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जालंधर - केरल के बहुचर्चित नन दुष्कर्म मामले के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ बयान देने वाले फादर कुरियाकोस का शव संदिग्ध परिस्थितियों में होशियारपुर के दसूहा में बरामद हुआ है। वह स्कूल के परिसर में पिछले पंद्रह दिन से रह रहे थे। यहां उन्होंने सेंट पाल कान्वेंट स्कूल दसूहा में बतौर फादर कार्यभार संभाला था। कुरियाकोस के परिजनों मौत को संदिग्ध बताते हुए इसकी जांच की मांग की है। इस संबंध में परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर आरोप लगाने वाले दुष्कर्म पीड़िता नन के भाई ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है।
बताया जा रहा है कि कुरियाकोस रविवार रात को अपने कमरे में सोए हुए थे, लेकिन सोमवार सुबह जब वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकले तो आशंकित स्टाफ ने कमरे में जाकर देखा ताे वह बेड पर पड़े थे। आवाज लगाने पर भी उन्होंने जब कोई जवाब नहीं दिया तो इसके बारे में स्कूल की प्रिंसिपल लिस्बत को जानकारी दी गई।
प्रिंसिपल लिस्बत इसकी जानकारी उन्हें मिलने पर जब वह स्टाफ के साथ कमरे में पहुंची तो वह बेड पर पड़े थे। आनन-फानन में एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल में पहुंचाया गया, जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद इसकी जानकारी दसूहा पुलिस को दी गई।
उधर, क्रिश्चियन फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष लारेंस चौधरी ने कहा कि फादर कुरियाकोस पूरी तरह से स्वस्थ थे। उन्हें किसी प्रकार की कोई बीमारी भी नहीं थी। वे नन दुष्कर्म के मामले में प्रमुख गवाह थे। मामले के बिशप फ्रैंको मुलक्कल को हाल ही में जमानत मिली थी। उसके बाद से फादर कुरियाकोस तनाव में थे। उनकी मौत के पीछे एक यह भी कारण हो सकता है।
इस घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी जे इलनचेयिन भी मौके पर पहुंचे। पुलिस भी मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेने के बाद कमरे को सील कर दिया है। फादर कुरियाकोस का पोस्टमार्टम सरकारी अस्पताल दसूहा में करवाया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चलेगा।
नन दुष्कर्म मामले के बाद कुरियाकोस को लगातार धमकियां मिल रही थी। हाल ही में उनकी कार पर हमला भी हुआ था। इस कारण मौत को संदिग्ध माना जा रहा है। 62 वर्षीय कुरियाकोस स्कूल के प्रिंसिपल थे।
दसूहा के डीएसपी एआर शर्मा ने बताया कि फादर कुरियाकोस दसूहा के सेंट पॉल चर्च में रहते थे। वह यहीं बिस्तर पर मृत मिले हैं। ऐसा मालूम हो रहा है कि उन्हें बेड पर उल्टियां हुई थीं। शव के पास ही रक्तचाप की गोलियां मिली हैं। मामले की जांच की जा रही है। उनके शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं। डीएसपी ने बताया कि फादर कुरियाकोस को कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई थी।
मृत फादर के भाई जोश कुरियाकोश ने बताया कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थी। इसके कारण वह काफी दिनों से परेशान थे। पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है और मामले की जांच में जुटी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। बिशप फ्रैंको के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाली बहन अनुपमा ने कहा कि कुरियाकोस की मौत की खबर सुनकर वह स्तब्ध हैं। फादर कुरियाकोस ने उन्हें पढ़ाया। वह नन दुष्कर्म मामले के प्रमुख गवाह थे। उन्होंने बिशप फ्रैंको के खिलाफ पुलिस को बयान दिए थे। वह उनकी मौत को संदिग्ध मानती हैं।
यह योजनाबद्ध हत्या
बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर आरोप लगाने वाले दुष्कर्म पीड़िता नन के भाई का कहना है कि यह एक योजनाबद्ध हत्या है। फादर कुरीकोस ने कहा था कि उनका जीवन खतरे में था। उनकी मौत की जांच की जानी चाहिए। साथ ही सभी गवाहों को पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए।
जमानत पर हैं आरोपित बिशप
बता दें, नन दुष्कर्म मामले के आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कन केरल हाई कोर्ट से सशर्त जमानत पर हैं। कोर्ट के अादेशों के अनुसार आरोपी बिशप केरल में प्रवेश नहीं कर सकते। वह विदेश भी नहीं जा सकते। जमानत के बाद फ्रैंको जालंधर पहुंचे थे।
ये है नन दुष्कर्म मामला
गौरतलब है कि केरल मूल के ईसाई धर्मगुरु फ्रैंको मुलक्कल पर एक नन ने दुराचार का आरोप लगाया है। नन का दावा था कि 2014 से लेकर 2016 तक फ्रैंको मुलक्कल ने उनके साथ 14 बार दुष्कर्म किया। वहीं, 28 जून को दुष्कर्म पीडि़ता के बयानों पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस क्रम में 21 सितंबर को गिरफ्तार हुए बिशप फ्रैंको की जमानत याचिका तीन अक्टूबर को खारिज हो गई थी। इसके लिए जताई गई आपत्तियां के जवाब देने के बाद 15 अक्टूबर को बिशप फ्रैंको मुलक्कल ने केरल हाईकोर्ट से सशर्त जमानत हासिल कर ली।
घटनाक्रम
-28 जून को शिकायत के बाद दुष्कर्म पीडि़ता का बयान दर्ज करने के बाद केरल के कोट्टायम जिले के वाईकोम थाने में दर्ज हुआ केस।
-13 अगस्त को पहली बार 9 घंटे बिशप से पूछताछ की गई थी।
-13 सितंबर को बिशप ने सर्कुलर जारी कर प्रशासनिक दायित्व फादर मैथ्यु कोकंदम को सौंपा।
-19 सितंबर को पुलिस के समक्ष हुए पेश।
-21 सितंबर को हुए गिरफ्तार
-एफआइआर के 85 दिनों के बाद हुई गिरफ्तारी।
-तीन अक्टूबर को जमानत याचिका हुई रद।
-15 अक्टूबर को मिली सशर्त जमानत। केरल में प्रवेश पर पाबंदी। पासपोर्ट भी कोर्ट में रहेगा जमा।
-22 अक्टूबर मामले के गवाह कुरियाकोस दसूहा में मृत मिले।


नई दिल्ली - अमृतसर ट्रेन ने कई लोगों की जिंदगियां देखते ही देखते रौंद डाली। शुक्रवार के हादसे को लेकर ट्रेन के ड्राइवर ने पुलिस और रेलवे अधिकारियों के सामने यह बयान दिया कि उन्होंने ट्रेन इसलिए नहीं रोकी क्योंकि लोग दुर्घटनास्थल पर पत्थर फेंकने लगे। लेकिन, वहां पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने ड्राईवर के इस बयान को सरासर झूठ करार दिया है।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- झूठ बोल रहा ड्राइवर
दशहरा वाले दिन रावण दहन देख रहे लोगों को पटरी पर रौंदते हुए ट्रेन निकल गई। इस हादसे में 61 लोगों की जान चली गई जबकि कई लोग घायल हुए। पीटीआई ने निगम पार्षद के बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा- “मैं मौके पर मौजूद था। ट्रेन ने अपनी गति थोड़ी सी भी धीमी नहीं की। ऐसा लगता था कि ड्राईवर हमें कुचल देना चाहता था। ट्रेन महज कुछ मिनटों के भीतर ही वहां से गुजर गया।”
उन्होंने कहा- “क्या यह मुमकिन है कि जब इतने लोगों की मौत हो गई हो और इतनी बड़ी संख्या में लोग घायल हो उसके बाद लोग ट्रेन के ऊपर पत्थरबाजी करे? ऐसा संभव है कि इस घटना के बाद तेज गति से जा रही ट्रेन पर हम पत्थरबाजी करने लग जाएं?”
आयोजक ने जारी किया वीडियो- बताया निर्दोष
उधर, दशहरा कार्यक्रम के आयोजक सौरभ मदन मिठू ने एक वीडियो रिलीज करते हुए कहा- “हमने सभी तरह की इजाजत ली थी और पटरी पर खड़ी भीड़ को करीब 10 बार चेताया था। मैं घटना से काफी दुखी हूं। कुछ लोग मुझे दोष दे रहे हैं।”
ड्राईवर ने कहा- लगाया था इमरजेंसी ब्रेक, लेकिन शुरू हुई पत्थरबाजी
शनिवार को ट्रेन ड्राईवर ने अपने बयान में बताया कि उन्होंने जब पटरी में भीड़ देखी तो इमरजेंसी ब्रेक लगाया था। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को पटरी से उतारने के लिए वह लगातार हॉर्न बजा रहे थे। ड्राईवर ने बताया कि जैसे ही वह ट्रेन रोकने जा रहा थे कि कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमृतसर की तरफ बढ़ गए और घटना के बारे में अधिकारियों को सूचित कर दिया। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने ड्राईवर के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसने मौके पर घटना के पास ट्रेन कहीं भी धीमी नहीं की गई थी।


नई दिल्ली/नोएडा - देश के बड़े एक्सपोर्टर से 13 करोड़ यूएस डॉलर (954.85 करोड़ रुपये) की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। एक्सपोर्टर से पहले सोशल मीडिया मैसेज के जरिए और फिर फोन पर धमकी देकर रंगदारी मांगी गई है। रंगदारी मांगने वाले ने धमकी दी है कि एक्सपोर्टर टेरर फंडिंग और हवाला कारोबार से जुड़ा है। उसकी बात न मानने पर एक्सपोर्टर को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इतनी बड़ी रंगदारी मांगे जाने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस सर्विलांस के जरिए आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
रंगदारी मांगने का ये मामला दिल्ली से सटे यूपी के औद्योगिक शहर नोएडा का है। बताया जा रहा है कि एक्सपोर्ट कंपनी के मालिक तफ्सीर अहमद नोएडा के सेक्टर-17 में परिवार के साथ रहते हैं। रविवार को उनके मोबाइल पर पांडेय नाम के एक अनजान नंबर से व्हाट्स एप मैसेज आया।
एक्सपोर्टर पर टेरर फंडिंग का लगाया आरोप
मैसेज में पांडेय नाम के शख्स ने तफ़्सीर पर आरोप लगाया कि उनका सम्बंध रामपुर जिले के रहने वाले मोईन कुरैशी से है। उसने कहा कि हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिये वह आतंकियों को फण्ड मुहैया (टेरर फंडिंग) कराते हो। उसे इसकी जानकारी मिली है। एक्सपोर्टर को धमकी दी गई है कि अगर फंसने से बचना चाहते हो तो 13 करोड़ यूएस डॉलर दो और एक सप्ताह के अंदर देश छोड़ कर भाग जाओ।
प्रदेश में इतनी बड़ी रंगदारी मांगने का पहला मामला!
रंगदारी का मैसेज आने के बाद से 75 वर्षीय तफ़्सीर अहमद समेत उनका पूरा परिवार सहमा हुआ है। उन्होंने सोमवार को मामले में नोएडा के थाना सेक्टर 20 पुलिस से शिकायत की है। नोएडा समेत पूरे प्रदेश में इतनी बड़ी रकम की रंगदारी मांगे जाने का संभवतः यह पहला मामला है। एक्सपोर्टर की शिकायत के बाद से पुलिस महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है। मामले में आला अधिकारियों को सूचना देकर, पुलिस कॉलर के नंबर से उसका पता लगाने में जुट गई है।
एक्सपोर्ट ने मैसेज का नहीं दिया जवाब, तो...
सेक्टर 17 में रहने वाले तफ़्सीर अहमद अपने बेटे सईद अहमद और परिवार के साथ रहते हैं। उनका एक बेटा सनबीर अहमद दुबई में रहता है। उनकी नोएडा में ही एक्सपोर्ट की कम्पनी है। तफ्सीर अहमद ने बताया कि रविवार शाम करीब 4 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नम्बर से मैसेज आया था।
इस मैसेज में लिखा था कि तुम (तफ्सीर) मोईन कुरैशी के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला कारोबार कर रहे हो। यहां से फंड आतंकियों को मुहैया कराते हो। तुम बुरी तरह से फंस चुके हो। तफ्सीर अहमद का कहना है कि उन्होंने इस मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद रात करीब 9.30 बजे उनके मोबाइल पर दूसरी बार मैसेज आया। इस मैसेज में लिखा था कि तुमने कोई जवाब नहीं दिया।
फोन कर कहा, रंगदारी नहीं दी तो मुसीबत में फंस जाओगे
दोनों मैसेज का जवाब न देने पर रात 9.45 बजे आरोपी का फोन आ गया। फोन पर हुई करीब 17 मिनट की बातचीत में आरोपी ने धमकी देते हुए कहा कि आप बहुत गलत काम कर रहे हैं। इसका अंजाम बुरा होगा। तफ्सीर अहमद ने आरोपी से मामले में मिलकर बात करने को कहा, तो उसने मिलने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही उसने एक्सपोर्टर को धमकी दी कि उनके आतंकियों से संबंध की खबर वह अखबारों में प्रकाशित करा देगा। साथ ही कहा कि अगर इस मुसीबत से बचना चाहते हो तो रंगदारी देकर एक सप्ताह के अंदर देश छोड़ कर भाग जाओ। इसके बाद आरोपी ने फोन काट दिया।
दुबई में रह रहे बेटे को भी फंसाने की दी धमकी
पीड़ित का कहना है कि आरोपी ने रात 12 बजे फिर फोन किया। इस बार कॉलर ने आरोप लगाया कि तुम्हारा एक बेटा दुबई में रहता है। वो टेरर फंडिंग में तुम्हारी मदद करता है। रंगदारी मांगने वाले ने यह भी कहा कि उसने बड़ी मुश्किल से अपने सीनियर को मीडिया में खबर रोकने के लिये मनाया है। इसके बदले में उन्हें (तफ्सीर को) जल्द 13 करोड़ यूएस डॉलर का इंतज़ाम करना पड़ेगा। इस पर तफ्सीर ने आरोपित से कहा कि वह सुबह उसे फोन कर इस संबंध में बात करेंगे। सोमवार सुबह तफ्सीर ने आरोपी को कोई फोन नहीं किया। इसके बाद आरोपी का दोपहर करीब 12.30 बजे फिर फोन आ गया। उसने, तफ्सीर से 13 करोड़ यूएस डॉलर के इंतजाम के बारे में पूछा। पीड़ित ने उसे रंगदारी देने से इंकार कर दिया।
पुलिस ने शुरू की जांच, जल्द खुलासे का दावा
इसके बाद उन्होंने नोएडा के थाना सेक्टर 20 में शिकायत कर दी। मामले में थाना सेक्टर-20 प्रभारी निरीक्षक मनोज पंत का कहना है कि मामला संदिग्ध लग रहा है। इतनी बड़ी रकम की मांग रंगदारी में कोई नहीं कर सकता है। पीड़ित की इतनी रकम देने की हैसियत भी नहीं है। आशंका है कि किसी विवाद में डराने के लिये रंगदारी मांगी गई है। आरोपित के मोबाइल नम्बर की जांच की जा रही है। जल्द ही मामले का पर्दाफाश किया जाएगा।

 


नई दिल्ली - उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह, केरल के सबरीमला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किये जाने की तारीख पर मंगलवार को निर्णय करेगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस.के. कौल की पीठ ने वकील मैथ्यूज जे नेदुम्परा की इस दलील पर विचार किया कि संवैधानिक पीठ के फैसले पर फिर से विचार की मांग कर रही उनकी याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
पीठ ने कहा, हम जानते हैं कि 19 पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं। हम मंगलवार तक फैसला करेंगे। नेदुम्परा राष्ट्रीय अयप्पा श्रद्धालु संगठन की ओर से दाखिल याचिका पर वकील के तौर पर पेश हुए। पांच सदस्यों वाली संविधान पीठ ने 4:1 के अनुपात से फैसला सुनाया था कि सबरीमला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए। हालांकि जब से सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है तभी से श्रद्धालु कोर्ट के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
रविवार को भी 6 महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। श्रद्धालुओं ने अयप्पा के मंत्रों का उच्चारण करते हुए तेलुगु बोलने वाली छह महिलाओं को मंदिर में पहुंचने से पहले ही रोक दिया। इससे पहले एक महिला पत्रकार ने भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें भी श्रद्धालुओं ने नहीं जाने दिया था।


नई दिल्ली - सीबीआई ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वत के आरोपों के संबंध में एजेंसी के डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के अनुसार इससे पहले रविवार को एक अप्रत्याशित कदम के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ इस आरोप को लेकर मामला दर्ज किया है कि मांस कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े एक मामले में जिस एक आरोपी के विरुद्ध वह जांच कर रहे थे। और इस मामले में उन्होंने रिश्वत ली। दो महीने पहले अस्थाना ने कैबिनेट सचिव से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ यही शिकायत की थी।
देवेंद्र कुमार पर भी हुई थी एफआईआर
अस्थाना के अलावा एजेंसी ने डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार और मनोज प्रसाद, कथित बिचौलिये सोमेश प्रसाद और अन्य अज्ञात अधिकारियों पर भी मामला दर्ज किया है। उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा सात, 13(2) और 13 (1) (डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा सात-ए भी लगाई गई है। सीबीआई ने सूचित किया कि इन धाराओं में किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से अनुमति लेने के जरूरत नहीं होती।
9 कॉल्स और कई व्हाट्सएप मैसेज के बाद CBI अधिकारी राकेश अस्थाना पर केस
सीबीआई ने सतीश साना की शिकायत के आधार पर विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। मांस कारोबारी मोईन कुरेशी की कथित संलिप्तता से जुड़े 2017 के एक मामले में जांच का सामना कर रहे साना ने आरोप लगाया कि अस्थाना ने उसे क्लीनचिट दिलाने में कथित रुप से मदद की। सीबीआई ने बिचौलिया समझे जाने वाले मनोज प्रसाद को भी 16 अक्टूबर को दुबई से लौटने पर गिरफ्तार किया था। हालांकि जांच एजेंसी इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधी हुई है।
गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अस्थाना उस विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुवाई कर रहे हैं जो अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले और उद्योगपति विजय माल्या द्वारा की गयी ऋण धोखाधड़ी जैसे अहम मामलों को देख रहा है। यह दल मोईन कुरैशी मामले की भी जांच कर रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार अस्थाना ने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को एक विस्तृत पत्र लिखकर वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के 10 मामले गिनाए थे। इसी पत्र में यह भी आरोप लगाया गया था कि साना ने इस मामले में क्लीनिचट पाने के लिए सीबीआई प्रमुख को दो करोड़ रुपये दिये। सूत्रों के अनुसार यह शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास भेजी गयी जो इस मामले की जांच कर रहा है।
अस्थाना ने प्राथमिकी दर्ज होने के चार दिन बाद केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को फिर लिखा कि वह साना को गिरफ्तार और पूछताछ करना चाहते हैं और इस संबंध में 20 सितंबर,2018 को निदेशक को एक प्रस्ताव भेजा गया था। अपने पत्र में उन्होंने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को लिखी अपनी चिट्ठी का भी हवाला दिया जिसमें निदेशक के खिलाफ कथित अनियमितताओं का ब्योरा दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि निदेशक ने करीब चार दिनों तक फाईल कथित रुप से रखी और 24 सितंबर, 2018 को उसे अभियोजन निदेशक (डीओपी) के पास भेजने का निर्देश दिया। अभियोजन निदेशक ने रिकार्ड में मौजूद सभी सबूत मांगे। सूत्रों के अनुसार अस्थाना की अगुवाई वाली टीम ने ही साना के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर खोला जिसने देश से भागने की कोशिश की लेकिन सक्रिय कार्रवाई की वजह से वह नहीं भाग सका। सूत्रों के मुताबिक अस्थाना ने कहा है यह फाइल डीओपी द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर के साथ फिर तीन अक्टूबर को सीबीआई निदेशक के समक्ष फिर रखी गयी लेकिन अबतक यह नहीं लौटी है।
सूत्रों ने अस्थाना की बातों का हवाला देते हुए कहा कि साना से एक अक्टूबर, 2018 को पूछताछ की गयी थी, पूछताछ के दौरान साना ने बताया कि वह एक नेता से मिला जिसने वर्मा से मुलाकात करने के बाद उसे आश्वासन दिया कि इस मामले में उसे क्लीनचिट दे दी जाएगी।

 


नई दिल्ली - महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने सोमवार को कहा कि वह एक क्रूज के किनारे पर बैठकर सेल्फी लेने के लिए माफी मांगती हैं। सेल्फी लेते हुए उनका वीडियो वायरल हो गया था। बहरहाल, उन्होंने कहा कि जहां वह बैठी थीं वह जगह सुरक्षित थी। वीडियो के वायरल होने के बाद अमृता फडणवीस को कथित तौर पर जोखिम लेते हुए सेल्फी लेने के लिए ट्विटर पर ट्रोल किया गया था।
वह 20 अक्टूबर को अमृता घरेलू क्रूज लाइनर अंग्रिया के उद्घाटन में शामिल हुई थीं। अमृता ने एक मराठी समाचार चैनल से सोमवार को कहा, जिस जगह पर मैंने सेल्फी ली, वह जगह खतरनाक नहीं थी क्योंकि उसके नीचे दो और सीढ़ियां थीं। उन्होंने कहा, अगर कोई सोचता है कि मैंने कुछ गलती की तो मैं इसके लिए माफी मांगती हूं। मैं युवाओं को बताना चाहती हूं कि सेल्फी लेते वक्त अपनी जान जोखिम में कतई नहीं डालनी चाहिए।
बता दें कि रविवार को अमृता ने सुरक्षा इंतजामों को दरकिनार कर देश के पहले डोमेस्टिक क्रूज ‘आंग्रीया’ की सेफ्टी रेलिंग को पार करके सेल्फी ली थी। घटना के वायरल हुए वीडियो में सुरक्षाकर्मी उन्हें समझाने की कोशिश करते नजर आ रहे थे। अमृता का सेल्फी लेते हुए जो वीडियो सामने आया है उसमें साफ देखा जा सकता है कि वह क्रूज के एकदम किनारे पर बैठकर सेल्फी ले रही हैं, जो जगह सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है।
अमृता फडणवीस के पीछे पुलिस के अधिकारी भी हैं और वह उन्हें ऐसा नहीं करने को कह रहे हैं। अधिकारी उनके पास भी जाते हैं और बताते हैं कि वहां खतरा है। वह उनसे उठने की गुजारिश भी करते हैं, लेकिन अमृता किसी की सुनने को तैयार नहीं दिखती।

 


पम्बा - सबरीमला मंदिर में 'दर्शन के आखिरी दिन, सोमवार को रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं द्वारा प्रवेश की योजना बनाए जाने की खबरों के बीच मंदिर एवं उससे जुड़े अन्य श्रद्धा केंद्रों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। “नैष्ठिक ब्रह्मचारी” के मंदिर में 10 से 50 साल की आयु वर्ग की लड़कियों एवं महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे श्रद्धालु घने जंगल में स्थित मंदिर तक जाने से उन्हें रोकने के लिए सबरीमला सन्नीधानम मंदिर परिसर में डेरा डाले बैठे हैं।
सबरीमला सन्नीधानम, पम्बा, निलाकल और इलावुमकल में आपराधिक दंड संहिता की धारा 144 लागू किए जाने के बावजूद सैकड़ों अयप्पा श्रद्धालुओं ने करीब 12 महिलाओं को मंदिर तक जाने से रोका और भगवान अयप्पा के दर्शन करने की उनकी मंशा पर पानी फेर दिया।
ताजा खबरों के मुताबिक, मंदिर में सभी महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले के आधार पर एक महिला ने मंदिर में प्रार्थना करने देने के लिए पुलिस से मदद मांगी। प्रसिद्ध मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद आज छठे दिन भी जारी रहा।
कुछ महिलाओं के मंदिर जाने की खबरों के बाद पुलिस ने सन्नीधानम और अन्य इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात शीर्ष अधिकारी, पुलिस महानिरीक्षक एस श्रीजीत ने सोमवार सुबह भगवान अयप्पा के मंदिर में पूजा की।
स्थानीय मीडिया ने नम आंखों से प्रार्थना करते हुए अधिकारी की तस्वीरें प्रसारित की। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच कार्यकर्ता रेहाना फातिमा को मंदिर तक ले जाने के लिए श्रीजीत को श्रद्धालुओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा था।
हालांकि अयप्पा श्रद्धालुओं के कड़े विरोध के चलते पुलिस उन्हें मंदिर के भीतर नहीं ले जा सकी। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने रविवार को छह महिलाओं को सबरीमला मंदिर में प्रवेश से रोक दिया था। इसके अलावा नाटकीय घटनाक्रम के बीच छह तेलुगु भाषी महिलाओं को भी प्रसिद्ध मंदिर तक जाने से रोका गया। इन घटनाक्रम से साफ होता है कि सोमवार को मासिक पूजा के बाद बंद हो रहे मंदिर में 10 से 50 साल के आयु वर्ग की कोई भी महिला अब तक वहां नहीं पंहुच पाई है।

 


नई दिल्ली - पांच सितारा होटल के बाहर पिस्तौल लहराकर युवती व उसके दोस्त को धमकाने वाले पूर्वबसपा सांसद के बेटे आशीष पांडेय की सोमवार को अदालत में पेशी है।
आशीष की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका पेश की जाएगी। बता दें कि बीते शुक्रवार को एक दिन की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने आशीष को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने आशीष की जमानत याचिका खारिज कर उसे सोमवार तक के लिए जेल भेज दिया था। इससे पहले पटियाला हाउस स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नीतू शर्मा की अदालत से दिल्ली पुलिस ने आशीष की चार दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने आरोपी को महज एक दिन के लिए रिमांड पर पुलिस को सौंपा था।
ये है पूरा मामला-
दक्षिणी दिल्ली के पांच सितारा होटल हयात रेजेंसी के बाहर 13 अक्टूबर की मध्यरात्रि बसपा के पूर्व सांसद राकेश पांडेय के बेटे आशीष के हाथ में पिस्तौल लेकर एक जोड़े को धमकाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद उसके खिलाफ आरकेपुरम थाने में मामला दर्ज किया गया था।
वीडियो अपलोड कर मांगी माफी-
आशीष पांडे 18 अक्टूबर को खुद पटियाला हाउस कोर्ट में सरेंडर करने पहुंच गया। सरेंडर करने से पहले आशीष ने 2 मिनट 36 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया जिसमें उसने उस दिन की घटना के बारे में बताया। उसने कहा कई दिनों से वायरल हुए वीडियो में सिर्फ एक पक्ष दिखाया जा रहा है। उसने कहा कि मुझे ऐसे प्रोजेक्ट किया जा रहा है जैसे कि मैं कोई टेरेरिस्ट हूं, वॉन्डेट हूं। उसने बताया कि ये बात सच है कि मेरे हाथ में पिस्तौल थी लेकिन वह मैंने लड़की के ऊपन नहीं ताना। मैंने उस लड़की की तरफ देखा तक नहीं था। उसने धक्का दिया और अश्लील इशारे किए और उसके दोस्त ने उल्टी सीधी बातें भी बोलीं।

 


नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट में शादी की उम्र घटाने की याचिका लेकर पहुंचे एक वकील को भारी पड़ गया है। कोर्ट ने वकील अशोक पांडे द्वारा दायर की गई जनहित याचिका को न सिर्फ खारिज कर दिया, बल्कि 25,000 का जुर्माना भी ठोंक दिया। दरअसल, इस याचिका में शादी की उम्र को कम करने का आग्रह किया गया था।
वकील अशोक पांडे ने अपनी याचिका में पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु को 18 वर्ष किए जाने का आग्रह किया गया था। शीर्ष अदालत को याचिका में कोई मैरिट दिखाई नहीं दिया। दरअसल, कोर्ट ने इस याचिका को समय की बर्बादी और गैरजरूरी समझा। इस कारण याचिका को खारिज कर दिया और वकील पर भी कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया।
गौरतलब है कि कानूनी रूप से विवाह हेतु लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष तय की गई है। लेकिन वकील साहब ने अपनी याचिका की पुरुषों की शादी की उम्र को 21 से घटाकर 18 करने की अपील की थी। दरअसल, कोर्ट में ऐसे कई महत्वपूर्ण मामले विचाराधीन हैं, ऐसे में कोर्ट को भी वकील अशोक पांडे की याचिका पर गुस्सा आ गया और दंड स्वरूप वकील पर जुर्माना लगा दिया, ताकि भविष्य में कोई अदालत का समय बर्बाद करने की कोशिश न करे।


मुंबई - विमान सेवाओं में गड़बड़ी का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को भी उड़ान के दौरान गोएयर के दो विमानों में तकनीकी खराबी देखने को मिली। इसके चलते दोनों विमानों को आधे रास्ते से लौटना पड़ा। इनमें से एक विमान ने दिल्ली से माले के लिए उड़ान भरी थी, जबकि दूसरा गोवा से दिल्ली के लिए उड़ा था।
एक ने माले के लिए भरी थी उड़ान, बीच रास्ते से दिल्ली लौटा
विमानन कंपनी गोएयर ने रविवार को एक बयान जारी कर उपरोक्त जानकारी दी। उसके अनुसार, 'दिल्ली से माले के लिए रवाना गोएयर फ्लाइट संख्या जी8 174 में बीच रास्ते तकनीकी दिक्कत आ गई। इसके चलते पायलट ने उसे दिल्ली वापस लाने का निर्णय लिया। लैंडिंग के बाद विमान में आई गड़बड़ी की पहचान कर दिक्कत दूर कर दी गई। उक्त विमान अभी सेवा में है।'
दिल्ली आ रही दूसरी फ्लाइट भी गोवा वापस गई
हालांकि कंपनी ने अपने बयान में यह नहीं बताया कि दोनों विमानों में कुल कितने यात्री सवार थे। इसी प्रकार कंपनी ने दूसरे विमान में आई खराबी के बारे में भी जानकारी दी है। अलग से बयान जारी कर गोएयर ने बताया, 'दिल्ली के लिए उड़ान भरे विमान को भी तकनीकी खराबी के चलते करीब आधे रास्ते से गोवा वापस लौटाने के लिए विवश होना पड़ा।
फ्लाइट संख्या जी8 285 के कार्गो एरिया में गलत अलार्म बजने से तकनीकी दिक्कत पैदा हुई थी।' कंपनी ने इस दौरान यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद प्रकट किया है।

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