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म्यांमार में सेना के खिलाफ प्रतिरोधक रूख अपनाने वाले रोहिंग्या मुस्लिम उग्रवादियों का कहना है कि, "अपने समुदाय के लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए अब उनके पास सरकार प्रायोजित कथित ज्यादतियों से लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है।" इनकी मांग यह भी है कि, रोहिंग्या समुदाय के भविष्य को लेकर किए जाने फैसलों में उन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए।गत शुक्रवार सेना पर हमले करने वाली अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (एआरएसए) के नेता अताउल्लाह खान की ओर से ट्वीटर पर जारी एक बयान में कहा गया है कि, 'म्यांमार सरकार प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए लड़ाई के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है और हम अपने समुदाय के हितों की रक्षा करेंगे।' इस बयान में कहा गया है कि, रोहिंग्या समुदाय के भविष्य से जुड़े फैसलों और मानवीय जरूरतों के बारे में कोई भी कदम उठाने से पहले इस समुदाय के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि, मुस्लिम आतंकवादी समूहों से उसका कोई लेना देना नहीं है और वह केवल रोहिंग्या समुदाय पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहा है। म्यांमार में इस समुदाय को नागरिकता का अधिकार नहीं है और न ही वे कहीं स्वतंत्र रूप से आ जा सकते हैं। इन्हें स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध नहीं है और बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के तौर पर इन्हें देखा जाता है। इनकी आबादी राखिने राज्य में अधिक हैं।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को कहा कि, आसियान के साथ भारत की वार्ता भागीदारी एक सामरिक भागीदारी में बदल गई है और भारतीय समुदाय समूह के साथ संबंधों को और मजबूत करने का एक मंच उपलब्ध कराता है। उन्होंने यहां आसियान-भारत प्रवासी भारतीय दिवस को संबोधित करते हुए आसियान को लेकर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।सुषमा ने करीब 3,000 प्रतिनिधियों से कहा कि, "हम यहां अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं और दुनिया में भारत और आसियान के भविष्य की दिशा साझा करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि, "हमारा समुदाय भारत और आसियान देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का एक मंच उपलब्ध कराता है।" विदेश मंत्री ने आसियान-भारत भागीदारी के 25 साल पूरे होने का संज्ञान करते हुए कहा कि, "हमारी वार्ता भागीदारी सामरिक भागीदारी में बदल गई है।"उन्होंने कहा कि, "आसियान क्षेत्र के साथ भारत का संपर्क हमारे परस्पर सिद्धांतों की स्पष्टता में निहित है। हमारा मानना है कि, जब सभी देश अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हैं और जब हम सार्वभौम समानता एवं परस्पर सम्मान के आधार पर आचरण करते हैं, तब हमारे देश खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं और हमारी अर्थव्यवस्थाएं समृद्ध होती हैं।" सुषमा ने आसियान के भारत के 'एक्ट ईस्ट' नीति का हिस्सा होने की बात पर जोर देते हुए कहा कि, "भारत की अर्थव्यवस्था के विकास के साथ उसके संबंध मजबूत होंगे, उसके व्यापार एवं निवेश का प्रवाह भी बढ़ेगा।"

अगर आपको भी टेंशन है तो तो अपने पार्टनर के टी शर्ट की खुशबू से सराबोर होने कोशिश करें क्योंकि वैज्ञानिकों ने पाया है कि महिलाएं अपने पुरूष जोड़ीदार के परफ्यूम की महक से खुद को तनावमुक्त महसूस करती हैं। जी हां हाल ही में हुए रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है।उन्होंने यह भी पाया कि किसी अजनबी के परफ्यूम की महक का उल्टा असर होता है और तनाव का स्तर बढ़ सकता है। कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया की स्नातक छात्रा एवं मुख्य शोधकर्ता मार्लिज होफर ने कहा, 'हमारे अध्ययन में पाया गया कि पार्टनर की गैरमौजूदगी में भी उसके परफ्यूम की महक तनाव कम करने में मददगार होती है।'जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित किए गए अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 96 युगलों की मदद ली और उसमें पाए गए तथ्यों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे।

अंतरिक्ष में छह बार जाने वाले, चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले और इसके चट्टानी सतह पर चहल-कदमी करने वाले एक महान अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जॉन यंग का निधन हो गया है। यह जानकारी नासा ने दी है।अंतरिक्ष एजेंसी ने खबर दी है कि, वह 87 साल के थे और निमोनिया के कारण शुक्रवार देर रात उनका निधन हो गया। वह नासा स्पेस सेंटर से कुछ ही मिनटों की दूरी पर स्थित ह्यूस्टन के एक उपनगर में रहते थे। एजेंसी के प्रशासक रॉर्बट लिटफुट ने एक बयान में बताया कि, "नासा और दुनिया ने एक अग्रणी व्यक्ति को खो दिया है।"बयान में कहा गया है कि, "अगले मानवीय पड़ाव की ओर देखने के कारण हम उनकी उपलब्धियों पर आगे बढ़ेंगे। यंग एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने जैमिनी, अपोलो से अंतरिक्ष में गये और अंतरिक्ष शटल कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और छह बार अंतरिक्ष में गये।" नासा ने बताया कि, एक बार उन्होंने अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय व्यतीत करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

 

 

 

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका की ओर से सैन्य सहायता पर रोक लगाने के बाद कहा कि उसका हमेशा हमारे देश के प्रति व्यवहार दगाबाज दोस्त का रहा है। आसिफ ने एक स्थानीय कैपिटल टीवी को दिए साक्षात्कार में कहा, 'अमेरिका का रवैया कभी भी सहयोगी या दोस्त का नहीं रहा। अमेरिका हमेशा दगाबाज दोस्त रहा।' राजधानी इस्लामाबाद और लाहौर के पूवीर् इलाकों में जुम्मे की नमाज के बाद छात्रों के कुछ समूहों ने ट्रम्प के खिलाफ नारेबाजी की और उनके फोटो तथा अमेरिकी झंडे भी जलाये। ये सभी आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त भी हो गये। गौरतलब है कि अमेरिका ने अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क नाम के आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करने में पाकिस्तान के नाकाम रहने और अपनी सरजमीं पर उनके पनाहगाह को नेस्तनाबूद करने में नाकाम रहने को लेकर इस्लामाबाद को सुरक्षा सहायता के तौर पर 900 अरब डॉलर से अधिक धन और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति कल रोक दी। अमेरिका ने कहा है कि जब तक अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तान उचित कार्रवाई नहीं करता तब तक उसे मिलने वाली सुरक्षा सहायता पर रोक रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नववर्ष ट्वीट के बाद पाकिस्तान को सभी सुरक्षा सहायता रोकने का कदम उठाया गया है। दरअसल, ट्रंप ने ट्वीट में आरोप लगाया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को झूठ और फरेब के सिवा कुछ नहीं दिया है तथा उसने पिछले 15 बरसों में 33 अरब डॉलर की मदद के बदले में आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया किया।विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के कड़े रुख से पाकिस्तान को अपने पुराने पड़ोसी और सहयोगी देश चीन के और करीब जाने का मौका मिल सकता है। ट्रम्प के ट्वीट आने के बाद भी चीन ने पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए उसका समर्थन किया था। चीन की ओर से किए गए राजनयिक और वित्तीय समर्थन ने भी पाकिस्तान के हाथों को मजबूत किया है। आसिफ के अलावा पाकिस्तान के कई अन्य नेताओं ने भी अमेरिका की तीखी आलोचना की। विपक्ष के नेता इमरान खान ने तो अमेरिका से संबंधविच्छेद करने और प्रतिशोध की अपील करते हुए कहा कि ट्रम्प का ट्वीट और अन्य अमेरिकी टिप्पणियां पाकिस्तान को जानबूझ कर नीचा दिखाने और अपमानित करने के प्रयासों का हिस्सा थे।अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी कर इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका मानता है कि इन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होने से ट्रंप प्रशासन काफी हताश हैं। इन दोनों आतंकवादी संगठनों ने पाकिस्तान को सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल किया है और यहां से उन्होंने पड़ोसी देश अफगानिस्तान में हमले किए जिनमें अमेरिकी ,अफगानी और अन्य सेनाओं के जवान मारे गए हैं।विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नौअर्ट ने हालांकि यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान इन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ निणार्यक कार्रवाई करता है तो कुछ सहायता जारी भी रखी जा सकती है। नौअर्ट ने अपनी नियमित ब्रीफिंग में कहा, 'आज हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि पाकिस्तान की जब तक पाकिस्तान सरकार हक्कानी नेटवर्क और अफगानी तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कोई निणार्यक कार्रवाई नहीं करती उस समय तक सुरक्षा सहायता को स्थगित किया जा रहा है। हमारे विचार से ये संगठन क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहे हैं और अमेरिकी जवानों को अपना शिकार बना रहे हैं।' पाकिस्तान को मिलने वाली सुरक्षा सहायता पर रोक लगाया जाना इस बात का संकेत है कि ट्रंप प्रशासन इन दोनों आतंकवादी संगठनों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं किए जाने से पाकिस्तान से नाराज है। ये दोनों संगठन पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देश अफगानिस्तान में हमले करने के लिए कर रहे हैं जिसमें अमेरिकी, अफगानी और अन्य सैनिक मारे जा रहे हैं।अमेरिका ने कहा है कि जब तक इन आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक सैन्य सहायता स्थगित रहेगी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस रोक से पाकिस्तान को दो श्रेणियों में मिलने वाली सैन्य सहायता प्रभावित होगी। पहली विदेशी सैन्य वित्तपोषण (एफएमएफ) जिससे पाकिस्तान अमेरिकी सेना के उपकरणों की खरीद और उससे प्रशिक्षण प्राप्त करता है। दूसरा सीएसएफ फंड जिससे पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में आर्थिक मदद मिलती है।

पाकिस्तान में पिछले वर्ष अक्तूबर में अगवा किए गए अफगानिस्तान के एक अधिकारी को अपहरणकतार्ओं ने छोड़ दिया है और वह स्वेदश लौट गए हैं।अफगानिस्तान के पूर्वी कुनार प्रांत के डिप्टी गवर्नर काजी मोहम्मद नबी अहमदी को पेशावर से उस वक्त अगवा कर लिया गया था, जब वह एक चिकित्सक के पास जा रहे थे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्हें किसने अगवा किया था। वह गुलबुद्दीन हेक्मतयार की हिज्ब—ए—इस्लामी पार्टी के सदस्य हैं।इस्लामाबाद में अफगानिस्तान के उप राजदूत जरदाश्त शम्स ने शनिवार को कहा कि, अहमदी कुनार में अपने परिवार के पास पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारी के भाई हबीबुल्ला का भी अपहरण किया गया था, वह अभी भी लापता हैं। परिवार से फिरौती की मांग की गई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि मांग पूरी की गई या नहीं।

दुनियाभर में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। एक तो यह किफायती है, दूसरा पर्यावरण के लिए भी इससे कोई खतरा नहीं है। इस दिशा में डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में स्थित एक स्कूल उदाहरण बन चुका है। इस स्कूल की बिल्डिंग में 12 हजार सोलर पैनल फिट किए गए हैं। स्कूल की सालाना बिजली आपूर्ति का आधा हिस्सा इन सोलर पैनल के जरिए…
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इमरान खान एक बार फिर अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान क्या एक बार फिर शादी के बंधन में बंध गए हैं। लाहौर में एक जनवरी को खान ने शादी की। बताया जा रहा है कि आध्यात्मिक झुकाव रखने वाली इस महिला के साथ पूर्व क्रिकेटर लंबे समय से संपर्क में…
नए साल के मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पाकिस्तान को कड़ी फटकार और उसके बाद सैन्य सहायता राशि बंद करने के कदम ने बीजिंग और इस्लामाबाद को और करीब ला सकता है। शुक्रवार को मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि पाकिस्तान और चीन दोनों ही अपने आर्थिक और सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, चीन इरान में चाबहार बंदरगाह के नजदीक स्थित पाकिस्तान के…
पाकिस्तान में सिंध प्रांत के थारपारकर जिले में बाइक पर आए लुटेरों ने दो हिंदू भाइयों की उनकी दुकान के बाहर शुक्रवार को गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद देश के अल्पसंख्यक समुदाय ने प्रदर्शन किए।'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की खबर के मुताबिक, पीड़ितों की पहचान दिलीप कुमार और चंदर माहेश्वरी के रूप में हुई है, जो अनाज व्यापारी थे। घटना के समय वह जिले के मीठी इलाके की…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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