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टीवी के क्यूटेस्ट कपल्स में से एक हितेन तेजवानी और गौरी प्रधान की लवस्टोरी फिल्म की कहानी की तरह ही है।हितेन तेजवानी और गौरी प्रधान की लवस्टोरी किसी फिल्म की तरह ही है। दोनों की पहली मुलाकात मुंबई एयरपोर्ट पर हुई थी।गौरी प्रधान और हितेज तेजवानी किसी एडफिल्म की शूटिंग के लिए हैदराबाद गए थे।वक्त बीतने के साथ-साथ हितेन तेजवानी और गौरी प्रधान की दोस्ती हो गई और जल्द ही दोनों एक-दूसरे को डेट भी करने लगे।सीरियल 'कुटुम्ब' में हितेन तेजवानी और गौरी प्रधान ने लीड रोल अदा किया था। इस सीरियल में दोनों की केमेस्ट्री को लोगों ने काफी पसंद भी किया था।बहुत कम लोग जानते है कि हितेन तेजवानी की पहली शादी टूट गई थी। कई दफा इंटरव्यू के दौरान हितेन अपनी पहली शादी के बारे में बात करने से बचते रहे है लेकिन उन्होंने गौरी प्रधान को हर एक बात बताई थी।साल 2001 में तलाक लेने के बाद हितेन तेजवानी ने तीन साल बाद ही गौरी प्रधान का हाथ थाम लिया था।हितेज तेजवानी और गौरी प्रधान खाली समय में ऐसे ही बच्चों की तरह मस्ती करते हैं।गौरी प्रधान और हितेन तेजवानी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब धमाल मचाती है। गौरी और हितेन हमेशा फैंस को कपल गोल्स देते हैं।गौरी प्रधान के जन्मदिन पर हितेन तेजवानी ने सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर किया है और उन्हें खास अंदाज में बधाई भी दी है।

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त इन दिनों कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके लिए अभिनेता का इलाज मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में चल रहा है। हाल ही में संजय दत्त ने कीमोथैरेपी का फर्स्ट साइकिल पूरा किया है। सिर्फ इतना ही नहीं, कैंसर के इलाज के बीच संजय दत्त अपनी आगामी फिल्म 'शमशेरा' की शूटिंग को पूरा करने में भी जुट चुके हैं। इन सब के बीच अब खबरें आ रही हैं कि संजय दत्त अपनी पत्नी मान्यता और बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने के लिए दुबई की उड़ान भर चुके हैं।कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन के बीच संजय दत्त की पत्नी और उनके बच्चे काफी दिनों से दुबई में फंसे हुए थे। टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, संजय दत्त ने हाल ही में अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए एक छोटा सा ब्रेक लिया है और इसके बाद अभिनेता एक फिर अपने इलाज के लिए अस्पताल का दौरा करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि संजय दत्त करीबन एक हफ्ते बाद अपने बच्चों से मिलने के बाद मुंबई वापस लौट आएंगे।ईटाइम्स के सूत्र के मुताबिक, 'संजय दत्त फिलहाल ठीक हैं और एक सप्ताह या 10 दिनों के बाद वो घर वापस लौटेंगे। काफी दिनों से संजय दत्त अपने जुड़वा बच्चों को देखना चाहते थे, जो अभी भी दुबई में हैं।' संजय ने अपनी पत्नी मान्यता के साथ दुबई के लिए एक चार्टर्ड के जरिए उड़ान भरी है। मान्यता ने हाल ही में इंस्टाग्राम स्टोरी पर कुछ मनमोहक तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें दोनों स्टार्स प्लेन में दिखाई दे रहे हैं।बात करें वर्क फ्रंट की तो संजय दत्त जल्द ही इस साल रिलीज होने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'केजीएफ चैप्टर 2' में दिखाई देंगे। इस फिल्म में संजय दत्त 'अधीरा' की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। इस फिल्म के अलावा संजय दत्त दो आगामी फिल्मों 'भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया' और 'तोरबाज' में दिखाई देंगे। इन फिल्मों के अलावा शमशेरा और पृथ्वीराज भी पाइपलाइन में हैं।

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच संसद के मानसून सत्र का आज तीसरा दिन है। कोरोना पर चर्चा के बाद राज्यसभा की कार्यवाही कल सुबह 9 बजे तक स्थगित कर दी गई है। माना जा रहा था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एलएसी पर चीन के साथ जारी टकराव को लेकर राज्यसभा में आज बयान देंगे। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने लोकसभा में बयान दिया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संसद से भी चीन को स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि सीमा पर यथास्थिति को एकतरफा बदलने का कोई प्रयास भारत को किसी सूरत में मंजूर नहीं है। लोकसभा में बयान देते हुए राजनाथ ने कहा कि भारत शांति से हर मुद्दे के हल का पक्षधर है लेकिन कोई आक्रामक रुख दिखाएगा तो माकूल जवाब दिया जाएगा।

भारी वित्तीय संकट में फिल्म उद्योग;-टीएमसी सांसद नुसरत जहां (TMC MP Nusrat Jahan) ने कहा कि फिल्म उद्योग भारी वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। बंगाल फिल्म उद्योग की हालत भी खराब है। हजारों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। ऐसे में मनोरंजन उद्योग और इसके तत्काल पुनरुद्धार के लिए सरकार से गुजारिश है कि वह राहत पैकेज घोषित करे। 

पाक ने 270 भारतीय मछुआरे पकड़े ;-लोकसभा में दमन एवं दीव से भाजपा सदस्‍य लालूभाई पटेल ने कहा कि पाकिस्‍तान ने 270 भारतीय मछुआरों और लगभग 1200 नावों को अब तक पकड़ा है। ये मछुआरे गुजरात, महाराष्‍ट्र और दमन दीव के रहने वाले हैं। मैं विदेश मंत्री से गुजारिश करता हूं कि वो पाकिस्‍तान ने इन मछुआरों को छोड़ने के लिए कहें... 

राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित;-कोरोना पर चर्चा के बाद राज्यसभा की कार्यवाही कल सुबह 9 बजे तक स्थगित कर दी गई है।

कोरोना से हुई मौतों पर सवाल;-आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि सरकार बार-बार यह कहती है कि दूसरे देशों की तुलना में हमारे यहां मौतें कम हुई हैं, यह बहुत ही घोर असंवेदनशील बयान है। अगर किसी के परिवार का कोई सदस्य मर जाता है तो क्या हम उससे ये कहेंगे कि हमें दुख है, लेकिन दुनिया से हम अच्छी स्थिति में हैं?

कोरोना वायरस पर चर्चा;-राज्यसभा में कोरोना वायरस पर स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर चर्चा हो रही है। कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में सरकार ने लॉकडाउन लगाया तो इसके फायदे क्या-क्या हुए, इसे भी सरकार को बताना चाहिए।

6 महीनों में 28 बार घुसपैठ:-गृह मंत्रालय की तरफ से राज्यसभा को बताया गया कि पिछले 6 महीनों के दौरान भारत चीन सीमा पर किसी घुसपैठ की रिपोर्ट नहीं है। साथ ही यह जानकारी भी दी कि इस साल अब तक पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में आतंकी 28 बार घुसपैठ कर चुके हैं।

मनोज झा का बाबा रामदेव पर निशाना:-आरजेडी के सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में कहा कि कोरोना काल में जून के महीने में एक क्षण ऐसा आया, जब एक महापुरुष (योगगुरु रामदेव) ने कहा कि उन्होंने कोरोना की दवाई बना ली है। उनका कोई नुकसान नहीं हुआ। उनकी दवाइयां बिक गईं। कोरोना काल में किस तरह से आयुर्वेद का गलत इस्तेमाल किया गया है, इसका हमें ध्यान रखना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर चर्चा;-कोरोना महामारी और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर 15 सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा दिए गए बयान पर आज राज्यसभा में चर्चा होगी।

राज्यसभा में उठा जासूसी का मुद्दा;-कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने राज्यसभा में भारतीयों की जासूसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चीनी सरकार से जुड़ी हुई शिंजियान आधारित टेक कंपनी 10,000 से अधिक भारतीयों की जासूसी कर रही है। मैं सरकार से जानना चाहता हूं कि क्या उन्होंने इस पर ध्यान दिया है। यदि हां, तो क्या कार्रवाई की गई है?

लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव;-कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने राजनीतिक नेताओं और प्रमुख अधिकारियों पर चीनी जासूसी के मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया है।

राज्यसभा की कार्यवाही शुरू:-राज्यसभा की तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू हो गई है। राज्यसभा की कार्यवाही के लिए शिवसेना सांसद संजय राउत और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मुख्तार अब्बास नक़वी संसद में पहुंचे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अब से कुछ देर बाद चीन से जारी तनाव पर बयान देंगे।

सांसदों के वेतन में 30 फीसद कटौती पर विधेयक पारित:-लोकसभा ने सांसदों के वेतन में 30 फीसद कटौती से जु़ड़ा विधेयक मंगलवार को पारित कर दिया। कोविड से निपटने के लिए अपने वेतन में कटौती का सांसदों ने एक सुर में समर्थन किया। हालांकि सांसद निधि को दो साल के लिए स्थगित रखने के फैसले को गलत बताते सरकार की आलोचना की। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को इसे सदन में पेश किया था।

जया बच्चन के बयान पर मचा घमासान:-बॉलीवुड के ड्रग्स कनेक्शन का मसला संसद में मंगलवार को जमकर गूंजा। राज्यसभा में जया बच्चन ने लोकसभा में दिए गए बयान पर रवि किशन को आ़़डे हाथों लिया। उन्होंने इसे फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम करने की साजिश करार देते हुए शून्यकाल में जमकर भ़़डास निकाली। गोरखपुर से भाजपाई सांसद और भोजपुरी अभिनेता रवि किशन और अभिनेत्री कंगना रनोट का नाम लिए बगैर कहा, 'जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। यह गलत है।'

नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमा से सटे इलाकों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की हर हरकत पर नजर भारतीय सेना नजर बनाए हुए है। बीते 20 दिनों में भारत और चीन के बीच उत्तरी पैंगोंग झील के समीप फायरिंग की कम से कम तीन घटनाएं हुई हैं। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच 100-200 राउंड हवाई फायरिंग की गई। 45 साल में यह पहली बार है जब एलएसी पर फायरिंग की कोई घटना हुई हो।सेना के सूत्रों ने कहा कि पहली घटना तब हुई जब भारतीय सेना ने 29-31 अगस्त के बीच दक्षिणी बैंक पंगोंग झील के पास ऊंचाइयों पर कब्जा करने की चीनी कोशिश को नाकाम कर दिया, जबकि दूसरी घटना 7 सितंबर को मुखपारी के पास हुई। सेना के सूत्रों ने कहा कि तीसरी घटना 8 सितंबर को पैंगोंग झील के उत्तरी तट के पास हुई थी। इस दौरान दोनों पक्षों के सैनिकों ने 100 से अधिक राउंड हवाई फायरिंग की थी। इस दौरान चीनी सेना बहुत आक्रामक तरीके से बर्ताव कर रही थी।यह घटना ऐसे समय में हुई थी जब शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर मॉस्को में थे, जहां सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए चीनी समकक्ष से उन्होंने मुलाकात की थी। बातचीत के दौरान दोनों पक्ष र कमांडर-स्तरीय वार्ता करने वाले थे, लेकिन अभी तक चीनी पक्ष की ओर से तारीख और समय की पुष्टि नहीं की गई है।भारत और चीन ने सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर अप्रैल-मई से कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक इसका कोई महत्वपूर्ण परिणाम नहीं निकला है। दोनों देशों के बीच इस साल अप्रैल-मई से तनाव चल रहा है। पोंगोंग झील के पास कोंगरूंग नाला, गोगरा और फिंगर क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा की गई घुसपैठ की कोशिशों के बाद गतिरोध और बढ़ गया है। चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना ने अब लद्दाख में सेना की तैनाती को कई गुना बढ़ा दिया है, ताकि चीनी सेना द्वारा किसी भी आक्रामक कदम का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

कोयंबटूर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 70 वें जन्मदिन के मौके पर, तमिलनाडु के कोयंबटूर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने भगवान शिव को सिवान कामाची अम्मन मंदिर में 70 किधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 70 वें जन्मदिन के मौके पर, तमिलनाडु के कोयंबटूर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने भगवान शिव को सिवान कामाची अम्मन मंदिर में 70 किलोग्राम का लड्डू चढ़ाया, और इसे लोगों में वितरित किया। और इसे लोगों में वितरित किया। बता दें कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी 70 साल के हो रहे हैं।उत्सव को चिह्नित करने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंदिर के बाहर एक जुलूस निकाला और फिर नमाज अदा की, जिसके बाद लड्डू बांटे गए। उत्सव के हिस्से के रूप में, पिछले एक सप्ताह से, भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न कार्यक्रमों में खुद को जरूरतमंदों के बीच राशन वितरण, रक्तदान शिविरों के आयोजन और नेत्र जांच शिविरों में शामिल किया है।इससे पहले 14 सितंबर को, भाजपा ने प्रधानमंत्री के 70 वें जन्मदिन को चिह्नित करने के लिए 'सेवा सप्त' नाम से एक सप्ताह का अभियान शुरू किया था। देश भर में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा कई सामाजिक पहल की जा रही हैं। यह अभियान पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा द्वारा उत्तर प्रदेश के गौतम बौद्ध नगर के छपरौली गाँव में शुरू किया गया था। अभियान 20 सितंबर तक जारी रहेगा।

लद्दाख। पूर्वी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से जारी तनाव के बीच भारतीय सेना किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को धार देने में जुटी हुई है। भारतीय सेना ने अब बोफोर्स होवित्जर तोपों (Bofors howitzers) को तैयार करना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, लद्दाख में सेना के इंजीनियर 155mm की इन तोपों की सर्विसिंग कर रहे हैं। इन तोपों को ऑर्टिलरी रेजिमेंट में 1980 के दशक के मध्य में शामिल किया गया था। ये तोपें लो एंड हाई दोनों एंगल से फायरिंग करने में सक्षम हैं। इनकी सर्विसिंग का काम पूरा होने के बाद इन्हें लद्दाख में तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय वायु सेना लद्दाख की फॉर्वर्ड पोस्ट तक जरूरी सामग्री पहुंचाने का काम कर रही है। सर्विसिंग के काम में जुटे इंजीनियरों ने कहा कि कुछ ही दिनों में ये तोपें सीमा पर गर्जने के लिए तैयार हो जाएंगी।अधिकारियों ने बताया कि इन तोपों को समय-समय पर सर्विसिंग और मेंटनेंस की जरूरत होती है। इसके लिए बकायदा टेक्नीशियंस को तैनात किया गया है। इस तोप ने कारगिल युद्ध के दौरान पूरे युद्ध का रुख बदल दिया था। इन तोपों ने जम्मू-कश्मीर के द्रास में ऑपरेशन विजय की लड़ाइयों को जीतने में बड़ी भूमिका निभाई थी। वर्कशाप में तैनात इंजीनियरों पर आपा‍त स्थितियों में तेजी से इन हथियारों को संचालन के लायक बनाने की जिम्‍मेदारी होती है। ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों को मार गिराने में इस तोप का कोई तोड़ नहीं है। वर्कशाप को टैंक की फायरिंग पिन से लेकर इंजन असेंबल तक सब कुछ मुहैया कराना होता है। उल्‍लेखनीय है कि मौजूदा वक्‍त में सीमा पर चीन की आक्रामकता को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी तैनाती भी बढ़ाई है। बीते 20 दिनों में भारत और चीन के बीच उत्तरी पैंगोंग झील के पास फायरिंग की कम से कम तीन घटनाएं हुई हैं। यही नहीं इस दौरान दोनों पक्षों के बीच 100-200 राउंड हवाई फायरिंग भी हुई है।

नई दिल्ली। दक्षिण भारत समेत विभिन्न राज्यों के कुछ लोगों के आंतकी संगठन आइएस में शामिल होने की पुष्टि के बाद, ये राज्य केंद्रीय और स्टेट सिक्योरिटी एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। गृह मंत्रालय की तरफ से इस बारे में जानकारी दी गई है।मंत्रालय ने बताया है कि नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (National Investigation Agency- NIA) ने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में आइएस की मौजूदगी से संबंधित 17 केस रजिस्टर किए हैं। जिन राज्यों में आतंकी संगठन की मौजूदगी की बात की जा रही है उनमें तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं। एनआइए ने इस मामले में 122 आरोपियों की गिरफ्तारी भी की है।बुधवार को आतंकवाद के मसले पर राज्यसभा में गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने जानकारी दी कि देश में 12 ऐसे राज्य हैं, जहां आइएस के आतंकी सबसे अधिक सक्रिय हैं। इनमें केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल , राजस्थान, बिहार, यूपी, एमपी और जम्मू-कश्मीर शामिल है।गौरतलब है कि जुलाई महीने में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसमें केरल और कर्नाटक प्रांत में आइएस से जुड़े करीब 200 आतंकियों के मौजूद होने की सूचना दी गई थी। यूएन ने भारत को चेतावनी दी थी कि भारत के केरल और कर्नाटक प्रांत में इस्लामिक स्टेट (आइएस) के सहयोगी संगठन हिंद विलयाह के 150 से 200 आतंकी मौजूद हैं। ये हमलावर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार के रहने वाले हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अलकायदा भारतीय उपमहाद्वीप में हमला करने की योजना बना रहा है।आइएसआइएस, अलकायदा और उससे संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंधों की निगरानी टीम की 26वीं रिपोर्ट जुलाई में जारी की गई थी। इसमें कहा गया था कि 10 मई 2019 को घोषित किए गए आइएसआइएस से संबंधित भारतीय हिंद विलयाह के पास अपने 180 से 200 सदस्य हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक्यूआइएस के वर्तमान नेता ओसामा महमूद है, जिसने मृत असीम उमर की जगह ली है।

नई दिल्ली। इस चुनौतीपूर्ण समय में 'वर्क फ्रॉम होम’ सामान्य बन चुका है। लेकिन अगर आप घर से काम करते हो और आपके कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं है। तो यह समय है एक ऐसे डिवाइस पर निवेश करने की, जो न केवल काम करने में आपकी मदद करे, बल्कि घर से आपकी प्रोडक्टिविटी को भी बढ़ाए।Intel® अपने 10वीं पीढ़ी Intel® Core ™ प्रोसेसर (10th Gen Intel® Core™ Processors) के साथ घर से काम करने की गतिशीलता को बदल रहा है। यह प्रोसेसर कई तरह की खासियतों से लैस है, जिसमें शामिल है – फस्ट परफॉर्मेंस, फास्टर कनेक्टिविटी, इंटीग्रेटेड ग्राफिक्स और ज्यादा स्पेस। इन फीचर्स से यूजर्स को ये फायदा होगा कि वो प्रोफेशनली काम कर पाएंगे और उनकी प्रोडक्टिविटी भी बरकरार रहेगी।    

वर्क फ्रॉम होम के लिए लैपटॉप चुनते समय किन बातों पर ध्यान दें?  

पावरफुल प्रोसेसर;-बात चाहे ज्यादा काम करने की हो या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और स्ट्रीमिंग की, लैपटॉप में प्रोसेसर की पावर बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए लैपटॉप खरीदते समय आपके लिए प्रोसेसर पहली और महत्वपूर्ण प्राथमिकता होनी चाहिए। 10वीं पीढ़ी Intel® Core ™ प्रोसेसर उन लोगों के लिए एक बेहतर प्रोसेसर है, जो घर से काम करते हुए अपनी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाना चाहते हैं। 

बिना रुके काम करें ;-पावरफुल प्रोसेसर के अलावा अन्य महत्वपूर्ण कारक भी हैं, जिन्हें उपयोगकर्ताओं को अपने लैपटॉप में देखना चाहिए। यदि आपके जॉब में ज्यादा काम शामिल है, तो आपको अपने लैपटॉप के लिए एक पावरफुल प्रोसेसर की तलाश करनी चाहिए। इसके अलावा, आपके लैपटॉप में कम से कम 4GB रैम, फुल HD डिस्प्ले और पर्याप्त स्टोरेज कैपेसिटी होनी चाहिए। इसके बाद यह भी ध्यान देना है कि लैपटॉप में लगी बैटरी की लाइफ कितनी है। यदि आपके घर में बिजली लगातार रहती है, तो यह बिंदु आपके लिए कम महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन उन लोगों के लिए जो लगातार बिजली कटौती का सामना करते हैं, उन्हें एक अच्छी बैटरी के साथ लैपटॉप लेना चाहिए, जिसकी लाइफ अच्छी हो और ज्यादा देर तक चल सके। उपर दिए गए विशेष विवरण के अलावा लैपटॉप का वजन और स्क्रीन की साइज भी बहुत मायने रखती है। इसलिए इस पर भी आप ध्यान दीजिए।

एडवांस फीचर्स जो हर किसी की जरूरत को पूरा करे;-10वीं पीढ़ी Intel® Core ™ प्रोसेसर शानदार टेक्नोलॉजी और जबरदस्त फीचर्स के साथ आता है, जिससे घर से काम करने का अनुभव अच्छा हो जाता है। इस प्रोसेसर की परफॉर्मेंस की वजह से आप काम की प्रोडक्टिविटी को न केवल बेहतर कर सकते हैं, बल्कि बढ़ा भी सकते हैं। जैसे इसकी मदद से आप वीडियो कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान ऑटोमेटिक बैकग्राउंड नॉइज को खत्म कर सकते हैं।     यही नहीं, Intel® Iris® प्ल्स ग्राफिक्स की मदद से आप 4K ब्रिलिएंस या उससे अधिक में वीडियो स्ट्रीम कर सकते हैं। Intel® Wi-Fi 6 (Gig+) स्ट्रीमिंग, फाइल शेयरिंग और क्लाउड कोलैबोरेशन को बढ़ा देता है। इसके अलावा, इस प्रोसेसर में और भी कई टेक्नोलॉजी है, जैसे Thunderbolt™ 3 और Intel® Optane™ मेमोरी। इसकी मदद से ऑफिस एप्स पर काम करने के दौरान आपको फास्ट और ज्यादा रेस्पॉन्सिव एक्सपीरियंस मिलेगा। 

5 लैपटॉप्स जो वर्क फ्रॉम होम के लिए हैं बेहतर ;-अगर आप वर्क फ्रॉम होम के लिए एक अच्छे लैपटॉप की तलाश कर रहे हैं, तो निम्नलिखित 5 लैपटॉप्स पर ध्यान दीजिए। ये सभी लैपटॉप्स 10वीं पीढ़ी Intel® Core ™ प्रोसेसर से लैस हैं और परफॉर्मेंस के मामले में काफी आगे हैं। साथ ही कीमत भी आकर्षक है।   

Dell 15 3593 Inspiron :-Dell New Inspiron 15 3593, 10वीं पीढ़ी Intel® Core™ i3-1005G1 प्रोसेसर के साथ आता है। यह लैपटॉप उन लोगों के लिए एक सही प्रोसेसर है, जो कम बजट में एक अच्छे परफॉर्मेंस वाले लैपटॉप की तलाश में हैं। यह एक अल्ट्रापोर्टेबल लैपटॉप है, जो प्रभावशाली डिस्प्ले के साथ आता है। इसका फास्ट प्रोसेसर और पावरफुल बैटरी आपको लंबे समय तक बिना किसी दिक्कत के काम करने में मदद करेंगे।

HP 15s-du2099tu:-HP 15s-du2099tu भी 10वीं पीढ़ी Intel® Core™ i3-1005G1 प्रोसेसर से लैस है। अगर आपके लैपटॉप में रिसोर्स इंटेंसिव एप्लिकेशन के साथ मल्टीटास्किंग की मांग रहती है, तो यह लैपटॉप आपके लिए उपयुक्त है। Intel® टर्बो बूस्ट टेक्नोलॉजी से बना प्रोसेसर काम की मांग के आधार पर आपके लैपटॉप की परफॉर्मेंस को बेहतर कर देता है।

Lenovo 7VIN Ideapad Slim 3:-10वीं पीढ़ी Intel® Core™ i3-1005G1 प्रोसेसर के साथ आने वाला Lenovo 7VIN Ideapad Slim 3 लैपटॉप भी प्रोफेशनल्स के लिए एक अच्छी पसंद हो सकता है। इसका डिजाइन स्लिक और स्लिम है, साथ ही यह अच्छी परफॉर्मेंस भी देता है। इसका पावरफुल ड्यूल-कोर प्रोसेसर काम में देरी की हर संभावना को समाप्त कर देता है।

Asus VivoBook 15 Ultrabook ;-अगर आप एक ऐसे लैपटॉप की तलाश कर रहे हैं, जो न केवल पावरफुल प्रोसेसर  और डुअल स्टोरेज से लैस हो, बल्कि दिखने में कॉम्पैक्ट और वजन में काफी हल्का हो, तो आप 10वीं पीढ़ी Intel® Core™ i3- -10110U प्रोसेसर वाले Asus VivoBook 15 Ultrabook पर भरोसा कर सकते हैं। इसका इंटीग्रेटेड Intel® UHD ग्राफिक्स अच्छे विजुअल्स प्रदान करता है। 

Acer Aspire 3 A315-56:-10वीं पीढ़ी Intel® Core™ i3- 1005G1 प्रोसेसर के साथ आने वाला Acer Aspire 3 A315-56 लैपटॉप भी इस लिस्ट में शामिल है। इसकी कई वजहें हैं। यह लैपटॉप बेहद हल्का है। साथ ही यह पर्याप्त स्टोरेज मेमोरी के साथ आता है, जो वर्क फ्रॉम होम के दौरान दिन-प्रतिदिन के कार्य के लिए काफी अच्छा है। इसमें शामिल Intel® HD 620, 4K के सपोर्ट के साथ अनमैच्ड मीडिया और वीडियो एक्सपीरियंस देता है।

धर्मांतरण में लिप्त 13 गैर सरकारी संगठनों की विदेशी फंडिंग के लाइसेंस निलंबित किए जाने के गृह मंत्रालय के फैसले के बाद संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन सांसद संजय सेठ की ओर से जिस तरह झारखंड में आदिवासियों के धर्मांतरण का मसला उठाया गया, उससे यही पता चलता है कि ईसाई मिशनरियां किस तरह बेलगाम हैं। भारत में धर्मांतरण के अग्रदूत ईसाई मिशनरी ही हैं। पुर्तगाली काफिले के साथ भारत आए ईसाई मत के प्रचारक फ्रांसिस जेवियर ने कहा था कि ब्राह्मण लोग शैतानी भूतों के साथ सहयोग रखते हुए हिंदुओं पर अपना प्रभाव रखते हैं, इसलिए हिंदुओं को ईसाइयत का प्रकाश देने हेतु ब्राह्मणों का प्रभाव तोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए।

ईसाई मत के प्रचारक जेवियर ने बड़े पैमाने पर गोवा में जुल्म ढाए;-जेवियर ने बल प्रयोग की भी खुली वकालत की, पर पुर्तगाली औपनिवेशिक शासकों ने उन्हें उतनी सेना नहीं दी जितनी वे चाहते थे, फिर भी जेवियर ने बड़े पैमाने पर गोवा में जुल्म ढाए। हिंदू मंदिरों को तोड़े जाने से मिली खुशी का उन्होंने स्वयं वर्णन किया। उनका पहला निशाना ब्राह्मण थे। इसीलिए हिंदू राजा पुर्तगालियों से संधि करते समय स्पष्ट लिखवाते थे कि वे ब्राह्मणों को नहीं मारेंगे, लेकिन मिशनरियों का गंभीर प्रहार वैचारिक था, जिसके दुष्प्रभाव आज और बढ़ गए हैं। निरंतर प्रचार ने आम यूरोपीय और भारतीय विमर्श में ऐसी विषैली बातें प्रवेश करा दीं, जिसे विविध राजनीतिक स्वार्थ हिंदुओं के विरुद्ध इस्तेमाल करते हैं। कथित सेक्युलर, मार्क्सवादी, इस्लामी और कुछ क्षेत्रीय दल जिन ब्राह्मण-द्वेषी बातों को स्वयंसिद्ध मानते हैं, उनकी शुरुआत मिशनरी प्रकाशनों से हुई। डॉ. कूनराड एल्स्ट ने विश्व इतिहास में यहूदी-विरोध के सिवा ब्राह्मण-विरोध ही मिशनरियों का सबसे बड़ा दुष्प्रचार अभियान बताया।

मिशनरी ब्राह्मणों को मिटाने पर एकमत थे;-विविध मिशनरी ब्राह्मणों को मिटाने पर एकमत थे। उनमें मतभेद केवल तरीकों को लेकर मिलता है। जैसे रॉबर्ट दे नोबिली बल प्रयोग के बदले धोखाधड़ी को उपयुक्त मानते थे। वह ब्राह्मणों वाले पहनावे में अपने को रोमन ब्राह्मण बताते हुए येशुर्वेद यानी जीससवेद को पांचवा वेद कहते थे। ऐसी धोखे की विधियां आज कई मिशनरी धाराओं द्वारा जमकर इस्तेमाल हो रही हैं। हिंदू मंदिरों में जीसस या मैरी की फोटो लगा देना, चर्चों को हिंदू डिजाइन देकर भोले हिंदुओं को फंसाकर ले जाना और उन्हें ईसाई अनुष्ठानों से जोड़ने और हिंदू व्यवहार से तोड़ने के तरीके जमकर अपनाए जा रहे हैं।

ब्राह्मणों को धर्मांतरित करा लें तो फिर आम हिंदुओं को ईसाई बनाना आसान:-नोबिली की कल्पना थी कि किसी तरह पहले ब्राह्मणों को धर्मांतरित करा लें तो फिर आम हिंदुओं को ईसाई बनाना आसान रहेगा। चीन, जापान, कोरिया में उनकी ऐसी तिकड़म कुछ कारगर भी रही थी। पहले मिशनरियों ने निम्न-वर्ग के पक्षधर होने के विपरीत नीति रखी थी, क्योंकि तब यूरोप में राजनीतिक समानता का कोई मूल्य नहीं था। सेंट पॉल ने गुलामी प्रथा का सक्रिय समर्थन किया था। पोप ग्रिगोरी पंद्रहवें ने भारत में चर्च में जाति-भेद रखने की बाकायदा मान्यता दी थी। 18-19वीं सदी तक चर्च ने समानता के विचार का कड़ा विरोध किया। यह तो पिछले डेढ़ सौ साल की बात है कि जब समाजवादी हवा ने दुनिया पर असर डाला तब चर्च ने रंग बदलकर अपने को शोषित-पीड़ित समर्थक बताना शुरू किया।

गोवा में कई चर्च आज भी उच्च जाति और निम्न जाति के लोगों के लिए दरवाजे अलग हैं;-भारत में भी मिशनरियों में सौ सवा-सौ साल पहले तक निम्न जातियों के प्रति चिंता जैसा कोई संकेत तक नहीं मिलता, जिसका आज वे दावा करते हैं। गोवा में कई चर्च आज भी उच्च जाति और निम्न जाति के लोगों के लिए आने-जाने के अलग दरवाजे रखते हैं। ऐसी चीज किसी हिंदू मंदिर में नहीं है। भारत में सक्रिय मिशनरी संस्थाएं अपनी शैक्षिक, बौद्धिक गतिविधियों में उसी हद तक दलित-आदिवासी पक्षी हैं, जहां तक यह हिंदू धर्म-समाज को तोड़ने में सहायक हो। वे डॉ. आंबेडकर का उपयोग भी अपने स्वार्थ के लिए करती हैं, लेकिन आर्य-अनार्य सिद्धांत, बुद्ध धर्म का विध्वंस, हिंदू-मुस्लिम मुद्दों आदि पर वे उनकी बातें नितांत उपेक्षित करते हैं।

भारत में सेंट थॉमस या जेवियर ने बल प्रयोग और छल-प्रपंच का प्रयोग कर जमीन फैलाई;-भारत में सेंट थॉमस या जेवियर समानता का संदेश लेकर नहीं आए थे। उन्होंने बल प्रयोग और छल-प्रपंच का प्रयोग कर जमीन फैलाई। इसमें दलित-आदिवासी समूह उसी तरह मोहरे हैं, जैसे पहले उन्होंने ब्राह्मणों को बनाने की कोशिश की थी। उसमें नाकामी के कारण ही उनका ब्राह्मण-विद्वेष और बढ़ा। झूठे प्रचार से ही हम जातियों के बारे में नकारात्मक बातें ही सुनते हैं। जाति में सुरक्षा, सहयोग, परिवार भावना लुप्त कर दी जाती है। इसके साक्ष्य कई ब्रिटिश सर्वेक्षणों में है। सभी जातियों का अपना-अपना गौरव था। उनमें हीनता की भावना नहीं थी, जिसका अतिरंजित प्रचार होता है। वस्तुत: जातियों के कारण भी हिंदू इस्लाम और ईसाइयत के धर्मांतरणकारी हमले झेलकर बचे रह सके।

मिशनरी संस्थानों में भारतीय इतिहास का विकृत पाठ पढ़ाया जाता है;-हमारी हालत पश्चिम एशिया जैसी नहीं हुई, जहां की सभ्यताएं इस्लाम ने कुछ ही वर्ष में नष्ट कर दीं। गत सौ साल से मिशनरियों की खुली नीति दलितों और वनवासियों को मुख्य निशाना बनाना है, क्योंकि दूसरी जातियों में उनकी दाल नहीं गली। इसीलिए उन्होंने ब्राह्मणों के विरुद्ध अधिक दुष्प्रचार किया, ताकि उन्हें निम्न जातियों का शोषक बताकर खुद को संरक्षक दिखा सकें। मिशनरी संस्थानों में भारतीय इतिहास का विकृत पाठ पढ़ाया जाता है, ताकि ब्राह्मण-विरोधी भावना पुष्ट हो सके। निरंतर प्रचार से बच्चे और युवा झूठी बातें मान लेते हैं। वे नहीं जानते कि हमारे महान कवियों, ज्ञानियों और संतों में हर जाति के लोग रहे हैं। शिक्षा में ब्राह्मण-विरोध भरर्ना ंहदू-विरोध का ही छद्म रूप है।

ब्राह्मणों ने जबरन धर्मांतरित कराए गए मुस्लिमों, ईसाइयों को वापस हिंदू बनाने के काम किए;-चूंकि ब्राह्मणों ने जबरन धर्मांतरित कराए गए मुस्लिमों, ईसाइयों को वापस हिंदू बनाने के काम किए, इसीलिए मिशनरी संगठनों ने उन्हें खास तौर पर निशाने पर लिया। दुर्भाग्यवश स्वतंत्र भारत में मिशनिरयों का काम और सहज हो गया। हमारे सेक्यूलर-वामपंथी अंग्रेजीदां बौद्धिक वर्ग ने उन्हें विशिष्ट आदर और सहूलियतें दीं। कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने हिंदू धर्म को नकारने के लिए ब्राह्मणवाद को निशाना बनाया। जातिवादी नेताओं ने अपने वोट-बैंक को मूर्ख बनाने हेतु ब्राह्मणों को निशाने पर लिया। इस प्रकार चौतरफा दुष्प्रचार से कथित हिंदूवादी भी मिशनरियों का रौब खाने लगे। वे स्वामी विवेकानंद का यह मूल्यांकन भी भूल गए कि ‘ब्राह्मण ही हमारे पूर्वपुरुषों के आदर्श थे।’ हमारे शास्त्रों में ब्राह्मण का आदर्श विशिष्ट रूप से प्रतिष्ठित है। भारत के बड़े से बड़े राजाओं के वंशधर यह कहने की चेष्टा करते हैं कि ‘हम अमुक कौपीनधारी, सर्वस्वत्यागी, वनवासी, फल-मूलाहारी और वेदपाठी ऋषि की संतान हैं।’

नई दिल्ली। दिल्ली दंगा मामले में पुलिस ने बुधवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, आईपीसी और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत दंगों के 15 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। कड़कड़डूमा कोर्ट में दायर चार्जशीट 10,000 पन्नों से अधिक की है।विस्तृत साजिश रचने के मामले में स्पेशल सेल ने (Unlawful Activities Prevention Act) यूएपीए  के तहत कुल 20 आरोपितों को गिरफ्तार किया है लेकिन अभी 15 के खिलाफ ही आरोप पत्र दायर किए गए हैं। यह आरोप पत्र पुलिस को 17 सितंबर से पहले कोर्ट में दाखिल करना था। इसको लेकर स्पेशल सेल दो बार हाई कोर्ट से समय मांग चुकी थी। चार्जशीट में जिन 15 लोगों को आरोपित बनाया गया है उनके नाम अभी तक सामने नहीं आये हैं। लेकिन समाचार एजेंसी एएनआइ ने बताया कि इनमें उमर खालिद और देशद्रोह का आरोपित शरजील इमाम के नाम शामिल नहीं हैं। इन दोनों को दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। 

 UAPA के तहत ये हैं 20 आरोपित

  1. दानिश (Danish)
  2. मो. परवेज अहमद (Mohd. Parvez Ahmad)
  3. मो. इलयास (Mohd Ilyas)
  4. खालिद (Khalid)
  5. इशरत जहां (Isharat Jahan)
  6. मीरन हैदर (Meeran Haider)
  7. ताहिर हुसैन (Tahir Hussain)
  8. गुलीशा (Gullisha)
  9. सफूरा जरगर (Safoora Zargar)
  10. शफा उर रहमान (Shafa Ur Rehman)
  11. आसिफ इकबाल तनहा (Asif Iqbal Tanha)
  12. शादाब अहमद (Shadab Ahmed)
  13. नताशा नरवाल (Natasha Narwal)
  14. देवांगना कलीता (Devangna Kalita)
  15. तसलीम अहमद(Tasleem Ahmed)
  16. सलीम मलिक (Saleem Malik)
  17. मो. सलीम खान (Mohd. Saleem Khan)
  18. अतहर खान (Athar Khan)
  19. उमर खालिद (Umar Khalid)
  20. शरजील इमाम (Sharjeel Imam)
     

50 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत;-बता दें कि दंगा में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हुए थे। इस मामले में कई आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि 22 व 23 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दिल्ली में आने के बाद उत्तर-पूर्वी जिले में दंगाइयों ने जानबूझकर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया ताकि विरोध में दंगा भड़क सके। 

दंगे में कुल 751 एफआइआर हुई है दर्ज;-उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे कुल 751 एफआइआर दर्ज की गई है। पुलिस ने अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतों पर 410 से अधिक एफआइआर दर्ज की, जबकि दूसरे समुदाय के द्वारा 190 से अधिक एफआइआर दर्ज की गई है। अन्य मुकदमे दैनिक डायरी प्रविष्टियों के आधार पर पंजीकृत किए गए थे। इसकी जानकारी दिल्ली के पुलिस कमिश्ननर एनएन श्रीवास्तव ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त जूलियो रिबेरो को लिखे पत्र में दी है। उन्होंने बताया कि बिना किसी भेदभाव के 1571 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। कई मामलों में चार्जशीट दायर की गई है, जबकि कई अन्य में जांच अभी भी जारी है।12 सितंबर को रिबेरो की ओर से मिले पत्र के जवाब में दिल्ली के पुलिस कमिश्ननर ने कहा कि पुलिस ने बगैर जाति-धर्म देखे निष्पक्ष तरीके से कर्रवाई की है। उम्मीद है एक अनुभवी पुलिस अधिकारी के रूप में आप कार्रवाई से सहमत होंगे।

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