दुनिया

दुनिया (1937)

एक स्नाइपर ने साढ़े तीन किलोमीटर (11319 फीट) की दूरी से सटीक निशाना लगाकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। यह कारनामा कनाडा की स्पेशल फोर्स के एक स्नाइपर ने इराक में आतंकी को मारकर किया है। अभी तक किसी ने भी ढाई किलोमीटर से ज्यादा दूरी का सटीक निशाना नहीं लगाया है।रिपो‌र्ट्स के अनुसार, इराक में तैनात कनाडा की ज्वाइंट टास्क फोर्स 2 के एक स्नाइपर ने पिछले महीने इराक में एक ऊंची इमारत से मैकमिलन टीएसी-50 राइफल का इस्तेमाल करते हुए इस्लामिक स्टेट (आईएस) के एक आतंकी को मार गिराया। वह आईएस आतंकी इराकी सेना पर हमला कर रहा था। 3450 मीटर की दूरी तय कर निशाना भेदने में गोली को 10 सेकंड लगे। इस लक्ष्य की पुष्टि वीडियो कैमरा व अन्य डाटा के जरिए की गई।इससे पहले सबसे ज्यादा दूरी से लक्ष्य भेदने का विश्व रिकॉर्ड ब्रिटिश स्नाइपर क्रैग हैरिसन के नाम था, जिन्होंने एक तालिबानी आतंकी को 2009 में 2475 मीटर (8120 फीट) की दूरी से मार गिराया था। क्रेन ने 338 लापुआ मैग्नम राइफल का इस्तेमाल किया था। उनसे पहले कनाडा के रॉब फर्लाग ने 2002 में 2430 मीटर (7972 फीट) से निशाना साधा था, तब उन्होंने ऑपरेशन एनाकोंडा के दौरान एक अफगानी आतंकी को मार गिराया था।ज्वाइंट टास्क फोर्स 2 का सदस्य कनाडाई स्नाइपर ज्वाइंट टास्क फोर्स 2 का गठन मुख्य रूस से आतंकवादरोधी, स्नाइपर ऑपरेशंस और बंधकों को छु़ड़ाने के लिए किया गया है। इस फोर्स की अधिकतर जानकारी छुपाकर रखी जाती है।स्नाइपर एक अचूक निशानेबाज होता है। दुनिया के कई देशों की सेनाएं अपने श्रेष्ठतम निशानेबाजों को स्नाइपर बनाती हैं।

अमेरिका के एक शीर्ष थिंक टैंक ने कहा है कि ट्रम्प प्रशासन जहां चीनियों के साथ निकटता बढ़ा रही है वहीं दुनिया में चीन के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने के लिए उसे भारत की जरूरत होगी। अमेरिका के लिए भारत को बेहद अहम बताते हुए अटलांटिक काउंसिल ने ट्रम्प प्रशासन से भारत के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देने की अपील की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिका के शीर्ष थिंक टैंक 'अटलांटिक काउंसिल' ने अपने नीति पत्र 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया फ्रॉम ए बैलेंसिंग टू लीडिंग पॉवर' में कहा है कि चीन ने आर्थिक एवं सैन्य दोनों मोर्चों पर प्रगति की है, इस बात को देखते हुए अमेरिका को अपने वैश्विक एवं क्षेत्रीय प्रभुत्व सुनिश्चित करने के लिए वहां अपने संसाधन लगाने की आवश्यकता है।नीति पत्र को पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी और साउथ एशिया सेंटर ऑफ द अटलांटिक काउंसिल के निदेशक भारत गोपालस्वामी ने संयुक्त रूप से लिखा है।इसमें कहा गया है कि जबकि ट्रम्प चीन से घनिष्ठ संबंधों पर काम कर रहे हैं। इसको देखते हुए वाशिंगटन को भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने के लिए और अधिक प्रयासों की जरूरत है। सीनेटर जॉन मैक्केन के एशिया-पैशिफिक क्षेत्र में मजबूती प्रदान करने का प्रस्ताव भारत के साथ अच्छे संबंधों के बढ़ाने के लिए अच्छा संकेत हो सकता है। उन्होंने लिखा कि 7.5 बिलियन डॉलर की मदद, अगर स्वीकृत हो जाती है, भारत-अमेरिका संबंधों को आने वाले वर्षों में बढ़ाने के लिए आरंभिक बिंदू हो सकती है।

माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई पिछले कुछ सालों से सवालों के घेरे में है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2015 में आए जबरदस्त भूकंप से दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी सिकुड़ गई है तो कई जानकारों का मानना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से माउंट एवरेस्ट पर जमी बर्फ की चादर पिघलने से उसकी ऊंचाई घट गई है। कई अध्ययनों में टेक्टॉनिक प्लेट में अप्रत्याशित हलचल के चलते माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई बढ़ने की भी अटकलें लगाई गई हैं। नेपाल सरकार ने इन्हीं सवालों को शांत करने के लिए माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई दोबारा नापने की कवायदें शुरू कर दी हैं।
1856 में पहली गणना
-एवरेस्ट पर्वत की ऊंचाई सबसे पहले साल 1856 में नापी गई थी। तब यह पर्वत 15वीं चोटी के नाम से जाना जाता था। ब्रिटिश सर्वेक्षक एंड्रयू वॉघ के नेतृत्व में पर्वतारोहियों के एक दल ने इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 8,840 मीटर (लगभग 29,002 फुट) ऊपर पाई थी। बाद में पर्वत का नाम इसकी खोज करने वाले ब्रिटिश सर्वेक्षक सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर माउंट एवरेस्ट रखने का फैसला किया गया।
1955 का आंकड़ा मान्य
-भारतीय सर्वेक्षकों के एक दल ने 1955 में एवरेस्ट का कद 8 मीटर अधिक पाया। उनका तर्क था कि एवरेस्ट की ऊंचाई का पैमाना उसकी चट्टान के बजाय चोटी पर जमी बर्फ की चादर होना चाहिए। इसी के साथ माउंट एवरेस्ट की आधिकारिक ऊंचाई 8,848 मीटर (लगभग 29,028 फुट) घोषित कर दी गई। 1975 में चीनी सर्वेक्षकों ने भी इस आंकड़े की तस्दीक की और एवरेस्ट की आधिकारिक ऊंचाई यही बरकरार रही।
90 करोड़ रुपये खर्च होंगे
-नेपाल के सर्वेक्षण विभाग के अध्यक्ष गणेश प्रसाद भट्टा कहते हैं, ‘हम 2012 से ही एवरेस्ट की ऊंचाई मापने पर विचार कर रहे थे, पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। 2015 में देश में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद एवरेस्ट के कद को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से जताई गई शंकाओं ने हमें दोबारा गणना के लिए प्रेरित किया।’ भट्टा ने नए सिरे से एवरेस्ट की ऊंचाई नापने पर 15 लाख डॉलर (लगभग 90 करोड़ रुपये) का खर्च आने का अनुमान लगाया है।
कयासबाजी
-2015 में आए भूकंप से दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी के सिकुड़ने की आशंका जताई गई थी
-टेक्टॉनिक प्लेटों में अप्रत्याशित हलचल से कई विशेषज्ञों ने ऊंचाई बढ़ने का भी अनुमान लगाया है
ऐसे होगी गणना
-समुद्र तल से 1,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नेपाल के उदयपुर जिले में तकनीशियनों ने एवरेस्ट की ऊंचाई मापने का काम शुरू किया
-यहां से एवरेस्ट की चोटी तक हर 2 किलोमीटर की दूरी पर खास स्टेशन बनाए जाएंगे, जो ऊंचाई को लेकर वास्तवित आंकड़ा जुटाएंगे
-मध्य जुलाई से युद्धस्तर पर शुरू होगा स्टेशनों का निर्माण कार्य, सर्वेक्षक ग्रैविटी मीटर, लेवलिंग उपकरण और जीपीएस के सहारे आंकेंगे कद


संयुक्त राष्ट्र - पाकिस्तान का परोक्ष रूप से जिक्र किए बिना भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से उन स्रोतों का पता लगाने को कहा है जहां से अफगानिस्तान में सरकार विरोधी तत्व दुनिया में सर्वाधिक बड़े सामूहिक सैन्य बलों से लड़ने के लिए हथियार, प्रशिक्षण और धन हासिल कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि हम इस चलन में बढ़ावा देख रहे हैं कि अफगानिस्तान में हिंसा को रोजमर्रा की घटना के रूप में लिया जा रहा है। आतंकवादियों और अपराधी नेटवर्कों की नृशंसता को सरकार विरोधी तत्वों या गृह और राजनीतिक संघर्ष के परिणाम के रूप में नजरअंदाज कर दिया जाता है। ऐसा करके हम कुछ महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाने में विफल नजर आते हैं।
अफगानिस्तान के संबंध में सुरक्षा परिषद की एक बैठक को संबोधित करते हुए, बिना किसी लाग लपेट के अकबरुद्दीन ने कहा कि ये सरकार विरोधी तत्व कहां से हथियार, विस्फोटक, प्रशिक्षण तथा धन हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनको सुरक्षित शरण कहां मिलती है्र ये कैसे हो सकता है कि ये तत्व दुनिया में सबसे बड़े सामूहिक सैन्य प्रयासों में से एक के खिलाफ खड़े हो गए हैं। ये कैसे संभव हुआ है कि ये तत्व अफगान लोगों की हत्याओं पर उन पर बर्बरता में दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
अकबरुद्दीन की ये टिप्पणियां परोक्ष रूप से पाकिस्तान के संबंध में थीं जिस पर भारत और अफगानिस्तान दोनों आतंकवादी समूहों को समर्थन, प्रशिक्षण और धन मुहैया कराने का आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने इस बात को भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अच्छे और बुरे आतंकवादियों के बीच भेद नहीं करना चाहिए और साथ ही उन्होंने एक समूह को दूसरे समूह के खिलाफ खड़ा करने के प्रयासों की भी निंदा की।
भारतीय राजदूत ने कहा कि तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अल कायदा, दाएश, लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद तथा उनके अन्य समूह सभी आतंकवादी संगठन हैं। इनमें से कई को संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित कर रखा है। उन सभी को आतंकवादी संगठन माना जाए और उनकी गतिविधियों को किसी भी प्रकार से सही नहीं ठहराया जाना चाहिए।
हाल ही में अफगानिस्तान में आतंकवादी हमलों के जरिए अस्पतालों, स्कूलों, जनाजों, अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों और राजनयिक मिशनों को निशाना बनाए जाने पर अकबरुद्दीन ने कहा कि ऐसा लगता है कि ये हमले उस राष्ट्र को एक प्रकार का संदेश देने के लिए हैं जो अपने पैरों पर खड़ा होने का प्रयास कर रहा है।


बीजिंग - पाकिस्तानी वायुसेना के एक ईरानी जासूसी ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद चीन के एक विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत चीन—पाकिस्तान आथर्कि गलियारे का हव्वा खड़ा करके के ईरान और इस्लामाबाद के बीच दरार पैदा नहीं कर सकता है।
बीते 19 जून को एक ईरानी ड्रोन को पाकिस्तानी वायुसेना के जेएफ—17 थंडर जेट ने मार गिराया था। यह जेट चीन निर्मित है।
पाकिस्तानी विदेश विभाग ने मीडिया को बताया कि ईरानी ड्रोन जासूसी मिशन पर था और पाकिस्तान की हवाई सीमा में बहुत अंदर तक आ गया था। इसके बाद उसे मार गिराया गया।
ईरान और पाकिस्तान के बीच संबंधों के तनाव के बारे में चीन चिंतित है क्योंकि उसे लगता है कि इससे सीईपीसी पर असर पड़ेगा। सीपीईसी परियोजना चीन के शिनजियांग को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को जोड़ेगी। ग्वादर ईरानी सीमा के निकट है।
बहरहाल, एक चीनी विशेषज्ञ ने इस बात पर जोर दिया कि ईरानी ड्रोन को मार गिराने से दोनों देशों का संबंध प्रभावित नहीं होगा।
ईरान में चीन के राजदूत रह चुके हुआ लिमिंग ने कहा, भारत 50 अरब डॉलर की सीपीईसी परियोजना का हव्वा खड़ा करके ईरान और पाकिस्तान के बीच दरार पैदा करने में सफल नहीं होगा।
हुआ ने कहा कि ईरान और पाकिस्तान पड़ोसी देश हैं और उनके संबंधों में बहुत सारी समस्याएं नहीं रही हैं, लेकिन भारत ईरान को यह मनवाने का प्रयास कर रहा है कि सीपीईसी और खासकर ग्वादर बंदरगाह के निर्माण से उसके हितों को


बगदाद - आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने मोसुल की प्रसिद्ध झुकी हुई मीनार और उससे जुड़ी मस्जिद को विस्फोट कर उड़ा दिया। इसी मस्जिद में वर्ष 2014 में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए अबु बकर अल बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित किया था।
आईएस के एक शीर्ष कमांडर अब्दुलमीर याराल्लाह ने एक बयान में कहा, हमारे जिहादी पुराने शहर में अंदर तक उनके ठिकानों की ओर बढ़ रही है और जब वे नूरी मस्जिद के 50 मीटर के दायरे में घुस गए तो आईएस ने नूरी मस्जिद और हदबा को उड़ा कर एक और ऐतिहासिक अपराध किया।
आपको बता दें कि इराकी शहर मोसुल में पिछले चार दिनों भयंकर लड़ाई छिड़ी हुई है। 19 जून को इराकी अधिकारियों ने मोसुल को पूरी तरह अपने कब्जे में लेने के लिए हमले की शुरआत करने के बाद पर्चा गिराकर आम लोगों को दूर में रहने की सलाह दी है और जिहादियों को आत्मसमर्पण करने या मरने की चेतावनी दी है। इस पुराने शहर को इस्लामिक स्टेट समूह के कब्जे से पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने के लिए इराकी बलों ने कुछ दिनों पहले हमले की शुरआत की थी।
इराकी कमांडर के अनुसार जिहादी कड़ा प्रतिरोध दिखा रहे हैं और उनकी चिंता 100,000 से अधिक लोगों को लेकर है, जिनके अब भी शहर में होने की संभावना है।

वाशिंगटन - आर्थिक मामलों पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष सहयोगी और भारत मामलों के विशेषज्ञ केनेथ आई जस्टर का नई दिल्ली में अमेरिका का अगला राजदूत होंगे। यह जानकारी व्हाइट हाउस ने दी है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मामलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति के उप सहायक और उनके राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के उप निदेशक 62 साल के जस्टर नामित होने और सीनेट से मंजूरी मिलने पर रिचर्ड वर्मा का स्थान…
दुबई - अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के सऊदी अरब के नये शहजादे मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की। ट्रंप ने सऊदी शाह सलमान के बेटे युवराज मोहम्मद बिन सलमान को सऊदी अरब का नया शहजादा बनने पर शुभकामनाएं दी है। ट्रंप ने शहजादा मोहम्मद बिन सलमान को टेलीफोन कर बधाई देते हुये कहा कि वह अमेरिका और सऊदी अरब…
न्यूयॉर्क - भारत की आबादी पहले के अनुमान से दो साल बाद यानी 2024 के आसपास चीन की आबादी को पार कर सकती है। भारत की जनसंख्या 2030 तक 1. 5 अरब होने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र के एक पूवार्नुमान में यह दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग ने बुधवार को 25वीं रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया है कि चीन की आबादी…
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वाशिंगटन - पेंटागन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि तालिबान और हक्कानी नेटवर्क सहित अफगान स्थित उग्रवादी समूहों को पाकिस्तान सरकार में शामिल तत्वों के समर्थन से लाभ मिल रहा है।ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल में पेंटागन ने अपनी पहली अफगान रिपोर्ट में अफगानिस्तान के परिणामों को पाकिस्तान अपने राष्ट्रीय हित में देखता है और अपनी भारत केंद्रित क्षेत्रीय नीति के लक्ष्यों पर कायम…
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