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ह्यूस्टन। यह तो सभी जानते हैं कि सेहतमंद रहने के लिए पर्याप्त नींद जरूरी होती है, लेकिन अगर आप नौ घंटे से ज्यादा सोते हैं तो आपको दिल की बीमारी हो सकती है और यह समय से पहले मौत का कारण बन सकती है।अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के शोधकर्ताओं ने नींद और हृदय संबंधी गतिविधियों पर करवाए गए 74 अध्ययनों की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि जो लोग 10 घंटे की नींद लेते हैं उनकी समय पूर्व मौत की आशंका आठ घंटे सोने वालों के मुकाबले 30 फीसद बढ़ जाती है। इस अध्ययनों में 33 लाख लोगों के आंकड़े शामिल किए गए।
सात घंटे से कम सोना अच्छा:-देर तक यानी नौ घंटे से ज्यादा सोने वाले लोगों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज यानी हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा 50 फीसद ज्यादा पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार सात घंटे से कम सोने वाले लोगों में समय पूर्व मौत या दिल की बीमारी के खतरे नहीं पाए गए।
नहीं बता सकते क्यों होता है ऐसे:-वैज्ञानिक हालांकि यह नहीं जानते कि जरूरत से ज्यादा सोना सेहत के लिए क्यों खतरनाक होता है लेकिन वे इस पर सहमत हैं कि ज्यादा सोने और कम सोने का सेहत पर बुरा असर पड़ता है। कम सोने से शरीर में लेप्टिन और घ्रेलिन की मात्रा बढ़ जाती है। इनकी मात्रा बढ़ने से इनसान को ज्यादा भूख लगती है और ज्यादा खाने से वह मोटापे का शिकार हो जाता है और यह तो सभी जानते हैं कि मोटापा हृदय संबंधी बीमारियों की जड़ है।
किनको आती है ज्यादा नींद:-शोधकर्ताओं के अनुसार डिप्रेशन के शिकार, खराब माली हालत, कमजोर सामाजिक हैसियत, बेरोजगारी और कसरत से जी चुराने वाले लोगों में ज्यादा नींद लेने की समस्या पाई जाती है।

लंदन। पशुओं के बच्चों की तस्वीरें देखने से लोगों की मांसाहार खाने की इच्छा कम होती है। एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर ऐसी तस्वीरों का असर ज्यादा होता है। ब्रिटेन में लंकास्टर विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के मनोचिकित्सकों ने महिलाओं तथा पुरुषों को बछड़ों, कंगारूओं के बच्चों, सूअर के बच्चों और मेमनों की तस्वीरें दिखाईं और यह जांच की कि क्या इससे मांस खाने की उनकी इच्छा पर कोई असर पड़ा।शोधकर्ताओं ने कहा, हमने पाया कि पुरुषों और महिलाओं दोनों को पशुओं के बच्चे बहुत प्यारे लगे और उनमें बच्चों के प्रति स्नेह का भाव आया। वहीं महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की मांसाहार की इच्छा पर कम असर पड़ा। विश्वविद्यालय की जारेड पियाजा ने बताया कि ऐसा इसलिए हो सकता है कि महिलाओं का बच्चों के प्रति भावनात्मक लगाव ज्यादा होता है।

शंघाई। चीन के रेस्तरां में वेटरों की जगह रोबोट ग्राहकों की मेहमाननवाजी कर रहे हैं। रेस्तरां की मेजों पर पहिये से चलने वाले ये ओवन के आकार के छोटे रोबोट शंघाई शैली में झींगा मछली परोसते हैं और मशीनी आवाज में ग्राहकों को कहते हैं, अपने खाने का आनंद लें। दरअसल, भविष्य में इस तरह के रेस्तरां बनाने के लिए यह कॉन्सेप्ट चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ने तैयार किया है। कंपनी का प्लान रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सभी सेक्टरों में बदलाव करना है। इसके पीछे कंपनी का मकसद रोबोट की कार्यक्षमता बढ़ाना और लेबर कॉस्ट कम करना है।अलीबाबा के प्रोडेक्ट मैनेजर काओ हैताओ कहते हैं, शंघाई में एक वेटर को हर माह 10 हजार यूआन करीब एक लाख रुपये देने होते हैं। साथ ही इनकी दो शिफ्ट में जरूरत होती है। इसके चलते पूरे शंघाई शहर में सैकड़ों वेटरों पर बहुत अधिक खर्च आता है। रोबोट के इस्तेमाल से हमें दो शिफ्ट की कीमत नहीं देनी पड़ेगी। वे पूरा दिन काम करेंगे। अलीबाबा ने इन रोबोट को सुपरमार्केट चेन हेमा में भी इस्तेमाल किया है। इन स्टोर्स में लोग मोबाइल एप से सामान चुनते हैं और रोबोट डिलीवर करते हैं। अलीबाबा ने चीन के 13 शहरों में 57 हेमा सुपरमार्केट खोल रखे हैं। इनमें रोबोट ही सारा काम करते हैं।

लंदन। ग्लोबल वार्मिग के कारण हमारी धरती पर खतरा बढ़ता जा रहा है। एक अध्ययन में आगाह किया गया है कि अगर हम नहीं सुधरे तो वैश्विक तापमान चार से पांच डिग्री सेल्सियस और समुद्र के जलस्तर में 60 मीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी वजह से धरती के कई स्थान निर्जन हो सकते हैं। हमारी गतिविधियां ऐसी ही रहीं तो पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के बावजूद यह खतरा टाला नहीं जा सकता।शोधकर्ताओं के अनुसार, ग्लोबल वार्मिग को 1.5 से दो डिग्री सेल्सियस के दायरे में रखने के बावजूद हालात बेहद कठिनाई भरे हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता विल स्टीफन ने कहा, 'ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन धरती पर तापमान वृद्धि का इकलौता कारक नहीं है।हमारे अध्ययन से जाहिर होता है कि मानव गतिविधियों के कारण तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में अगर हम ग्रीनहाउस उत्सर्जन को रोक भी देते हैं तो भी ग्लोबल वार्मिग बढ़ सकती है। इस हालात से बचाव के लिए इंसानी गतिविधियों को और नियंत्रित किए जाने की जरूरत है। इससे धरती के दोहन को रोका जा सकता है।'स्वीडन के स्टाकहोम रिजिल्यन्स सेंटर के शोधकर्ता जॉन रॉकस्टोर्म ने कहा, 'भट्टी बनने की आशंका अगर हकीकत हो गई तो धरती के कई स्थान निर्जन हो जाएंगे।' जर्मनी के पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इंपैक्ट रिसर्च के निदेशक एच जोकिम ने कहा, 'हमारे अध्ययन से यह जाहिर होता है कि औद्योगिक काल के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से हमारे पर्यावरण पर किस तरह का दबाव पड़ा है।'
हर दशक बढ़ रहा 0.17 डिग्री सेल्सियस तापमान:-स्टीफन के अनुसार, इस समय वैश्विक औसत तापमान पूर्व औद्योगिक काल की तुलना में एक डिग्री सेल्सियस से थोड़ा ज्यादा है। अभी हर दशक में 0.17 डिग्री सेल्सियस की दर से तापमान बढ़ रहा है।
बड़े बदलाव का कारण मानव गतिविधियां:-मानव गतिविधियों की प्रक्रिया को फीडबैक के तौर पर जाना जाता है। इन फीडबैक में समुद्र की तलहटी में मीथेन हाइड्रेट्स में गिरावट, समुद्र में बैक्टीरिया की वृद्धि, अमेजन और उत्तरी जंगलों के खत्म होने के अलावा उत्तरी गोला‌र्द्ध, आर्कटिक और अंटार्कटिका की बर्फ की चादरों का सीमित होना शामिल है।
ऐसे हो सकता है बचाव:-शोधकर्ताओं के मुताबिक, धरती को भट्टी बनने से रोका जा सकता है। इसके लिए ना सिर्फ कार्बन डाईआक्साइड और दूसरी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लानी होगी बल्कि वनों, कृषि और मृदा प्रबंधन को बेहतर करना पड़ेगा। ऐसी तकनीक का भी इस्तेमाल करना होगा जिससे वातावरण और भूमि के नीचे संग्रहित कार्बन डाईआक्साइड को हटाया जा सके।

ग्वाटेमाला सिटी। इसी जून में ग्वाटेमाला का फ्यूगो ज्वालामुखी जिसने भयंकर तबाही मचाई थी, फिर से भड़क सकता है। अधिकारियों ने इस संबंध में चेतावनी जारी की है। रविवार की शाम अधिकारियों ने आदेश जारी कर कर्मचारियों से उन जगह को खाली करने के आदेश जारी किए जो वहां पर पिछले एक महीने से काम कर रहे थे। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के हवाले से ये खबर सामने आई है।साथ ही वहां आस-पास के रहनेवालों से आग्रह किया गया है कि वे नदियों से दूर रहें क्योंकि वह ज्वालामुखी के कारण कभी भी ओवरफ्लो हो सकता है, साथ ही उन्हें अधिकारियों के निर्देशों का अनुपालन करने को कहा गया है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, शनिवार को ग्वाटेमाला के 74 किमी दक्षिण में प्यूअर्टो सैन जोस में भयानक भूकंप के झटके महसूस किए गए जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.1 मापी गई। इसी के मद्देनजर विशेषज्ञों ने ये चेतावनी आदेश जारी किए हैं।ग्वाटेमाला के नेशनल कोऑर्डिनेटर फॉर डिजास्टर रिडक्शन ने बताया कि पिछली बार आई ज्वालामुखी हालिया वर्षों में सबसे खतरनाक रही। इस दौरान 300 लोगों की मौत हो गई थी जबकि हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा था।

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान के नए कप्‍तान इमरान खान की ताजपोशी का समय लगातार बदलता जा रहा है। फिलहाल 15 अगस्‍त को उनकी ताजपोशी की बात की जा रही है, लेकिन हो पाएगी या नहीं इस बारे में फिलहाल कोई कुछ नहीं कह रहा है। ये सब तब हो रहा है जब इमरान खान ने अपनी सरकार बनाने के लिए जरूरी नंबर जुटा लिए हैं। सरकार बनाने को उन्‍हें 172 सीटें चाहिएं थीं, निर्दलीय और दूसरी पार्टियों के समर्थन के बाद अब उनके पास 174 सीटें हैं। कुल मिलाकर ये कहना गलत नहीं होगा कि आंकड़ों की बाजीगिरी में वह फिलहाल बाजी मार ले गए हैं। लेकिन इसके बाद भी एक बड़ा सवाल ज्‍यों का त्‍यों बना हुआ है। और वो ये है कि क्‍या इमरान खान अपनी सरकार को पूरा समय चला सकेंगे।
इमरान पर सवाल:-पाकिस्‍तान में कथित लोकतात्रिंक व्‍यवस्‍था को देखते हुए यह सवाल काफी बड़ा है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि पाकिस्‍तान का कोई भी प्रधानमंत्री आज तक अपना समय पूरा नहीं कर पाया है। नवाज शरीफ इसकी ताजा मिसाल हैं। वह तीन बार सत्ता पर काबिज हुए लेकिन तीनों बार ही उन्‍हें हटा दिया गया। बहरहाल, सवाल जितना बड़ा है इसका जवाब भी उतना ही उलझा है। उनका समय पूरा करने के सवाल पर विदेश मामलों के जानकार कमर आगा भी इससे पूरी तरह से इत्तफाक रखते हैं। दैनिक जागरण से बात करते हुए उन्‍होंने कहा कि इमरान खान को सत्ता तक पहुंचाने वाली सेना है। वह अपने आप कुछ नहीं कर सकते थे। लिहाजा जब तक वह सेना का साथ देते रहेंगे तब तक सत्ता में बने रहेंगे। जहां उन्‍होंने सेना से इतर कुछ करने की कोशिश की तो उन्‍हें सेना सत्ता से बेदखल कर देगी।
खराब हालत में पाकिस्‍तान और इमरान:-उनके मुताबिक पाकिस्‍तान के मौजूदा हालात काफी खराब हो चुके हैं। आर्थिकतौर पर उसके हाल खराब है। ऐसे में इमरान खान ने जो वादे चुनाव के दौरान आवाम से किए थे उन्‍हें भी पूरा करना काफी मुश्किल होगा। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि पहले पाकिस्‍तान को तीन तरफ से फंड मिलता था। इसमें अमेरिका, सऊदी अरब और चीन शामिल था। लेकिन अब अमेरिका पूरी तरह से उससे अलग हो चुका है। हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्‍तान को आतंकवाद खत्‍म करने के नाम पर दिए जाने वाले फंड में जबरदस्‍त कटौती की है। इसके बाद सऊदी अरब कि हालत भी पहले से खराब हो चुकी है। वह यमन में लड़ाई पर काफी पैसा खर्च कर रहा है। इसके बाद चीन ही बचता है। लेकिन चीन पाकिस्‍तान की आर्थिक स्थिति को मजबूत नहीं कर सकता है। ऐसे में भी इमरान खान के सत्ता में आने के बाद भी उनके समय पूरा करने पर बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है।
सेना के खिलाफ जाने की हिम्‍मत:-जहां तक नंबर जुटाने वाली बात है तो उसमें उन्‍होंने जरूर बाजी मार ली है। कमर आगा का ये भी कहना है कि सेना के खिलाफ जाने की हिम्‍मत वहां पर शायद ही कोई करेगा। जो करेगा उसका हश्र नवाज या बेनेजीर और उनके पिता भुट्टो जैसा ही होगा। लेकिन जिन निर्दलीयों और पार्टी ने इमरान को समर्थन किया है उनके अपने स्‍वार्थ हैं। ऐसे में टकराव होना बेहद लाजमी है। हालांकि इमरान सेना के पोस्‍टर ब्‍वॉय के तौर पर जाने और पहचाने जाते हैं। अब तक उन्‍होंने वही किया है जो जो सेना ने उनसे करवाना चाहा। ये पूछे जाने पर कि सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी क्‍या वास्‍तव में इमरान को पाकिस्‍तान की आवाम पसंद करती है, आगा का कहना था इमरान की राजनीतिक जमीन बेहद खोखली है। सिंध हो या फिर बलूच हो या फिर पंजाब हो इमरान को बहुत लोग पसंद नहीं करते है। लेकिन यहां के युवाओं की दिलचस्‍पी जरूर इमरान में हो सकती है।
सेना खुद सत्ता में नहीं आ सकती:-कमर आगा का साफतौर पर कहना है कि मौजूदा समय में पाकिस्‍तान की सेना खुद सीधेतौर पर सत्ता पर काबिज नहीं हो सकती है। यदि होती है तो उसको अमेरिका समेत दूसरे देशों से कोई समर्थन नहीं मिलने वाला है। ऐसे में छवि खराब होने की आशंका ज्‍यादा है। लिहाजा सेना सत्ता पर अपनी बात मनवाने के लिए एक मुखौटा रखना चाहती है जो मौजूदा समय में इमरान खान है। जैसा सेना कहेगी वो करेंगे, जब करने से इंकार कर देंगे तो बाहर कर दिए जाएंगे। सेना के सरकार में दखल देने का इससे बेहतर उपाय कुछ और नहीं हो सकता है।
नवाज का सकुशल बाहर आना बेहद मुश्किल:-कमर आगा ने इस बातचीत में ये भी कहा कि नवाज शरीफ के बुरे दिनों की शुरुआत करने के पीछे पहले और अब भी सेना ही रही है। पहले मुशर्रफ जो कि खुद राष्‍ट्रपति होने के साथ-साथ सेनाध्‍यक्ष थे, वो रहे और अब भी सेना की वजह से उन्‍हें ये दिन देखने पड़े हैं। उनके मुताबिक नवाज सेना को किनारे लगाते लगाते खुद सेना द्वारा किनारे कर दिए गए। ये पूछे जाने पर कि नवाज क्‍या जेल से सकुशल वापस आ सकेंगे, उनका कहना था कि ये काफी मुश्किल है। आपको बता दें कि नवाज की हालत काफी खराब है और उन्‍हें अदियाला जेल से दूसरी जेल में शिफ्ट किया गया है। लेकिन फिलहाल उनकी हालत खराब है। इसलिए उनके सकुशल वापस आ पाना काफी मुश्किल दिखाई देता है।
खतरे में पीएमएल-एन का वजूद:-पीएमएल-एन के वजूद को लेकर उनका कहना था कि नवाज से यह पार्टी थी, लेकिन नवाज के बाद पार्टी का वही हश्र होगा जो भुट्टो की पार्टी पीपीपी का हुआ है। वह मौजूदा दौर में अपने गढ़ में भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकी है। उनके मुताबिक पाकिस्‍तान में भी पार्टी एक चेहरे से ज्‍यादा कुछ नहीं है। पीपीपी का चेहरा बेनेजीर भुट्टो हुआ करती थीं और पीएमएल-एन का चेहरा नवाज थे। भुट्टो के जाने के बाद पार्टी अंतिम सांसे गिन रही है। वहीं पीएमएल-एन में अब कोई बड़ा नेता नहीं है जो उसको आगे बढ़ा सके। लिहाजा ये पार्टी भी सिर्फ झंडे और पोस्‍टर तक ही सिमट कर रह जाएगी। मौजूदा दौर की यदि बात करें तो पंजाब से भी अब पीएमएल-एन खारिज हो चुकी है। यह नवाज के लिए काफी बुरा है।

मातरम। दस दिन में दूसरी बार आए भूकंप के तेज झटके ने पर्यटकों को इंडोनेशिया के प्रमुख पर्यटन द्वीप लॉमबोक से लौटने के लिए मजबूर कर दिया है। भूकंप से घबराए पर्यटक लॉमबोक और आसपास के द्वीपों से जल्द से जल्द निकलने की कोशिश में हैं। रविवार शाम को आए 6.9 तीव्रता के भूकंप से 91 लोगों की जान चली गई। दो सौ से ज्यादा लोग घायल हैं।देश-विदेश के सैकड़ों…
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले उनका बेटा उनके प्रतिद्वंद्वी के बारे में सूचना हासिल करने के लिए रूसी वकील से मिला था। हालांकि, ट्रंप ने इस बैठक का बचाव करते हुए इसे कानूनी करार दिया है।नौ जून, 2016 को डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की रूसी वकील नतालिया वेसेलनितस्काया के साथ मुलाकात को लेकर यह राष्ट्रपति ट्रंप का अब तक का सबसे स्पष्ट…
बीजिंग। चीन ने सोमवार को घोषणा की है कि उसने अपने पहले हाइपरसोनिक विमान का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह हाइपरसोनिक विमान अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। ये परमाणु हथियार ले जाने के साथ किसी भी मौजूदा पीढ़ी की मिसाइल विरोधी रक्षा प्रणालियों (ऐंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स) में प्रवेश कर सकता है। यह विमान अपनी शॉक वेव पर चलता है।चीन की एकेडमी ऑफ एयरोस्पेस एरोडायनामिक्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि…
इस्लामाबाद। एक फोन एप और पांच करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का डाटाबेस पिछले महीने हुए संसदीय चुनाव में इमरान खान का प्रमुख हथियार था। हालांकि, उनके विरोधी उन पर गुपचुप तरीके से सेना की मदद लेने का आरोप लगा रहे हैं।इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने 25 जुलाई के मतदान से पहले तकनीक का जिस तरह इस्तेमाल किया, उससे अन्य पार्टियों पर बढ़त बनाने में उसे बड़ी कामयाबी मिली।चुनाव से…
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