके अलावा विभिन्न बोर्डों में भी विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे इस नई व्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके।

नेशनल डेंटल कमीशन की प्रमुख जिम्मेदारियों में दंत शिक्षा से जुड़े नियम बनाना, संस्थानों का मूल्यांकन करना, मानव संसाधन का आकलन करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और निजी दंत कॉलेजों की फीस के लिए दिशा-निर्देश तय करना शामिल है। इसके साथ ही सामुदायिक दंत स्वास्थ्य, शिक्षा और पेशेवर नैतिकता के लिए भी मानक निर्धारित किए जाएंगे।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही 1948 का डेंटिस्ट्स एक्ट समाप्त हो गया है और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया भंग कर दी गई है। सरकार का मानना है कि यह सुधार न केवल दंत शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, बल्कि आम जनता को सस्ती और बेहतर मौखिक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम देश में दंत चिकित्सा क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।