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नई दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-सम्मेलन केंद्र (आईईसीसी) परिसर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-सम्मेलन केंद्र (आईईसीसी) परिसर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
  • PublishedJuly 27, 2023

नमस्‍कार,

एक अद्भुत दृश्य मेरे सामने है। भव्य है, विराट है, विहंगम है। और ये आज का ये जो अवसर है, इसके पीछे जो कल्पना है, और आज हमारी आंखों के सामने उस सपने को साकार होते हुए देख रहे हैं, तब मुझे एक प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां गुनगुनाने का मन करता है:-

नया प्रात है, नई बात है, नई किरण है, ज्योति नई।

नई उमंगें, नई तरंगे, नई आस है, साँस नई।

उठो धरा के अमर सपूतो, पुनः नया निर्माण करो।

जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो।

आज के ये दिव्य और भव्य ‘भारत मंडपम’ उसे देख करके हर भारतीय खुशी से भर रहा है, आनंदित है, और गर्व महसूस कर रहा है। ‘भारत मंडपम’ आह्वान है भारत के सामर्थ्य का, भारत की नई ऊर्जा का। ‘भारत मंडपम’ दर्शन है, भारत की भव्यता का और भारत की इच्छाशक्ति का। कोरोना के कठिन काल में जब हर तरफ काम रुका हुआ था, हमारे देश के श्रमजीवियों ने दिन-रात मेहनत करके इसका निर्माण पूरा किया है।

‘भारत मंडपम’ के निर्माण से जुड़े हर श्रमिक भाई-बहन को, हर कर्मी को आज सच्‍चे हृदय से मैं अभिनंदन करता हूं, उनका साधुवाद करता हूं। आज सुबह मुझे इन सभी श्रमजीवियों से मिलने का मौका मिला था, हमारे इन श्रमिक साथियों को सम्मानित करने का मुझे सौभाग्य मिला था। आज उनकी मेहनत देख, पूरा भारत विस्मित है, भारत चकित है।

मैं राजधानी दिल्ली के लोगों को, देश के लोगों को इस नए इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर- ‘भारत मंडपम’ की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। यहां देश के कोने-कोने से अतिथि आए हैं, मैं उन सबका हृदय से स्वागत करता हूं। टीवी के माध्यम से, सोशल मीडिया के माध्यम से जो करोड़ों लोग इस वक्त हमारे साथ जुड़े हुए हैं, मैं उनका भी अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज का दिन वैसे भी हर देशवासी के लिए बहुत ऐतिहासिक है, आज कारगिल विजय दिवस है। देश के दुश्मनों ने जो दुस्साहस दिखाया था, उसे मां भारती के बेटे-बेटियों ने अपने पराक्रम से परास्त कर दिया था। कारगिल युद्ध में अपना बलिदान देने वाले प्रत्येक वीर को मैं कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से श्रद्धांजलि देता हूं।

साथियों,

‘भारत मंडपम’ के इस नाम के पीछे और जैसा अभी पीयूष जी ने बताया, भगवान बशवेश्वर के ‘अनुभव मंडपम’ की प्रेरणा है। अनुभव मंडपम यानि वाद और संवाद की लोकतांत्रिक पद्धति, अनुभव मंडपम यानि अभिव्यक्ति, अभिमत। आज दुनिया ये स्वीकार कर रही है कि भारत Mother of Democracy है। तमिलनाडु के उत्तरामेरूर में मिले शिलालेखों से लेकर वैशाली तक, भारत की वाइब्रेंट डेमोक्रेसी सदियों से हमारा गौरव रही है।

आज जब हम आजादी के 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो ये ‘भारत मंडपम’, हम भारतीयों द्वारा अपने लोकतंत्र को दिया एक खूबसूरत उपहार है। कुछ हफ्तों बाद ही यहीं पर G-20 से जुड़े आयोजन होंगे, दुनिया के बड़े-बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष यहां उपस्थिति होंगे। भारत के बढ़ते हुए कदम और भारत का बढ़ता हुआ कद, इस भव्य ‘भारत मंडपम’ से पूरी दुनिया देखेगी।

साथियों,

आज पूरी दुनिया Inter-Connected है, Inter-Dependent है और वैश्विक स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों और समिट्स की श्रृंखला लगातार चलती रहती है। ऐसे कार्यक्रम कभी एक देश में तो कभी दूसरे देश में होते हैं। ऐसे में भारत में, देश की राजधानी दिल्ली में, अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक कन्वेंशन सेंटर होना बहुत ही जरूरी था। यहां जो व्यवस्था थीं, जो हॉल्स थे, वो कई दशक पहले यहां बने थे। पिछली शताब्दी की वो पुरानी व्यवस्था, 21वीं सदी के भारत के साथ कदमताल नहीं कर पा रही थी। 21वीं सदी के भारत में हमें 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करने वाला निर्माण करना ही होगा।

इसलिए ये भव्य निर्माण, ये ‘भारत मंडपम’ आज मेरे देशवासियों के सामने है, आपके सामने है। ‘भारत मंडपम’ देश-विदेश के बड़े-बड़े exhibitors को मदद करेगा। ‘भारत मंडपम’ देश में कॉन्फ्रेंस टूरिज्म का बहुत बड़ा जरिया बनेगा। ‘भारत मंडपम’ हमारे स्टार्टअप्स की शक्ति को शो-केस का माध्यम बनेगा। ‘भारत मंडपम’ हमारे सिनेमा-जगत, हमारे आर्टिस्ट्स की परफॉर्मेंस का साक्षी बनेगा।

‘भारत मंडपम’ हमारे हस्तशिल्पियों, कारीगरों-बुनकरों के परिश्रम को प्लेटफॉर्म देने का एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम बनने वाला है और ‘भारत मंडपम’ आत्मनिर्भर भारत औऱ Vocal For Local अभियान का प्रतिबिंब बनेगा। यानि इकोनॉमी से इकोलॉजी तक, ट्रेड से टेक्‍नोलॉजी तक, ऐसे हर आयोजन के लिए ये विशाल परिश्रम और ये विशाल परिसर, ये ‘भारत मंडपम’ बहुत बड़ा मंच बनेगा।

साथियों,

भारत मंडपम जैसी इस व्यवस्था का निर्माण कई दशक पहले हो जाना चाहिए था। लेकिन शायद मुझे लगता है, बहुत सारे काम मेरे हाथ में ही लिखे हुए हैं। और हम देखते हैं, दुनिया में किसी देश में अगर एक ओलंपिक समिट होता है, पूरी दुनिया में उस देश का प्रोफाइल एकदम से बदल जाता है। आज ये विश्‍व में इन चीजों का महात्‍मय बहुत बड़ा हो गया है और देश का प्रोफाइल भी बहुत मायने रखता है। और ऐसी ही व्‍यवस्‍थाएं हैं जो कुछ न कुछ उसमें value addition करती हैं।

लेकिन हमारे देश में कुछ अलग सोच के लोग भी हैं। नकारात्मक सोच वालों की कोई कमी तो है नहीं हमारे यहां। इस निर्माण को रोकने के लिए भी नकारात्मक सोच वालों ने क्या-क्या कोशिशें नहीं की। खूब तूफान मचाया गया, अदालतों के चक्कर काटे गए। लेकिन जहां सत्‍य होता है, वहां ईश्‍वर भी होता है। लेकिन अब ये सुंदर परिसर आपकी आंखों के सामने मौजूद है।

दरअसल, कुछ लोगों की फितरत होती है, हर अच्छे काम को रोकने की, टोकने की। अब आपको याद होगा जब कर्तव्य पथ बन रहा था तो न जाने क्‍या-क्‍या कथायें चल रहीं थीं, फ्रंट पेज पर, ब्रेकिंग न्‍यूज में क्‍या कुछ चल रहा था। अदालत में भी न जाने कितने मामले उठाये गये थे। लेकिन जब अब कर्तव्‍य पथ बन गया, वे लोग भी दबी जुबान में कह रहे हैं कि अच्‍छा हुआ है कुछ, देश की शोभा बढ़ाने वाला है। और मुझे विश्‍वास है कुछ समय बाद ‘भारत मंडपम’ के लिए भी वो टोली खुल करके बोले या न बोले, लेकिन भीतर से तो स्‍वीकार करेगी और हो सकता है किसी के समारोह में यहां आकर लेक्‍चर देने भी आ जाये।

Friends,

कोई भी देश हो, कोई भी समाज हो, वो टुकड़ों में सोचकर, टुकड़ों में काम करके आगे नहीं बढ़ सकता। आज ये कन्वेंशन सेंटर, ये ‘भारत मंडपम’ इस बात का भी गवाह है कि हमारी सरकार कैसे होलिस्टिक तरीके से, बहुत दूर की सोचकर काम कर रही है। इन जैसे सेंटर्स में आना आसान हो, देश-विदेश की बड़ी कंपनियां यहां आ सकें, इसलिए आज भारत 160 से ज्यादा देशों को e-Conference visa की सुविधा दे रहा है। यानी सिर्फ ये बनाया ऐसा नहीं, पूरी सप्‍लाई चेन, सिस्‍टम चेन, उसकी व्‍यवस्‍था की है।

2014 में दिल्ली एयरपोर्ट की कैपेसिटी भी सालाना करीब 5 करोड़ यात्रियों को हैंडल करने की थी। आज ये भी बढ़कर सालाना साढ़े सात करोड़ पैसेंजर हो चुकी है। टर्मिनल टू और चौथा रनवे भी शुरू हो चुका है। ग्रेटर नोएडा के जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने के बाद इसे और शक्ति मिलेगी। बीते वर्षों में दिल्ली-NCR में होटल इंडस्ट्री का भी काफी विस्तार हुआ है। यानी कॉन्फ्रेंस टूरिज्म के लिए एक पूरा इकोसिस्टम बनाने का हमने बिल्‍कुल प्‍लान-वे में प्रयास किया है।

साथियों,

इसके अलावा भी यहां राजधानी दिल्ली में भी बीते वर्षों में जो निर्माण हुए हैं, वो देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। कौन भारतीय होगा, जिसका सिर देश की नई संसद देख करके ऊंचा नहीं होगा। आज दिल्ली में नेशनल वॉर मेमोरियल है, पुलिस मेमोरियल है, बाबा साहेब अंबेडकर मेमोरियल है। आज कर्तव्य पथ के आसपास सरकार के आधुनिक ऑफिसेज, दफ्तर, उस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। हमें वर्क कल्‍चर भी बदलना है, वर्क एनवायरमेंट भी बदलना है।

आप सबने देखा होगा, प्राइम मिनिस्टर्स म्यूजियम से आज की नई पीढ़ी को देश के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में जानने का मौका मिल रहा है। जल्द ही दिल्ली में, और ये भी आप लोगों के लिए खुशखबरी होगी, दुनिया के लिए भी खुशखबरी होगी, जल्‍द ही दिल्‍ली में दुनिया का सबसे बड़ा और जब मैं कहता हूं, दुनिया का सबसे बड़ा मतलब दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजियम- युगे-युगीन भारत भी बनने जा रहा है।

साथियों,

आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। भारत आज वो हासिल कर रहा है, जो पहले अकल्पनीय था, कोई सोच भी नहीं सकता था। विकसित होने के लिए हमें बड़ा सोचना ही होगा, बड़े लक्ष्य हासिल करने ही होंगे। इसलिए “Think Big, Dream Big, Act Big” के सिद्धांत को अपनाते हुए भारत आज तेजी से आगे बढ़ रहा है। और कहा भी गया है- इतने ऊँचे उठो कि, जितना उठा गगन है। हम पहले से बड़ा निर्माण कर रहे हैं, हम पहले से बेहतर निर्माण कर रहे हैं, हम पहले से तेज गति से निर्माण कर रहे हैं।

पूर्व से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक, भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर बदल रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा Solar Wind Park आज भारत में बन रहा है। दुनिया का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज आज भारत में है। 10 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी टनल आज भारत में है। दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड आज भारत में है। दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम आज भारत में है। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा आज भारत में है। एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल-रोड ब्रिज भी भारत में है। आज भारत दुनिया के उन देशों में है जहां ग्रीन हाइड्रोजन पर इतना बड़ा काम हो रहा है।

साथियों,

आज हमारी सरकार के इस टर्म और पिछले टर्म के कार्यों का परिणाम पूरा देश देख रहा है। आज देश का विश्वास पक्का हो गया है कि अब भारत की विकास यात्रा रुकने वाली नहीं है। आप जानते हैं कि हमारे पहले टर्म की शुरुआत में भारत, वर्ल्ड इकोनॉमी में दसवें नंबर पर था। जब मुझे आज लोगों ने काम दिया तब हम दस नंबरी थे। दूसरे टर्म में आज भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी इकोनॉमी है। और यह ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर, बातों-बातों में नहीं, ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर मैं कह रहा हूं।

मैं देश को ये भी विश्वास दिलाऊंगा कि तीसरे टर्म में, दुनिया की पहली तीन इकोनॉमीज में एक नाम भारत का होगा। यानी, तीसरे टर्म में पहली तीन इकोनॉमी में गर्व के साथ हिन्‍दुस्‍तान खड़ा होगा दोस्तों। Third Term- Top Three Economy में पहुंच कर रहेगा भारत और ये मोदी की गारंटी है। मैं देशवासियों को ये भी विश्वास दिलाऊंगा कि 2024 के बाद हमारे तीसरे टर्म में, देश की विकास यात्रा और तेजी से बढ़ेगी। और मेरे तीसरे कार्यकाल में आप अपने सपने अपनी आंखों के सामने पूरे होते देखेंगे।

साथियों,

आज भारत में नव निर्माण की क्रांति चल रही है। बीते 9 साल में भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए करीब-करीब 34 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस साल के बजट में भी कैपिटल एक्सपेंडिचर 10 लाख करोड़ रुपए रखा गया है। नए एयरपोर्ट, नए एक्सप्रेस वे, नए रेल रूट, नए ब्रिज, नए अस्पताल, आज भारत जिस स्पीड और स्केल पर काम कर रहा है, ये वाकई अभूतपूर्व है।

70 साल में, ये मैं और किसी की आलोचना करने के लिए नहीं कह रहा हूं, लेकिन हिसाब-किताब के लिए कुछ reference जरूरी होता है। और इसलिए मैं उस reference के आधार पर बात कर रहा हूं। 70 साल में भारत में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर के आसपास रेल लाइनों का Electrification हुआ था। जबकि पिछले 9 साल में भारत में करीब-करीब 40 हजार किलोमीटर रेल लाइनों का Electrification हुआ है। 2014 से पहले हमारे देश में हर महीने सिर्फ 600 मीटर, किलोमीटर मत समझना, सिर्फ 600 मीटर नई मेट्रो लाइन बिछाई जा रही थी। आज भारत में हर महीने 6 किलोमीटर नई मेट्रो लाइन का काम पूरा हो रहा है।

2014 से पहले देश में 4 लाख किलोमीटर से भी कम ग्रामीण सड़कें थीं। आज देश में सवा सात लाख किलोमीटर से भी ज्यादा ग्रामीण सड़कें हैं। 2014 से पहले देश में करीब-करीब 70 के आसपास ही हमारे एयरपोर्ट थे। आज देश में एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 150 के आसपास पहुंच रही है। 2014 से पहले देश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम भी सिर्फ 60 शहरों में था। अब देश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम 600 से भी ज्यादा शहरों में पहुंच गया है।

साथियों,

बदलता हुआ भारत आज पुरानी चुनौतियों को समाप्त करते हुए आगे बढ़ रहा है। हम समस्याओं के स्थाई समाधान पर, Permanent Solution पर जोर दे रहे हैं। और इसका एक उदाहरण पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान भी है। यहां उद्योग जगत के साथी बैठे हैं, मैं चाहूंगा कि आप जाकर उस पोर्टल को देखिए। देश में रेल-रोड जैसे फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, स्कूल बनाने हों, हॉस्पिटल बनाने हों, ऐसे सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान एक बहुत बड़ा गेमचेंजर साबित होने जा रहा है। इसमें अलग-अलग लेयर के 1600 से ज्यादा अलग-अलग लेयर्स के डेटा उसके अंदर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाया गया है। कोशिश यही है कि देश का समय और देश का पैसा पहले की तरह बर्बाद ना हो।

साथियों,

आज भारत के सामने बहुत बड़ा अवसर है। आज से सौ साल पहले, मैं पिछली शताब्‍दी की बात कर रहा हूं, आज से 100 साल पहले जब भारत आजादी की जंग लड़ रहा था, तो वो पिछली शताब्दी का तीसरा दशक, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। 1923-1930 का वो कालखंड याद कीजिए, पिछली शताब्‍दी का तीसरा दशक भारत की आजादी के लिए बहुत अहम था। इसी प्रकार 21वीं सदी का ये तीसरा दशक भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पिछली शताब्‍दी के तीसरे दशक में ललक थी, लक्ष्‍य था स्‍वराज्‍य का, आज लक्ष्य है समृद्ध भारत का, विकसित भारत बनाने का। उस तीसरे दशक में देश आजादी के लिए निकल पड़ा था, देश के कोने कोने से आजादी की गूंज सुनाई देती थी। स्वराज आंदोलन की सभी धाराएं, सभी विचार चाहे वो क्रांति का मार्ग हो, या असहयोग का मार्ग हो, सारे मार्ग पूर्ण रूप से जागरूक थे, ऊर्जा से भरे हुए थे, इसी का परिणाम था कि इसके 25 साल के भीतर-भीतर देश आजाद हो गया, आजादी का हमारा सपना साकार हुआ। और इस शताब्‍दी के इस तीसरे दशक में हमारे सामने अगले 25 साल का लक्ष्य है। हम समर्थ भारत का सपना लेकर, विकसित भारत का सपना लेकर निकल पड़े हैं। हमें भारत को वो ऊंचाई देनी है, उस सफलता पर पहुंचाना है, जिसका सपना हर स्वतंत्रता सेनानी ने देखा था।

हमें इस संकल्प की सिद्धि के लिए सभी देशवासियों ने, 140 करोड़ हिन्दुस्तानियों ने दिन रात एक कर देना है। और साथियों मैं अनुभव से कहता हूं, मैंने एक के बाद एक सफलताओं को अपनी आंखों के सामने देखा है। मैंने देश की शक्ति को भली-भांति समझा है, देश के सामर्थ्‍य को जाना है और उसके आधार पर मैं कहता हूं, बड़े विश्‍वास से कहता हूं, भारत मंडपम में खड़े हो करके इन सुयोग्‍य जनों के सामने कहता हूं भारत विकसित हो सकता है, अवश्‍य हो सकता है। भारत गरीबी दूर कर सकता है, जरूर कर सकता है। और मेरे इस विश्वास के पीछे जो आधार है, वो भी मैं आज आपको बताना चाहता हूं।

नीति आय़ोग की रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में सिर्फ पांच साल में साढ़े तेरह करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। और भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी ये कह रही हैं कि भारत में अति गरीबी extreme poverty जो है, वो खत्‍म होने के कगार पर है। यानी बीते 9 वर्षों में देश ने जो नीतियां बनाईं हैं, जो निर्णय लिए हैं, वो देश को सही दिशा में ले जा रहे हैं।

साथियों,

देश का विकास तभी हो सकता है, जब नियत साफ़ हो, नीति सही हो, देश में सार्थक परिवर्तन लाने के लिए उपयुक्‍त नीति हो। भारत की प्रेसिडेंसी के दौरान, पूरे देश में हो रहे जी-20 के आयोजन भी इसका एक प्रेरक उदाहरण हैं। हमने जी-20 को सिर्फ एक शहर, एक स्थान तक सीमित नहीं रखा। हम जी-20 की बैठकों को देश के 50 से ज्यादा शहरों में ले गए। हमने इसके माध्यम से भारत की विविधता को शोकेस किया है। हमने दुनिया को दिखाया कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति क्या है, भारत की विरासत क्या है। विविधताओं के बीच भी भारत किस प्रकार से प्रगति कर रहा है। भारत किस प्रकार से विविधता को सेलिब्रेट करता है।

आज दुनिया भर से लोग इन आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। G-20 की बैठकों के लिए अनेक शहरों में नई सुविधाओं का निर्माण हुआ, पुरानी सुविधाओं का आधुनिकीकरण हुआ। इससे देश का फायदा हुआ, देश के लोगों का फायदा हुआ। और यही तो सुशासन है, यही तो Good Governance है। नेशन फर्स्ट, सिटीज़न फर्स्ट की भावना पर चलते हुए ही हम भारत को विकसित भारत बनाने वाले हैं।

साथियों,

इस महत्‍वपूर्ण अवसर पर आप सबका यहां आना, ये अपने-आप में आपके दिल के कोने में भी भारत के लिए जो सपने पड़े हैं ना, उन सपनों को खाद-पानी देने का ये अवसर है जी। एक बार फिर भारत मंडपम जैसी शानदार सुविधा के लिए दिल्ली के लोगों को, देश के लोगों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। और इतनी बड़ी तादाद में आप आए, मैं आपका फिर से एक बार स्‍वागत और अभिनंदन करता हूं।

धन्यवाद!