चीन में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद पीएम मोदी भारत रवाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में आयोजित 25वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद सोमवार को भारत के लिए रवाना हुए। अपनी सकारात्मक यात्रा के दौरान, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं और वैश्विक शांति, स्थिरता और सहयोग पर भारत के रुख को रेखांकित किया।
आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के वित्तपोषण और कट्टरपंथ के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल के आतंकी हमले का जिक्र करते हुए सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।
भारत-चीन और भारत-रूस संबंधों में प्रगति
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक में पीएम मोदी ने भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक गति का स्वागत किया और आपसी सम्मान व संवेदनशीलता पर आधारित स्थिर संबंधों की वकालत की। वहीं रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ चर्चा में, उन्होंने वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए भारत-रूस सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
एससीओ ढांचे में भारत की प्रतिबद्धता
पीएम मोदी ने सुरक्षा, संपर्क और अवसर के तीन स्तंभों के तहत एससीओ में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन, शांति, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सतत विकास पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने किर्गिस्तान को एससीओ अध्यक्षता संभालने के लिए बधाई दी।
विश्व नेताओं के साथ मुलाकात
पीएम मोदी ने मालदीव, नेपाल, लाओस, वियतनाम, आर्मेनिया और तुर्कमेनिस्तान के नेताओं के साथ मुलाकात कर विविध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
जापान यात्रा के सकारात्मक परिणाम
ज्ञात हो, चीन यात्रा से पहले, पीएम मोदी ने जापान में भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्होंने टोक्यो यात्रा के सकारात्मक परिणामों की सराहना की और भारत-जापान संबंधों के और मजबूत होने की आशा जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (X) पर अपनी यात्रा को “सफल” बताते हुए चीनी सरकार और जनता का शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।
