प्रमुख खबरें

वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच डीएपी की कीमत स्थिर, किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं

वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच डीएपी की कीमत स्थिर, किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं
  • PublishedMarch 10, 2026

केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2025–26 के लिए किसानों को राहत देते हुए डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) उर्वरक की कीमत को 1350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग पर स्थिर बनाए रखने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, डीएपी की कीमत स्थिर रखने के लिए सरकार ने 3500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की विशेष व्यवस्था की है। इसमें फैक्टरी से खेत तक लॉजिस्टिक्स लागत, जीएसटी और निर्माताओं के लिए लगभग 4 प्रतिशत उचित लाभ को शामिल किया गया है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक कीमतों में बदलाव का असर किसानों तक न पहुंचने देना है।

सरकार ने बताया कि देश में फॉस्फेटिक और पोटाश (P&K) उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है। 5 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार:

डीएपी: जरूरत 51.38 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले उपलब्धता 71.89 लाख मीट्रिक टन

एमओपी (MOP): जरूरत 14.18 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले उपलब्धता 18.17 लाख मीट्रिक टन

एनपीकेएस (NPKS): जरूरत 76.48 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले उपलब्धता 108.39 लाख मीट्रिक टन

उर्वरकों की आपूर्ति और आवाजाही की निगरानी के लिए सरकार इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही है। इसके अलावा राज्यों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ समन्वय कर रेल रैक की आवाजाही को प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार ने न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) ढांचे के तहत 10:26:26 और 12:32:16 जैसे नए उर्वरक ग्रेड को भी शामिल किया है। इस नीति के तहत नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा के आधार पर सब्सिडी दी जाती है, जिससे किसान अपनी फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरक का चयन कर सकें।

रबी सीजन 2025–26 के दौरान अन्य प्रमुख उर्वरकों की औसत खुदरा कीमत (50 किलोग्राम बैग) इस प्रकार है:

NPK 10-26-26: 1814.82 रुपये

NPK 12-32-16: 1711.87 रुपये

MOP: 1710.54 रुपये

सरकार का कहना है कि इस नीति से संतुलित पोषण को बढ़ावा मिलेगा और यूरिया पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी, जिससे मिट्टी की सेहत भी बेहतर बनी रहेगी।

यह जानकारी रसायन और उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 10 मार्च 2026 को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।