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पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए कितनी सुरक्षित है और उन्हें कितनी सुविधाएं मुहैया करता है, इसका खुलासा एक बार फिर हुआ है। इस बार पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के एक समाजिक कार्यकर्ता (ऐक्टिविस्ट) ने पाकिस्तान की पोल खोली है। तौकीर गिलानी नाम के एक्टिविस्ट ने मुजफ्फराबाद में आयोजित एक जनसभा में सार्वजनिक तौर पर कहा कि पाकिस्तान की सेना आतंकवादियों को ट्रेनिंग देती है। उन्हें सुरक्षित ठिकाना प्रदान करती है और इतना ही नहीं उनकी रक्षा भी करती है। पीओके एक्टिविस्ट ने कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना न तो देश के लिए काम कर रही, न आवाम के लिए और न ही कश्मिरियों के लिए। तौकीर गिलानी ने आगे कहा कि दुनिया में कोई दूसरा मुल्क नहीं होगा जो अपने ही लोगों के खिलाफ काम करता हो लेकिन पाक के हुक्मरान अपने ही लोगों पर अत्याचार कर रहे हैं।पाक सेना अपने ही लोगों को जिहादी के तौर पर तैयार करती है और फिर उनका अपने हिसाब से इस्तेमाल करती है।' तौकीर ने कहा कि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी फौज के बहकावे में आ रहे हैं। गौरतलब है कि भारत हमेशा से ही इस बात को कहता आ रहा है कि पाकिस्तान आतंकियों को ट्रेनिंग देता है और उनका इस्तेमाल भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए करता है। लेकिन पाकिस्तान इसे मानने से इनकार कर देता है.बता दें कि पाकिस्तान लगातार भारत में घुसपैठ कराने की कोशिश करता रहता है। इसके लिए वह गरीबों को लालच देकर उनका इस्तेमाल करता है। आए दिन कश्मीर में पाक से आए आतंकी मारे जाते हैं। हंदवाड़ा में हाल ही में सुरक्षाकर्मियों से हुई मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया है। उस आतंकी के पास से ग्रेनेड, राइफल और पाकिस्तानी नोट बरामद हुए हैं।भारत कई बार विभिन्न मंचों से पाक की पोल खोल चुका है। अब पीओके के लोग भी खुलकर पाक हुकूमत के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने लगे है। पीओके में मीडिया पर प्रतिबंध के बावजूद वहां से अक्सर पाक सरकार के विरोध में प्रदर्शन की तस्वीरें आती रहती हैं।

दुनियाभर में 1.1 अरब लोग ऐसे हैं, जो आधिकारिक रूप से हैं ही नहीं। ये लोग बिना किसी पहचान प्रमाण के जिंदगी बिता रहे हैं। इस मुद्दे की वजह से दुनिया की आबादी का एक अच्छा खासा हिस्सा स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं से वंचित है। विश्व बैंक के 'विकास के लिए पहचान कार्यक्रम (आईडी4डी) ने हाल में आगाह किया है कि इन 'अदृश्य लोगों में से बड़ी संख्या में अफ्रीका और एशिया में रहते हैं। इनमें से एक-तिहाई बच्चे हैं जिनके जन्म का पंजीकरण नहीं हुआ है। इसमें कहा गया है कि यह समस्या मुख्य रूप से उन भौगोलिक क्षेत्रों में अधिक गंभीर है जहां के नागरिक गरीबी, भेदभाव, महामारी या हिंसा का सामना कर रहे हैं। आईडी4डी कार्यक्रम का प्रबंधन करने वाली वैजयंती देसाई ने कहा कि यह मुद्दा कई कारणों की वजह से है। लेकिन इसकी प्रमुख वजह विकासशील इलाकों में लोगों और सरकारी सेवाओं के बीच दूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक माहौल भी कई बार परिवारों को अपनी पहचान उजागर करने के प्रति हतोत्साहित करता है। किसी एक समुदाय या नागरिकता के लोगों के बीच पहचाने जाने का भी डर होता है। यह दुर्भाग्य की बात है कि कई बार सरकारें एक समूह के मुकाबले दूसरे को अधिक वरीयता देती हैं।जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिनिधि एनी सोफी लुईस ने कहा कि कई परिवारों को जन्म पंजीकरण के महत्व के बारे में बताया ही नहीं जाता। पंजीकरण नहीं होने की वजह से बच्चों को उनका मूल अधिकार नहीं मिल पाता। उन्हें स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाता। अगर माता-पिता को जन्म पंजीकरण की जानकारी भी हो तो भी कई बार लागत की वजह से वे ऐसा नहीं करते हैं।चीन जैसे देश में कई साल तक लोगों ने जानबूझकर अपने बच्चों का पंजीकरण इसलिए नहीं कराया क्योंकि उन्हें 'एक बच्चे की नीति के नतीजों का डर था।'

डॉक्टरों को लोगों की जान बचाने वाले इंसानों के रूप में देखा जाता है। 21वीं सदी में मेडिकल साइंस के हैरतंगेज आविष्कारों के चलते तो डाक्टरों ने कई करिश्मे कर दिखाए हैं। लेकिन हम ये नहीं जानते कि बाकी प्रोफोशन की तरह डॉक्टरों को काम करने की जगह पर उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।ब्रिटेन में डॉक्टरों की एक संस्थान 'The Royal College of Surgeons Edinburgh (RSCE)' के अनुसार काम की जगह पर भय का माहौल युवा डॉक्टरों के काम पर बुरा असर डाल रहा है। इस परेशान का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ता है।संस्थान द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक अस्पतालों में सीनियर डॉक्टर ट्रेनी या फिर जूनियर सर्जन्स को ऑपरेशन के दौरन तंग करते हैं। वो किसी न किसी बात पर अपने जुनियर्स को सताते हैं जिसके चलते नए डॉक्टर दिमागी तौर पर परेशान रहते हैं और मरीजों का इलाज ढंग से नहीं कर पाते हैं।इससे पहले एक अन्य रिपोर्ट में भी सामने आया था कि ट्रेनिंग करने वाला हर छह में एक सर्जन इन परेशानियों के चलते तनाव में रहता है। इसी को देखते हुए वरिष्ठ डॉक्टरों ने ये आगाह किया है कि इस तरह के परेशान करने वाले माहौल के चलते युवा इस पेशे में आने से करतराने लगेंगे।
सीनीयर डॉक्टर करते हैं ये हरकतें
इस संस्थान की एक डॉक्टर एलिस हार्ट्ले ने बताया कि एक बार ऑपरेशन के दौरान एक सीनीयर डॉक्टर ने उन पर कुछ औजार फेंक दिए. हार्ट्ले ने बताया कि ऐसी घटनाएं अपवाद नहीं हैं बल्कि अक्सर सामने आती हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाएं दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं।ऐसी ही एक अन्य घटना बयां करते हुए एक डॉक्टर बताया कि जब वो मरीज का ऑपरेशन करने के लिए चीरा लगा रही थीं, तब अचानक उनके सीनीयर ने उनके हाथ पर जोर से मारा।RSCE ने माना है कि इस तरह का परेशान करने वाला कल्चर आगे चलकर सर्जन के काम पर बेहद बुरा असर डाल सकता है।

 

49 साल की एक महिला की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब सालों की कोशिशों के बाद वो आखिरकार मां बन गईं। अपने बेटे के साथ घूमने वाली इस महिला को देखकर हर कोई उसे बच्चे की नानी या दादी मान लेता है, लेकिन इस बात का महिला को बुरा नहीं लगता। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके जीवन में ये पल काफी संघर्षों के बाद आया है। इंग्लैंड के एक कस्बे में रहने वालीं लुइस वॉर्नफर्ड को इस बात का एहसास है कि इस उम्र में मां बनना लोगों के लिए अजीब हो सकता है। लेकिन इस पल के लिए उन्होंने 16 साल का लंबा दर्द भरा सफर तय किया है। शादी के बाद डॉक्टरों ने बताया कि लुइस प्राकृतिक रूप से मां नहीं बन सकती हैं। इसी चलते उन्होंने आर्टिफिशिल तरीकों से मां बनने के लिए ट्रीटमेंट शुरू किया। लेकिन लगातार कोशिशों के बावजूद वो मां बनने में असफल रहीं। 16 साल में 18 बार उनको गर्भपात के दर्द से गुजरना पड़ा। इस दौरान लुइस और उनके पति मार्क ने करीब 79 लाख रुपये ट्रीटमेंट पर खर्च कर दिए थे। लेकिन लुइस ने इन सालों में कभी भी हिम्मत नहीं हारी और मेडिकल ट्रीटमेंट की पीड़ा सहते हुए वो मां बनने की कोशिश करती रहीं। आखिरकार उनकी लंबी कोशिश सफल हुई और लुइस ने विलियम को जन्म दिया।लुइस कहती हैं, 'विलियम हमारी दुनिया है। मेरे जीवन में ऐसा वक्त भी आया जब मैंने सोच लिया था कि मैं कभा मां नहीं बन पाउंगी। लेकिन आखिरकार हमारे सपने सच हो गए। मैं इससे ज्यादा खुश कभी नहीं रही।'उन्होंने कहा, 'मेरा परिवार भी अब मुझे पहले से ज्यादा प्यार करता है। सिर्फ प्यार ही जिंदगी में महत्व रखता है। आज के समय जिन महिलाओं को मां बनने में दिक्कतें आती हैं उनके पास कई सारे विकल्प हैं। ये बहुत अच्छी बात है।'लुइस के पति मार्क कहते हैं कि इतने सालों तक हताश रहने के बाद ये खुशी मिलना वाकई काफी सुखद है। उन्होंने कहा, 'अब हम वो परिवार हैं जैसा लुइसहमेशा से चाहती थी।'


बीजिंग - चीन का कहना है कि अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन की ओर से भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर जोर देने और बीजिंग की आलोचना करने में पक्षपात की बू आती है। भारत के अपने दौरे से पहले टिलरसन ने कहा था, ‘अनिश्चितता और चिंता के इस दौर में भारत को विश्व स्तर पर एक भरोसेमंद साझेदार की जरूरत है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि वैश्विक स्थिरता, शांति और समृद्धि को लेकर हमारे साझा मूल्य एवं नजरिये को देखते हुए अमेरिका ही वह साझेदार है।’
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने पत्रकारों से कहा कि बहुत सारे मीडिया की भारत और अमेरिका के बीच संबंधों के विकास में काफी दिलचस्पी है। उन्होंने कहा, ‘हम दोनों देशों के बीच संबंधों के विकास को देखकर तब तक खुश हैं जब तक वे क्षेत्र के शांतिपूर्ण विकास और क्षेत्र के देशों के बीच रिश्तों के बढ़ने के पक्ष में हैं।’ लू ने कहा कि चीन आशा करता है कि वॉशिंगटन चीन के विकास और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चीन की भूमिका को निष्पक्ष ढंग से देखेगा।

 


शंघाई - चीन में एक महिला यात्री के अंधविश्वास के चलते फ्लाइट घंटों तक नहीं उड़ पाई। शंघाई से उड़ने वाली एक फ्लाइट बुधवार को उस वक्त घंटों के लिए रुक गई जब महिला ने अपने 'गुड लक' के लिए सिक्के उछाले और सिक्के विमान के इंजन में जा फंसे। दरअसल महिला ने अपनी सुरक्षा की कामना करते हुए कुछ सिक्के हवा में उछाले जो हवाई जहाज के इंजन में चले गए, जिसकी वजह से विमान को पांच घंटे के लिए रोकना पड़ा। इस वजह से विमान के उड़ने में पांच घंटे की देर हो गई।
महिला ने हवा में उछाले 9 सिक्के
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, 80 साल की बुजुर्ग महिला यात्री चाइना साउदर्न एयरलाइंस द्वारा परिचालित CZ380 विमान से यात्रा कर रही थीं। ये विमान शंघाई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गुआंगझू के लिए उड़ान भरने वाला था। इसी दौरान महिला ने विमान में सवार होने की बाद नौ सिक्के हवा में फेंके जिनमें से आठा सिक्के तो इंजन तक नहीं पहुंच सके लेकिन एक सिक्का इंजन के अंदर चला गया और उसमें फंस गया।
पांच घंटे खड़ा रहा विमान
विमान में मौजूद एक यात्री ने महिला को ऐसा करते हुए देखा था जिसके बाद उसने एयरपोर्ट अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी। खबर मिलते ही पुलिस सिक्कों की खोजबीन करने मौके पर पहुंची तो पुलिस को इंजन में से सिक्का बरामद हुआ जिसके बाद सुरक्षा कारणों के चलते विमान को पांच घंटों तक खड़ा रखा गया और पूछताछ के बाद महिला को भी छोड़ दिया गया।

वॉशिंगटन - संयुक्त राष्ट्र में झूठी तस्वीर दिखाकर दुनियाभर में शर्मिंदगी झेलने के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। मगर एक बार फिर से उसके झूठ की पोल खुल गई है। पाक के दावे को खारिज करते हुए अमेरिका ने कहा है कि हाल में छुड़ाए गए अमेरिकी-कनाडाई दंपति को पिछले पांच साल से पाकिस्तान में ही रखा गया था। इससे पहले पाक ने दावा किया…
बीजिंग - चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रची गई थी। एक अधिकारी ने इस संबंध में दावा करते हुए कहा है कि जिनपिंग ने अपने अभियान के तहत सरकार के खिलाफ विद्रोह को नाकाम कर दिया था। ‘चाइना सिक्योरिटीज रेगुलेटरी कमीशन’ के अध्यक्ष लिउ शियू ने कहा कि शी ने उस विद्रोह को नाकाम कर अपनी पार्टी को बचाया था, जिसकी साजिश उनके विरोधियों ने…
टोक्यो - जापान में रविवार को आम चुनाव होंगे। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों की मानें तो प्रधानमंत्री शिंजो एबी दोबारा जीत का परचम लहरा सकते हैं। उनकी शानदार वापसी होगी। वह संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में दो तिहाई बहुमत पा सकते हैं। एबी की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी नीत गठबंधन 465 में से 300 से ऊपर सीटें पा सकता है। जापानी मतदाता भले एबी को बहुत पसंद नहीं करते…
काबुल - अफगानिस्तान में शिया मुस्लिम समुदाय के दो मस्जिदों में हुए आत्मघाती बम धमाको में कम से कम 72 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हो गए। पहला हमला पश्चिमी काबुल में हुआ वहीं दूसरा हमला घोर प्रांत में हुआ। पश्चिमी काबुल में स्थित एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती बम विस्फोट में 39 लोगों की मौत हो गई, जबकि 45 अन्य घायल हो…
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