हिमाचल में मानसून की ‘महा-तबाही’! सैकड़ों मौतें, हजारों घर तबाह, पढ़ें दिल दहला देने वाली रिपोर्ट

शिमला, 23 सितंबर 2025 (ANI): हिमाचल प्रदेश में इस साल का मानसून विनाशकारी साबित हुआ है। 20 जून से अब तक राज्य में कुल 451 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह मौतें बारिश से जुड़ी आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुई हैं।
मौतों का डरावना आंकड़ा
कुल 451 मौतों में से 262 मौतें सीधे तौर पर बारिश से जुड़ी आपदाओं के कारण हुईं। इनमें भूस्खलन (Landslides), अचानक आई बाढ़ (Flash Floods), बादल फटना (Cloudbursts), डूबना और बिजली गिरना जैसी घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, मानसून के दौरान खराब मौसम और सड़कों की दयनीय स्थिति के कारण हुए सड़क हादसों (Road Accidents) में 189 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
1. घायल: 497 लोग घायल हुए हैं।
2. लापता: 47 लोग अभी भी लापता हैं।
3. पशुधन का नुकसान: 2,500 से अधिक पशुओं और लगभग 27,000 पोल्ट्री पक्षियों की भी मौत हुई है।
तबाही का मंजर: बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
आपदा के कारण राज्य के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भारी क्षति पहुंची है।
1. मकान – 1,804 घर पूरी तरह तबाह, 29,466 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
2. सार्वजनिक संपत्ति – 4,861 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान
3. सबसे ज्यादा प्रभावित विभाग – लोक निर्माण विभाग (PWD) को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान
वर्तमान स्थिति: जन-जीवन अभी भी अस्त-व्यस्त
23 सितंबर की सुबह तक, राज्य में 338 सड़कें अभी भी बंद हैं, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-03 और NH-503A) भी शामिल हैं।
1. बिजली: 45 वितरण ट्रांसफार्मर (DTRs) खराब हैं।
2. पेयजल: 77 पेयजल आपूर्ति योजनाएं ठप पड़ी हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले:
1. सड़कें: कुल्लू (106), मंडी (109), और कांगड़ा (40) में सबसे ज्यादा सड़कें बंद हैं।
2. मौतें: मंडी (66), कांगड़ा (57), और चंबा (68) में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं।
एक SDMA अधिकारी ने बताया, “सड़कों, पानी और बिजली की आपूर्ति को बहाल करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण प्रगति धीमी हो गई है।” प्राधिकरण ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
