सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की युवा शक्ति के लिए कौशल विकास और रोजगार

भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति न केवल तकनीक, बल्कि प्रतिभा विकास और रोजगार सृजन का भी प्रतीक है। ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन’ यानी ISM के तहत, भारत सरकार 2030 तक 10 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है।
प्रशिक्षण पहल
AICTE के नए VLSI डिज़ाइन पाठ्यक्रम में 100 संस्थानों के 45,000+ छात्र नामांकित हैं। वहीं NIEIT कालीकट का स्मार्ट लैब 44,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित कर चुका है। और तो और सेमीवर्स के साथ अगले दस वर्षों में 60,000 और इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। मध्य प्रदेश का फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम भी 20,000 इंजीनियरों को तैयार करेगा। ऐसे में भारत की युवा शक्ति के लिए सेमीकंडक्टर सेक्टर में कौशल विकास और रोजगार के अवसर हैं।
वैश्विक साझेदारियां
माइक्रोन, IIT रुड़की, IBM और पर्ड्यू विश्वविद्यालय के साथ समझौते नवाचार और व्यावहारिक अनुभव को बढ़ावा दे रहे हैं।वहीं IBM छात्रों को उन्नत प्रयोगशालाओं तक पहुंच प्रदान कर रहा है, जबकि पर्ड्यू अनुसंधान और व्यवसायीकरण पर केंद्रित है। इससे सेमीकंडक्टर सेक्टर में छात्रों को नवाचार और व्यावहारिक अनुभव अर्जित करने में बेहतरीन मदद मिल रही है।
रोजगार सृजन
HCL-फॉक्सकॉन का नया संयंत्र 1,200 नौकरियां सृजित करेगा। 1 लाख वर्ग फुट की नई सुविधा सर्वर, ड्रोन, और रोबोट जैसे उन्नत उत्पादों का निर्माण करेगी। सेमीकॉन इंडिया 2025 का कार्यबल विकास मंडप युवाओं को करियर परामर्श प्रदान करेगा।
ऐसे में यह कहना बिलकुल भी गलत होगा कि भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र न केवल तकनीकी प्रगति, बल्कि युवा प्रतिभाओं को सशक्त बनाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का भी केंद्र बन रहा है।
