मास्टर ब्लास्टर के शतकों का ऐतिहासिक शतक, 16 मार्च 2012 में सचिन ने रचा था क्रिकेट इतिहास

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में गिना जाता है। अपनी शानदार बल्लेबाजी से उन्होंने क्रिकेट को नया आयाम दिया और कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए।
16 मार्च बना यादगार दिन
16 मार्च का दिन सचिन तेंदुलकर और क्रिकेट जगत के लिए बेहद खास है। इसी दिन 2012 में उन्होंने ऐसा कारनामा किया था, जो क्रिकेट इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था और जिसका टूटना आज भी बेहद मुश्किल माना जाता है।
बांग्लादेश के खिलाफ रचा इतिहास
16 मार्च 2012 को भारत और बांग्लादेश के बीच वनडे मुकाबला मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेला गया था। टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 5 विकेट पर 289 रन बनाए थे। पारी की शुरुआत करने उतरे सचिन तेंदुलकर ने 147 गेंदों पर 114 रन की शानदार पारी खेली। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 100वां शतक था। सचिन तेंदुलकर क्रिकेट इतिहास में 100 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाले दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं।
असंभव को किया संभव
सचिन से पहले शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि कोई बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगा सकता है। लेकिन ‘मास्टर ब्लास्टर’ सचिन तेंदुलकर ने इस असंभव को संभव कर दिखाया। खास बात यह भी रही कि यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी शतक साबित हुआ।
भारतीय बल्लेबाजी के रहे सबसे बड़े स्तंभ
1989 से 2013 के बीच सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट के प्रमुख स्तंभ रहे। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच, सबसे ज्यादा शतक, टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है। वनडे क्रिकेट में पहला दोहरा शतक लगाने का कारनामा भी सचिन तेंदुलकर ने ही किया था, जिसने सीमित ओवरों के क्रिकेट में नई मिसाल कायम की।
करियर के शानदार आंकड़े
टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर ने 200 मैचों की 329 पारियों में 51 शतक लगाते हुए 15,921 रन बनाए। वहीं वनडे क्रिकेट में उन्होंने 463 मैचों में 49 शतक और 96 अर्धशतक की मदद से 18,426 रन बनाए। वनडे में उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 200 रन रहा है। इसके अलावा सचिन तेंदुलकर ने एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेला था, जिसमें उन्होंने 10 रन बनाए थे।
विश्व कप विजेता टीम का भी रहे हिस्सा
सचिन तेंदुलकर 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे। उन्होंने 16 नवंबर 2013 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। हालांकि, संन्यास के बाद भी उनके रिकॉर्ड और उपलब्धियां क्रिकेट जगत में उन्हें हमेशा प्रासंगिक बनाए रखती हैं।
