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लंदन:-ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी ने आज कहा कि सितंबर की शुरुआत में देश को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है।कंजरवेटिव पार्टी के सांसद ग्राहम ब्रैडी ने कहा कि पार्टी ने तय किया है कि प्रधानमंत्री के पद के लिये चुनाव अगले हफ्ते शुरू हो और 2 सितंबर तक इसका निष्कर्ष निकालना चाहिए। कंजरवेटिव पार्टी के साथ साथ देश के आम लोग वास्तव में निश्चितता चाहते हैं। हमें एक संकल्प लेना होगा और इस प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से जितनी जल्दी निपट सके हमारे लिए उतना अच्छा होगा।पिछले दिनों हुए जनमत संग्रह में ब्रिटेन के 50 फीसदी से ज्यदा मतदाताओं ने प्रधानमंत्री डेविड कैमरून की सलाह के खिलाफ 28 सदस्यीय गुट यूरोपीय संघ (ईयू) छोड़ने के पक्ष में मतदान किया था।जनमत संग्रह के नतीजे समाने आने के बाद कैमरन ने घोषणा किया था कि वह अक्टूबर तक इस्तीफा दे देगें।

वाशिंगटन:-अमेरिका के एक सीनेटर ने भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता नहीं देने का निर्णय करने के लिए एनएसजी की प्रशंसा की है। अमेरिकी सीनेटर एडवर्ड मार्के ने चीन के नेतृत्व में हुए मजबूत विरोध के मद्देनजर भारत की सदस्यता पर कोई निर्णय लिए बिना एनएसजी की पूर्ण बैठक के सोल में समाप्त होने के कुछ ही घंटों बाद परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की तारीफ की।मैसाचुसेटस से जूनियर डेमोक्रेटिक सीनेटर एडवर्ड मार्के ने एक बयान में कहा, एनएसजी ने भारत को प्रवेश देने से रोककर परमाणु अप्रसार संधि के प्रति अपने दढ़ समर्थन को आज फिर से दोहराया। उन्होंने कल कहा कि एनएसजी की स्थापना भारत के 1974 के परमाणु परीक्षण की प्रतिक्रिया के तौर पर की गई थी और इसने परमाणु हथियारों के और विस्तार में योगदान कर सकने वाली उस तकनीक को साझा करने से रोकने के लिए दशकों काम किया है।भारत विरोधी के तौर पर चर्चित मार्के ने कहा, यदि भारत को एनएसजी में शामिल कर लिया जाता तो यह संगठन में भागीदार एकमात्र ऐसी सरकार होती जो एनटीपी का कोई पक्ष नहीं होती, जिससे संधि के प्रति एनएसजी की प्रतिबद्धता कमजोर होती। भारत को प्रवेश देने से रोककर एनएसजी ने संधि और व्यापक वैश्विक अप्रसार व्यवस्था दोनों को मजबूत किया है।अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य के तौर पर मार्के ने भारत और अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौते को पारित होने से रोकने के प्रयासों का असफल नेतृत्व किया है। मार्के ने पिछले महीने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान भारत की एनएसजी में सदस्यता के आवेदन का विरोध किया था। एनएसजी की पूर्ण बैठक कल सोल में समाप्त हुई जिसमें भारत की सदस्यता पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कल कहा, सोल में एनएसजी की बैठक में भारत को तुरंत समूह की सदस्यता देने से इंकार कर दिया गया और कहा गया कि जिन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं किया है उनकी भागीदारी पर चर्चा जारी रहेगी। चीन ने भारत को सदस्यता दिए जाने को लेकर अपने विरोध को गोपनीय नहीं रखा था। चीन ने भारतीय पक्ष में बड़े समर्थन के बावजूद सदस्यता की उसकी दावेदारी को विफल कर दिया। भारतीय अधिकारियों के अनुसार 38 देशों ने भारत को समर्थन दिया।

नई दिल्ली:-ब्रिटेन में शुक्रवार को यूरोपीय यूनियन में रहने या न रहने के प्रश्न पर जनमत संग्रह हुआ और इसका जो नतीजा आया उससे यह निश्चित हो गया है कि अब भविष्य में ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन का सदस्य नहीं रहेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन चाहते थे कि ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन के साथ रहे और वोटिंग में हुई हार के बाद कैमरन ने कहा कि वो जल्दी ही अपने पद से इस्तीफा देंगे।वोटिंग में भाग लेने वाले 52 फीसदी वोटरों ने यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के बाहर होने के पक्ष में वोट दिया जबकि 48 फीसदी लोगों ने यूरोपीय यूनियन के साथ रहने के लिए वोट दिया। ब्रिटेन की जनता के इस फैसले की वैश्विक स्तर पर चर्चा हो रही है, यहां पर यूरोपीय यूनियन से संबधित खास बातों पर नजर डालेंगे...

1- क्या है यूरोपीय यूनियन:-यूरोपियन यूनियन यूरोप के 28 देशों का एक राजनैतिक एवं एवं आर्थिक मंच है जहां पर ये सदस्य देश अपने प्रशासकीय कार्य करते हैं, यूरोपीय यूनियन के नियम सभी सदस्य देशों पर लागू होता है।

2- 1957 से हुई इसकी शुरुआत:-1957 में रोम की संधि द्वारा यूरोपीय आर्थिक परिषद के माध्यम से छह यूरोपीय देशों ने अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर इसकी स्थापना की और इसमें समय के अनुसार बदलाव होता रहा और 2007 में लिस्बन समझौते के तहत सुधारों की प्रक्रिया 1 जनवरी 2008 से शुरु हुई। आज यूरोपीय यूनियन में 6 से बढ़कर सदस्य देशों की संख्या 28 हो चुकी है।

3- सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार:-यूरोपिय यूनियन के सदस्य राष्ट्र एकल बाजार के रूप में व्यापार करते हैं इसके कानून सभी सदस्य देशों पर लागू होता है, यूरोपीय यूनियन के नागरिकों को व्यापार के लिए चार सुविधाएं निश्चित तौर पर मिलती हैं।

4- एकल मुद्रा प्रणाली:-1999 में यूरोपिय संघ के 15 सदस्य देशों ने एक नई मुद्रा यूरो को अपनाया। इसके साथ यूरोपीय यूनियन ने अपनी विदेश, स्रुरक्षा, न्याय नीति की भी घोषणा की। यूरोपीय यूनियन के किसी देश में यात्रा करने के लिए पासपोर्ट की बाध्यता को खत्म कर दिया गया।

5- यूरोपीय यूनियन है कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सदस्य:-यूरोपीय यूनियन संयुक्त राष्ट्रसंघ एवं विश्व व्यापार संगठन में अपने सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करता है। यूरोपीय यूनियन के 21 देश नाटो के भी सदस्य हैं। यूरोपीय यूनियन के के महत्वपूर्ण संस्थानों में यूरोपियन कमीशन, यूरोपीय संसद, यूरोपीय संघ परिषद, यूरोपीय न्यायलय एवं यूरोपियन सेंट्रल बैंक इत्यादि शामिल हैं।

6- 2012 में मिला शांति का नोबेल पुरस्कार:-यूरोपीय यूनियन को वर्ष 2012 में यूरोप में शांति और सुलह, लोकतंत्र और मानव अधिकारों की उन्नति में अपने योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

7- 28 देशों का संगठन है यूरोपीय यूनियन:-यूरोपीय यूनियन में शामिल देशों में आस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातीविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, स्पेन, स्वीडन, एवं युनाइटेड किंगडम और कोएशिया हैं, जबकि तीन देश इसका सदस्य बनने की प्रकिया में हैं और आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहें हैं।

8- सभी यूरोपीय देश नहीं हैं इसके सदस्य:-यूरोपीय यूनियन में कुछ यूरोपीय देश जैसे स्वीटजरलैंड, नार्वे, एवं सोवियत रूस इसका हिस्सा नहीं हैं। कुछ सदस्य राष्ट्रों के भूमि क्षेत्र भी यूरोप का हिस्सा होते हुए भी संघ के भौगोलिक नक्शे में शामिल नहीं है, उदहारण के तौर पर चैनल एवं फरोर द्वीप का हिस्सा।

9- काउंसिल आफ यूरोपीय यूनियन है प्रमुख कार्यकारी संगठन:-यूरोपीय यूनियन अपने कई प्रशासनिक एवं अन्य इकाइयों द्वारा संचालित होता है, जिनमें मुख्य रूप से काउंसिल आफ यूरोपीय यूनियन, यूरोपीय कमीशन, एवं यूरोपीय पार्लियामेंट मुख्य हैं। यूरोपीय आयोग संघ के प्रमुख कार्यकारी अंग के तौर पर काम करता है और इसके प्रतिदिन के कामों की जिम्मेवारी इसी पर होती है।

10- ब्रिटेन ने क्यों चुनी बाहर निकलने की राह

- ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन के कानून का पालन करना पड़ता था जिसमें ब्रिटेन को दिक्कत का सामना करना पड़ता था।

- ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन में रहने के कारण प्रतिवर्ष कर्ज में डूबता जा रहा था।

- ब्रिटेन में अवैध प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और ब्रिटेन के लोगों की नौकरियों पर प्रवासियों ने कब्जा जमा रखा है है जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ रहा था।

लंदन:-ब्रिटेन में जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन और यूरोपीय संघ पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को लेकर आईएसआईएस ने खुशी जताई है और यूरोप को पंगु करने के लिए बर्लिन और ब्रुसेल्स में हमले की बात कही है। यह जानकारी मीडिया की एक खबर में दी गई।मिरर ने एसआईटीई खुफिया समूह के हवाले से खबर दी कि आतंकवादियों के बीच लोकप्रिय जिहादी टेलीग्राम ने आर्थिक अराजकता की प्रशंसा की जो ईयू जनमत संग्रह के बाद पैदा हुई है और समर्थकों से अपील की कि यूरोप के मुख्य भूभाग पर हमला करें।ब्रिटेन ने 43 साल बाद ऐतिहासिक जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ को छोड़ने के लिए वोट दिया। 52 फीसदी लोगों ने यूरोपीय संघ को छोड़ने के हक में वोट दिया।कुल मतदाताओं में से 72 फीसदी लोगों ने मतदान किया जिससे 1975 के फैसले को पलट दिया जब ब्रिटेन ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय का सदस्य रहने के लिए वोट दिया था जो बाद में यूरोपीय संघ ब गया।ब्रिटेन की सेना के प्रमुखों ने चेतावनी दी है कि यूरोप भर में हॉलीडे रिसॉर्ट को आईएसआईएस जैसे समूहों से गंभीर और सीधे खतरा है।ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के हवाले से कहा गया है, ब्रिटेन के हितों और ब्रिटिश नागरिकों के खिलाफ पूरी दुनिया में आतंकवादी हमले का ऐसे समूहों या लोगों से खतरा बढ़ गया है जो इराक और सीरिया युद्ध से प्रभावित हैं।यूरो 2016 के फुटबॉल मैच में इस हफ्ते आयरलैंड और बेल्जियम के बीच एक बड़े आतंकवादी हमले की योजना को आतंकवाद निरोधक पुलिस ने समझा जाता है कि टाल दिया।

नई दिल्ली:-ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के फैसले पर अब मुहर लग गई है। ब्रिटेन के करीब 52 प्रतिशत लोगों ने EU से बाहर होने जबकि 47 प्रतिशत लोगों ने Brexit से दूर रहने के लिए वोट किया है। ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने की मांग आज की नहीं है कई सालों से ब्रिटेन की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियां इसकी मांग करती रहीं हैं। आज हम बता रहें हैं वो 5 वजहें जिसकी वजह से ब्रिटेन ने छोड़ दिया यूरोपीय यूनियन का साथ:

1. ब्रिटेन में बढ़ रहा प्रवासी संकट: Brexit का समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि EU से अलग हो जाने पर ब्रिटेन में गहराते जा रहे प्रवासी संकट से निपटा जा सकेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में हर रोज़ करीब 500 प्रवासी दाखिल होते हैं और पूर्वी यूरोप के करीब 20 लाख लोग इस समय ब्रिटेन में रह रहे हैं। EU से अलग हो जाने के बाद ब्रिटेन प्रवासियों के आने पर रो लगा सकेगा साथ ही अपराधी प्रवासियों को डिपोर्ट भी कर सकेगा। सीरिया में जारी संकट ने और बढ़ाई दिक्कतें।

2. EU को नहीं चुकानी होगी भारी रकम: EU से अलग होने और Brexit से आने वाले वक़्त में ब्रिटेन को 99 हज़ार 300 करोड़ रुपये की सालाना बचत होगी। ये रकम ब्रिटेन को EU में बने रहने के लिए मेंबरशिप फीस के रूप में चुकानी पड़ती है।

3. EU की अफसरशाही से मुक्ति: यूरोपियन यूनियन में जारी अफसरशाही ब्रिटेन के लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं है। Brexit का समथन कर रहे लोगों का कहना है कि EU तानाशाही रवैया अपनाती है। सिर्फ कुछ ब्यूरोक्रेट्स मिलकर ब्रिटेन समेत 28 देशों के लोगों का भविष्य तय करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक EU के लिए करीब 10 हज़ार अफसर काम करते हैं। इनमें से कई पूर्व राजनेता है और अपने देश में राजनीतिक पारी खत्म होने के बाद ये नेता EU का हिस्सा बन जाते हैं। European Union का कामकाज देखने वाले अफसरों और सांसदों को मोटी सैलरी भी मिलती है।

4. डेविड कैमरून से भी ज्यादा सैलेरी लेते हैं अफसर: Brexit की मांग कर रहे लोगों का दावा है कि EU में काम करने वाले ज्यादतर अफसरों की सैलरी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से भी ज्यादा है। यूरोपियन यूनियन के सांसदों को 19 हज़ार रुपये का दैनिक भत्ता मिलता है और साल भर में अलग-अलग तरह के खर्च के लिए 31 लाख रुपये मिलते हैं। जबकि स्टाफ रखने के खर्च के नाम पर इन सांसदों को साल भर में 1 करोड़ 70 लाख रुपये अलग से मिलते हैं। EU में कम कर रहे अफसरों को एक तरफ तो मोटी सैलेरी मिलती है वहीँ आम लोगों के मुकाबले इन्हें कम टैक्स भी चुकाना पड़ता है। Brexit का समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि ये सुविधाएं, जनता के पैसों से दी जा रही हैं और अफसरशाही की वजह से आम जनता से फैसले लेने का हक़ भी छीन लिया गया है।

5. मुक्त व्यापार के रस्ते खुले: यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद अब ब्रिटेन को अमेरिका और भारत जैसे देशों से मुक्त व्यापार करने की छूट मिल गई है। ब्रिटेन में फिलहाल 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कानून EU के ही लागू हैं। EU के मुकाबले ब्रिटेन बाकी दुनिया को करीब दो गुना ज्यादा निर्यात करता है।

ताशकंद/सियोल:-परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए सियोल में गुरुवार रात को हुई विशेष सत्र में चर्चा के दौरान चीन के नेतृत्व में कुछ देशों द्वारा कड़े विरोध के कारण भारत के आवेदन पर पानी फिर गया। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भारत के आवेदन का मूल्यांकन ‘योग्यता’ के आधार पर करने का आग्रह किया था।सियोल के एक उच्च जानकार सूत्र ने बताया कि एनएजजी के 48 देशों के इस गुट के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों की रात्रिभोज के बाद होने वाली बैठक में भारत की सदस्यता पर चर्चा की गई, जिसमें चीन के साथ ब्राजील, ऑस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, तुर्की और आयरलैंड ने भारत की सदस्यता का विरोध किया।चीन का कहना है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है, इसलिए उसे एनएसजी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए। वहीं, अर्जेंटीना और दक्षिण कोरिया के साथ कई प्रमुख सदस्य देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, मैक्सिको, स्विटरलैंड और रूस भारत की एनएसजी सदस्यता का समर्थन कर रहे हैं।चीन भारत के एनएसजी में प्रवेश का विरोध कर रहा है। यह संस्था ही वैश्विक परमाणु व्यापार और प्रौद्योगिकी को नियंत्रित करती है। चीन ने एनएसजी सदस्यता के लिए पाकिस्तान का समर्थन कर परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना भारत के सदस्य बनने की राह में बड़ा रोड़ा लगा दिया है।चीन ने जोर दिया है कि अगर भारत को कोई छूट दी जाती है, तो वही छूट पाकिस्तान को भी दी जानी चाहिए। जबकि, पाकिस्तान का परमाणु अप्रसार को लेकर कथित रूप से बुरा रिकार्ड रहा है। कहा जाता है कि उसने लीबिया, ईरान और उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार प्रौद्योगिकी बेची थी।उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में हुए शंघाई कारपोरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर चीन से गुजारिश की कि वह भारत की एनएसजी सदस्यता का मूल्यांकन ‘योग्य’ के आधार पर करें।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने यहां संवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने चीन से गुजारिश की है कि वह भारत के आवेदन पर एक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ आकलन करे और योग्यता के आधार पर निर्णय ले।’’यह पूछे जाने पर कि 48 देशों के इस संगठन में भारत को शामिल करने की कितनी संभावना है, उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में जटिल और नाजुक बातचीत की प्रक्रिया चल रही है। मुझे जो कहना था, वह मैं आपसे कह चुका हूं।’’भारत इस समूह की सदस्यता प्राप्त करने के लिए प्रचंड कूटनीतिक प्रयास में जुटा है। एनएसजी आम सहमति पर काम करता है और इसमें किसी नए सदस्य को सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति के बाद ही शामिल किया जा सकता है। विदेश सचिव एस. जयशंकर फिलहाल भारत की एनएसजी सदस्यता के लिए कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने के लिए सियोल में मौजूद हैं।

नई दिल्ली:-ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन में रहेगा या नहीं ब्रिटेन के लोगों ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। नतीजों से साफ़ है कि अब ब्रिटेन यूरो जोन का हिस्सा नहीं रहेगा। ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में न रहने के चलते मुंबई शेयर बाज़ार में 900 अंकों की भारी गिरावट देखी गई है। उधर रुपया भी डॉलर के मुकाबले 78 पैसे गिरकर कारोबार कर रहा है।मार्किट की हालत देखी…
लंदन:-प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद शुक्रवार को कहा कि वह अक्टूबर तक पद छोड़ देंगे। कैमरन ने ब्रेक्सिट नतीजों के बाद डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर कहा, ‘‘ब्रिटेन के लोगों ने दूसरा रास्ता चुना है। इसलिए उन्हें नया प्रधानमंत्री चुनने की जरूरत है।’’यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के निकलने के बाद कैमरन पर दबाव है। ब्रिटेन 43 वर्षों बाद ऐतिहासिक जनमत संग्रह में ईयू…
बीजिंग:-चीन के पूर्व में स्थित जियांग्सू प्रांत में भारी बारिश के कारण कम से कम 98 लोगों की जान चली गई और 800 से अधिक घायल हो गए। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर में कहा गया है कि बारिश, ओले और तूफान के कारण यानचेंग शहर में जनजीवन बाधित हो गया और कई मकान ध्वस्त हो गए हैं। यानचेंग के उपनगर फुनिंग और शेयांग काउंटी के कई इलाकों में…
लंदन:-ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में रहने या इसे छोड़ने का फैसला करने वाले ऐतिहासिक जनमत संग्रह में लाखों ब्रितानियों द्वारा मतदान कर दिए जाने के बाद अब पूरे देश में मतगणना चल रही है। हालांकि मतदान के बाद कोई एग्जिट पोल तो नहीं आए थे लेकिन यूगव की ओर से किए गए ऑन द डे सर्वेक्षण के जरिए कल देर रात यूरोपीय संघ में रहने के पक्षधर रिमेन खेमे को…

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