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कुआलालंपुर। रहस्मयी तरीके से गायब हुए मलेशियाई विमान एमएच 370 की खोज एक बार फिर असफल रही। 4 साल पहले लापता विमान के बारे में अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बोर्ड एयरलाइंस की उड़ान एमएच 370 में लापता यात्रियों के परिवारों ने कहा कि उनको विमान के गायब होने की जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें कोई भी नई जानकारी नहीं है। यह रिपोर्ट निजी कंपनी के विमान खोजने के दो महीने बाद आई है। यह विमान आठ मार्च 2014 को 239 लोगों को लेकर कुआलालंपुर से बीजिंग जाते वक्त अचानक लापता हो गया था। एमएच 370 विमानन क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा रहस्य बन गया है।लापता यात्रियों के परिवारवालों का कहना है कि जारी की गई रिपोर्ट में बहुत सारी गलतियां है। इनमें प्रोटोकॉल और दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इन गलतियों को दोहराया नहीं जाएगा और भविष्य में उन्हें रोकने के लिए उपाय किए जाएंगे। मलेशिया ने 29 मई को विमान की तलाश करने का जिम्मा अमेरिकी फर्म ओशन इन्फिनिटी को दिया था। फर्म ने हिंद महासागर में 112,000 वर्ग किमी तक विमान की तलाश की, लेकिन इसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला। ऑस्ट्रेलिया, चीन और मलेशिया के बाद विमान की यह दूसरी बड़ी खोज थी, इस खोज पर 147 मिलियन डॉलर खर्च किए गए थे।
2014 में लापता हुआ था मलेशियाई विमान:-एमएच 370 विमान मार्च, 2014 में कुआलालंपुर से बीजिंग जाते वक्त लापता हो गया था। इसमें 239 यात्री सवार थे। इसका पता लगाने के लिए विमानन इतिहास का सबसे बड़ा खोज अभियान शुरू किया गया था, जिसमें कई देश शामिल थे। लेकिन विमान का कोई सुराग नहीं मिला। पिछले साल जनवरी में खोज बंद कर दी गई। इसी अभियान के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खोजी दल को 3900 मीटर गहराई में दो जगह कुछ टुकड़े और मलबा मिला था।
निजी कंपनी ने फिर शुरू की थी खोज:-लापता विमान की खोज इस साल मई में फिर शुरू की गई थी। इस बार यह काम एक निजी खोजी कंपनी कर रही थी। मलेशिया ने उसे "नो फाइंड, नो फी" के आधार पर काम दिया था। यानी खोज नहीं होने पर कोई भुगतान नहीं किया था।

वॉशिंगटन। पूरी दुनिया में घूमना हर किसी का सपना होता है, लेकिन जब सफर साइकिल से करना हो तो सोचकर ही पसीने छूट जाते हैं। पर यह कारनामा कर दिखाया है ब्रिटेन के 21 वर्षीय किशोर ने, जिसने एक पहिए की साइकिल के साथ तीन साल में पूरी दुनिया का चक्कर लगा लिया। उन्होंने इस दौरान चैरिटी के लिए ढाई करोड़ से ज्यादा का दान भी जुटाया है।वे विश्व के पहले व्यक्ति बन गए हैं, जिन्होंने यह यात्रा बिना किसी समर्थन पूरी की। मार्च 2015 में एड प्रैट ने 19 वर्ष की उम्र में टाउटन स्थित समरसेट से अपनी 21 हजार मील की यात्रा एक पहिए की साइकिल के साथ शुरू की थी। उन्होंने अपने साथ जरूरत के सामान के तौर पर 36 इंच की निंबस ओरेकल यूनिसाइकिल से जुड़े पैनियर में एक तंबू, सो बैगिंग, स्टोव, कुछ खाने का सामान रखा था। उन्होंने यह यात्रा बिना किसी सहायता व समर्थन के पूरी की। एड ने इस सफर के फोटो सोशल साइट्स पर भी पोस्ट किए हैं। इसमें कई देशों के खास स्थानों पर फोटो लिए गए हैं, जिनमें एड प्रैट नजर आ रहे हैं। इन देशों में गए प्रैट अपनी साइकिल से दक्षिण एशिया और यूरोप 20 से ज्यादा देशो में गए थे।वे चीन, सिंगापुर, योरप के तुर्की, जॉर्जिया, अजरबैजान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिर अमेरिका पहुंचे। न्यूयॉर्क से एडनबर्ग गए और फिर अपनी यात्रा का समापन समरसेट में किया। वे डेढ़ दर्जन देशों के करीब 45 से ज्यादा शहरों से होकर गुजरे थे।
चैरिटी के लिए जुटाए ढाई करोड़ से ज्यादा रुपए;-एड प्रैट ने इतनी कम उम्र में बहुत बड़ी दान राशि जुटाने का कारनामा भी किया। उन्होंने दुनियाभर में घूमकर 2 करोड़ 69 लाख 81 हजार से ज्यादा राशि जुटाई है। यह राशि गरीब बच्चों की पढ़ाई, इलाज और उनके बेहतर भविष्य के लिए उपयोग की जाएगी।
बीच में ही छोड़ना पड़ी पढ़ाई:-एड के माता-पिता निक और नैक्सन ने बताया कि बेटे ने बहुत ही नेक काम किया है। इसके लिए एड को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ना पड़ी। चैरिटी और स्कूल के अध्यक्ष लक सीमोन ने बताया कि एड प्रैड का एक मेल आया था, जिसमें उन्होंने चैरिटी के लिए दुनिया के सफर पर निकलने की योजना का जिक्र किया। हमने एड के माता-पिता से संपर्क किया। इसके बाद सारी दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इस सफर की शुरुआत समरसेट से की गई।
फैक्ट -
- 21,000 मील की यात्रा
- 20 से ज्यादा देश
- 45 से ज्यादा शहर
- 2 करोड़ 69 लाख 81 हजार से ज्यादा खर्च

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और चारों प्रांतीय असेंबलियों के लिए बुधवार को हुए चुनावों के अंतिम नतीजे चुनाव आयोग ने शनिवार को घोषित कर दिए। इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) को नेशनल असेंबली में 116 सीटें हासिल हुई हैं। चूंकि 270 सीटों पर चुनाव कराए गए थे, लिहाजा उन्हें बहुमत के लिए 20 और सीटों की दरकार है। उन्होंने नवाज शरीफ की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी-नवाज (पीएमएल-एन) और बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को भ्रष्ट करार देते हुए उनका समर्थन लेने की संभावना से इन्कार किया है।माना जा रहा है कि वह निर्दलियों और एक छोटे दल की मदद से गठबंधन सरकार बना सकते हैं।पाकिस्तान चुनाव आयोग की ओर से शनिवार को नतीजों की घोषणा के बाद इमरान खान ने सरकार गठन के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलियों से बातचीत का सिलसिला तेज कर दिया। पीटीआइ पदाधिकारियों ने बताया कि वे निर्दलियों और कम से कम एक अन्य राजनीतिक पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।पीटीआइ के वरिष्ठ प्रवक्ता फैसल जावेद खान ने बताया कि मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के साथ भी बातचीत जारी है। एमक्यूएम को इस चुनाव में छह सीटें मिली हैं। जबकि निर्दलियों के खाते में 13 सीटें आई हैं। फैसल ने बताया कि इमरान खान पाकिस्तान के स्वाधीनता दिवस 14 अगस्त से पहले प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।दो नवगठित पार्टियों द ग्रांड डेमोक्रेटिक अलायंस (जीडीए) और बलूचिस्तान आवामी पार्टी (बीएपी) ने भी इमरान खान को समर्थन के संकेत दिए हैं। दोनों को क्रमश: दो और चार सीटें मिली हैं। बता दें कि पाकिस्तानी कानून के मुताबिक राष्ट्रपति को नेशनल असेंबली का पहला सत्र चुनाव के 21 दिनों के भीतर बुलाना चाहिए ताकि नए सदस्यों को शपथ दिलाई जा सके और नए स्पीकर का चुनाव हो सके।चुनाव आयोग द्वारा घोषित नतीजों के मुताबिक इमरान खान की पार्टी पीटीआइ को 1,68,57,035 मत हासिल हुए हैं। जबकि 64 सीटें हासिल करने वाली पीएमएल-एन को 1,28,94,225 और 43 सीटें पाने वाली पीपीपी को 68,94,296 मत हासिल हुए। मतों की संख्या के मामले में निर्दलीय चौथे स्थान पर रहे, उन्हें 60,11,297 वोट मिले। लेकिन सीटों के लिहाज से चौथे स्थान पर मुत्ताहिदा मजलिस ए अमल (एमएमएपी) रही जिसे 13 सीटें मिलीं। उसे 25,30,452 वोट हासिल हुए।
शरीफ और भुट्टो की पार्टियों से नहीं लेंगे समर्थन:-चूंकि 270 सीटों पर चुनाव कराए गए थे, लिहाजा उन्हें बहुमत के लिए 20 और सीटों की दरकार है। उन्होंने नवाज शरीफ की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी-नवाज (पीएमएल-एन) और बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को भ्रष्ट करार देते हुए उनका समर्थन लेने की संभावना से इन्कार किया है। माना जा रहा है कि वह निर्दलियों और एक छोटे दल की मदद से गठबंधन सरकार बना सकते हैं। पाकिस्तान चुनाव आयोग की ओर से शनिवार को नतीजों की घोषणा के बाद इमरान खान ने सरकार गठन के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलियों से बातचीत का सिलसिला तेज कर दिया।
छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन:-पीटीआइ पदाधिकारियों ने बताया कि वे निर्दलियों और कम से कम एक अन्य राजनीतिक पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। पीटीआइ के वरिष्ठ प्रवक्ता फैसल जावेद खान ने बताया कि मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के साथ भी बातचीत जारी है। एमक्यूएम को इस चुनाव में छह सीटें मिली हैं। जबकि निर्दलियों के खाते में 13 सीटें आई हैं। फैसल ने बताया कि इमरान खान पाकिस्तान के स्वाधीनता दिवस 14 अगस्त को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। दो नवगठित पार्टियों द ग्रांड डेमोक्रेटिक अलायंस (जीडीए) और बलूचिस्तान आवामी पार्टी (बीएपी) ने भी इमरान खान को समर्थन के संकेत दिए हैं। दोनों को क्रमश: दो और चार सीटें मिली हैं। बता दें कि पाकिस्तानी कानून के मुताबिक राष्ट्रपति को नेशनल असेंबली का पहला सत्र चुनाव के 21 दिनों के भीतर बुलाना चाहिए ताकि नए सदस्यों को शपथ दिलाई जा सके और नए स्पीकर का चुनाव हो सके।

इस्लामाबाद। नेशनल असेंबली के चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरे पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) ने कहा है कि उसके नेता इमरान खान 14 अगस्त से पहले प्रधानमंत्री पद की शपथ ले लेंगे। उस दिन पाकिस्तान अपना स्वाधीनता दिवस मनाता है।
छोटी पार्टियों और निर्दलीय सांसदों का समर्थन जुटाने की कवायद:-पीटीआइ के नेता नईनुल हक ने कहा कि हमने अपना होमवर्क कर लिया है। 14 अगस्त से पहले नई सरकार का गठन हो जाएगा। इसके लिए पार्टी छोटी पार्टियों और निर्दलीय सांसदों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। उल्लेखनीय है कि सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद पीटीआइ स्पष्ट बहुमत से पीछे रह गई।इस बीच, पाकिस्तान में राजनीतिक सरगर्मी जोरों पर है। सियासी बिसात पर सभी पार्टियां अपने हिसाब से गोटी चल रही हैं। इसके लिए एक तरफ खुले में बैठकें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ गोपनीय वार्ताओं का दौर भी जारी है।'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, संसद की दो बड़ी पार्टियां- पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की अगले कुछ दिनों में बैठक होने की संभावना है। इसमें पीटीआइ सरकार को संसद में घेरने के लिए संयुक्त रणनीति अपनाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। पाकिस्तानी समाचार चैनल नई सरकार के संभावित मंत्रियों और अन्य अहम पदों के लिए कयास लगाने में जुटे हुए हैं।पीटीआइ के जो नेता एक से अधिक चुनाव क्षेत्रों से जीते हैं उनको अतिरिक्त सीटों से त्यागपत्र देना होगा। खुद इमरान खान पांच सीटों से चुनाव जीते हैं। इसलिए उनको चार सीटों से त्यागपत्र देना होगा। तक्षशिला के गुलाम सरवर खान दो सीटों से जीते हैं। उनको भी एक सीट छोड़नी पड़ेगी। खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री परवेज खट्टक नेशनल असेंबली और प्रांतीय विधानसभा दोनों के लिए चुने गए हैं। यदि पार्टी उनको फिर से मुख्यमंत्री बनाती है, तो उन्हें नेशनल असेंबली से त्यागपत्र देना होगा। इन स्थितियों का जायजा लेने के बाद ही पार्टी ने छोटी पार्टियों और निर्दलीय सांसदों का समर्थन लेने का फैसला किया है।सूत्रों के अनुसार, कुछ पार्टियों ने इमरान को समर्थन देने का एलान भी कर दिया है, लेकिन, इसके बावजूद उनके समर्थन में फिलहाल 122 सांसद ही हैं। यह सरकार गठन के लिए जरूरी सांसदों से 15 कम है।
संसद का गणित
342 सीटें हैं नेशनल असेंबली में
272 सीटों पर होता है चुनाव
115 सीटें पीटीआइ को
64 सीटें पीएमएल-एन को
43 सीटें पीपीपी को
137 सीटें सामान्य बहुमत के लिए जरूरी।

वाशिंगटन। अमेरिका में महज 15 साल की उम्र में इंजीनियर बनने के बाद भारतवंशी तनिष्क अब्राहम अब पीएचडी करने की तैयारी कर रहे हैं। विलक्षण प्रतिभा के धनी तनिष्क ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कर नया कीर्तिमान रचा है।अपनी सफलता से उत्साहित तनिष्क ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं और अपनी उपलब्धियों पर गर्व भी महसूस करता हूं।' केरल से ताल्लुक रखने वाले उनके माता-पिता ताजी और बिजू अब्राहम का कहना है, 'वह बहुत जुनूनी है। हमें बस उसका साथ देना है।'इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद पीएचडी और आगे चलकर मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए तनिष्क ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, डेविस में दाखिला लिया है। तनिष्क आगे चलकर एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) करना चाहते हैं। अपने सपनों के बारे में बताते हुए तनिष्क ने कहा, 'अन्य लोगों की तरह मेरा भी सपना कैंसर पर शोध करने का है। मैं कैंसर के इलाज के लिए नए तरीके तलाशना चाहता हूं।' तनिष्क ने बुरी तरह जले मरीजों को छुए बिना उनके दिल की धड़कन मापने का उपकरण बनाने में भी सफलता हासिल की है।

नई दिल्‍ली। संयुक्‍त राष्‍ट्र के बारे में आपने काफी कुछ सुना होगा। अकसर मुसीबत के समय में विभिन्‍न देशों में विभिन्‍न तरह की मदद के रूप में संयुक्‍त राष्‍ट्र हमेशा से ही अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। इसके अलावा संयुक्‍त राष्‍ट्र की अगुवाई में हिंसा की जद में आए विभिन्‍न देशों में शांति सेना भेजने का काम भी इसके ही जिम्‍मे आता है। सीरिया से लेकर अफ्रीका के कई देशों तक संयुक्‍त राष्‍ट्र कई तरह की भूमिकाओं में दिखाई देता है। लेकिन अगर इतनी बड़ी संस्‍था ही आर्थिक संकट से जूझती हुई दिखाई दे तो ताज्‍जुब जरूर होता है। लेकिन ये सच है। ऐसा किसी और ने नहीं बल्कि खुद संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेस ने ही इसके सदस्‍य देशों से यह सब कहा है।
गुतरेस की अपील;-उन्‍होंने सदस्‍य राष्‍ट्रों से अनिवार्य अनुदान की राशि पूरी और समय पर अदा करने का आग्रह किया है। उन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र के खराब होते आर्थिक हालातों का जिक्र करते हुए सदस्‍य देशों को एक पत्र भी लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि ‘नियमित बजट में सदस्य देशों की ओर से अनुदान राशि अदा करने में देरी के चलते नगदी की कमी का सामना जिस तरह हम कर रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं किया। गुतरेस का ये भी कहना है कि किसी भी वित्तीय वर्ष में हमारा धन इतनी जल्दी इतना कम कभी नहीं हुआ।
भारत कर चुका भुगतान, कई अब भी बाकी:-आपको बता दें कि भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र की स्‍थापना से ही इसका सदस्‍य है। इसके अलावा भारत ने इसकी स्‍थापना में काफी अहम भूमिका भी अदा की थी। जहां तक भारत के भुगतान का सवाल है तो 26 जुलाई तक न सिर्फ भारत बल्कि इसके 112 सदस्य देशों ने अपने नियमित बजट बकाये का पूरा भुगतान कर दिया था। भारत ने इस साल 29 जनवरी को 1.79 करोड़ डॉलर (लगभग 123 करोड़ रुपये) का भुगतान किया था। इस साल जून के आखिर में सदस्य देशों द्वारा 2008 के आकलन के लिए अदा की गई राशि करीब 1.49 अरब डॉलर (लगभग 10,238 करोड़ रुपये) रही।
पिछली अवधि में मिली राशि:-पिछले साल इसी अवधि में नियमित बजट में जमा राशि 1.70 अरब डॉलर (लगभग 11,680 करोड़ रुपये) से कुछ अधिक थी। आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी लेकिन इसके बाद भी कुल देशों ने अब तक भी अपने नियमित बजट बकाये का भुगतान नहीं किया है। इन देशों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, ब्राजील, मिस्र, इजरायल, मालदीव, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सेशेल्स, सूडान, सीरिया, अमेरिका और जिम्बाब्वे का नाम शामिल हैं।
कौन सा देश करता है कितनी मदद:-आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के कुल खर्च का सबसे ज्यादा हिस्सा अमेरिका देता है। वह वैश्विक निकाय को सालाना मुख्य बजट 540 करोड़ डॉलर (लगभग 37,095 करोड़ रुपये) का 22 फीसद भुगतान करता है। शांति अभियानों का वह 28.5 फीसद खर्च उठाता है। शांति अभियानों का सालाना बजट 790 करोड़ डॉलर (लगभग 54,245 करोड़ रुपये) का है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली रंधावा ने कहा कि अन्य देशों को अपना भुगतान बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपना हिस्सा 25 फीसद से आगे नहीं बढ़ाएगा।
यूएन ने की योगदान में कमी:-अमेरिका की बात चली है तो आपको ये भी बता दें कि अमेरिका ने 2018-19 के लिए यूएन के बजट में ₹18 अरब से अधिक की कटौती करने की घोषणा की थी। अमेरिका का कहना था कि वह यूएन के मैनेजमेंट और सपोर्ट फंक्शन बजट में भी कटौती करेगा। यूएन चार्टर के तहत अमेरिका यूएन के सालाना बजट में 22 फीसद योगदान देता है। 2017-18 में अमेरिका ने करीब ₹76 अरब का योगदान दिया था।
क्‍या है संयुक्‍त राष्‍ट्र:-गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय कानून को सुविधाजनक बनाने में सहयोग करना, अंतरराष्‍ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, मानव अधिकार और विश्व शांति शामिल है। आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्‍टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकारपत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई थी, जिसमें भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के विजेता देशों ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्‍ट्रीय संघर्ष में हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से स्थापित किया था। वे चाहते थे कि भविष्य में फिर कभी इस तरह विध्‍वंसकारी युद्ध सामने न आए। संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश (संयुक्त राज्य अमेरिका, फ़्रांस, रूस और संयुक्त राजशाही) द्वितीय विश्वयुद्ध में बहुत अहम देश थे।
यूएन के सदस्‍य देश:-वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में 193 देश हैं। यूएन संरचना में आम सभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक व सामाजिक परिषद, सचिवालय और अंतराष्‍ट्रीय न्यायालय शामिल है। संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित है। इसके अलावा और अहम संस्थाएं जीनेवा, कोपनहेगन आदि में भी है।
यूएन की भाषा:-संयुक्त राष्ट्र ने 6 भाषाओं को राज भाषा के तौर पर स्वीकृत किया हुआ है। इसमें अरबी, चीनी, अंग्रेज़ी, फ़्रांसीसी, रूसी और स्पेनिश शामिल हैं। इनमें से केवल अंग्रेज़ी और फ्रांसीसी भाषा को ही काम-काज की भाषा के तौर पर माना गया है। आपको यहां बता दें कि इसकी स्थापना के समय, केवल चार राजभाषाएं स्वीकृत की गई थीं, जिनमें चीनी, अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी और रूसी भाषा शामिल थी।

जकार्ता। इंडोनेशिया के लंबोक द्वीप में 6.4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की वजह से 10 लोगों की मौत हो गई और 40 घायल हो गए हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार भूकंप सुबह 6 बजकर 47 मिनट पर आया और इसका केंद्र लंबोक के मताराम से 50 किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित था जिसकी आबादी 3 लाख 19,000 है। लोकप्रिय गिली द्वीप समूह रिसॉर्ट्स के प्रवेश द्वार…
लाहौर। पाकिस्तान में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने का भारत पर कैसा असर होगा? यह तो अब आने वाला वक्त बताएंगे, लेकिन यह अभी से साफ हो गया है कि इमरान खान चीन के साथ मधुर संबंधों को बनाकर रखना चाहते हैं। दरअसल, क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) ने पाकिस्तान-चीन संबंधों पर जोर देते हुए कई ट्वीट किए हैं।'CPEC की दिशा में बढ़ना…
यरुशलम। इजरायल ने 17 साल की फलस्तीनी किशोरी अहद तमीमी को रविवार को अपनी जेल से रिहा कर दिया। तमीमी पिछले साल दिसंबर में वेस्ट बैंक स्थित अपने गांव में एक इजरायली सैनिक को पीटकर फलस्तीन की हीरो बन गई थीं। उनकी मां नरीमन ने इस घटना को फेसबुक पर लाइव कर दिया था। वीडियो वायरल होने से यह घटना दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई थी।इजरायल ने सैनिक…
वाशिंगटन। अपने नागरिकों के तिब्बत जाने में अड़चन पर अमेरिका सख्त हो गया है। संसद की एक समिति ने एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को तिब्बत जाने से रोकने वाले चीनी अधिकारियों को अपने यहां प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। अमेरिकी संसद की न्यायपालिका समिति ने सर्वसम्मति से इस विधेयक को मंजूर कर लिया है।अब इस विधेयक को प्रतिनिधि सभा…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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