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उत्तर पूर्व नाइजीरिया से कम से कम 31 लकड़हारे लापता हो गए हैं, जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि बोको हराम आतंकवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया है। सुरक्षा सूत्रों ने यह जानकारी दी है। इससे पहले इसी क्षेत्र में सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में 30 सैनिक लापता हो गए थे।सूत्रों ने एजेंसी को बताया कि लापता हुए अधिकतर लकड़हारों की उम्र 20 के करीब थी और वे जलाने वाली लकड़ी लेने बोको हराम के कब्जे वाले क्षेत्र गामबोरु गए थे। गामबोरु में सैनिको के साथ मिलकर बोको हराम के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले मिलिशिया उमर कच्चाला ने कहा, ''सभी 31 लोग मंगलवार से दिखाई नहीं दिए हैं और यह स्पष्ट है कि उन्हें बोको हराम ने पकड़ लिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को फटकार लगाने और उसके बाद इस्लामाबाद की तरफ से हाफिज सईद के संगठन के चंदा जुटाने पर रोक के बाद अब जमात उद दावा कानून नोटिस भेजने की तैयारी में है। जेयूडी ने कहा कि वह बदनाम करने के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय को कानूनी नोटिस भेजेगा।पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर का ये बयान की जमात उद दावा पर कार्रवायी अमेरिकी दबाव में नहीं किया गया, जमात उद दावा के प्रवक्ता याहया मुजाहिद ने कहा कि दस्तगीर वही भाषा बोल रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बोल रहे हैं।उन्होंने इस बात के लिए भी रक्षामंत्री की कड़ी आलोचना की कि यह कार्रवायी जेयूडी, एफआईएफ और अन्य संगठनों पर की गई है ताकि वह स्कूली छात्रों पर आतंकवादी अब और फायरिंग ना कर सके। मुजाहिद ने कहा कि यह बेहद अपमानजक है। हम रक्षामंत्री के खिलाफ इस कथन के लिए कानून नोटिस भेज रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद को रोके जाने की धमकी के बाद पाकिस्तान तहरीके इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान ने गुरुवार को कहा कि, "अब सही समय आ गया है जब पाकिस्तान को अमेरिका से अपने संबंध तोड़ लेने चाहिए।"दुनिया न्यूज ने उनके हवाले से कहा, 'पाकिस्तान में अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अमेरिका अब सारा दोष पाकिस्तान को दे रहा है और मैं शुरू से ही कहता रहा हूं कि, पाकिस्तान को दूसरे के लिए कभी नहीं लड़ना चाहिए और यह किराए की बंदूक जैसी बात है।'उन्होंने आगे कहा कि, "अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए अब पाकिस्तान के पास चीन, रूस और ईरान के साथ मिलकर एक सहयोगी तंत्र बनाने का व्यावहारिक उपाय है।" खान ने कहा कि, 'पाकिस्तान की जनता को अपनी सरकार से उम्मीदें हैं कि, वह राष्ट्र की संप्रभुता तथा अस्मिता को बरकरार रखेगी।'

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को जब अचंभित करने वाली चुनावी जीत का पता चला तो वह खुश नहीं थी बल्कि रोने लगी थीं। अमेरिका के एक पत्रकार की नई किताब में यह खुलासा किया गया है। माइकल वॉल्फ द्वारा लिखी गई 'फायर एंड फरी: इनसाइड द ट्रंप व्हाइट हाउस' किताब में दावा किया गया है कि, ट्रंप का अंतिम लक्ष्य कभी भी जीतना नहीं था।ट्रंप ने अपने सहायक सैम नुनबर्ग को चुनावी दौड़ की शुरआत में कहा था कि, उनका अंतिम लक्ष्य कभी भी जीतना नहीं था। मैं दुनिया में सबसे मशहूर व्यक्ति हो सकता हूं। किताब के अंशों के अनुसार, उनके लंबे समय से दोस्त रहे फॉक्स न्यूज के पूर्व प्रमुख रोजर एलिस कहना चाहते थे कि, अगर तुम टेलीविजन में करियर बनाना चाहते हो तो सबसे पहले राष्ट्रपति पद के लिए खड़े हो। न्यूयॉर्क पत्रिका में इस किताब के अंश "डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे" शीर्षक से प्रकाशित हुए हैं, जिसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने इन्हें खारिज किया है।सारा ने कहा कि, असल में एक छोटी सी बातचीत हुई थी, जिसका किताब से कोई लेना देना नहीं है। मुझे लगता है कि, राष्ट्रपति के कार्यभार संभालने के बाद से करीब पांच से सात मिनट यह बातचीत हुई थी और उनके साथ केवल इतनी ही बातचीत हुई थी। वॉल्फ के मुताबिक, व्हाइट हाउस में प्रवेश करने के बाद ट्रंप को कामकाज के बारे में बहुत कम पता था। लेखक ने दावा किया कि ट्रंप को सुझाव देना सबसे ज्यादा जटिल था। ट्रंप के राष्ट्रपति के कामकाज का मुख्य मुद्दा यह था कि वे अपनी विशेषज्ञता पर विश्वास करते थे चाहे वह विचार कितना ही अप्रासंगिक या तुच्छ ही क्यों ना हो।किताब में कहा गया है कि, जूनियर ट्रंप ने अपने एक दोस्त को बताया था कि, चुनावी रात को आठ बजे के बाद जब अप्रत्याशित रुझानों ने ट्रंप की जीत की पुष्टि कर दी थी, तो उसके पिता ऐसे लग रहे थे जैसे उन्होंने भूत देख लिया है। मेलानिया खुश होने की बजाय रो रही थीं। न्यूयॉर्क मैगजीन के अनुसार चुनाव के दिन से गत अक्तूबर तक वॉल्फ ने 18 महीने तक राष्ट्रपति और उनके वरिष्ठ कर्मचारियों से बातचीत की और उनका साक्षात्कार लिया।वॉल्फ ने कहा कि, व्हाइट हाउस में ट्रंप के खुद के व्यवहार ने इतनी अराजकता और अव्यवस्था फैलाई जितनी किसी और चीज ने नहीं। व्हाइट हाउस ने इस किताब की सामग्री को खारिज किया है। यह किताब अगले सप्ताह से दुकानों पर उपलब्ध होगी। सैंडर्स ने कहा कि, यह किताब झूठ से भरी है और इसमें उन लोगों के हवाले से भ्रामक तथ्य रखे गए हैं, जिनकी व्हाइट हाउस तक कोई पहुंच नहीं है। उन्होंने अपने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा है, "लेखक को इस किताब के लिए व्हाइट हाउस तक कोई पहुंच नहीं मिली। वास्तव में वह कभी राष्ट्रपति के साथ नहीं बैठे।"

 

क्या आप जानते हैं कि जापान की सड़कों पर ट्रैफिक सिग्नल में नीली लाइट का प्रयोग किया जाता है? पड़ गए न सोच में कि भला ट्रैफिक सिग्नल में नीली लाइट का क्या प्रयोग... तो चलिए जानते हैं आपके इस सवाल का जवाब।
यहां हैं भाषाई झोल:-सैकड़ों वर्ष पहले जापानी भाषा में सिर्फ चार रंग हुआ करते थे- काला, सफेद, लाल और नीला। नीले रंग को जापानी भाषा में ‘एओ’ कहते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि उस समय जापान में हरे और नीले दोनों रंगों के लिए एक ही शब्द ‘एओ’ का इस्तेमाल होता था। लेकिन कुछ सालों बाद हरे रंग के लिए नया शब्द ‘मिडोरी’ विकसित किया गया। दोनों रंगों के लिए अलग-अलग नाम होने के बावजूद आज भी जापान में हरे रंग की चीजों के लिए ‘एओ’ शब्द का ही प्रयोग होता है, जबकि दिखने में ये चीजें ‘मिडोरी’ यानी कि हरी होती हैं। तो कहना गलत नहीं होगा कि जापान में ट्रैफिक लाइट के रंग कहीं न कहीं इन्हीं नीले और हरे के भाषाई मिश्रण का ही नतीजा है।
बात ट्रैफिक लाइट की;-जापान में ट्रैफिक लाइट की शुरुआत वर्ष 1930 में हुई थी। उस समय ‘गो’ के लिए हरी लाइट का ही प्रयोग होता था, यानी दिखने में भी यह हरे रंग की ही थी। लेकिन आधिकारिक दस्तावेज या लिखित रूप में ट्रैफिक लाइट के हरे रंग को ‘मिडोरी’ न लिखकर ‘एओ’ लिखा गया, जिसका अर्थ होता है नीला। और शायद यही वजह थी कि जापान ने वर्ष 1968 में वियना कन्वेन्शन ऑन रोड साइन एंड सिग्नल की संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, जबकि भारत सहित लगभग 69 देश इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। वियना अंतर्राष्ट्रीय संधि का उद्देश्य ट्रैफिक सिग्नल को मानकीकृत करना है।
सरकार ने लिया बड़ा फैसला:-किसी कारण जापान की सरकार ने वर्ष 1973 में फैसला लिया कि वह सरकारी दस्तावेजों में बदलाव नहीं करेगी, बल्कि लाइट के रंग में बदलाव करेगी और इसीलिए सरकार ने हरे रंग का ही नीला शेड (ब्लुइश ग्रीन) ट्रैफिक लाइट में प्रयोग करने का फैसला लिया। यानी कानूनी रूप से जापान में भी ‘गो’ के लिए ग्रीन लाइट ही है, लेकिन दिखने में यह नीली है। इसके अलावा आपको बता दें कि भारत की ही तरह जापान में भी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए विजन टेस्ट देना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें लाल, पीले और नीले रंग में फर्क पहचानना पड़ता है।
ट्रैफिक लाइट का इतिहास:-दुनिया में सबसे पहली ट्रैफिक लाइट वर्ष 1868 में लंदन के ब्रिटिश हाउस ऑफ पार्लियामेंट के सामने लगाई गयी थी। उस समय इस लाइट को रेलवे इंजीनियर जे.पी नाइट ने लगाया था। रात में दिखने के लिए इस ट्रैफिक लाइट में गैस का प्रयोग किया जाता था। बता दें कि उस समय इसमें सिर्फ लाल और हरे रंग का ही प्रयोग होता था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के साथ शांति समझौते की इच्छा नहीं दिखाने पर फलस्तीन को दी जाने वाली सहायता को रोकने की धमकी दी है।ट्रंप ने ट्वीट करके कहा, ''हम फलस्तीन को प्रत्येक वर्ष करोड़ों डॉलर देते हैं और बदले में हमें कोई आदर या प्रसंशा नहीं मिलती। वे इजराइल के साथ लंबित शांति समझौता पर बात तक करने के लिए राजी नहीं है।उन्होंने कहा, ''हमनें वार्ता के सबसे कठिन हिस्से येरुशलम को बातचीत की मेज से अलग कर दिया, इजराइल को इसके लिये ज्यादा कीमत चुकानी होगी। लेकिन फलस्तीन के शांति वार्ता के लिए राजी नहीं होने की सूरत में क्यों हम उन्हें भविष्य में इस तरह के भारी भुगतान करें। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने इससे पहले दिन में कहा था कि यदि फलस्तीन शांति समझौते से इनकार करता रहा तो अमेरिका सहायता में कटौती करेगा।निक्की ने न्यूयॉर्क में संरा मुख्यालय में कहा, ''मेरा मानना है कि राष्ट्रपति ने मूल रूप से यह कहा है कि जब तक फलस्तीन शांति वार्ता के लिए राजी नहीं हो जाता वह कोई अतिरिक्त धन नहीं देना चाहते या सहायता को रोकना चाहते हैं ।फलस्तीन को मिलने वाली अमेरिकी सहायता का मकसद कांग्रेस के हित वाली कम से कम तीन अमेरिकी नीतियों का प्रचार प्रसार करना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहायता बंद करने की धमकी से फलस्तीन 'ब्लैकमेल' नहीं होगा। फलस्तीन के वरिष्ठ अधिकारी हसन अशरवी ने बुधवार को एक बयान में यह बात कही। वह ट्रंप के सालाना 30 करोड़ डॉलर की सहायता बंद करने की धमकी पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।उन्होंने कहा, "हम ब्लैकमेल नहीं होंगे। ट्रंप ने पहले तो हमारे शांति, स्वतंत्रता और न्याय के प्रयासों को तोड़ दिया, और अब…
पेरू में डेविल्स कर्व के नाम से दुर्घटना संभावित क्षेत्र में एक ट्रक से टकराने के बाद एक बस पहाड़ी से नीचे गिर गई है। इस हादसे में कम से कम 48 लोग मारे गए।अधिकारियों ने बताया कि बस हुआचो से 55 यात्रियों को लेकर लीमा आ रही थी। उसी दौरान हादसा हुआ। बस पहाड़ी से 100 मीटर नीचे गिरी और समुद्र किनारे चट्टानों पर पलट गई। गृह मंत्रालय ने…
अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने पाकिस्तान को 25.5 करोड़ डॉलर की सहायता रोकने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूख की सराहना की है। इन सांसदों में उनके कुछ आलोचक भी शामिल हैं। सहायता रोकने का फैसला लेते हुए अमेरिका ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।सीनेटर रैंड पॉल ने इस रूख पर ट्रंप के साथ अपनी सहमति जताते…
एक पूर्व राजनयिक ने कहा है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा मूल्य वर्धिक कर (वैट) लागू किये जाने से वहां रह रहे अधिकतर भारतीयों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और उनकी बचत में कमी आएगी।सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय राजनयिक रहे तल्मीज अहमद ने एजेंसी से कहा कि, ''मैं कहूंगा कि वहां 70 से 80 फीसद भारतीय प्रभावित होंगे।" उन्होंने कहा कि सऊदी अरब…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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