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संयुक्त राष्ट्र। कोरोना महामारी के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा का ऐतिहासिक 75वां सत्र बुधवार से शुरू हो गया है। सबसे पहले तुर्की के राजनयिक वोल्कन बोजकिर ने सत्र के अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने नाइजीरिया के तिजानी मुहम्मद बंदे का स्थान लिया है।विश्व संगठन के 75 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब विभिन्न देशों के नेता वर्चुअल तरीके से एक-दूसरे से रूबरू होंगे। कोरोना महामारी के चलते जहां पूरे विश्व में लगभग तीन करोड़ लोग बीमार हैं वहीं अब तक नौ लाख इकत्तीस हजार लोगों की मौत हो चुकी है।संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, 'विश्व निकाय के इतिहास में यह वर्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी देश कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। पिछले सात महीने हम से कई लोगों के लिए व्यक्तिगत और व्यवसायिक तौर पर बेहद कठिन रहे हैं। हम सभी अनिश्चितता से जूझ रहे हैं और आगे की स्थिति भी बहुत साफ नहीं है।' महासभा की उच्चस्तरीय बैठक 21 सितंबर को होगी।सत्र की जनरल डिबेट का कार्यक्रम 22 सितंबर से शुरू होगा 29 सितंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 सितंबर को एक पूर्व में रिकॉर्ड किए गए बयान के माध्यम से सत्र को संबोधित करेंगे। अबकी बार सबसे पहले ब्राजील के राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो को जनरल डिबेट में सबसे पहले बोलने का मौका मिलेगा। पारंपरिक तौर पर जनरल डिबेट में अमेरिका दूसरे नंबर का वक्ता होता है और माना जाता है कि ट्रंप इसके लिए न्यूयॉर्क जा सकते हैं।

बहुपक्षवाद सभी समस्याओं की रामबाण दवा:-महासभा के अध्यक्ष के तौर पर पदभार ग्रहण करने वाले तुर्की के राजनयिक वोल्कन बोजकिर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर शारीरिक दूरी से किसी प्रकार की मदद नहीं मिलेगी क्योंकि कोई भी देश अकेले इस महामारी से नहीं लड़ सकता है।उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद दुनिया की सभी समस्याओं के लिए रामबाण दवा है। संयुक्त राष्ट्र के राजदूतों और राजनयिकों को संबोधित करते हुए बोजकिर ने कहा कि महामारी की शुरुआत के बाद से बहुपक्षवाद के आलोचक और मुखर हो गए हैं और इसका इस्तेमाल एकतरफा कदमों को सही ठहराने के लिए करने लगे हैं।

बीजिंग। चीन के हालिया सैन्य अभ्यास का मकसद ताइवान और उसके विदेशी मददगारों को स्पष्ट संदेश देना था। संदेश यह कि चीन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर है। चीन सरकार के प्रवक्ता मा शियोगुआंग ने कहा कि सैन्य अभ्यास एक आवश्यक कदम था, क्योंकि ताइवानी नेता चीन से स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा करने की तैयारी में जुटे थे। चीन के विकास को रोकने की कोशिशों के तहत ताइवानी नेता बाहरी मदद ले रहे हैं।इस समय भी स्थिति गंभीर और जटिल बनी हुई है। इसके पीछे ताइवान की सत्ताधारी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और उसके समर्थकों का हाथ है। उन्होंने कहा कि हम ताइवान की स्वतंत्रता की चाल को विफल कर देने अपने देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए संकल्पित और सक्षम हैं। वहीं, ताइवान ने कहा कि सैन्य अभ्यास के दौरान पिछले सप्ताह चीन के लड़ाकू विमानों ने दो दिन उसके हवाई क्षेत्र का अतिक्रमण किया।ताइवान ने कहा कि चीन की ओर से की गई यह उकसाने वाली कार्रवाई थी। यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। ताइवान ने यह भी कहा है कि चीनी सेना के कारण पूरे क्षेत्र को खतरा है और विश्व समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए। बीते दिनों ताइवान के उपराष्ट्रपति लाई चिंग ने कहा था कि चीन लाइन क्रॉस न करें। ताइवान शांति चाहता है लेकिन हम अपने लोगों की हर हाल में सुरक्षा करेंगे।बीते दिनों ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने दक्षिण चीन सागर और ताइवान की खाड़ी में चीन के आक्रामक रवैये की तरफ इशारा करते हुए उसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है। दुनिया के लोकतांत्रिक देशों को इसके खिलाफ एकजुट होना चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा था कि एकतरफा आक्रामक कार्रवाइयों पर अंकुश लगाने के लिए मित्र देशों को एक तंत्र बनाना चाहिए। 

नई दिल्ली। कोरोना ने दुनिया भर में कई देशों में तमाम तरह के हालात बदल दिए हैं। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ देश के बच्चों का भविष्य भी प्रभावित किया है। शहरी इलाकों में तो बच्चे ऑनलाइन किसी न किसी तरह से शिक्षा ले ले रहे हैं मगर ग्रामीण इलाकों में और दुनिया के कुछ देशों में शिक्षा पर भी ग्रहण लग गया है। कई देशों में आज भी इंटरनेट की सुविधा मौजूद नहीं है, वहां सिर्फ टीवी उपलब्ध है। ऐसे देशों में अब शिक्षा और मनोरंजन दोनों का माध्यम टीवी ही रह गया है।दरअसल ये माना जाता है कि बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो वहां वो अपने टीचरों और साथियों से काफी कुछ सीखते हैं, उनकी नींव मजबूत होती है मगर इस शैक्षणिक सत्र में जब उनकी पढ़ाई शुरू होने वाली थी तो कोरोना संकट आ गया। मार्च के अंतिम सप्ताह में बंद हुए स्कूलों को अब तक खुलने की नौबत नहीं आ पाई है, फिलहाल तीन महीने तक इनके खुलने के आसार भी नहीं नजर आ रहे हैं। ऐसी जगहों पर बच्चों के भविष्य पर काफी असर पड़ रहा है। ऐसा ही एक देश है अफ्रीका जहां इन दिनों बच्चों की शिक्षा और मनोरंजन दोनों का साधन टीवी ही बना हुआ है।अफ्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में बच्चे अपने माता-पिता के बीच बैठकर टीवी पर कार्टून कैरेक्टर देखकर मछली (फिश) का उच्चारण सीख रहे हैं। यहां शिक्षकों और सहपाठियों की जगह टेलीविजन ने ले ली है। सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को काबू में रखने के लिए मार्च में ही स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया था। यहां के स्कूलों को फिलहाल जनवरी तक बंद कर दिया गया है।

नहीं है ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प;-यहां बच्चों के पास ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प नहीं है। यूएन की एजेंसी यूनिसेफ का कहना है कि उप-सहारा अफ्रीका के देश के कम से कम आधे स्कूली छात्रों के पास इंटरनेट नहीं है। यहां लाखों बच्चे टीवी पर कार्टून देख पढ़ना सीख रहे हैं। तंजानिया का एक एनजीओ (गैर-लाभकारी संगठन) उबोंगो अफ्रीकी देशों के टीवी और रेडियो नेटवर्क को नि:शुल्क सामग्री देता है।मार्च महीने में उबोंगो ने 9 देशों में कार्यक्रम का प्रसारण किया। यह कार्यक्रम 1.2 करोड़ घरों तक पहुंचा। उबोंगा का स्वाहिली में मतलब होता है "दिमाग"। उबोंगो के संचार प्रमुख ईमान लिपुंबा कहते हैं कि अगस्त के महीने तक कार्यक्रम 20 देशों के 1.7 करोड़ घरों तक पहुंच चुका है, लिपुंबा कहते हैं कि कोविड-19 महामारी ने हमें तेजी से बढ़ने के लिए मजबूर किया है।साल 2014 में कलाकारों, इनोवेटर्स और शिक्षकों ने तंजानिया में उबोंगो की स्थापना की थी। इसको अभी तक 40 लाख अमेरिकी डॉलर की मदद मिल चुकी है और इसने यूट्यूब से सात लाख अमेरिकी डॉलर भी कमाए हैं। मुनेन की तरह अन्य बच्चों के लिए फिलहाल उबोंगो के कार्यक्रम ही सीखने का जरिया हैं। केन्या के शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि कोविड-19 के मामले जब काफी हद तक कम हो जाएंगे तभी स्कूल दोबारा खोले जा सकते हैं। 

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक टिकटॉक स्टार फॉलोअर्स की लिस्ट बढ़ाने के लिए अपनी मौत की झूठी खबर फैलकार मुसीबत में फंस गया है। दरअसल आदिल राजपूत नाम के एक टिकटॉक स्टार ने अपने अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट की थी, जिसमें उसकी पत्नी अपने पति की मौत पर रोती हुई नजर आ रही है। इस वीडियो को देखने के बाद आदिल के फैंस सदमे में आ गए, लेकिन जब उन्हें सच्चाई का पता चला तो वो आदिल से काफी नाराज हो गए।एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, आदिल राजपूत राहिम यार खान नाम से एक फेमस टिकटॉकर हैं जिसके यहां 2.5 मिलियन यानी 20 लाख 50 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं। आदिल की पत्नी फराह ने उसके टिकटॉक आकाउंट से एक वीडियो पोस्ट करके आदिल के मरने की खबर दी। इस वीडियो में वो रोती हुई कहती नजर आ रही हैं, "आदिल अब हमारे साथ नहीं हैं।" इसके साथ ही उसने जानकारी दी कि उसे एक फोन के जरिए आदिल की एक्सीडेंट में मौत की सूचना मिली है।जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर होने लगा तो एक मस्जिद ने भी आदिल के अंतिम संस्कार और उसके अनुष्ठान की घोषणा कर दी। इसके बाद आदिल के फैंस काफी दुखी हो गए, लेकिन जब वो आदिल के घर उसके परिवार को सांत्वना देने पहुंचे तो वो हैरान रह गए। यहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि आदिल जिंदा है। इसके बाद आदिल की पत्नी फराह ने एक और वीडियो पोस्ट किया और कहा कि उन्हें कुछ गलतफहमी हो गई थी। लेकिन आदिल की इस हरकत से फैंस काफी नाराज हैं और उन्होंने टिकटॉक स्टार को कहा है कि फेमस होने के लिए यह सही रास्ता नहीं है।

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2020 का आगाज होने वाला है। यूएई में खेले जाने वाले 13वें एडिशन में 8 टीमें भाग ले रही हैं। मुंबई की टीम के नाम सबसे ज्यादा चार बार खिताब जीतने का रिकॉर्ड है जबकि दिल्ली की टीम ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा मैच गंवाए हैं। पिछले 12 एडिशन में किस टीम का रहा है कैसा प्रदर्शन किसने जीते हैं कितने मुकाबले चलिए जान लेते हैं।इंडियन प्रीमियर लीग के खेले गए 12 सीजन में 5 टीम को यह ट्रॉफी उठाने मौका मिल पाया है। मुंबई ने (2013, 2015, 2017, 2019) सबसे ज्यादा चार बार, चेन्नई ने (2010, 2011, 2018) तीन, कोलकाता (2012, 2014) और हैदराबाद (2009 डेक्कन चार्जर्स और 2016 सनराइजर्स हैदराबाद) ने दो जबकि राजस्थान की टीम ने (2008) एक बार ट्रॉफी जीती है।

टूर्नामेंट की आठ टीमों का अब तक का प्रदर्शन

मुंबई का सफर:-मुंबई की टीम के अब तक के प्रदर्शन पर नजर डालें तो 2008 में पांचवें, 2009 में सातवें, 2010 में उप विजेता, 2011 में तीसरे स्थान, 2012 में चौथे स्थान पर रहने के बाद साल 2013 में टीम ने अपना पहला खिताब जीता था। इसके बाद 2014 में टीम चौथे नंबर पर रहने के बाद अगले साल 2015 में फिर से ट्रॉफी जीतने में कामयाब रही। 2016 में पांचवें और फिर 2017 में टीम विजेता बनी। 2018 में एक बार फिर से 5वें नंबर पर रही लेकिन 2019 में टीम ने वापसी करते हुए चौथी बार खिताब जीतकर इतिहास बनाया।

चेन्नई की सफर;-चेन्नई की टीम पहले सीजन में उप विजेता रही थी जबकि 2009 सेमीफाइनल में पहुंची। तीसरे और चौथे सीजन में टीम ने ट्रॉफी लगातार दो बार जीती। साल 2012, 2013 में फाइनल में हारकर उप विजेता रही। 2014 में टीम ने तीसरा जबकि 2015 में दूसरा स्थान हासिल किया। 2016 और 2017 टीम को निलंबित कर दिया गया था और 2018 में उन्होंने चैंपियन बनकर वापसी की। 2019 में भी टीम उप विजेता रही थी।

कोलकाता का सफर;-टीम को पहले में छठे जबकि दूसरे एडिशन में आठवें स्थान पर जगह मिली थी। 2010 टीम फिर से छठे और 2011 में चौथे स्थान पर रही थी। 2012 में कोलकाता ने पहली बार खिताब जीता और 2013 में सातवें स्थान पर रहने के बाद टीम ने 2014 में एक बार फिर से चैंपियन बनने का कमाल किया। 2015 में टीम 5वें, 2016 में चौथे जबकि 2017 और 2018 में तीसरे स्थान पर रही। पिछली बार टीम को पांचवां स्थान मिला था।

हैदराबाद का सफर;-डेक्कन चार्जर्स के नाम से उतरने वाली हैदराबाद की टीम ने 2008 में आठवां स्थान हासिल किया जबकि 2009 में टीम चैंपियन बनी। 2010 में चौथा, 2011 में सातवां और 2012 में आठवां स्थान मिला। 2013 से हैदराबाद की टीम सनराइजर्स के नाम से उतरी और चौथा स्थान हासिल किया। 2014 और 2015 में छठे तो 2016 में विजेता बनीं। 2017 में चौथा, 2018 दूसरा और 2019 में चौथा स्थान हासिल किया।

राजस्थान का सफर;-साल 2008 में विजेता, 2009 में छठे, 2010 में सातवें, 2011 में छठे, 2012 में सातवें, 2013 में तीसरे, 2014 में पांचवें, 2015 में चौथे, 2016 और 2017 में टीम को निलंबित कर दिया गया था। 2018 में राजस्थान की टीम चौथे और पिछले साल सातवें नंबर पर रही थी।

दिल्ली का सफर:-2008 और 2009 में टीम सेमीफाइनल में पहुंची थी। 2010 में पांचवें, 2011 में 10 वें स्थान पर रही थी। 2012 में तीसरे, 2013 में 9वें, 2014 में आठवें, 2015 में सातवें, 2016 में छठे, 2017 में छठे, 2018 में आठवें, जबकि पिछले साल टीम तीसरे स्थान पर रही।

पंजाब का सफर;-2008 में सेमीफाइनल में पहुंची टीम अगले साल 5वें स्थान पर रही। 2010 में आठवें, 2011 में पांचवें, 2012 और 2013 में छठे स्थान पर रहने के बाद 2014 में टीम उप विजेता रही। 2015 और 2016 में टीम आठवें स्थान पर रही। 2017 में पांचवें जबकि 2018 में सातवें स्थान पर रही। पिछली साल टीम को छठा स्थान प्राप्त हुआ था।

बेंगलोर का सफर;-2008 में टीम 7वें स्थान पर रही, 2008 में उप विजेता बनी, 2010 में तीसरे, 2011 उप विजेता जबकि 2012 और 2013 में पांचवें नंबर पर, 2014 में सातवें स्थान पर रही। 2015 में टीम तीसरे जबकि अगले साल उप विजेता बनीं। 2017 में आठवें, 2018 में छठे, 2019 में टीम को आठवां स्थान मिला।

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व क्रिकेटर डीन जोन्स ने इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के 13वें सीजन से पहले चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की परेशानियों के बारे में बताया है। कंगारू दिग्गज का मानना है कि आइपीएल 2020 के लिए अनुभवी बल्लेबाज सुरेश रैना का चेन्नई सुपर किंग्स में न होना टीम के लिए बहुत बड़ी चिंता होगी। सुरेश रैना ने निजी कारणों का हवाला देकर आइपीएल 2020 से अपना नाम वापस ले लिया है।चेन्नई सुपर किंग्स के लिए अब तक 193 मैचों में 5000 से ज्यादा रन बना चुके सुरेश रैना आइपीएल के इस सीजन के लिए यूएई गए थे, लेकिन निजी कारणों से वह आइपीएल के 13वें सीजन से हट गए और स्वदेश लौट आए। अब डीन जोन्स ने स्टार स्पोर्ट्स के शो में बात करते हुए कहा, "सुरेश रैना का इस बार टीम में नहीं होना, सीएसके के लिए बहुत बड़ी चिंता होगी, वो आइपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 बल्लेबाजों में शामिल हैं।"उन्होंने आगे कहा, "रैना बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और स्पिन के खिलाफ काफी अच्छी बल्लेबाजी करते हैं। सीएसके के लिए मुश्किल यह हो सकती है कि उनके ज्यादातर बल्लेबाज दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं। सीएसके की टीम में कुछ बाएं हाथ के बल्लेबाजों की जरूरत है, खासकर तब जब वो लेग स्पिनर के खिलाफ खेल रहे हों और गेंद बाहर की ओर जा रही हो।" रैना को मिस्टर आइपीएल कहा जाता है, क्योंकि वे इस लीग के सबसे सफल खिलाड़ी हैं।आपको बता दें, आइपीएल के 13वें सीजन की शुरुआत शनिवार 19 सितंबर से होने जा रही है। लीग का पहला मैच मौजूदा चैंपियन मुंबई इंडियंस और तीन बार की आइपीएल चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला जाएगा। उधर, सुरेश रैना की बात करें तो उन्होंने दुबई से लौटने के बाद एक इंटरव्यू में कहा था कि वे हालात सामान्य होने के बाद आइपीएल खेलने के लिए जा सकते हैं। सीएसके ने उन्हें 11 करोड़ में रिटेन किया था।

नई दिल्ली। सरकार ने घरेलू खिलौना उद्योग को गुणवत्ता मानकों को लागू करने के लिए और चार माह की मोहलत दी है। इसका मतलब है कि कोरोना वायरस महामारी से जुड़ी परिस्थितियों के बीच घरेलू खिलौना उद्योग को अब इन मानकों को अमल में लाने के लिए अगले साल जनवरी तक का समय मिल गया है। सरकार की ओर से बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना में कहा गया है कि खिलौना (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश 2020 के क्रियान्वयन की समयसीमा को इस साल एक सितंबर, 2020 से बढ़ाकर एक जनवरी 2021 कर दिया है। इस आदेश में कहा गया कि इस फैसले के अंतर्गत देश के खिलौना मैन्युफैक्चरर्स को कोविड-19 महामारी से पैदा हुई परेशानियों के मद्देनजर मानकों को लागू करने के लिए चार माह का अतिरिक्त समय दिया गया है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार मौजूदा वक्त में खिलौनों के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है और उसने फरवरी में खिलौनों के इम्पोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी भी की थी। खिलौनों के गुणवत्ता नियंत्रण आदेश से सरकार की कोशिश बाजार में घटिया मानक वाले खिलौनों पर रोक लगाने की है। एक अध्ययन के मुताबिक करीब 67 फीसद खिलौने सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। भारत में खिलौना से जुड़ी इंडस्ट्री मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में है। इसमें लगभग 4,000 से अधिक छोटे और मझोले इंटरप्राइजेज शामिल हैं। देश में करीब 85 फीसद खिलौनों का आयात चीन से किया जाता है। इसके बाद श्रीलंका, मलेशिया, जर्मनी, हांगकांग और अमेरिका का स्थान आता है। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खिलौना उद्योग को प्रोत्साहित करने की बात कही थी।

नई दिल्ली। ICICI Home Finance ने दिल्ली में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कुशल श्रमिकों के लिए नई लोन स्कीम 'अपना घर ड्रीम्ज' की शुरुआत की है। कंपनी इस स्कीम के तहत दो लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक का लोन देगी। यह स्कीम कारपेंटर, पलम्बर, इलेक्ट्रिशियन, टेलर, पेंटर, वेल्टर, ऑटो मैकेनिक, मैन्युफैक्चरिंग मशीन ऑपरेटर, कंप्यूटर मैकेनिक्स, आरओ रिपेयर टेक्नीशियन, छोटे एवं मझोले उद्योग के मालिकों और किराने की दुकान चलाने वाले लोगों के लिए है।ICICI Home Finance की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में यह कहा गया है कि यह लोन स्कीम देश के अनौपचारिक क्षेत्र के लोगों के लिए है, जो अपना घर खरीदना चाहते हैं लेकिन लोन लेने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज नहीं जुटा पाते हैं।कंपनी की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि 20 साल की अवधि के लोन के लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड और छह माह के बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेजों की जरूरत होगी। पांच लाख रुपये तक के लोन के लिए ग्राहक के खाते में 1,500 रुपये की न्यूनतम राशि होनी चाहिए। वहीं, पांच लाख रुपये तक के लोन के लिए 3,000 की रकम होनी चाहिए। ICICI Home Finance के एमडी और सीईओ अनिरुद्ध कमानी ने कहा, ''ICICI Home Finance में हमारा लक्ष्य इकोनॉमी से जुड़े अनौपचारिक क्षेत्र के मेहनतकश पेशेवरों और स्थानीय स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों के 'अपने घर' के सपने को साकार करना है।''कमानी ने कहा, "हमारे शाखा के कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों को स्थानीय अर्थव्यवस्था की समझ होती है, वहीं हमारी विधिक टीम एवं टेक्निकल एक्सपर्ट कम-से-कम दस्तावेज के साथ होम लोन के आवेदन को त्वरित तरीके से प्रोसेस करते हैं।"कंपनी ने कहा है कि ग्राहक प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) से जुड़े सभी लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। यह कम आय वाले समूहों व आर्थिक रूप से कमजोर तबकों एवं मध्यम आय वाले समूहों के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम है।

नई दिल्ली। मानसून सत्र के दूसरे दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध पर बयान दिया। उन्होंने लद्दाख की पूर्वी सीमाओं पर हाल में हुई गतिविधियों से अवगत करवाया और इस दौरान भारतीय सैनिकों द्वारा दिए गए बलिदान के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद एक गंभीर मुद्दा है और दोनों देश यहां शांति बनाए रखने पर सहमत हैं। उन्होंने भारतीय सैनिकों की वीरता के बारे में बात करते हुए कहा कि जिस तरह से हमारी सेना सुरक्षा कर रही है हमें उन पर गर्व है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वे आश्वस्त कराना चाहते हैं हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

रक्षा मंत्री के बयान की 10 बड़ी बातें-

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव अब अपनी सजा के खिलाफ किसी उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकते हैं। पाकिस्तान की संसद ने उस अध्यादेश की अवधि चार महीने के लिए बढ़ा दी है, जो जाधव को ऐसा करने की इजाजत देता है। जाधव को लेकर पाकिस्तान दबाव का सामना कर रहा है। इसी दबाव में उसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के फैसले को लागू करने के लिए यह अध्यादेश लाना पड़ा।गत मई में जारी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (समीक्षा एवं पुनर्विचार) के अध्यादेश की अवधि 17 सितंबर को समाप्त होने जा रही थी, लेकिन नेशनल असेंबली (निचले सदन) ने ध्वनिमत से अध्यादेश की अवधि बढ़ा दी। आइसीजे ने पाकिस्तान से कहा था कि वह जाधव को एक सैन्य अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा की प्रभावी समीक्षा मुहैया कराए। भारतीय नौसेना के 50 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव को अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी।

तीन सितंबर को इस मामले में हुई थी दूसरी बार सुनवाई:-पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट से जाधव के लिए एक वकील नियुक्त करने का आग्रह कर रखा है। अदालत ने तीन सितंबर को इस मामले की दूसरी बार सुनवाई की थी। तब कोर्ट ने पाकिस्तान सरकार से कहा था कि वह जाधव के लिए एक वकील नियुक्त करने का भारत को 'एक और मौका' दे। इसकी सुनवाई अब अगले महीने होगी। पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते कहा था कि अदालत में जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए वकील नियुक्त करने से संबंधित न्यायिक आदेशों की जानकारी भारत को दी गई, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया।

पाक अपने अध्यादेश का कर रहा है उल्लघंन: भारत;-इससे पहले 16 जुलाई को पाकिस्तान ने जाधव को राजनयिक पहुंच प्रदान की थी। लेकिन, भारत का कहना था कि यह पहुंच न तो सार्थक थी, न ही विश्वसनीय। इस दौरान जाधव तनाव में भी दिखे। भारत ने कहा कि पाकिस्तान आइसीजे के फैसले का ही नहीं, अपने अध्यादेश का भी उल्लंघन कर रहा है।जाधव तक राजनयिक पहुंच देने से इन्कार करने और मौत की सजा को चुनौती देने के लिए भारत ने हेग स्थित आइसीजे का दरवाजा खटखटाया था। आइसीजे ने जुलाई 2019 में फैसला सुनाया। इसमें कहा गया था कि पाकिस्तान को जाधव की सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार करना चाहिए। साथ ही, बिना देरी किए भारत को राजनयिक पहुंच प्रदान की जानी चाहिए।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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