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तेहरान। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। अमेरिका ने गत मई में 2015 के परमाणु समझौते को तोड़ कर ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिए थे। इसी के जवाब में सोमवार को ईरान ने शिकायत दर्ज कराई। विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा, 'शिकायत दर्ज कराने की प्रमुख वजह एकतरफा प्रतिबंध पुन: लागू करने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना है। हम कानून के प्रति प्रतिबद्ध हैं। अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने की आदत का मुकाबला करना जरूरी है।'ईरान के अनुसार अमेरिका ने अपनी इस हरकत से कई अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के साथ 1955 में दोनों देशों के बीच हुई मित्रता संधि का भी उल्लंघन किया है। नए प्रतिबंधों को अमेरिका अगस्त और नवंबर में दो चरणों में लागू करेगा। इसके पीछे उसकी मंशा यूरोप व अन्य देशों के साथ ईरान के व्यापार पर रोक लगाना है। वह ईरान के तेल निर्यात को भी कम करना चाहता है।हालांकि ईरान परमाणु समझौते में शामिल अन्य देश इस समझौते को जारी रखने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं। 2015 में हुए इस समझौते में अमेरिका और ईरान के अलावा ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, चीन, जर्मनी और यूरोपीय संघ भी शामिल थे।आइसीजे में इस साल आठ अक्टूबर को ईरान द्वारा अमेरिका पर किए गए एक और केस की सुनवाई होनी है। अमेरिका ने विदेश में जमा ईरान की संपत्ति फ्रीज कर दी थी। इसको लेकर भी दो साल पहले ईरान ने एक केस दर्ज कराया था।

 

वाशिंगटन। अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख भारतीय प्रवासी नहीं हैं बल्कि ये हमारे अपने लोग हैं। यह बात अमेरिका में अफगानिस्तान के राजदूत ने कही। वह जलालाबाद में हुए एक हमले में मारे गए अल्पसंख्यक समुदाय की याद में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। एक जुलाई को जलालाबाद में राष्ट्रपति अशरफ गनी से मिलने जा रहे हिंदू और खों से भरी बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। इसमें 19 लोगों की मौत हो गई थी। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (आइएस) ने ली थी।वाशिंगटन डीसी स्थित अफगानिस्तान दूतावास में आयोजित कार्यक्रम में राजदूत हमदुल्लाह मोहिब ने कहा कि यह मौका हमें उस समाज को समझने के लिए एक साथ लाया है, जिसकी जड़ें अफगानिस्तान में अत्यधिक गहरी हैं। इस मौके पर अमेरिका की पहली हिंदू महिला सांसद तुलसी गबार्ड ने कहा कि यह हमला दुनिया में मौजूद डर, कट्टरता और घृणा का एक और उदाहरण है। यह डराने की रणनीति और हमें बांटने की कोशिश है, लेकिन हम सभी को इस घृणा और कट्टरता के खिलाफ खड़ा होना होगा।अमेरिका में भारत के उप राजदूत पुनीत कुंडल ने हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यहां पर आयोजित यह कार्यक्रम अफगानिस्तान सरकार की इस समुदाय के प्रति भावनाओं को प्रदर्शित करता है। इस मौके पर अफगानिस्तान की स्थानीय भाषा में पीडि़तों को याद किया गया।

 

लाहौर। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) के अध्यक्ष इमरान खान इस बार लाहौर समेत पांच जगहों से चुनाव मैदान में उतरे हैं। उन्हें लाहौर से कभी जीत नसीब नहीं हुई। यहां से वह जितनी बार चुनाव लड़े, उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। लाहौर से उनके फिर चुनाव लड़ने पर सियासी गलियारे में इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि क्या इमरान इस बार भी लाहौर में हारेंगे या इतिहास बदलेंगे?लाहौर में पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली (एनए) की 13 सीटें हैं। यह शहर नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन का 1990 से गढ़ बना हुआ है। इमरान इस बार यहां की एनए-131 सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। उनका मुकाबला पीएमएल-एन उम्मीदवार ख्वाजा साद रफीक से है।इमरान ने 1996 में पीटीआइ की स्थापना की थी। इसके बाद 1997 में हुए आम चुनाव में उन्होंने लाहौर की दो सीटों से किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2002 के चुनाव में उन्हें लाहौर की एनए-122 सीट से हार का मुंह देखना पड़ा। 2013 के आम चुनाव में भी लाहौर में उनकी किस्मत नहीं बदली। तब वह दूसरी सीटों पर तो जीत गए लेकिन लाहौर में फिर हार गए थे।

बीजिंग। चीन ने भारत के साथ लगती सीमा पर तिब्बत इलाके में एक गुमनाम मौसम अवलोकन स्टेशन स्थापित किया है। चीन का कहना है कि मौसम के हालात पर नजर रखने के लिए यह स्टेशन खोला गया है, इसके अलावा अगर भविष्य में कभी पड़ोसी देश के साथ संघर्ष की स्थिति बने तो मदद मिल सके। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक भारतीय सीमा के पास युमाई शहर के अंतर्गत तिब्बत में ये स्टेशन स्थापित किया गया है ताकि देश की रक्षा के लिए परिवहन और संचार संबंधी हलचलों की जानकारी मिलती रहे। चीन की योजना सीमावर्ती इलाकों में ऐसे कई और स्टेशन खोलने की है।तिब्बत की मौसम विभाग की वेबसाइट पर भी इस बारे में जानकारी दी गई है। जिसके मुताबिक यह स्टेशन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मौसम संबंधी परिवर्तनों की जानकारी देगा और सीमावर्ती इलाकों में सेना और आम जनता के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा। यह सीमा पर संघर्ष के दौरान भी सेना को काफी जानकारी उपलब्ध करवाएगा। दरअसल, संघर्ष के दिनों में मौसम की जानकारी काफी अहम हो जाती है। वाहनों के उड़ान भरने, मिसाइल छोड़ने और अन्य जरूरी कामों के लिए मौसम की सटीक जानकारी होना जरूरी है। सीमावर्ती इलाके में स्थित एक छोटा सा मौसम अवलोकन केंद्र यह जानकारियां आसानी से उपलब्ध करवा सकता है।

हेलसिंकी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में सोमवार को मिलने पर कहा कि हमारे पास बात करने के लिए बहुत अच्छे मुद्दे हैं। व्यापार से लेकर सैन्य और मिसाइलों तक चीन से परमाणु तक हम सब कुछ पर चर्चा कर रहे हैं। हम चीन, हमारे पारस्परिक मित्र, राष्ट्रपति शी के बारे में कुछ बात करेंगे।जून महीने में दुनियाभर के कूटनीतिक विशेषज्ञों की नजरें सिंगापुर की ओर लगी हुई थीं। 12 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से ऐतिहासिक बैठक कर रहे थे। अब एक माह बाद हेलसिंकी का नंबर है। सोमवार को फिनलैंड की राजधानी में ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने वाले हैं। यह इन दोनों नेताओं की पहली बैठक होगी। बैठक के लिए ट्रंप हेलसिंकी पहुंच चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के आरोपों के मद्देनजर हर कोई जानना चाह रहा है कि दोनों नेताओं में क्या बातचीत होती है?यूरोप आने से पहले जब ट्रंप ने कहा था कि उनकी यात्रा का सबसे आसान हिस्सा हेलसिंकी प्रवास रहेगा, तो कई लोगों की भवें तन गई थीं। ब्रसेल्स और लंदन प्रवास के दौरान अब तक ट्रंप की यात्रा विवादों में रही है। इस बीच, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल का मामला फिर गरमा गया है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने में पुतिन ने ट्रंप की गुप्त रूप से मदद की थी। ऐसे में इसकी उम्मीद कम ही है कि बैठक में यह अकेला मुद्दा हावी रहेगा।रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वाशिंगटन और मॉस्को का द्विपक्षीय संबंध बेहद खराब है। हमें एक नई शुरुआत करनी होगी। हालांकि, हम ट्रंप को बातचीत के योग्य साझीदार मानते हैं।

जकार्ता। इंडोनेशिया में 48 वर्षीय सुगिटो की मगरमच्‍छ के काटने से मौत हो गई। पापुआ प्रांत में मृतक के अंतिम संस्‍कार के बाद गुस्‍साई भीड़ ने सैंकड़ों मगरमच्‍छों की जान ले ली।
आवासीय इलाके के पास है मगरमच्‍छों का फार्म;-पुलिस के अनुसार, मृतक सुगिटो अपने पशुओं के चारे के लिए घास ढूंढने के दौरान मगरमच्छों के बाड़े में गिर गया। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ ने मृतक सुगिटो के एक पैर को काट लिया था और एक मगरमच्छ के पिछले हिस्से से टकराकर उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि आवासीय इलाके के पास फार्म की मौजूदगी को लेकर गुस्साए सुगिटो के रिश्तेदार और स्थानीय निवासी स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे। स्थानीय संरक्षण एजेंसी के प्रमुख बसर मनुलांग ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि फार्म मुआवजा देने को तैयार है।
गुस्‍साई भीड़ ने 292 मगरमच्‍छों को मार डाला:-अधिकारियों ने बताया कि मौत के बाद गुस्‍साई भीड़ चाकू, छुरा और खुरपा लेकर फार्म पहुंच गई और 4 इंच लंबे बच्चों से लेकर दो मीटर तक के 292 मगरमच्छों को मार डाला। पुलिस और संरक्षण अधिकारियों का कहना था कि वह इस भीड़ को रोक पाने में असमर्थ थी। अधिकारियों ने कहा कि वे इसकी जांच कर रहे हैं और आपराधिक आरोप भी तय किए जा सकते हैं। इंडोनेशिया द्वीपसमूह में मगरमच्छों की कई प्रजातियों समेत विभिन्न वन्यजीव पाए जाते हैं। मगरमच्छों को संरक्षित जीव माना जाता है।दो साल पहले भी यहां एक रूसी पर्यटक की मौत भी मगरमच्‍छ के काटने के कारण हुई थी।

एस्टोरिया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में स्वर्णिम अध्याय लिखने वाली गदर पार्टी के बारे में अब अमेरिका के ओरेगन राज्य में स्कूली बच्चों को पढ़ाया जाएगा। गदर पार्टी की स्थापना के 105 वर्ष पूरा होने के मौके पर आयोजित समारोह में ओरेगन की अटार्नी जनरल एलन एफ रोसेनब्लूम ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि गदर पार्टी का इतिहास अब राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा। इस कार्यक्रम का आयोजन…
नई दिल्‍ली। आपको जानकर हैरत होगी कि दुनिया भर में एक करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्‍हें किसी देश की नागरिकता नहीं है। यह आंकड़ा और किसी का नहीं बल्कि संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार संस्‍था का है। यही वजह है कि इन लोगों को मौलिक अधिकार भी प्राप्‍त नही हैं। म्‍यांमार का रखाइन इलाका भी इसी श्रेणी में आता है। यहां पर मौजूदा कानून की बदौलत करीब दस लाख लोगों को नागरिकता…
नई दिल्‍ली। फीफा वर्ल्‍ड कप के फाइनल मैच में भले ही क्रोएशिया की टीम को फ्रांस के हाथों हार मिली हो, लेकिन इसके बाद भी वह मैदान में लोगों का दिल जीतने में कामयाब रही। क्रोएशिया की टीम के अलावा टीम की जिस फैन पर दर्शकों की सबसे अधिका निगाह रही वह थी वहां की राष्‍ट्रपति ग्रेबर किट्रोविक। फीफा के फाइनल मैच को देखने के लिए ग्रेबर दर्शकों से भरे…
तेल अवीव। इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के परमाणु कार्यक्रमों के दस्तावेज रात के अंधेर में छह घंटे से ज्यादा समय तक चले अॉपरेशन के बाद गायब कर दिेए थे।एक साल तक गोदाम की निगरानी करने के बाद इजरायल को यह पता लग गया था कि ईरानी गार्ड सुबह की शिफ्ट में 7 बजे आते हैं। ऐसे में एजेंटों को स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि वे सुबह…
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