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वाशिंगटन - उत्तर अमेरिका में वैज्ञानिकों ने उड़न गिलहरी की एक नई प्रजाति की खोज की है, जो करीब दो सौ साल से इस इलाके में छिपी हुई थी। यह नई प्रजाति उत्तर अमेरिका के प्रशांत तटीय क्षेत्र में रहती है। इसको हम्बोल्ट की उड़न गिलहरी या ग्लाउकोमिस ओरेगोनेंसिस के नाम से जाना जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा, इस नई प्रजाति की आबादी को अब तक पहले से ज्ञात उत्तरी उड़न गिलहरी ही समझा जाता था।
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जिम केनागी ने कहा, लगभग दो सौ साल से यह माना जा रहा था कि उत्तर-पश्चिम में हमारे पास उड़न गिलहरी की केवल एक प्रजाति है। लेकिन पहली बार हमने इसके मूल जीनोम और डीएनए पर गौर करने के बाद पाया कि यह एक अलग प्रजाति है।
उन्होंने कहा, यह एक हैरतअंगेज खोज है। इस अध्ययन का प्रकाशन जर्नल ऑफ मैमलोलॉजी में हुआ है। हम्बोल्ट उड़न गिलहरी की खोज के साथ ही दुनिया में उड़न गिलहरी की प्रजातियों की तादाद 45 हो गई है।

 

नई दिल्ली - चीन की एक रेलकार निर्माता कंपनी ने बिना ड्राइवर और पटरी के चलने वाली रेल तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। कंपनी के अनुसार उसकी प्रौद्योगिकी विश्व में अपनी तरह की पहली है। इस रेल को कंपनी ने मध्य चीन के हुनान प्रांत के झुझोउ शहर में पेश किया।
रेल को बनाने वाली कंपनी सीआरआरसी कॉर्पोरेशन के अनुसार उसकी रेल, बस और रेल का मिलजुला रूप है। इसमें स्टील के पहियों की जगह रबड़ के पहिए लगाए गए हैं। इस कारण रेल को चलने के लिए पटरियों की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेल को ड्राइवर के बिना चलाने के लिए कंपनी ने खास तरह के सेंसर का इस्तेमाल किया है।
इसकी वजह से यह रेल सड़क पर बने चिह्नों को पढ़कर अपना रूट तय कर पाती है। ईंधन के लिए यह रेल बैटरी का इस्तेमाल करती है। इसलिए कंपनी ने इसके पर्यावरण अनुकूल होने का दावा किया है।
झुझोउ शहर का प्रशासन 2018 में इस रेल का संचालन शुरू करेगा। इसके लिए प्रशासन साढ़े छह किलोमीटर का विशेष मार्ग तैयार करेगा।
रेल की खासियतें
--70 किलोमीटर प्रति घंटे है अधिकतम रफ्तार
--300 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है रेल
--40 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है पूरा चार्ज होने पर
--30 मीटर है तीन डिब्बों वाली इस रेल की लंबाई

वाशिंगटन - कतर को लेकर गहराए राजनयिक संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सउदी अरब के शाह सलमान से फोन पर बातचीत की और क्षेत्र में आतंकवाद का मुकाबला करने तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की एकजुटता का आहवान किया।
व्हाइट हाउस ने कल एक बयान में कहा कि दोनों ने क्षेत्र में किसी भी देश द्वारा किए जाने वाले आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और चरमपंथ को खत्म करने उपायों पर चर्चा की । इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद को पराजित करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए जीसीसी की एकजुटता जरूरी है।
व्हाइट हाउस का यह बयान उस वक्त आया है जब एक दिन पहले सउदी अरब, मिस्र, बहरीन और यूएई ने कतर के साथ राजनयिक संबंध खत्म कर दिए। इससे पहले सुबह के अपने ट्वीट में ट्रंप कतर के साथ राजनयिक संबंध खत्म किए जाने के कदम का समर्थन करते दिखाई दिए थे।
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका मुद्दों को हल करने और सहयोग बहाल करने के लिए सभी पक्षों के साथ निकट संवाद बनाये रखेगा। स्पाइसर ने कहा कि ट्रंप ने अपनी सउदी अरब यात्रा के दौरान रियाद में कतर के अमीर के साथ बहुत रचनात्मक बातचीत की थी।
उधर, अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने कहा कि अमेरिका यह स्वीकारता है कि कतर ने आतंकी समूहों को वित्तपोषण रोकने को लेकर कुछ बड़े प्रयास किए हैं।
उन्होंने कहा, मुझे यह स्पष्ट करने दीजिए। कतर ने कुछ प्रगति की है लेकिन उन्हें अभी बहुत कुछ करना है। बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।

नई दिल्ली - रूसी हैकरों ने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से कुछ दिन पहले अमेरिका की एक वोटिंग सॉफ्टवेयर कंपनी को हैक किया था। वहीं अब एक खबर आ रही है कि कतर संकट के लिए पीछे भी रूस का ही हाथ है। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक अमेरिकी जांचकर्ताओं का मानना है कि रूसी हैकरों ने झूठी खबर (फेक न्यूज) चलाकर कतर के सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों के साथ रिश्ते खराब कर दिए और राजनयिक संबंध भी तुड़वा दिये। अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने मामले की जांच में कतर सरकार की मदद के लिए एक टीम दोहा भेजी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीआई के विशेषज्ञों ने मई के अंत में कतर का दौरा एक कथित साइबर हमले की जांच के लिए किया। उन लोगों ने देखा कि हैकर्स ने कतर की सरकारी न्यूज एजेंसी पर झूठी खबर डाल दी थी। उसी झूठी खबर को हवाला देकर सऊदी अरब ने कतर से राजनयिक और आर्थिक संबंध तोड़ने का फैसला लिया।
कतर ने आरोपों को बताया गलत
कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल सानी ने सीएनएन को बताया कि एफबीआई ने हैक और फर्जी खबर डालने की पुष्टि कर दी है। उन्होंने सीएनएन से बताया, 'जो कुछ भी आरोप लगाए गए हैं, वे सभी गलत सूचना के आधार पर हैं और हमारा मानना है कि सारी संकट की जड़ यह गलत सूचना ही है।'
अरब समेत पांच देशों ने संबंध तोड़े
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले विदशी दौरे के समय सऊदी में ईरान की आलोचना कर चुके हैं। मालूम हो कि पांच जून को सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात समेत सात देशों ने कतर के साथ राजनयिक रिश्ते खत्म कर लिए हैं। इन देशों ने कतर के साथ राजनयिक रिश्तों के साथ जमीन, समुद्र और हवाई संपर्क भी खत्म कर दिए। आतंकी और चरमपंथी संगठनों को समर्थन का आरोप लगाते हुए कतर के खिलाफ ये एक्शन लिया गया।
फेक न्यूज में क्या है
बताया जा रहा है कि 23 मई को कतर न्यूज एजेंसी ने एक खबर प्रकाशित की थी, जिसमें कतर के अमीर के हवाले से कहा गया कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान क्षेत्रीय और इस्लामिक शक्ति है। लिहाजा इसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हालांकि कतर का कहना है कि यह खबर झूठी है और हैकिंग के जरिए प्लांट की गई है। कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी का कहना है कि अब एफबीआई ने भी हैकिंग और फेक न्यूज की पुष्टि कर दी है।
गौरतलब है कि सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने सोमवार को कतर से सभी तरह के संबंध तोड़ने की घोषणा की। कतर पर चरमपंथी गुटों की मदद करने और सऊदी अरब के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ईरान का समर्थन करने के आरोप लगाए गए। दूसरी तरफ कतर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस विवाद में ट्रंप सऊदी अरब के साथ खड़े नजर आए हालांकि कतर में अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री बेस है।

वाशिंगटन - अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके कहने पर ही कथित तौर से आतंकवाद का समर्थन करने वाले कतर को मुस्लिम देशों ने अलग-थलग कर दिया है।
ट्रंप का दावा है कि उनकी सलाह पर ही सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, लीबिया और मालदीव ने अपने कूटनीतिक और राजनयिक संबंध खत्म कर लिए हैं।
ट्रंप के मुताबिक उन्होंने अपनी हालिया यात्रा के दौरान सऊदी अरब को कहा था कि कतर अतिवादी विचारधारा का समर्थन कर रहा है और उन्हें फंड दे रहा है। ट्रंप ने कहा है कि उनके लौटते ही, उनकी सऊदी अरब यात्रा का असर भी दिखने लगा है।

काबुल - अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मंगलवार को तालिबान को चेतावनी दी कि अगर वह शांति का रास्ता नहीं अपनाता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
यहां ‘ काबुल प्रक्रिया’ को संबोधित करते हुए गनी ने बताया कि राजधानी के राजनयिक क्षेत्र में पिछले सप्ताह हुए भीषण ट्रक हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 150 हो गई है। अफगानिस्तान में आए दिन हो रहे हमलों के विरोध में लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं। सुरक्षा देने में नाकाम रहने के कारण गनी की तीखी आलोचना के साथ ही उनकी सरकार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
अफगान राष्ट्रपति ने कहा, हम (तालिबान को) शांति के लिए एक मौका दे रहे हैं। लेकिन यह ऐसा प्रस्ताव नहीं है जो कभी समाप्त ही नहीं होगा। वक्त निकलता जा रहा है। यह आखिरी मौका है। इसे स्वीकार करो या परिणाम भुगतो।
काबुल प्रक्रिया एक अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन है जिसका मकसद अफगानिस्तान में शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बनाना है। इस सम्मेलन में 24 देशों ने भाग लिया है। तालिबान के फिलहाल गनी की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। काबुल के राजनयिक क्षेत्र में पिछले सप्ताह हुए भीषण ट्रक धमाके मरने वालों की संख्या पहले 90 बताई गई थी।
अमेरिका अफगानिस्तान के साथ : मैकमास्टर
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एच.आर. मैकमास्टर ने भरोसा दिलाया है कि अमेरिका अफगानिस्तान की सरकार के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है। व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, लेफ्टिनेट जनरल मैकमास्टर ने काबुल आतंकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका अफगान सरकार और वहां की जनता के साथ है। उन्होंने अफगानिस्तान की राष्ट्रीय एकता सरकार के प्रति अमेरिकी समर्थन का उल्लेख किया और कहा कि शांति एवं सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अफगानिस्तान का एकजुट और मजबूत बने रहना जरूरी है।

 

इस्लामाबाद लंदन रोम - लंदन ब्रिज के हमलावरों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए मंगलवार को पाकिस्तान में भी छापेमारी की गई। पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई ने पाकिस्तानी मूल के आतंकी खुर्रम बट के एक रिश्तेदार के इस्लामाबाद स्थित रेस्टोरेंट पर छापा मारा। बट उन तीन आतंकियों का सरगना था, जिन्होंने बीते शनिवार को लंदन में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में सात लोगों की जान…
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); काठमांडू - नेपाल के दिग्गज नेता शेर बहादुर देउबा आज देश के चौथी बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। नेपाली संसद आज प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव कराने जा रही है।देउबा प्रधानमंत्री पद के इकलौते उम्मीदवार हैं क्योंकि मुख्य विपक्षी सीपीएन—यूएमएल अथवा किसी अन्य पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। देउबा को प्रधानमंत्री पद के लिए 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन हासिल…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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