यूपीआई लेनदेन में 8 वित्तीय वर्षों में 114 प्रतिशत का उछाल : केंद्र

भारत में डिजिटल भुगतान में सर्वाधिक लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), पिछले आठ वित्तीय वर्षों में तेजी से बढ़ा है। संसद में दी गई एक जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 में यूपीआई लेनदेन 92 करोड़ थे, जो 2024-25 में बढ़कर 18,587 करोड़ हो गया। यह 114 प्रतिशत की सालाना औसत वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है। इसी दौरान, यूपीआई से किए गए भुगतानों का कुल मूल्य 1.10 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 261 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि जुलाई 2025 यूपीआई के लिए ऐतिहासिक रहा, क्योंकि इस महीने पहली बार 1,946.79 करोड़ से ज्यादा लेनदेन हुए।
वहीं डिजिटल भुगतान के कुल लेनदेन भी तेजी से बढ़े हैं। 2017-18 में यह संख्या 2,071 करोड़ थी, जो 2024-25 में बढ़कर 22,831 करोड़ हो गई, यानी 41 प्रतिशत CAGR की वृद्धि हुई। जबकि कुल भुगतान का मूल्य इसी अवधि में 1,962 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3,509 लाख करोड़ रुपये हो गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें ऋण अनुशासन, जिम्मेदार ऋण वितरण, बेहतर प्रशासन, टेक्नोलॉजी अपनाना और सहकारी बैंकों के विनियमन में सुधार शामिल हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार के लिए सरकार ने वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो के जरिए शीर्ष प्रबंधन का चयन, राष्ट्रीयकृत बैंकों में गैर-कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति, टैलेंट पूल का विस्तार और प्रबंध निदेशकों के लिए प्रदर्शन आधारित कार्यावधि विस्तार जैसी पहलें की हैं। इसके अलावा, ईएएसई (Enhanced Access and Service Excellence) सुधारों से बैंकों में शासन, विवेकपूर्ण ऋण, जोखिम प्रबंधन, टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित बैंकिंग, तथा परिणाम-केंद्रित मानव संसाधन प्रबंधन में अहम प्रगति हुई है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भी सरकार ने म्युचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर एमएसएमई और इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम जैसी योजनाएं लागू की हैं, जिनसे छोटे व्यवसायों को वित्तीय मदद और मजबूती मिली है।
