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नई दिल्ली। भारत और मलेशिया में पाम ऑयल को लेकर चल रही तनातनी पर दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड के दावोस में वार्ता संभव है। दावोस में व‌र्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक का आयोजन 20-24 जनवरी को होना है। मलेशिया की सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि आयोजन के मौके पर दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों की मुलाकात संभव है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल आयातक और मलेशिया निर्यातक:-भारत ने पिछले दिनों मलेशिया से रिफाइंड पाम ऑयल का आयात प्रतिबंधित कर दिया था। मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक व निर्यातक हैं। वहीं, भारत दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल आयातक है। तनाव के चलते शुक्रवार को मलेशिया सबसे बड़ा झटका लगा। बीते 11 सालों में पॉम ऑइल की बेंचमार्क कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
पाम ऑयल के आयात पर प्रतिबंध क्यों लगा:-कहा जा रहा है कि मलेशिया के प्रधानमंत्री ने भारत की हाल की कुछ घरेलू नीतियों के खिलाफ जमकर बयान दिए हैं, जिसके खिलाफ भारत सरकार ने यह कदम उठाया है। लेकिन वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसी सप्ताह गुरुवार को स्पष्ट किया कि रिफाइंड पाम ऑयल के आयात पर प्रतिबंध का फैसला पूरी तरह घरेलू कारोबारियों के हितों को देखते हुए लिया गया है।
गोयल करेंगे भारतीय दल का प्रतिनिधित्व;-दावोस में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल करेंगे। आयोजन के दौरान वे डब्ल्यूटीओ के मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में भी शिरकत करेंगे। वहां उनकी ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, रूस, सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड, कोरिया और सिंगापुर के मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता का भी कार्यक्रम है।
डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक और ओईसीडी के महासचिव के साथ बैठक:-इसके अलावा वे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के महानिदेशक और आर्थिक सहयोग व विकास संगठन (ओईसीडी) के महासचिव के साथ भी बैठक करेंगे। गोयल के साथ केंद्रीय जहाजरानी और रसायन व उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख एल. मांडविया, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री, पंजाब के वित्त मंत्री और तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री भी डब्ल्यूईएफ में शिरकत करेंगे।

बठिंडा। बठिंडा, पंजाब निवासी 73 वर्षीय भोला सिंह लकड़ी के खिलौने बनाने के कार्य में आज भी पूरी तल्लीनता से लगे रहते हैं। यह जुगत वह रोजी-रोटी के लिए नहीं, बल्कि पारंपरिक खिलौनों को बचाने के लिए है। कहते हैं, आज भी जब मैं वह गाना सुनता हूं- लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा, घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा..., तो सोच में पड़ जाता हूं कि समय कितना कुछ बदल देता है, पीछे रह जाती हैं तो बस यादें।अमरपुरा बस्ती में भोला की छोटी सी दुकान है, जहां वे लकड़ी के खिलौने बनाते दिख जाएंगे- पूरी लगन और तन्मयता के साथ। कहते हैं, दो दशक पहले तक भी लकड़ी के खिलौने चलन में थे, सस्ते, टिकाऊ और हानिरहित। लेकिन आज प्लास्टिक के आधुनिक खिलौनों के आगे लकड़ी के ये खिलौने फीके पड़ गए हैं। मैं चाहता हूं कि आज के बच्चे देश की संस्कृति से जुड़े इन पारंपरिक खिलौनों को देख सकें, इसलिए इन्हें बनाता हूं। संतोष इस बात का है कि इन खिलौने के चंद कद्रदान आज भी मेरी दुकान पर पहुंच जाते हैं। भोला सिंह अपनी इस छोटी से दुकान में बैठकर लकड़ी के अनेक खिलौने गढ़ते हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियां, बैलगाड़ियां, रथ, गाड़ी, गाय, भेड़, बकरी, शेर, हिरण, गड़ारी..., उनकी दुकान में वे सारे खिलौने मिल जाएंगे, जो पुराने दौर की याद दिलाते हैं। आज बेशक छोटे बच्चों को चलना सिखाने के लिए वाकर ने जगह ले ली है, लेकिन भोला सिंह आज भी पुराने जमाने में चलन में रही गड़ारी बनाते हैं।भोला सिंह का कहना है कि वाकर में वो बात कहां जो लकड़ी की इस गड़ारी में है। वास्तव में छोटे बच्चे गड़ारी से ही सही ढंग से चलना सीखते हैं। यह बच्चों को खड़े होना भी सिखाता है। इससे उनका संतुलन बेहतर बनता है। ग्राहकों के बारे में कहते हैं, शहरी तो नहीं, लेकिन ग्रामीण महिलाएं आज भी अपने बच्चों के लिए इसे खरीदकर ले जाती हैं। रोज कोई न कोई ये खिलौने खरीदने के लिए आ ही जाता है। ये खिलौने बेचकर मैं रोजाना तीन-चार सौ रुपये की कमाई कर लेता हूं। इस शौक के बारे में उन्होंने बताया कि बरसों पहले जब मैं अपने गांव मैहणा में रहा करता था तो खिलौनों के साथ-साथ खेती से संबंधित औजार और घर की रसोई में काम आने ली वस्तुएं खुद बना लिया करता था। फिर परिवार के बच्चों के लिए बनाने लगा। इस काम में मुझे सुकून मिलता।
याद आ जाता है बचपन...;-भोला सिंह कहते हैं मैं यह काम रोजीरोटी के लिए नहीं, शौकिया तौर पर कर रहा हूं। मेरे तीन बेटे हैं, जो अपना-अपना काम करके अच्छी कमाई कर रहे हैं। बच्चों के खिलौने बनाने में मुझे बेहद आनंद आता है। बचपन की यादें भी ताजा हो जाती हैं। चाहता हूं कि नई पीढ़ी भी इन्हें जाने, समझे और अपनाए।

 

 

 

नई दिल्ली। कितने लोगों को पता है कि जायद क्या होती है। सच्चाई तो यह है कि कृषि प्रधान देश में सरकारों ने भी सिर्फ रबी और खरीफ को याद रखा था, जायद भुला दिया था। जायद यानी खरीफ और रबी सीजन के बीच की फसलें जो न तो अधिक पानी मांगती है न खाद, फिर भी फसल लहलहाती हैं। अफसोस कि देश की लगभग 70 फीसद खेत इस दौरान खाली पड़े रहते हैं। बिहार और पश्चिम बंगाल में धान की खेती के बाद तकरीबन 10 लाख हेक्टेयर खेत परती पड़े रहते हैं। न तो किसान जागते हैं और न ही सरकार। अब सरकार जागी है और किसानों को जगाने का फैसला किया गया है। पहली बार जायद सीजन की फसलों की तैयारी के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें सभी राज्यों के कृषि सचिवों और अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। किसानों को जानकारी से लेकर बीज तक उपलब्ध कराए जाएंगे। जाहिर तौर पर 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने में भी इसका बड़ा हाथ होगा।इस दौरान लगाई जाने वाली फसलों में तेज गरमी और शुष्क हवाओं को सहने की अच्छी क्षमता होती है। क्योंकि इस दौरान बारिश की संभावना न के बराबर ही रहती है, जबकि गरमी की शुरुआत हो जाती है। ऐसे मौसम में उत्तरी राज्यों में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, तोरी, भिंडी, टिंडा और करेला की खेती होती है। इनमें खेत में पैदा होने वाले फल और सब्जियां दोनों होती हैं। इसके अलावा दलहन और तिलहन की फसलें भी होती हैं, जिनमें मूंग और उड़द के साथ तिलहनी सूरजमुखी की खेती भी होती है।केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सम्मेलन के इस मौके पर सभी राज्यों के प्रतिनिधियों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए जायद की फसलें सबसे मुफीद साबित हो सकती हैं। इनमें सब्जियां और फल शामिल हैं। कृषि मंत्रालय की योजना के मुताबिक जायद की फसलों के लिए उपयुक्त बीजों की आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने की तैयारियां पहले से ही कर ली गई हैं। राज्यों में इच्छुक किसानों को बीजों के पैकेट प्रदान करेगी।केंद्र की राजग सरकार ने जायद सीजन की फसलों पर फोकस किया है।

 

नई दिल्‍ली। आज ही के दिन कश्मीरी पंडितों की काली यादों के तीस साल पूरे हो रहे हैं। सामने 19 जनवरी, 1990 का वो दिन है और इतिहास फिर कटघरे में है। इसी दिन कश्मीरी पंडितों को कश्मीर छोड़ने का फरमान सुनाया गया था। जिन घरों में उन लोगों की किलकारियां गूंजी, जिनमें उन्होंने लोरियां सुनी, पुरखों की निशानियां, यार-दोस्तों से जुड़ी यादें सब एक एक झटके में बहुत पीछे छूट गए। पुनर्वास योजना के तहत पिछले तीस सालों में सिर्फ एक परिवार कश्मीर लौटा है तो किसी में अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद वापस लौटने की आस जगी।
खाली होते गए घर:-कश्मीर में आतंकवाद का दौर शुरू होने से पहले वादी में 1242 शहरों, कस्बों और गांवों में करीब तीन लाख कश्मीरी पंडित परिवार रहते थे। फिर 242 जगहों पर सिर्फ 808 परिवार रह गए। आतंकवादियों के फरमान के बाद कश्मीर से बेघर हुए कश्मीरी पंडितों में से सिर्फ 65 हजार कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू में पुनर्वास एवं राहत विभाग के पास दर्ज हुए।
भाषणों तक सीमित रहा भाईचारा:-राज्य की सत्ता चंद लोगों के हाथ में रही और उन्होंने कभी पंडितों की घर वापसी के लिए कोई प्रयास नहीं किए। कश्मीरी पंडितों से भाईचारा केवल भाषणों तक ही रहा और लाखों परिवार तीन दशक तक वही दर्द झेलते रहे।
आपबीती- बहन-बेटियों के बारे में अपशब्द लिखे;-बहन-बेटियों के बारे में अपशब्द लिखे जाते थे मैं 18 साल का था जब कश्मीर छोड़ने का एलान हुआ और हम घर के साथ पुरानी यादों को छोड़कर चल दिए। करते भी क्या..हमारी बहन-बेटियों के बारे में दीवारों पर अपशब्द लिखे जाते थे। घरों पर पत्थर फेंके जाते थे। जान बचाते या घर। सब कुछ याद करके आज भी रूह कांप जाती है।- सुनील पंडिता, कश्मीरी पंडित
कश्मीर इस्लामिक राज्य बन गया;-अब जगी उम्मीद अनुच्छेद 370 के कारण एक सेक्यूलर भारत में कश्मीर इस्लामिक राज्य की तरह बन गया था। अब देश का संविधान लागू होने के कारण हमें उम्मीद जगी है कि हमारे भी अच्छे दिन लौट सकते हैं। केंद्र से अपेक्षा है कि हमें अपनी धरती पर बसाने के लिए ठोस निर्णय लेगी और कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।- अजय चुरंगु, पनून कश्मीर के चेयरमैन
तीस साल में लौटा सिर्फ एक परिवार:-प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए करीब छह हजार नौकरियां देने की घोषणा हुई थी। तत्कालीन राज्य सरकार की ढुलमुल नीति के कारण लगभग 2200 पदों पर ही नियुक्तियां हुई हैं। जिन पदों पर नियुक्तियां हुईं है वो लोग भी अपने परिवारों को कश्मीर नहीं ले जा पाए हैं। या तो उनकी संपत्ति और बगीचों पर कब्जा हो चुका है या फिर उन्हें जला दिया गया है। पैकेजों के तहत साल 2015 में सिर्फ एक ही कश्मीरी पंडित परिवार बीते 30 सालों के दौरान कश्मीर लौटा है।
काले अतीत की तिथियां
- 1980 के बाद बदल चुका था। रूस अफगानिस्तान पर चढ़ाई कर चुका था और अमेरिका उसे वहां से निकालने की फिराक में था। इसके लिए अफगानिस्तान के लोगों को मुजाहिदीन बनाया जाने लगा। जब पुलिस ने कार्रवाई की तो कुछ मुसलमानों के मारे जाने पर कहा जाने लगा कि कश्मीरी काफिर दुश्मन हैं। कश्मीर में करीब 5 प्रतिशत पंडित थे। हालांकि कई जगह 15-20 प्रतिशत तक भी कहा जाता है।
-1986 में गुलाम मोहम्मद शाह ने अपने बहनोई फारुख अब्दुल्ला से सत्ता छीन ली और मुख्यमंत्री बन गये। एलान हुआ कि जम्मू के न्यू सिविल सेक्रेटेरिएट एरिया में एक पुराने मंदिर को गिराकर मस्जिद बनवाई जाएगी तो लोगों ने प्रदर्शन किया। जवाब में कट्टरपंथियों ने नारा दे दिया कि इस्लाम खतरे में है। इसके बाद कश्मीरी पंडितों पर धावा बोल दिया गया।
- 4 जनवरी 1990 को उर्दू अखबार आफताब में हिजबुल मुजाहिदीन ने छपवाया कि सारे पंडित कश्मीर छोड़ दें। चौराहों और मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाकर कहा जाने लगा कि पंडित यहां से चले जाएं। अपनी औरतों को यहीं छोड़ जाएं। इसके बाद हत्याएं और दुष्कर्म की घटनाएं सामने आने लगीं।
बनाया जाए अलग होम लैंड;-कश्मीरी पंडित चाहते हैं कि उनके लिए कश्मीर में एक अलग होमलैंड बने जिसे केंद्र शासित राज्य का दर्जा मिले। राज्य के सभी सियासी दल इसका विरोध करते हैं। कांग्रेस और भाजपा भी प्रत्यक्ष रूप से इसकी समर्थक नजर नहीं आती। अगर यह संभव न हो तो राज्य में उनको एकसाथ बसाया जाए ताकि वह अपनी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं को जीवित रख सकें। इसके अलावा वे चाहते हैं कि पिछली सदी के आखिरी दशक में उनके मकानों व जमीन जायदाद पर हुए कब्जों को केंद्र व राज्य सरकार छुड़ाए या फिर जिन लोगों को अपनी सपंत्ति बेचनी पड़ी थी, उसे वह वापस दिलाई जाए।

नई दिल्‍ली।जम्मू-कश्मीर और इसके आस पास बना पश्चिमी विक्षोभ अब कमजोर पड़ने लगा है। लेकिन मौसम विभाग ने कहा है कि 20 से 21 जनवरी तक एक नया पश्चिमी विक्षोभ फ‍िर से सक्रिय होगा जिससे उत्‍तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और उत्तर पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग की मानें तो 20 और 21 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ असरकारी रहने के बाद इसका प्रभाव कम होने लगेगा। इस दौरान इसके असर से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश जबकि पहाड़ों पर बर्फबारी हो सकती है।मौसम विभाग की मानें तो पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में इस महीने अब तक तीन पश्चिमी विक्षोभ आ चुके हैं। बीते 15 जनवरी को हिमालय क्षेत्र में हालिया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ था जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में बीते तीन दिनों से बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश देखी गई। मौसम विभाग ने अगले दो तीन दिनों तक पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बेहद घना कोहरा बने रहने की संभावना जताई है। विभाग की मानें तो उत्तराखंड, उत्तरी राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में 22 जनवरी तक घना कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।उत्तराखंड में बीते दो दिन से हो रही बर्फबारी के कारण करीब 300 गांव जिला मुख्यालय से कट गए हैं जबकि 350 गांवों में बिजली गुल है। बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत 40 से ज्यादा सड़कों पर आवागमन बाधित है। शनिवार शाम को मसूरी और नैनीताल की पहाड़ियों पर हिमपात हुआ। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ ही रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर और चम्पावत के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी जारी है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 21 जनवरी तक मौसम ऐसा ही रहने वाला है।मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में अगले दो दिनों तक कोल्ड डे यानी पाला पड़ने की आशंका जताई है। यही नहीं सौराष्ट्र और कच्छ इलाके में कुछ स्थानों पर शीतलहर की स्थिति देखी जा सकती है। हालांकि सोमवार से इससे राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने दिल्ली एनसीआरमें 21 से 23 जनवरी तक सर्दी से राहत मिलने का अनुमान जताया है। वहीं उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश इलाकों में 23 और 24 जनवरी को कोहरा का प्रकोप देखे जाने की संभावना जताई है।

नई दिल्ली। आपको एक्टर शाहरुख खान और करीना कपूर की फिल्म 'रा.वन' तो याद होगी और उस फिल्म का गाना 'छम्मक छल्लो' भी याद होगा। वो ही गाना जिसमें करीना कपूर ने रेड कलर की साड़ी पहनकर डांस किया था और वो गाना काफी पॉप्युलर भी हुआ था। अब वो गाना एक बार अपने सिंगर की वजह से सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि इस गाने के सिंगर अपना अलग शहर बनाने जा रहे हैं।जी हां, इस गाने में अपनी आवाज देने वाले रैपर एकॉन अब साउथ अफ्रीका में अपना खुद का अलग शहर बनाने वाले हैं। सिंगर एकॉन ने खुद इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर दी है और बताया है कि 'एकॉन सिटी' का एग्रीमेंट पूरा हो चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एकॉन यह सिटी सेनेगल में बसाई जा रही है और इसका नाम एकॉन सिटी होगा।वहीं, बताया जा रहा है कि एकॉन को इस सिटी के लिए 2 हजार एकड़ की जमीन भी मिल गई है। साथ ही इस सिटी में खुद के अलग नियम होंगे और सिटी में एक क्रिप्टो करेंसी यानी डिजिटल करेंसी भी चलेगी, जिसका नाम Akion होगा। इस सिटी का निर्माण शुरू हो गया है और 2018 में एकॉन ने इसकी जानकारी भी दी थी। साथ ही शहर में एयरपोर्ट जैसी कई सुविधाएं भी होंगी।हालांकि, अभी सिटी को बसने में करीब 10 साल लगेंगे और उसके बाद यहां लोग रहना शुरू होंगे। बता दें कि एकॉन काफी अमीर शख्स हैं और उनकी कुल संपति 80 मिलियन डॉलर है, जो करीब 568 करोड़ रुपये है। वे दुनिया के सबसे अमीर सिंगर्स में एक हैं और अफ्रीका के सबसे अमीर सिंगर हैं। अभी एकॉन अपनी सिटी को लेकर खबरों में हैं।

नई दिल्ली। हाल के वर्षों में फिटनेस बैंड पहनने का चलन काफी बढ़ा है खासकर युवा इस ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। बीते 14 जनवरी को HONOR ने HONOR Band 5i नाम से एक फिटनेस बैंड लॉच किया, जो न केवल डिजाइन, बल्कि डिस्प्ले और फीचर्स के मामले मे स्टाइलिश और इनोवेटिव भी है। लॉन्च के बाद से इस फिटनेस बैंड ने युवाओं के दिलों में जगह बना ली है। आइए जानते हैं कि यह फिटनेस बैंड Mi Band 4 के मुकाबले कैसा है?
डिजाइन:-ऐसा देखा गया है कि युवाओं को उस तरह के फिटनेस बैंड ज्यादा पसंद आते हैं, जिसका डिजाइन काफी आकर्षक हो। HONOR Band 5i का डिजाइन Mi Band 4 के मुकाबले काफी फ्रेश और अलग है। इसका डिजाइन देखकर आपको लगेगा कि यह फिटनेस बैंड आपकी कलाई पर जरूर होना चाहिए। इसका वॉच-स्टाइल स्ट्रैप कलाई पर खूबसूरत तो लगता ही है, साथ ही सही तरह से फिट भी हो जाता है। Mi Band 4 का स्ट्रैप थर्मोप्लास्टिक पॉलीयूरेथेन से बना है जबकि HONOR Band 5i सिलिकॉन रबड़ से बना है। यहां Mi Band 4 के मुकाबले HONOR Band 5i थोड़ा हल्का भी है, जो आपके कलाई पर कम्फर्टेबली फिट बैठेगा। HONOR Band 5i का वेट 15 ग्राम है, जबकि Mi Band 4 का वेट 22.1 ग्राम है। दोनों ही बैंड 5ATM वॉटर रेसिस्टेंट के साथ आते हैं।
डिस्प्ले:-HONOR Band 5i की जो चीज सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, वो इसका कलरफुल डिस्प्ले है। इसका नया और कलर टच डिस्प्ले इसे बाकी फिटनेस बैंड्स से अलग करता है। इसका खूबसूरत डिस्प्ले देखकर आपको इसे खरीदने का मन करेगा। HONOR Band 5i का डिस्प्ले 2.4cm (0.96") का है, जिसका HD रिजोल्यूशन 80X160 है। यह एक फुल टच स्क्रीन है अर्थात आप इसे अपनी उंगली से कंट्रोल कर सकते हैं। फास्ट और ईजी कम्यूनिकेशन के लिए इसका कलर टच स्क्रीन कलर कोड टेक्स्ट और कॉल आईकॉन दिखाता है, जिससे आपको एक अलग एक्सपीरिएंस मिलेगा। वहीं बात करें Mi Band 4 के डिस्प्ले की तो 120 x 240 रिजोल्यूशन के साथ आने वाला इसका डिस्प्ले HONOR Band 5i के डिस्प्ले के सामने सामान्य और थोड़ा फीका भी लगता है।
हेल्थ ट्रैकिंग;-HONOR Band 5i कई सारे नए फीचर्स के साथ लॉच हुआ है। इसमें TruSeen और TruSleep जैसे फीचर्स मुख्य रूप से शामिल है। TruSeen फीचर हार्ट रेट पर 24x7 नजर रखता है और सामान्य स्तर से ऊपर या नीचे जाने पर आपको अलर्ट भेजता है। यह एक हार्ट रेट मॉनिटर टेक्नोलॉजी है। बात करें TruSleep फीचर की तो इसकी मदद से नींद के 6 टाइप को ठीक से ट्रैक किया जा सकता है और बेहतर नींद के लिए सुझाव प्राप्त किया जा सकता है। इससे आपकी नींद की क्वालिटी में सुधार होगा। यह आपके रोज के स्लीप हैबिट की पहचान करता है और करीब 200 पर्सनलाइज्ड असेसमेंट के लिए सुझाव भी देता है। इस तरह आप इन दोनों टेक्नोलॉजी की मदद से खुद को फिट रख सकते हैं। वैसे स्लीप और हार्ट रेट को मॉनिटर करने के लिए Mi Band 4 में भी फीचर्स दिए गए हैं, लेकिन जिस सटीकता और तकनीक के साथ HONOR Band 5i के फीचर्स काम करते हैं उतने Mi के नहीं कर पाते।SpO2 एक और ऐसा अनोखा फीचर है जो मार्केट में मिल रहे बैंड्स में नहीं मिलता, मगर ये आपको HONOR Band 5i में मिलने वाला है। SpO2 आपको आपके ब्लड में ऑक्सीजन लेवल कितना है, ये बताता है। ये फीचर उन लोगों के लिए बहुत ही काम का है, जो फिटनेस फ्रीक हैं या फिर अपनी सेहत पर बहुत ध्यान देते हैं।
फिटनेस:-आज के समय में खुद को फिट रखना सबसे जरूरी चीज है। इससे न केवल आप स्वस्थ रहते हैं, बल्कि पर्सनालिटी में निखार भी आता है। HONOR Band 5i हाई लेवल फिटनेस को ट्रैक करने के लिए एडवांस रनिंग प्लानर के तौर पर काम करता है और जरूरत के हिसाब से आपको सुक्षाव भी देता है। HONOR Band 5i की लिस्ट में हार्ट रेट, वर्कआउट टाइम, डिस्टेंस, स्ट्राइड फ्रीक्वेंसी, स्पीड, कैलोरीज और एरोबिक्स जैसे मॉनिटर फीचर्स शामिल हैं, जिसे वे पूरी सटीकता और समझदारी के साथ ट्रैक करते हैं और डेटा के साथ सही रिजल्ट भी देते हैं। इसके अलावा इसके अन्य फिटनेस मोड्स में आउटडोर रनिंग, इनडोर रनिंग, आउटडोर वॉकिंग, इंनडोर वॉकिंग, आउटडोर साइकिलिंग, इनडोर साइकिलिंग, रॉईंग मशीन, एलिप्टिकल ट्रेनर और फ्री ट्रेनिंग भी शामिल है। वैसे Mi Band 4 भी वॉकिंग, रनिंग, पूल स्वीमिंग, साइकिलिंग जैसी रोज की गतिविधियों को ट्रैक करता है, लेकिन जब डिटेल और सटीकता की बात हो तो वहां HONOR Band 5i आगे निकल जाता है।
वॉच फेसस;-फिटनेस बैंड को नया रूप देने के लिए हमारे पास स्ट्रैप को बदलने का ऑप्शन होता है। ये स्ट्रैप अलग-अलग कलर में मौजूद होते हैं, लेकिन HONOR Band 5i एक ऐसा फिटनेस बैंड है, जो आपको वॉच फेस बदलने का भी मौका देता है। इसका मतलब यह हुआ कि आप अलग-अलग ऑकेशन जैसे घर, ऑफिस और जिम आदि के लिए अपना फेवरेट वॉच फेस लगाकर अपने फिटनेस बैंड को फ्रेश लुक दे सकते हैं और खुद को ज्यादा स्टाइलिश बना सकते हैं। यहां Mi Band 4 भी यूजर्स को वॉच फेसस बदलने की सुविधा देता है, लेकिन HONOR Band 5i के वॉच फेसस ज्यादा फ्रेश और ट्रेंडी लगते हैं।
कनेक्टिविटी और अन्य फीचर्स;-यूजर्स Mi बैंड पर विभिन्न एप्स के लिए नोटिफिकेशन देख सकते हैं और कॉल रिजेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा यह फाइंड माई फोन, मैसेज रिमाइंडर, रिमोट पिक्चर ट्रैकिंग, म्यूजिक कंट्रोल, इनकमिंग कॉल नोटिफिकेशन, स्टॉप वॉच और एक्टीविटी रिमाइंडर जैसे फीचर्स भी देता है। वैसे उपरोक्त सभी कनेक्टिविटी फीचर्स HONOR Band 5i में भी मिलेंगे। लेकिन ‘रिमोट कैमरा फोटो शूट’ एक ऐसा फीचर है जो केवल HONOR Band 5i में ही मिलता है। इस फीचर की खासियत है कि आप इसे अपने स्मार्टफोन से कनेक्ट करके, उसके कैमरे को कंट्रोल कर सकते हैं अर्थात आप इसके जरिए फोटोग्राफी भी कर सकते हैं। यह फीचर आपको एक अलग और शानदार एक्सपीरिंस देगा।
बैटरी लाइफ:-फिटनेस बैंड में जान डालने के लिए Mi अपने बैंड में 20 दिन की बैटरी लाइफ देने का वादा करता है। वहीं HONOR Band 5i 7 दिन की बैटरी लाइफ देता है। आपका फिटनेस बैंड आसानी से चार्ज हो इसके लिए HONOR Band 5i में बिल्ट-इन USB पोर्ट की सुविधा भी दी गई है। इसकी मदद से आप कहीं भी और कभी भी बैंड को अपने लैपटॉप या दूसरे डिवाइस के जरिए चार्ज भी कर सकते हैं।
कीमत और उपलब्धता:-Amazon पर Mi band 4 की कीमत 2,299 रुपये है। जबकि HONOR Band 5i की कीमत 1999 रुपये रखी गई है। इस तरह हम कह सकते हैं कि जबरदस्त फीचर्स, कलरफुल डिस्प्ले और शानदार डिजाइन के साथ HONOR Band 5i एक किफायती फिटनेस बैंड भी है। बता दें कि HONOR Band 5i Amazon पर 18 जनवरी, दोपहर 12 बजे से प्राइम मेंबर्स के लिए और 19 जनवरी, 2020 से सभी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा।भागदौड़ वाली जीवनशैली की वजह से आज हम अपनी सेहत को सही तरह से मैनेज नहीं कर पा रहे हैं। यहां पर एक स्मार्ट फिटनेस बैंड की जरूरत है, जो आपकी फिटनेस से लेकर हार्ट रेट और नींद का पूरा ख्याल रखे।HONOR Band 5i इस मामले पूरी तरह से खरा उतरता है। यह बैंड स्मार्ट होने के साथ-साथ स्टाइलिश और कई नए फीचर्स से लोडेड भी है। ऐसे में यह युवाओं को कीफायती दाम में फ्रेश एक्सपीरिएंस देने के साथ-साथ उनके स्टाइल को निखारने का काम करेगा।

बॉलीवुड के स्टार एक्टर कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) इन दिनों अपनी आगामी फिल्मों के चलते लगातार चर्चा में बने हुए है। कार्तिक आर्यन बहुत जल्द 'लव आज कल' में नजर आने वाले है। इस फिल्म का जबरदस्त ट्रेलर रिलीज हो गया है। इसमें कार्तिक आर्यन दमदार किरदार में दिखाई दिए है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के साथ ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड की कर रहा हैं। फिल्म 'लव आज कल' का ट्रेलर ट्रेंड होने के साथ- साथ कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर उनके फैंस के बीच वायरल हो रही हैं।दरअसल, सामने आई इन तस्वीरों में कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) अपनी मां एक गाड़ी में बैठे दिखाई दिए। कार्तिक की ये तस्वीरें एक फैनपेज पर शेयर हुई है। सामने आई इन तस्वीरों के पीछे सच्चाई ये हैं कि बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन ने अपनी ममी को कार गिफ्ट की है। हाल ही में कार्तिक को अपनी मम्मी के साथ इस कार में देखा गया। ग्रीन कलर की इस कार को मिनी कूपर कहा जाता है। सामने आई इन फोटोज में आप देख सकते हो कि कार्तिक ड्राइव कर रहे है और उनकी मम्मी उनके बगल में बैठी हुई दिखाई दी। बता दें, इस कार की शुरुआती कीमत 29 लाख से होती है।खैर बात अगर 'लव आज कल' की करें तो, कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) इस फिल्म में सारा अली खान के साथ रोमांस करते दिखाई देंगे। ये फिल्म 14 फरवरी को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के अलावा कार्तिक आर्यन पहली बार कियारा आडवाणी के साथ फिल्म 'भूल भुलैया 2' और जाह्नवी कपूर के साथ फिल्म 'दोस्ताना 2' में भी अहम किरदार में नजर आने वाले हैं।

नई दिल्ली। हैदराबाद को दुनिया के सबसे dynamic यानी गतिशील शहरों की सूची में पहला स्थान मिला है। हैदराबाद को सामाजिक-आर्थिक और कॉमर्शियल रीयल एस्टेट जैसे कई मापदंड पर दुनिया के किसी भी अन्य शहर के मुकाबले बेहतर अंक मिले हैं। ग्लोबल प्रोपर्टी कंसल्टेंट जेएलएल इंडिया की इस सूची में बेंगलुरु का नाम दूसरे स्थान पर है। जेएलएल के मुताबिक आर्थिक सुस्ती के बावजूद दुनिया के 20 डायनेमिक शहरों की सूची में भारत के सात शहरों को जगह मिली है। राष्ट्रीय राजधानी इस सूची में छठे पायदान पर है। वहीं, तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई पांचवें स्थान पर है। JLL 'City Momentum Index' के मुताबिक पुणे 12वें, कोलकाता 16वें और मुंबई 20वें स्थान पर है। जेएलएल ने यह सूची बनाते समय दुनियाभर के शहरों के सामाजिक-आर्थिक एवं वाणिज्यिक परिसंपत्तियों एवं रीयल एस्टेट मार्केट को ध्यान में रखा है।JLL ने एक रिपोर्ट में कहा है, ''130 शहरों की सूची में हैदराबाद को विश्व का सबसे डायनेमिक शहर आंका गया है।'' रिपोर्ट में कहा गया है कि हैदराबाद को GDP Growth, खुदरा बिक्री और हवाई यात्रियों की बढ़ोत्तरी जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर दुनियाभर में सबसे अधिक अंक मिले हैं।पिछले साल की सूची देखी जाए तो हैदराबाद ने एक पायदान की छलांग लगाई है। पिछले साल वह दूसरे स्थान पर था और बेंगलुरु टॉप पर रहा था।जेएलएल इंडिया के सीईओ और कंट्री हेड रमेश नायर ने कहा, ''दुनियाभर के निवेशक भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बहुत जबरदस्त दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत मोर्चों पर सरकार की ओर से किए गए सुधारों का फायदा दिखने लगा है। आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी होने के बावजूद इन सुधारात्मक कदमों से बाजार में अधिक पारदर्शिता आई है और इससे रीयल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा मिला है।''उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के शहरों में कॉमर्शियल रीयल एस्टेट में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है

नई दिल्ली। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने 31 जनवरी से दो दिन के हड़ताल का आह्वान किया है। यूएफबीयू नौ ट्रेड यूनियनों का प्रतिनिधित्व करता है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन ने 11 मार्च से तीन दिन की हड़ताल की घोषणा की है। उसने कहा है कि अगर उसके बावजूद भी उनकी मांगों को नहीं माना गया तो एक अप्रैल, 2020 से बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। बैंक यूनियनों की तीन चरण में हड़ताल की योजना है। UFBU के संयोजक संजीव कुमार बंदलिश के मुताबिक इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के चेयरमैन, वित्त सेवा विभाग के सचिव और श्रम मंत्रालय के मुख्य श्रम आयुक्त को हड़ताल के संदर्भ में पहले ही पत्र भेजा जा चुका है। बकौल बंदलिश वेतन में संशोधन, बैंकिंग सिस्टम को पांच दिन करने, विशेष भत्ता को मूल वेतन में शामिल करने, नई पेंशन योजना को खत्म करने जैसी कई मांगों के काफी समय से लंबित होने के कारण हड़ताल पर जाने का निर्णय किया गया है।
सैलरी मिलने में होगी देरी:-अगर यह प्रस्तावित हड़ताल अमल में आती है तो देश की एक बड़ी आबादी को इस बार विलंब से वेतन मिलेगी। ऐसा इसलिए कि अधिकतर विभागों एवं कंपनियों में महीने के आखिरी दिन या नए महीने के पहले दिन सैलरी आती है। इस बार 31 जनवरी को शुक्रवार है, एक फरवरी को शनिवार है और दो फरवरी को रविवार है। ऐसे में आपको वेतन मिलने में देरी हो सकती है। इससे ईएमआई पेमेंट, क्रेडिट कार्ड पेमेंट जैसी आपकी वित्तीय योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। जिन लोगों को चेक से सैलरी मिलती है, उन्हें तो और दिक्कत हो सकती है क्योंकि तीन दिन लगातार बैंक बंद रहने के बाद चेक क्लियर होने में काफी वक्त लग सकता है।
8 जनवरी को भारत बंद में भी लिया था हिस्सा;-बैंक कर्मचारियों ने केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से आयोजित भारत बंद में भी अपनी मांगों को लेकर हिस्सा लिया था।

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