भारत-चीन ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति : राजदूत शू फिहोंग

इस मुलाकात के बाद भारत में चीन के राजदूत शू फिहोंग ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की गति बनाए रखने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। इससे पहले सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत की यात्रा पर सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे और उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की।
बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन और भारत, 2.8 अरब से अधिक संयुक्त जनसंख्या वाले दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश हैं और उन्हें वैश्विक उत्तरदायित्व की भावना रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्रमुख शक्तियों के रूप में कार्य करते हुए विकासशील देशों के लिए एकता के माध्यम से शक्ति प्राप्त करने का उदाहरण स्थापित करना चाहिए। साथ ही, विश्व बहुध्रुवीकरण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण को आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।
वांग यी ने आगे कहा कि दोनों पक्षों को सही रणनीतिक धारणाओं को अपनाना चाहिए और एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी या खतरे के रूप में देखने के बजाय साझेदार और अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन को विकास एवं पुनरुद्धार में अपने बहुमूल्य संसाधनों का निवेश करना चाहिए और पड़ोसी प्रमुख देशों के रूप में आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित सह-अस्तित्व, साझा विकास और परस्पर सहयोग को मजबूत करने के रास्ते तलाशने चाहिए।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि चीन “मैत्री, ईमानदारी, पारस्परिक लाभ और समावेशिता” के सिद्धांतों पर कायम है और भारत सहित अपने पड़ोसी देशों के साथ मिलकर एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध, सुंदर और मैत्रीपूर्ण घर बनाने के लिए तैयार है। वांग यी ने कहा कि चीन और भारत को आत्मविश्वास के साथ एक ही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, बाधाओं को दूर करना चाहिए और सहयोग का विस्तार करना चाहिए।
वांग यी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की गति को सुदृढ़ करना चाहिए ताकि भारत और चीन जैसी दो महान पूर्वी सभ्यताओं के पुनरोद्धार की प्रक्रियाएं एक-दूसरे के लिए लाभकारी साबित हों। उन्होंने कहा कि इससे न केवल एशिया, बल्कि पूरे विश्व को स्थिरता और निश्चितता मिलेगी।
