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लंदन - ब्रिटेन के कानून मंत्री फिलिप ली ने ब्रेक्जिट समझौते में संसद की भूमिका को सीमित करने के सरकार के इरादे को लेकर अपना इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि सरकार की ब्रेक्जिट नीति नागरिकों के हित में नहीं हैं।
दरअसल, मंगलवार को दोनों सदन प्रधानमंत्री टेरीजा द्वारा तैयार किए गए ब्रेक्जिट समझौते पर वोट करेंगे। ब्रेक्जिट मंत्री डेविड जोन्स ने कहा है कि वोट समझौते को मान्य करने के लिए होगा या कोई समझौता होगा ही नहीं। इसे ब्रेक्जिट में संसद की भूमिका को सीमित करने के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ सासंदों की मांग है कि यदि वह ब्रेक्जिट समझौते के विरोध में वोट दें तो संसद के पास इतना अधिकार हो कि वह सरकार को इसमें बदलाव करने के लिए बाध्य करे।
ली ने अपनी वेबसाइट में लिखा, 'मेरे इस फैसले का मुख्य कारण ब्रेक्जिट प्रक्रिया और वोट के आखिरी परिणाम पर संसद की भूमिका को सीमित करना है। भविष्य में मुझे अपने बच्चों को ईमानदारी से बताना है कि मैंने उनके लिए सबसे बेहतर करने की कोशिश की है। जिस तरह से ब्रिटेन यूरोपीय संघ से निकलता हुआ दिख रहा है उसका मैं समर्थन नहीं कर सकता।'


नई दिल्‍ली - पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाइ नेता किम जोंग उन के बीच हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता के नतीजों पर टिकी है। लगभग ढाई करोड़ आबादी वाले उत्तर कोरिया विश्व कूटनीति के केंद्र में बना हुआ है। यह सच है कि लोगों की नजर उत्तर कोरिया से ज़्यादा वहां के शीर्ष नेता किम जोंग-उन पर टिकी है। आइए जानते हैं, उनके उन रहस्‍यों के बारे, जिसकी जिज्ञासा पूरी दुनिया को है।
'उन' को विरासत में मिली सत्‍ता की चाबी
किम जोंग को सत्‍ता विरासत में मिली। लगातार तीन पीढ़ियों से उत्‍तर कोरिया की सत्‍ता इस परिवार के हाथों में है। उन के पूर्व उत्तर कोरिया में सत्‍ता की बागडोर उनके पिता किम जोंग-इल के पास थी। इल को भी सत्‍ता उनके पिता किम इल-सुंग से मिली। वर्ष 2011 में किम जोंग-इल की मौत के बाद उत्‍तर कोरिया की सत्‍ता उन के हाथों में आई।
शासकों का विदेशी दौरों में यकीन नहीं
उत्‍तर कोरिया के तीनों ही शासकों का विदेशी दौरों और दुनिया से घुलने-मिलने में बहुत कम यकीन था। आप इस बात से जरूर अचरज में पड़ेंगे कि साल 2011 में सत्ता संभालने के बाद से किम जोंग-उन ने कोई विदेशी यात्रा नहीं की। यहां तक की अपने सबसे करीबी चीन और रूस के यहां भी उन अब तक नहीं गए हैं। हालांकि, ऐसा कहा जाता है कि हाल ही में उन्होंने पहली बार चीन का दौरा किया। विदेशी दौरे के मामले में तीनों ही शासकों की एक ही रणनीति रही है। उन के पिता और दादा भी विदेशी दौरों पर भरोसा नहीं रखते थे।
हालांकि, विदेशी दौरे पर नहीं जाने के पीछे जानकार उनके सुरक्षा कारणों को बड़ी वजह बताते हैं। उन के पूर्व शासक किम जोंग-इल का चीनी प्रेम किसी से नहीं छिपा है। अपने शासन के दौरान इल कई बार चीन के दौरे गए थे। इल के पूर्व उत्‍तर कोरिया के शासक किम इल-सुंग भी चीन और रूस के दौरे पर गए थे। लेकिन उन ने अभी चीन और रूस का दौरा नहीं किया है।
किम जोंग-उन ने 2015 में रद किया रूसी दौरा
मई 2015 में किम जोंग उन का रूसी दौरा प्रस्‍तावित था, ले‍किन यह दौर रद कर दिया गया। दरअसल , रूस ने दूसरे विश्‍व युद्ध खत्‍म होने की 70वीं सालगिरह पर एक खास कार्यक्रम रखा था। रूस पहुंचने वाले राष्‍ट्राध्‍यक्षों में उन का नाम भी शमिल था। उन को इस जश्‍न में शामिल होना था। लेकिन कार्यक्रम के पहले बिना कारण बताए ही इस यात्रा को रद कर दिया गया। रूस ने भी इसे उत्‍तर कोरिया का आंतरिक मामला कहकर इससे पल्‍ला झाड़ लिया था। उस वक्‍त उम्‍मीद की जा रही थी इस मौके पर रूस के राष्‍ट्रपति पुतिन के साथ किम की द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। अगर किम जोंग उन रूस की यात्रा पर जाते तो उत्‍तर कोरिया की सत्‍ता संभालने के बाद यह उनकी पहली विदेशी यात्रा होती।
सुरक्षा कारणों से नहीं करते विदेशी यात्रा
अगर किम जोंग उन की सुरक्षा के स्‍तर को देखा जाए तो यह प्रमाणित हो जाता है कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर अतिसंवेदनशील हैं। छह लेयर वाली सुरक्षा कवच के चलते उन सदैव चर्चा में रहते हैं। इस प्रकार की सुरक्षा लेयर दुनिया के कुछ राष्‍ट्राध्‍यक्षों के पास ही है। इसलिए जानकारों को कहना है कि उन अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित और भय‍भीत रहते हैं। इसलिए वह कम से कम विदेशी दौरा करते हैं। इसमें कोई शक नहीं इसके चलते उत्‍तर कोरिया पूरी दुनिया से अलग-थलग पड़ गया है। दुनिया के 26 देशों से उत्‍तर कोरिया के कूटनीतिक रिश्‍ते हैं। इसमें भारत भी शामिल है।
उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग की सुरक्षा
उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन की सुरक्षा का आलम यह कि उनके आसपास परिंदा भी पर नहीं मार सकता। इन अंगरक्षकों का चयन उनकी फिटनेस, निशानेबाजी, मार्शल आर्ट के कौशल और उनकी वेशभूषा के आधार पर किया गया है। उत्तर कोरिया विश्व के सबसे कठोर सुरक्षा वाले देशों में से एक है और उसके नेता की सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य है।
किम की मौजूदगी वाले हर समारोह में जाने वाले विदेशियों को भी कड़ी सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना होता है। उत्तर कोरिया के डीफेक्टर री योंग गूक ने कहा कि यह विश्व की सबसे कड़ी सुरक्षाओं में से एक है, यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता।


नई दिल्‍ली - उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता को जिस तरह की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है, शायद ही ऐसी सुरक्षा विश्व के किसी अन्य नेता को दी जाती हो। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को तीन श्रेणियों में सुरक्षा दी जाती हैं। आइए जानते हैं कि उत्तर कोरिया के नेता उन की अभेद्य सुरक्षा में कौन लोग शामिल होते हैं। उनकी सुरक्षा की क्‍या रणनीति होती है। एक नजर,
पहला घेरा: ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स के हवाले
किम की गाड़ी के साथ सुरक्षा बनाने वाले सुरक्षाकर्मियों को ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स कहते हैं। ये सेना में अफसर होते हैं। किम के गाड़ी में सवार होते ही ये सुरक्षाकर्मी चारों तरफ से घेरा बनाकर एक अभेद्य सुरक्षा मुहैया कराते हैं। मेन ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स में करीब 200 से 300 बॉडीगार्ड्स होते हैं। इनमें से आधे बॉडीगार्ड और बाकी ड्राइवर और तकनीकी स्टाफ होते हैं।
दूसरा और तीसरा घेरा: गार्ड कमांड करते हैं रखवाली
किम की सुरक्षा पंक्ति मे दूसरा और तीसरा घेरा भी काफी अहम है। इस घेरे की जिम्‍मेदारी गार्ड कमांड की होती है। इस घेरे में लगे सुरक्षाकर्मियों पर यह जिम्‍मेदारी होती है कि ये उन स्‍थलों की जांच करते हैं, जहां किम को जाना होता है। इसके साथ ही ये सुरक्षाकर्मी किम के लिए विशेष फोन लाइन या कम्प्यूटर का इंतजाम करते हैं। इनका चयन भी उसी तरह होता है जैसा कि मेन ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स का होता है।
ये सुरक्षा गार्ड किम के खान-पान का पूरा ख्‍याल रखते हैं। ये गार्ड कमांड उन सभी रास्तों को आधा मील तक अपने कब्‍जे में रखते हैं, जहां से किम जोंग-उन गुजरते हैं।
कोरियन पीपल्स आर्मी से होता है चयन
इन बॉडीगार्ड्स का चयन कोरियन पीपल्स आर्मी से किया जाता है। चयन करते समय इन सुरक्षाकर्मियों की लंबाई का विशेष ध्‍यान रखा जाता है। सुरक्षा कारणों से इनकी लंबाई किम जोंग-उन के बराबर ही होती है। इन बॉडीगार्ड्स का अचूक निशाना होता है। ये सुरक्षाकर्मी मार्शल आर्ट्स में दक्ष और बंदूक चलाने में निपुण होते हैं।
किम को सुरक्षा देने वाले बॉडीगार्ड्स समूह की विशेष जांच होती है। इतना ही नहीं इन जवानों की तीन पीढ़ियों की पृष्ठभूमि की कठोर जांच की जाती है। इस समूह में शामिल सुरक्षा‍कर्मी उत्‍तर कोरिया के जाने माने परिवार से ताल्‍लुक रखते हैं। इन सुरक्षाकर्मियों के पास नौकरी छोड़ने का विकल्‍प नहीं होता है। चयन होने के बाद इनका प्रशिक्षण एक कमांडो की तर्ज पर होता है। इनको विशेष ऑपरेशन के लिए तैयार किए जाता है।
ड्राइवर की होती है खास ड्रेस
सुरक्षा के साथ-साथ किम के ड्राइवर के लिए भी खास तरह की पोशाक होती है। ड्राइवर को लेदर के दस्‍ताने पहनना अनिवार्य होता है ताकि गाड़ी पर उसका नियंत्रण बना रहे। इसके साथ कार के अंदर वह सूचनाओं से अपडेट रहे, इसके लिए वह कानों में इयरपीस पहनता है। इसके जरिए वह सुरक्षा और मार्ग से अपडेट होता रहता है। उसके कपड़े पर विशेष पिन और बैज लगा होता है। वह विशेष कोड के जरिए बात करता है।

 


इस्‍लामाबाद - एवेनफील्‍ड संपत्‍ति मामले में फंसे पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का कहना है कि उनके इस केस को लड़ने के लिए कोई वकील तैयार नहीं हो रहा है। शरीफ के वकील ख्‍वाजा हैरिस ने सोमवार को नवाज व उनके परिवार को दी जाने वाली अपनी कानूनी सेवाओं को समाप्‍त कर दिया। हैरिस ने कहा कि सप्‍ताहांत में अकाउंटैबिलिटी कोर्ट में पेश होने में वे असमर्थ हैं।
शरीफ ने दावा किया कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है क्योंकि कोई वकील ऐसे मामले में पैरवी नहीं करेगा जहां उसे मामला तैयार करने के लिए समय नहीं मिले और उससे सप्ताहांत पर पेश होने के लिए कहा जाए। शरीफ उनके वकील ख्वाजा हैरिस का जिक्र कर रहे थे जो 11 जून(सोमवार) को उनका प्रतिनिधित्व करने में नाकाम रहे क्योंकि हैरिस ने कहा कि वह न तो दबाव में काम कर सकते और ना ही अकाउंटैबिलिटी कोर्ट की मांग के अनुसार सप्ताहांत पर पेश हो सकते. ‘डान’ अखबार ने शरीफ के हवाले से कहा, ‘क्या प्रधान न्यायाधीश (मियां साकिब निसार) नहीं जानते कि न्याय में जल्दबाजी न्याय को कुचलने के समान है?’
हैरिस ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट एक माह के अंदर सुनवाई खत्‍म करना चाहता था जो संभव नहीं था। नवाज और उनका परिवार भ्रष्‍टाचार के तीन मामलों का सामना कर रहा है जो नेशनल अकाउंटैबिलिटी ब्‍यूरो (एनएबी) द्वारा दायर की गई है। यदि पाकिस्‍तान आम चुनाव के पहले भ्रष्‍टाचार मामलों में फैसला आया तो यह कानून का अपमान होगा। उन्‍होंने परवेज मुशर्रफ की भी आलोचना की। उन्‍होंने कहा, ‘संविधान का उल्‍लंघन करने वाले तानाशाह को कैसे इतना प्‍यार दिया जा रहा है।‘ अकाउंटैबिलिटी कोर्ट में भ्रष्‍टाचार मामले में शरीफ के बेटे हसन और हुसैन, बेटी मरियम, दामाद मोहम्‍मद सफदर और वित्‍त मंत्री इशाक डार का नाम शामिल है।
बता दें कि पिछले साल 28 जुलाई को पाकिस्‍तान सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्‍य करार दिया था।

शी चिनफिंग ने कहा कि विभिन्न पक्षों ने फैसला किया है कि वे एससीओ चार्टर का पालन कर शांगहाई भावना का प्रचार कर पड़ोसियों जैसी मित्रता पर कायम रहकर व्यावहारिक सहयोग बढ़ाएंगे और क्षेत्रीय शांति ,स्थिरता और विकास का अनुसरण करेंगे।उस दिन विभिन्न पक्षों ने एससीओ शिखर बैठक की छिंगताओ घोषणा ,व्यापारिक सरलीकरण पर एससीओ के नेताओं के संयुक्त बयान और एससीओ के सदस्य देशों के आपस में दीर्घकालिक अच्छे पड़ोसी जैसे मित्रवत सहयोग समझौते के भावी पाँच साल में कार्यांवयन कार्यक्रम जैसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये।शी चिनफिंग ने कहा कि हमारा समान पक्ष है कि सुरक्षा एससीओ के निरंतर विकास की नींव है।आर्थिक वैश्विकरण और क्षेत्रीय एकता आम रुझान है।विभिन्न पक्ष बहुपक्षीय व्यापार तंत्र मज़बूत करेंगे और किसी भी तरह की व्यापारिक संरक्षणवाद का विरोध करेंगे।विभिन्न पक्ष क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग व्यवस्थामें सुधार करेंगे और एक पट्टी एक मार्ग निर्माण और विकास रणनीति के जुड़ाव को मज़बूत बनाएंगे।शी चिनफिंग ने बल देते हुए कहा कि विभिन्न पक्ष संस्कृति,शिक्षा,विज्ञान, तकनीक,पर्यावरण रक्षण,स्वास्थ्य,पर्यटन,युवा,मीडिया और खेल में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग करने को तैयार हैं।

8 देशों के शंघाई कॉर्पोरेशन आर्गेनाइजेशन (एस.सी.ओ.) में भारत अकेला देश रहा जिसने चीन की महत्वाकांक्षी वन बैल्ट वन रोड (ओ.बी.ओ.आर.) परियोजना का समर्थन नहीं किया। चीन ने इस परियोजना के लिए करीब 80 देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से समझौता कर रखा है। एस.सी.ओ. के 2 दिवसीय सम्मेलन की समाप्ति पर जारी घोषणापत्र में कहा गया है कि रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिजस्तान और तजाकिस्तान ने चीन के बैल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बी.आर.आई.) को अपने समर्थन की पुष्टि की है। घोषणापत्र में कहा गया कि सदस्य देशों ने यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन के विकास समेत बी.आर.आई. के क्रियान्वयन की दिशा में किए गए संयुक्त प्रयासों के लिए प्रसन्नता व्यक्त की है। इसके अलावा एस.सी.ओ. के स्पेस में एक व्यापक, खुला, पारस्परिक रूप से लाभकारी और समान साङोदारी को विकसित करने के लिए क्षेत्रीय देशों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय संघों की क्षमता के इस्तेमाल की भी बात कही गई। आपको बता दें कि चीन की एक क्षेत्र एक रोड (ओ.बी.ओ.आर.) परियोजना पर एक परोक्ष टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी बड़ी संपर्क सुविधा परियोजना में सदस्य देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि समावेशिता सुनिश्चित करने वाली सभी पहलों के लिए भारत की ओर से पूरा सहयोग मिलेगा। उल्लेखनीय है कि भारत ओ.बी.ओ.आर. का लगातार कड़ा विरोध करता रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रोजैक्ट का एक हिस्सा, 50 अरब डॉलर का चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत ने कहा कि वह किसी ऐसे प्रोजैक्ट को स्वीकार नहीं कर सकता जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसकी मुख्य चिंता को अनदेखा करता हो। चीन ने 2013 में इस परियोजना की रूपरेखा पेश की थी जिसका लक्षय दक्षिण-पूर्वी एशिया, सैंट्रल एशिया, गल्फ रीजन, अफ्रीका और यूरोप को रोड और सागर के नैटवर्क से जोड़ना है। शी जिनपिंग पहले ही कह चुके हैं कि चीन इस प्रोजैक्ट में 126 अरब डॉलर का निवेश कर सकता है।
भारत-पाक के शामिल होने से एस.सी.ओ. की ताकत और बढ़ेगी : जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (एस.सी.ओ.) में भारत और पाकिस्तान के शामिल होने से इसकी ताकत और बढ़ेगी। उन्होंने 8 सदस्यीय इस समूह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन का स्वागत किया। जिनपिंग ने अपने शुरुआती भाषण में कहा कि यहां पूर्वी चीनी बंदरगाह शहर में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति हुसैन की उपस्थिति ‘महान ऐतिहासिक क्षण’ है। जिनपिंग ने कहा, संगठन शंघाई भावना के लिए खड़ा है। उन्होंने आम, व्यापक, समग्र, सहकारी और दीर्घकालीन सुरक्षा का आान किया। उन्होंने कहा, हमें शीतयुद्ध की मानसिकता और गुटों के बीच टकराव को खारिज करना चाहिए और अन्य देशों की सुरक्षा के खर्च पर स्वयं की पूर्ण सुरक्षा के चलन का विरोध करना चाहिए, ताकि सभी देशों को सुरक्षा प्राप्त हो सके

लंदनः पंजाब नेशनल बैंक में हजारों करोड़ रुपए के धन शोधन तथा धोखाधडी का मुख्य आरोपी नीरव मोदी राजनीतिक शरण की तलाश में भाग कर ब्रिटेन पहुंच गया है। मीडिया की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।फाइनेन्शियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत और ब्रिटेन के अधिकारी कह रहे हैं कि वर्ह नीरव मोदी लंदन में है, जहां उसकी कंपनी का एक स्टोर है। यहां वह…
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