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दुनिया (2208)


नई दिल्ली - हम इंसानों ने पिछली करीब एक सदी में प्रकृति के साथ जितनी छेड़छाड़ की है, उतनी शायद ही पहले कभी की हो। इसी एक सदी के दौरान विश्व में जनसंख्या विस्फोट देखने को मिला, खासकर 20वीं सदी के अंतिम 40 सालों में। इसके अलावा इंसान ने अपनी जरूरतों के लिए ऐसे-ऐसे अविष्कार किए और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ की कि पर्यावरण का संतुलन ही बिगड़कर रह गया।
अगर आप पर्यावरण के प्रति सोचते हैं तो यह खबर आपके लिए चिंता का विषय हो सकती है। वैज्ञानिकों ने बुधवार को यह डरावनी ख़बर दी। ख़बर यह है कि अंटार्कटिका का एक बड़ा हिस्सा टूटकर अलग हो गया है। बता दें कि अंटार्कटिका का 98 फीसद हिस्सा बर्फ से ढका हुआ है और जो हिस्सा टूटा है वह करीब एक खरब टन का आइसबर्ग है। आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि जो हिस्सा टूटा है उस अकेले हिस्से में ही अमेरिका के न्यूयॉर्क जैसे 7 शहर समा सकते हैं। जाहिर है इस चट्टान के टूटने से अंटार्कटिका की सूरत बदल जाएगी।
इस खबर में हमने बताया था कि अंटार्कटिक के एक बड़े हिस्से में दरार दिख रही है। अगर यह हिस्सा टूटा एक बड़ा हिस्सा अंटार्कटिका से अलग हो जाएगा। जब हमने ख़बर दी थी उस समय तक अंटार्कटिक के पूर्वी तट पर यह दरार अब 111 मील लंबी हो चुकी थी। साल 2011 से मई 2017 तक यह 50 मील और बढ़ गई थी। इस दरार के बढ़ने की रफ्तार 3 फीट प्रतिदिन तक थी।
पहले से था इसके अलग होने का अंदेशा
जैसा हमने हमने 10 मई की अपनी स्पेशल स्टोरी बताया था कि वैज्ञानिक कई महीनों से इस हिमशैल के टूटने का पूर्वानुमान लगा रहे थे। यह आइसबर्ग अब तक के दर्ज आंकड़ों में सबसे बड़ा है। पर्यावरण के लिहाज से चिंताजनक होने के अलावा यह दक्षिणी ध्रुव के आसपास जहाजों के लिए भी गंभीर ख़तरा बन सकता है। ये अंटार्कटिका के उत्तर-पूर्वी किनारे की लार्सन चट्टान का हिस्सा था। लार्सन सी बर्फ की चट्टान से 5800 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा अलग हो जाने से इसका आकार 12 फीसदी से ज्यादा घट गया है और इसी के साथ अंटार्कटिक प्रायद्वीप का परिदृश्य हमेशा के लिए बदल गया है।
अंटार्कटिका से अक्सर टूटते रहते हैं हिमशैल
इससे पहले लार्सन-ए और लार्सन-बी भी लार्सन बर्फ की चट्टान से अलग हो चुके हैं। अब इस बर्फ की चट्टान के टूटने के बाद लार्सन कमजोर हो सकती है। लार्सन-सी का टूटना तेजी से गर्म हो रही धरती के लिए एक और ख़तरे की घंटी साबित हो सकती है। अंटार्कटिका से हमेशा हिमशैल अलग होते रहते हैं, लेकिन यह काफी बड़ा है, ऐसे में महासागर में जाने के इसके रास्ते पर निगरानी की खास जरूरत होगी। सालों से पश्चिमी अंटार्कटिक हिम चट्टान में बढ़ती दरार को देख रहे शोधकर्ताओं ने कहा कि यह घटना 10 जुलाई से लेकर 12 जुलाई के बीच किसी समय हुई है।
ऐसा नहीं है कि ख़तरे की घंटी सिर्फ अंटार्कटिका से ही बजी हो। ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनियाभर में ग्लेशियरों की पिघलने की रफ्तार काफी तेज हो गई है। आर्कटिक में भी 1975 से 2012 के बीच बर्फ की मोटाई 65 फीसद घट चुकी है। अब तक कहा जा रहा था कि हमारे ग्लेशियर धीमी मौत मर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में पता चला है कि असल में यह रफ्तार काफी तेज है। डराने वाले आंकड़े यह हैं कि 1975 से 2012 के बीच आर्कटिक बर्फ की मोटाई 65 फीसद घटी है। 1979 के बाद प्रत्येक दशक में आर्कटिक की बर्फ घटने की दर 2.8 फीसद रही है।
ये मौत तो बहुत तेज है...
ग्लोबल वार्मिंग के कारण तीन दशकों में आर्कटिक पर बर्फ का क्षेत्रफल करीब आधा हो गया है। आर्कटिक काउंसिल की ताजा रिपोर्ट ‘स्नो, वॉटर, आइस, पर्माफ्रॉस्ट इन द आर्कटिक’ (स्वाइपा) के मुताबिक 2040 तक आर्कटिक की बर्फ पूरी तरह से पिघल जाएगी। पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि यह बर्फ 2070 तक ख़त्म होगी, लेकिन असामान्य और अनियमित मौसम चक्र की वजह से यह और भी तेजी से पिघल जाएगी। पर्यावरणविदों के अनुसार आर्कटिक की बर्फ पिघलने से पृथ्वी के वातावरण में भयावह परिवर्तन हो सकते हैं। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय पत्रिका द इकोनॉमिस्ट में प्रकाशित हुई है। इस साल सात मार्च को आर्कटिक में सबसे कम बर्फ मापी गई।
मौसम में होंगे भयानक बदलाव
ग्लोबल वार्मिंग के कारण अगले कुछ सालों में दुनियाभर के मौसम में भयानक बदलाव देखने को मिलेंगे। ध्रुवों और ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्र के बीच तापमान में अंतर के कारण पृथ्वी के बड़े हिस्से में हवाएं चलती हैं। अगर आर्कटिक का तापमान ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्र के मुकाबले तेजी से बढ़ेगा तो धरती के अप्रत्याशित स्थानों पर बेमौसम लू चलेगी और यह मानव जीवन के लिए चिंता का विषय है। आर्कटिक में पर्माफ्रॉस्ट (बर्फ से ढकी मिट्टी की परत) में बड़ी मात्रा में जैव पदार्थ मौजूद हैं। बर्फ के पिघलने से यह पदार्थ गर्मी में जलकर कार्बनडाइ ऑक्साइड या मीथेन के रूप में वातावरण में घुल जाएंगे। इससे ग्लोबल वार्मिंग और तेज होगी।
डूब क्षेत्र में आ जाएंगे मुंबई सहित दुनियाभर के तटीय शहर
आर्कटिक घेरे में स्थित ग्रीनलैंड के बर्फ क्षेत्र में पृथ्वी का दस फीसद मीठा पानी है। अगर वहां की बर्फ पिघलती है तो समुद्र का स्तर इस सदी के अंत तक 74 सेमी से भी अधिक बढ़ जाएगा, जो ख़तरनाक साबित हो सकता है। इससे मुंबई, चेन्नई, मेलबर्न, सिडनी, केपटाउन, शांघाई, लंदन, लिस्बन, कराची, न्यूयार्क, रियो-डि जनेरियो जैसे दुनिया के तमाम खूबसूरत और समुद्र के किनारे बसे शहरों को ख़तरा हो सकता है।
बता दें कि समुद्र का पानी बर्फ के मुकाबले गहरे रंग का होता है। ऐसे में यह ज्यादा गर्मी सोखता है। आर्कटिक पर जितनी ज्यादा बर्फ पिघलेगी, उतना ही अधिक पानी गर्मी को सोखेगा, जिससे बर्फ पिघलने की रफ्तार और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। मेलबर्न विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार 2026 तक धरती का तापमान 1.5 डिग्री तक बढ़ जाएगा, इस तरह से अनुमान लगाया जा सकता है कि धरती का तापमान कितनी तेजी से बढ़ रहा है। अगर इसी रफ्तार से धरती का तापमान बढ़ता रहा तो ग्लेशियरों की बर्फ पिघलने की रफ्तार और भी बढ़ेगी।
भारत पर असर
आर्कटिक की बर्फ पिघलने से समुद्र के प्रवाह पर भी असर पड़ेगा। इससे प्रशांत महासागर में अल नीनो का असर तेज़ होने के साथ भारतीय मानसून भी प्रभावित होगा। ऐसा नहीं है कि सिर्फ आर्कटिक की ही बर्फ तेजी से पिघल रही है। अंटार्कटिक की बर्फ पिघलने की रफ्तार भी काफी तेज़ है। ताजा घटना ने तो सभी पर्यावरणविदों को चिंता में डाल दिया है। ऐसा होने से हिंद महासागर का तापमान भी बढ़ेगा, जो भारत में मानसून की रफ्तार प्रभावित करेगा।


शंघाई - चीन की विशाल अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। जहां एक तरफ पश्चिमी देश 'ब्लैक स्वांस' से परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ चीन को 'ग्रे राइनो' की समस्या ने परेशान कर रखा है। चीन का इस ओर ध्यान तब गया है जब यह समस्या अपने विकराल रूप में आ गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार 'ग्रे राइनोज' ने चीन की अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला करना शुरू कर दिया है।
ग्रे राइनोज चीन के ऐसे बिजनेस टाइकून हैं जिन्होंने राजनीति में अपनी घुसपैठ बना कर ग्लोबल कंपनियों का एक संगठन तैयार कर लिया है। एनबैंग इंश्योरेंस ग्रुप, फोसन इंटरनेशनल, एचएनए ग्रुप और डेलियन वांडा ग्रुप ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने सरकारी बैंकों से सस्ती दरों पर कर्जा लेकर आज अपने बड़े एंपायर खड़े कर लिए हैं।
बिजनेस के ये खिलाड़ी आज इतनी मजबूत स्थिति में आ गए हैं कि चीनी सरकार अब इन पर शिकंजा कसने जा रही है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में चेताया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वित्तीय स्थिरता महत्त्वपूर्ण है। वहीं दूसरी तरफ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र माने जाने वाले एक अखबार ने भी 'ग्रे राइनोज' से उपजे खतरों पर लेख लिखा था।
चीनी नियामक इस बात को लेकर आशंकित हैं कि इनमें से कुछ कंपनियों के संगठन बहुत मजबूत हो गए हैं। उन्होंने इतना कर्ज ले लिया है कि वो अब देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। बैंक अधिकारी अब ऐसी कंपनियों की बैलेंस शीट की जांच कर रहे हैं।
पिछले साल ही एनबैंग नामक इंश्योरंस कंपनी ने न्यूयॉर्क में वाल्डोर्फ अस्टोरिया के लिए 2 अरब डॉलर चुकाए। इसके कुछ दिनों बाद ही इस कंपनी के चेयरमैन वू जियाहुई को चीनी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, हालांकि इनके कारण का खुलासा नहीं किया गया है।
चीन का वॉरेन बफे कहे जाने वाले फोकस कंपनी ने क्लब मेड के साथ मिलकर कई बिलियन डॉलर कमाए है। 2015 में इस कंपनी के चेयर मैन गुओ गुआनचांग को अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था। कंपनी को दबाव में आकर इस बात से इनकार करना पड़ा। इसी तरह एक रीजनल एयरलाइन्स की तरह शुरू हुई एचएनए देखते ही देखते एक पॉवरहाउस बन गई। इसके पास हिल्टन होटल, दूशे बैंक और स्विसपोर्ट के भी स्टेक्स थे। बैंक ऑफ अमेरिका ने अब इस कंपनी के साथ बिजनेस न करने का निर्णय लिया है।
इसी तरह डिलियन वांडा ने भी बड़ी अमेरिकी एंटरटेनमेंट कंपनियों से जमकर मुकाबला किया। पिछले साल इसने चीन में डिज्नी को भी पीछे छोड़ दिया। अब ये कंपनी धीरे-धीरे अपने थीम पार्क और होटल बेच रही है। इन कंपनियों के साथ सबसे बुरी बात यह रही कि इन्हें कोई देखने वाला ही नहीं था। यानी इनपर कोई पकड़ नहीं बना पा रहा था। ग्रे राइनोज में एक बात सामान थी कि इन्होंने खूब सारा कर्ज ले रखा था और बहुत सारी डील्स साइन की थीं।
पिछले कई सालों तक चीन के बैंक कंपनियों को ढेर सारा कर्ज देते रहे जिससे अर्थव्यवस्था में अधिक से अधिक पैसा भेजा जा सके। 2008 की मंदी के बाद इनको बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया। इन संगठित कंपनियों ने बैंकों से हद से अधिक कर्ज ले रखा है। मिक्जिन पेई का कहना है कि इन कंपनियों के इतन अधिक फलने-फूलने का एक मात्र कारण चीनी सरकार है। अगर आप यह देखें कि ये कंपनियां अचानक इतनी बड़ी कैसे बढ़ गईं तो इसका मुख्य कारण है कर्ज।
2015 में अर्थव्यवस्था के कमजोर पड़ते ही चीन की सरकार ने इस ओर कदम उठाने शुरू कर दिए। एक तरफ चीन भारत के साथ सीमा विवाद पर लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है वहीं दूसरी तरफ आंतरिक तौर पर चीन इससे कहीं अधिक बड़ी मुसीबत झेलने पर मजबूर है। चीन की हालिया हरकतों से यह साफ हो जाता है कि वह एशिया में अतिक्रमण की नीति अपना रहा है। लेकिन आर्थिक तौर पर खुद को भारत से मजबूत बताने वाला चीन अपने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने में नाकामयाब होता दिखाई दे रहा है।


इस्लामाबाद - भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने जल्द सेवानिवृत्त होंगे। बासित के सेवानिवृत्ति के अनुरोध को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्वीकार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक तुर्की में पाकिस्तान के राजदूत सोहेल महमूद भारत के अगले राजदूत बन सकते हैं। वह अगले महीने तक यह जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से खबर दी कि अप्रैल 2018 में विदेश मंत्रालय से सेवानिवृत्त हो रहे बासित ने प्रधानमंत्री शरीफ को आवेदन देकर शीघ्र सेवानिवृत्ति का अनुरोध किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया।
चैनल ने बासित की समयपूर्व सेवानिवृत्ति का कोई कारण नहीं बताया लेकिन विदेश कार्यालय के सूत्रों ने इससे पहले कहा कि वह वर्तमान विदेश सचिव तेहमीना जंजुआ की नियुक्ति पर नाखुश हैं क्योंकि वह बासित से कनिष्ठ हैं।
1982 में हुए विदेश सेवा में शामिल
बासित 1982 में विदेश सेवा में शामिल हुए थे। उन्होंने विदेश में पाकिस्तानी मिशन पर कई राजनयिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। वर्ष 2014 में भारत के उच्चायुक्त के रूप में नियुक्ति से पहले बासित मई 2012 से मार्च 2014 तक जर्मनी में पाकिस्तानी के राजदूत थे। बासित नई दिल्ली में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।


बीजिंग - चीन में पुलिस ने हैकिंग के आरोप में एक ही कंपनी के नौ लोगों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि उन लोगों ने एक वायरस प्रोग्राम तैयार किया था, जिसकी चपेट में पिछले सालभर में चीन से बाहर 25 करोड़ से ज्यादा कंप्यूटर आ चुके हैं।
सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि बीजिंग में यह पहला मामला है, जिसमें देश से बाहर का डाटा चुराने का प्रयास करने वालों को पकड़ा गया है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ लगातार चीनी हैकर्स पर विदेशी कंपनियों के डाटा चुराने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं चीन अब तक ऐसे आरोपों को नकारता रहा है। चीन खुद को ही साइबर हमले का शिकार बताता रहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग की इस कंपनी ने 'फायरबॉल' नाम से वायरस प्रोग्राम तैयार किया था। इससे चीन के बाहर दुनियाभर के 25 करोड़ से ज्यादा कंप्यूटर प्रभावित हुए और कंपनी ने आठ करोड़ युआन (करीब 76 करोड़ रुपये) कमाए। हेदियान जिले की पुलिस ने बताया, 'हिरासत में लिए गए नौ लोग कंपनी के महत्वपूर्ण स्टाफ हैं। ये सभी युवा हैं और आइटी क्षेत्र से जुड़े हैं।' पुलिस को इनके बनाए वायरस के बारे में हेदियान के ही एक इंटरनेट यूजर ने तीन जून को बताया था।


यशलम - इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट ने मंगलवार को मतदान के जरिए यशलम में धार्मिक स्थल से विवादित मेटल डिटेक्टर हटाने का फैसला किया। मेटल डिटेक्टर के बजाय अब यहां स्मार्ट प्रणाली से निगरानी की जाएगी। यहां 14 जून को दो धार्मिक स्थलों पर इसराइली पुलिसकर्मियों की मौत के बाद तनाव की स्थिति बन गई थी जिसके बाद सुरक्षा के लिए यहां मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे।
मेटल डिटेक्टरों को हटाए जाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी दबाव बनाया गया था और चेतावनी दी गई थी कि इससे अशांति का माहौल बन सकता है और हिंसा इसराइल और फिलस्तीन क्षेत्र से बाहर तक फैल सकती है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि इजराइल सुरक्षा मंत्रिमंडल ने सुरक्षा निकायों द्वारा दिए उन अनुरोधों को स्वीकार कर लिया है जिनमें सुरक्षा निरीक्षण के लिए मेटल डिटेक्टर के स्थान पर आधुनिक सुरक्षा तकनीकों और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी।
हालांकि इस हफ्ते की शुरआत में प्रवेश द्वार पर कैमरे लगा दिए गए थे। इस निर्णय से पहले नेतान्याहू और जॉर्डन के बादशाह अब्दुल्ला द्वितीय के बीच इसे लेकर बातचीत हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष राजदूत जेसन ग्रीनब्लैट भी संकट पर बातचीत करने के लिए इसराइल आए थे और संयुक्त राष्ट्र में पश्चिम एशिया के राजदूत ने भी हिंसा के और बढ़ने की चेतावनी दी थी।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दावा किया कि भारत ने चीनी क्षेत्र में घुसने की बात स्वीकार की है और इस गतिरोध का समाधान निकालने के लिए उसे सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम क्षेत्र से अपने जवानों को ईमानदारी से वापस बुलाना चाहिए। वांग ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध पर पहली बार टिप्पणी करते हुए बैंकॉक में कहा कि सही और गलत बहुत स्पष्ट है और यहां तक कि वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों ने खुले तौर पर कहा कि चीनी सेना भारतीय क्षेत्र में नहीं घुसी।चीन के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए वांग के संक्षित बयान में कहा गया है कि भारतीय सेना ने चीनी क्षेत्र में घुसने की बात स्वीकार की। इस समस्या का समाधान बेहद आसान है, भारत ईमानदारी से सेना को वापस बुलाए। तिब्बत के दक्षिणी छोर पर यह गतिरोध शुरू हुआ। चीनी सेना ने विवादित इलाके में सड़क निमार्ण की कोशिश की, जिसके बाद भारत के सहयोगी देश भूटान ने भी इस इलाके पर अपना दावा जताया।भारत ने कहा कि भूटान, चीन और भारत की सम्मिलित सीमा के समीप यथास्थिति बदलने के लिए चीन की एकतरफा कार्रवाई से भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। गत सप्ताह राज्यसभा में अपने संबोधन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन पर बुलडोजर का इस्तेमाल कर सड़कों का निमार्ण करने का आरोप लगाया था। भूटान ने लिखित में चीन से इस पर विरोध दर्ज कराया है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि देश किसी भी कीमत पर चीन के सुरक्षा हितों की रक्षा करेगा।

लोग काम पर जाने के लिए अमूमन बस, ट्रेन या कार का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जर्मनी के म्यूनिख शहर का एक व्यक्ति नदी में लगभग दो किलोमीटर तैरकर अपने काम पर जाता है। दो किलोमीटर की तैराकी बेंजामिन डेविड ने अपने काम पर जाने का यह अनूठा रास्ता किसी शौक में नहीं, बल्कि मजबूरी में अपनाया। बीबीसी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, डेविड अपने शहर की व्यस्त सड़कों पर…
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने चीन पर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मनमानी करने का आरोप लगाया है। खुफिया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीजिंग की आलोचना करते हुए कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए चीन तेजी से ‘बलपूर्वक व हठधर्मी’ तरीके अपना रहा है। दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र में ऐसा देखा जा सकता है।दरअसल बीते सप्ताह चीन…
कई जानवर इंसानों के काफी अच्छे दोस्त माने जाते रहे हैं। लेकिन वे इंसानों के ही नहीं बल्कि अन्य जानवरों के भी अच्छे दोस्त होते हैं। इसी तरह का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।वीडियो के अनुसार, एक डॉग ने नदी में डूब रहे हिरण के बच्चे की जान बचाई। कुत्ते के मालिक ने पूरी घटना का वीडियो बनाया है। हालांकि, यह साफ नहीं हो पा रहा…
नई दिल्ली - सिक्किम सेक्टर में डोकलाम क्षेत्र को लेकर पिछले एक महीने से भारत और चीन के बीच तनातनी चल रही है। इस विवाद के दौरान दोनों देशों की ओर से आए दिन कुछ न कुछ बयानबाजी होती रहती है। लेकिन इस बार पहली दफा चीन के रक्षा मंत्रालय की ओर से एक बयानबाजी की गई है, जिसमें खुले तौर पर भारत को चेतावनी दी गई है। चीन ने…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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