Ladakh में हिंसा के बाद अब कैसे हैं हालात? जानें कितनी मौतें हुईं और कितने हैं घायल

लेह, 25 सितंबर, 2025 : शांति के लिए पहचाने जाने वाले लद्दाख की वादियां बुधवार को हिंसा और विरोध प्रदर्शन की आग में सुलग उठीं। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 40 पुलिसकर्मियों सहित 80 से अधिक लोग घायल हो गए। बेकाबू भीड़ ने भाजपा कार्यालय और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने लेह में कर्फ्यू लगाकर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।
यह हिंसा उस वक्त भड़की जब लेह एपेक्स बॉडी (LAB) द्वारा बुलाए गए ‘लेह बंद’ के दौरान हजारों युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए। इस हिंसा के बाद, 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपनी हड़ताल तोड़ दी और युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की।
क्या है लद्दाख का पूरा मामला और क्यों हो रहा है प्रदर्शन?
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश बना था। शुरुआत में इस फैसले का स्वागत हुआ, लेकिन अब स्थानीय लोग अपनी पहचान, संस्कृति, भूमि और रोजगार को लेकर चिंतित हैं। इसी चिंता के कारण यह आंदोलन शुरू हुआ, जिसकी चार प्रमुख मांगें हैं:
1. पूर्ण राज्य का दर्जा (Full Statehood): लद्दाख के लोग चाहते हैं कि इसे केंद्र शासित प्रदेश की बजाय एक पूर्ण राज्य बनाया जाए ताकि स्थानीय सरकार के पास अधिक अधिकार हों।
2. छठी अनुसूची में शामिल करना (Inclusion in 6th Schedule): यह सबसे बड़ी मांग है। संविधान की छठी अनुसूची पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों की तरह आदिवासी क्षेत्रों को भूमि, वन और स्थानीय रीति-रिवाजों पर कानून बनाने के लिए स्वायत्तता प्रदान करती है। लद्दाख के लोग अपनी पारिस्थितिकी और अनूठी जनजातीय पहचान को बाहरी औद्योगिक शोषण से बचाने के लिए यह सुरक्षा कवच चाहते हैं।
3. अलग लोकसभा सीटें (Separate Lok Sabha Seats): लेह और कारगिल जिलों के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटों की मांग की जा रही है ताकि दोनों क्षेत्रों को संसद में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
4. नौकरियों में आरक्षण (Reservation in Jobs): लद्दाख के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग भी शामिल है।
हिंसा क्यों और कैसे भड़की?
यह आंदोलन महीनों से शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन बुधवार को हालात बिगड़ गए।
1, भूख हड़ताल: लेह एपेक्स बॉडी (LAB) की युवा शाखा के 15 कार्यकर्ता 10 सितंबर से भूख हड़ताल पर थे। मंगलवार को उनमें से दो की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिससे युवाओं में गुस्सा बढ़ गया।
2. लेह बंद का आह्वान: इसी के विरोध में बुधवार को ‘लेह बंद’ का आह्वान किया गया, जिसमें हजारों छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए।
3. पथराव और आगजनी: मार्च के दौरान स्थिति तब बिगड़ी जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। भीड़ ने भाजपा कार्यालय और लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) के दफ्तर पर हमला कर आग लगा दी। सीआरपीएफ के एक वाहन को भी आग के हवाले कर दिया गया।
किसने क्या कहा?
1. सोनम वांगचुक: उन्होंने हिंसा को “बेवकूफी” बताते हुए कहा, “इससे हमारे मकसद को नुकसान पहुंचता है। हम शांति के रास्ते पर चल रहे थे।”
2. उपराज्यपाल: उन्होंने इसे एक साजिश बताया और हिंसा में बाहरी लोगों के शामिल होने की जांच कराने की बात कही।
3. केंद्र सरकार: गृह मंत्रालय ने कहा कि बातचीत में प्रगति हो रही थी, लेकिन सोनम वांगचुक के “भड़काऊ बयानों” ने लोगों को गुमराह किया।
4. विपक्ष (कांग्रेस): भाजपा ने हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है और एक स्थानीय कांग्रेस नेता फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग पर भड़काऊ भाषण देने के लिए केस भी दर्ज किया है।
केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का अगला दौर 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है, लेकिन इस हिंसा ने पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया है। फिलहाल, लद्दाख में तनाव का माहौल है और सुरक्षाबल स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।
