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टोक्योः जापान के गामागोरी शहर में एक मछली की वजह से प्रशासन को हाई अलर्ट जारी करना पड़ गया। लोगों को चेताने के लिए प्रशासन ने लाउडस्पीकर पर अनाउंसमैंट कराया कि इस मछली को खाने से बचें। दरअसल जापान के एक सुपरमार्कीट ने गलती से फूगु मछली के 5 पैकेट्स बेच दिए थे। इस सुपरमार्कीट में मछली बेचने से पहले उसके लिवर नहीं निकाला गया था, जबकि इसमें एक विषैला तत्व पाया जाता है।जैसे ही प्रशासन को ये बात पता चली वो हरकत में आया और लोगों को सावधान करने के इरादे से उस लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी कराई, जिसे मिसाइल अटैक के वक्त इस्तेमाल किया जाता है।प्रशासन ने मछली के 3 पैकेट्स को जब्त कर लिया है, मगर बाकी दो पैकेट्स नहीं मिले हैं। ऐसे में गामागोरी शहर में प्रशासन ने एइमरजेंसी वायरलैस सिस्टम के जरिए इस फूगु मछली को न खाने की सलाह दी है।जापान में फूगु मछली काफी पसंद की जाती है और सर्दियों में ये सबसे महंगी डिशेस में से एक है। मगर इस मछली की चमड़ी, आंत और लिवर में एक तरह का जहरीला तत्व टेट्रोडोटॉक्सिन पाया जाता है जो जानलेवा होता है। जापान में शेफ को इसे पकाने के लिए पहले मंजूरी लेनी पड़ती है। इस मछली के लिवर को अगर आप खाते हैं तो लकवा मार सकता है, वहीं इससे सांस लाने में भी परेशानी हो सकती है और वक्त रहते ईलाज न मिला तो इंसान की मौत भी हो सकती है।

अमेरिका के जॉर्जिया में इमारत में आग लगने से तीसरी मंजिल पर एक बच्ची फंस गई। ऐसे में एक फायरमैन ने बहादुरी की मिसाल देते हुए सुक्षित बचाया है। रौंगटे खड़े कर देने वाला ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।दरअसल जॉर्जिया स्टेट की एक तीन मंजिला इमारत में आग लग गई। रिपोर्ट्स की मानें तो ये पूरा वाक्या 3 जनवरी का है। यहां के डेकाल्ब काउंटी फायर रेसक्यू डिपार्टमेंट ने कैमरा फुटैज जारी की हैं जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे कैप्टन स्कॉट ने बच्ची को बचाया। इमारत में आग इतनी ज्यादा फैल गई थी कि फायर डिपार्टमेंट अगर सही समय पर न आता तो किसी को बचा पाना मुश्किल था। फायरमैन ने जब तीसरी मंजिल में एक बच्ची को फंसा देखा तो उन्होंने उसे नीचे कैप्टन की तरफ फेंका और कैप्टन ने उस बच्ची को पकड़कर उसकी जान बचाई। इसी घटना के बारे में बताते हुए फायरमैन बताते हैं कि उस दिन हम बच्चों को ऐसे पकड़ रहे थे जैसे फुटबॉल को पकड़ रहे हों। फायर डिपार्टमेंट ने इस पूरी घटना का वीडियो फेसबुक पर शेयर किया है। इस वीडियो के 300K व्यूज आ चुके हैं और इसके कुल 3,000 शेयर हो चुके हैं।

वैज्ञानिकों ने करीब 4000 साल पुरानी दो ममियों के राज पर से पर्दा उठा दिया। वैज्ञानिकों की खोज में सामने आया है कि ये दो ममियां दो सौतेले भाइयों की हैं, जो उस वक्त के शाही परिवार का हिस्सा थे।अगली पीढ़ी की डीएनए सीक्वेंसिंग की मदद से दो भाइयों की प्रसिद्ध ममी के बारे में शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि उनके पिता अलग-अलग व्यक्ति थे और वे दोनों सौतेले भाई थे। ये ममी 1800 ईसा पूर्व की हैं।ब्रिटेन के मेनचेस्टर संग्रहालय के इजिप्टोलॉजी कलेक्शन मे इन भाइयों की ममी सबसे पुरानी है। माना जाता है कि ये भाई संभ्रात परिवार से संबंध रखते थे और उनका नाम 'खनम नख्त' और 'नख्त अंख' था। इन ममियों की खोज वर्ष 1907 में हुई थी। तभी से यह बहस छिड़ी हुई थी कि वास्तव में ये दोनों एक दूसरे के संबंधी थे या नहीं।काहिरा के दक्षिण में एक गांव से इन ममियों की खोज डेयर रिफेह ने की थी। यह दो भाइयों के मकबरे के नाम से प्रसिद्ध है। इनके ताबूतों पर चित्रलिपि उत्कीर्ण है जिससे पता चलता है कि वे दोनों एक अज्ञात स्थानीय गर्वनर के बेटे थे और उन दोनों की मां का नाम एक ही था - 'खनुम-आ'। तभी से उन दोनों को दो भाई के रूप में पहचान मिली।मकबरे की पूरी सामग्री 1908 में जब मेनचेस्टर ले जाई गई थी। इजिप्टोलॉजिस्ट मारग्रेट मरी ने उनकी जांच की तो उनकी टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि उनके कंकाल की बनावट बहुत अलग है। इससे पता चलता है कि वे आपस में संबंधी नहीं थे। फिर यह माना गया कि उनमें से एक भाई को गोद लिया गया था। साल 2015 में उनके दांतों से लिए गए डीएनए और सीक्वेंसिंग की अगली पीढ़ी की प्रक्रिया की मदद से यह पता लगा कि उनके बीच माता के पक्ष की ओर से कोई संबंध था।

 

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने प्रवासियों के लिए योग्यता आधारित व्यवस्था के बारे में संकेत देते हुए कहा कि वे कुशल, प्रतिभाशाली और अंग्रेजी बोलने वाले प्रवासियों को देश में जगह देना चाहते हैं। इससे भारत जैसे देशों को फायदा हो सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका आने वाले प्रवासियों की संख्या कम करने के लिए योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली पर जोर दे रहे हैं।ट्रंप प्रशासन का मानना है कि योग्यता आधारित प्रवासी व्यवस्था से दुनियाभर के सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली लोग अमेरिका आएंगे जबकि लोगों के लिए गैरकानूनी रूप से देश में आना मुश्किल हो जाएगा।राष्ट्रपति मौजूदा व्यवस्था में सुधार करने के लिए लॉटरी के जरिए दिए जाने वाले वीजा और श्रृंखला प्रवास को खत्म करना चाहते हैं।उन्होंने कहा, ''हम चाहते हैं कि दुनिया के किसी भी हिस्से से लोग आएं, वे इस देश को प्यार करते हों, यहां के लोगों से प्यार करते हों, जो कुशल हों, प्रतिभाशाली हों, जो अंग्रेजी भाषा बोलते हों, जो हमारे मूल्यों और जैसी जिंदगी हम जीते हैं, उसका समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हों।अधिकारी ने कहा कि ऐसे प्रवासी दुनिया के किसी भी हिस्से से हो सकते हैं, बस वे इन योग्यताओं को पूरा करते हों।अगर ऐसी कोई नीति बनाई और लागू की जाती है तो इससे भारत जैसे देशों को लाभ हो सकता है जिसके ज्यादातर लोग इस मापदंड को पूरा करते हैं।अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए आव्रजन प्रणाली में सुधार करना चाहता है।उन्होंने कहा, ''हम सभी पृष्ठभूमियों या दुनिया के किसी भी स्थान के व्यक्तियों को अमेरिका में आने देना चाहेंगे लेकिन उनकी योग्यता तथा सफलता की संभावना के आधार पर।अधिकारी ने कहा कि ऐसे किसी भी विदेशी नागरिक को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो आतंकवाद से संबंधित अपराध करें या आतंकवाद का समर्थन करने की साजिश रचें।उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य सभी रूपों में आतंकवाद का खात्मा करना है चाहे वह कहीं से भी पैदा हुआ हो।व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रपति आवेदक के देश, धर्म और जातीयता पर ध्यान दिए बिना योग्यता आधारित व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं।सैंडर्स ने कहा, ''वह चाहते हैं कि प्रवासी हर कहीं से आएं लेकिन वह योग्यता आधारित व्यवस्थाके जरिए ऐसा करना चाहते हैं।उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ''योग्यता आधारित व्यवस्था नस्ल, धर्म या देश पर आधारित नहीं है। यह असल में योग्यता पर आधारित है।सैंडर्स ने कहा कि यह ''अधिक निष्पक्ष व्यवस्था है और एक साल पहले डेमोक्रेट सदस्यों ने इसका समर्थन किया था।

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने प्रवासियों के लिए योग्यता आधारित व्यवस्था के बारे में संकेत देते हुए कहा कि वे कुशल, प्रतिभाशाली और अंग्रेजी बोलने वाले प्रवासियों को देश में जगह देना चाहते हैं। इससे भारत जैसे देशों को फायदा हो सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका आने वाले प्रवासियों की संख्या कम करने के लिए योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली पर जोर दे रहे हैं।ट्रंप प्रशासन का मानना है कि योग्यता आधारित प्रवासी व्यवस्था से दुनियाभर के सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली लोग अमेरिका आएंगे जबकि लोगों के लिए गैरकानूनी रूप से देश में आना मुश्किल हो जाएगा।राष्ट्रपति मौजूदा व्यवस्था में सुधार करने के लिए लॉटरी के जरिए दिए जाने वाले वीजा और श्रृंखला प्रवास को खत्म करना चाहते हैं।उन्होंने कहा, ''हम चाहते हैं कि दुनिया के किसी भी हिस्से से लोग आएं, वे इस देश को प्यार करते हों, यहां के लोगों से प्यार करते हों, जो कुशल हों, प्रतिभाशाली हों, जो अंग्रेजी भाषा बोलते हों, जो हमारे मूल्यों और जैसी जिंदगी हम जीते हैं, उसका समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हों।अधिकारी ने कहा कि ऐसे प्रवासी दुनिया के किसी भी हिस्से से हो सकते हैं, बस वे इन योग्यताओं को पूरा करते हों।अगर ऐसी कोई नीति बनाई और लागू की जाती है तो इससे भारत जैसे देशों को लाभ हो सकता है जिसके ज्यादातर लोग इस मापदंड को पूरा करते हैं।अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए आव्रजन प्रणाली में सुधार करना चाहता है।उन्होंने कहा, ''हम सभी पृष्ठभूमियों या दुनिया के किसी भी स्थान के व्यक्तियों को अमेरिका में आने देना चाहेंगे लेकिन उनकी योग्यता तथा सफलता की संभावना के आधार पर।अधिकारी ने कहा कि ऐसे किसी भी विदेशी नागरिक को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो आतंकवाद से संबंधित अपराध करें या आतंकवाद का समर्थन करने की साजिश रचें।उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य सभी रूपों में आतंकवाद का खात्मा करना है चाहे वह कहीं से भी पैदा हुआ हो।व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रपति आवेदक के देश, धर्म और जातीयता पर ध्यान दिए बिना योग्यता आधारित व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं।सैंडर्स ने कहा, ''वह चाहते हैं कि प्रवासी हर कहीं से आएं लेकिन वह योग्यता आधारित व्यवस्थाके जरिए ऐसा करना चाहते हैं।उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ''योग्यता आधारित व्यवस्था नस्ल, धर्म या देश पर आधारित नहीं है। यह असल में योग्यता पर आधारित है।सैंडर्स ने कहा कि यह ''अधिक निष्पक्ष व्यवस्था है और एक साल पहले डेमोक्रेट सदस्यों ने इसका समर्थन किया था।

जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने बुधवार को कहा कि, उनके कर्मचारी ने गलती से उत्तर कोरिया द्वारा जापान पर मिसाइल दागने का अलर्ट भेज दिया, जबकि वह दूसरी खबर भेजना चाहते थे। एनएचके ने किसी भी यांत्रिक खामी से इंकार किया और कहा कि, वह एहतियाती उपाय पर गौर कर रहा है। हालांकि इसने विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया।हवाई में आपातकालीन अधिकारियों की गलती से मिसाइल हमले की चेतावनी राज्य भर में फोन पर भेजे जाने के कुछ दिनों बाद यह गलत सूचना चली है। प्रसारक ने बताया कि एनएचके न्यूज फ्लैश को संभावित आपातकाल के लिए तैयार किया गया था। इसने कहा कि, अलर्ट को कई कर्मचारियों द्वारा जांचे जाने के बाद ही इसे प्रसारित किया जाता है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान ने कहा है कि, अमेरिका पाकिस्तान को आश्वस्त करने का प्रयास कर रहा है कि भारत उसके लिए खतरा नहीं है और इस्लामाबाद को नई दिल्ली के प्रति अपने रणनीतिक रूख में बदलाव लाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि, अमेरिका के साथ सौहार्दपूर्ण लेकिन ''पूरी तरह से निष्कपट संवाद की आवश्यकता है, जिसमें हर चीज सामने हो।" उन्होंने कहा कि इसका…
इस बार की सर्दियां धरती के उत्तरी हिस्से पर कहर बनकर टूटी हैं। चाहे अमेरिका हो, यूरोप या फिर रूस, भयानक सर्दी के सितम ने पूरी उत्तरी हिस्से को मानो बर्फ से ढक दिया है। धरती के सबसे ठंडे, आबादी वाले इलाके में तो हाल इस कदर खराब हैं कि वहां के थर्मामीटर ने ही दम तोड़ दिया है।आपको बता दें कि रूस के साइबेरिया में आने वाला छोटा सा…
दुनिया में लोगों को जुनून कुछ ऐसा करवा देता है कि वो मिसाल कायम कर देते हैं। ऐसी ही प्यार की एक मिसाल कायम की एक प्रेमी जोड़ी ने। लोग शादी करने के लिए अलग-अलग आलीशान जगह ढूंढते हैं लेकिन इस प्रेमी युगल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के पास पहुंचर शादी रचाई।फिनलैंड की रहने वालीं 32 साल की बिजनेसवुमन हाईदी तुरुनेन और 31 साल के ऑस्ट्रेलिया…
अमेरिका के कैलिफोर्निया के एक दंपति को अपने 13 बच्चों को घर में बंधक बनाकर रखने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।लॉस एंजलिस के पूर्व में 113 किलोमीटर दूर पैरिस में 57 वर्षीय डेविड एलेन टरफिन और 49 वर्षीय लुइस अन्ना टरपिन ने अपने 13 बच्चों को एक घर में बंधक बनाकर रखा था। दो से लेकर 29 वर्ष आयु के यह सभी बच्चे कुपोषित हालत में मिले। बच्चों…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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