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इस्‍लामाबाद - पाकिस्‍तान एक बार फिर मुंबई हमले के मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद को बचाने में जुट गया है। पाकिस्‍तान ने कहा है कि वह जांच के लिए आ रही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की टीम को हाफिज सर्इद और उसके संगठनों की सीधे तौर पर जांच करने की इजाजत नहीं देगा। आपको बता दें कि हाफिज सईद और उसके संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बढ़े वैश्विक दबाव के बीच प्रतिबंधों का मुआयना करने के लिए यूएनएससी की एक टीम इस हफ्ते पाकिस्‍तान दौरे पर आ रही है। इस दौरे का मकसद इस बात का पता लगाना है कि पाकिस्‍तान वैश्विक स्‍तर पर लगाए प्रतिबंधों का कितना अनुपालन कर रहा है।
पाक अखबार 'द नेशन' ने यूएनएससी टीम की जांच के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें पाक सरकार के सूत्रों के हवाले से कई अहम जानकारियां दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, यूएनएससी की सेंक्‍शंस मॉनिटरिंग टीम को हाफिज सईद या जमात-उद-दावा के अलावा इससे जुड़े बाकी संगठनों तक सीधी पहुंच नहीं बनाने दी जाएगी।
वहीं एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि पाक सरकार ने तय किया है कि हाफिज सईद के मामले में वो दबाव में नहीं आएगी। रिपोर्ट में पाक सरकार के एक बड़े अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यूएनएससी की टीम ने फिलहाल हमसे हाफिज सईद तक सीधी पहुंच की मंजूरी नहीं मांगी है, मगर वो इसकी इजाजत मांगते भी हैं तो उन्हें ये नहीं दी जाएगी। हम उनसे बातचीत कर रहे हैं।
एक और अधिकारी ने कहा कि ये टीम पाक अधिकारियों से मिलेगी और प्रतिबंधित संगठनों की सूची मांगेगी। हमने यूएन के आदेश का पालन किया है। इसलिए इस मामले में परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।
आपको बता दें कि यूएनएससी की टीम दो दिवसीय दौरे के तहत पाकिस्‍तान यात्रा पर होगी, जिसकी शुरुआत गुरुवार से होगी। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्‍ठ पाक अधिकारी ने बताया कि यूएनएसी 1267 सेंक्‍शंस कमिटी की मॉनिट‍िरिंग टीम 25 और 26 जनवरी को यहां होंगी। टीम का दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका और भारत द्वारा हाफिज सईद व उसके संगठनों पर प्रतिबंध लागू करने को लेकर पाकिस्‍तान पर दबाव बनाया जा रहा है।
हाल ही में हाफिज सईद को लेकर दिए गए पाक पीएम शाहिद खकान अब्‍बासी के बयान पर अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। अमेरिका ने पाकिस्तान से दो टूक कहा था कि हाफिज सईद एक आतंकी है, जो मुंबई में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड भी है। इसलिए पाकिस्तान उस पर कानून की अंतिम सीमा तक केस चलाए। आपको बता दें कि पिछले दिनों पाक पीएम ने हाफिज सईद को 'साहेब' कहते हुए कहा था कि उसके खिलाफ पाकिस्‍तान कोई केस दर्ज नहीं है। इसलिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद को नजरबंद किए जाने के बाद नवंबर में रिहा कर दिया गया था। अमेरिका ने जमात-उत-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है, जो कि लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा है। अमेरिका ने जमात-उद-दावा को 1987 में सईद द्वारा स्थापित लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी मोर्चा कहा था। 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों को अंजाम देने में लश्कर ही जिम्मेदार था, जिसमें 166 लोगों की जान गई थी।


दावोस - पिछले साल देश के कुल धन में 73 फीसदी का योगदान भारत की एक फीसद अमीरों की आबादी का था। आय में असमानता की यह चिंताजनक तस्वीर आज जारी किए गए एक सर्वे में सामने आई है। बाकि देश की लगभग आधी आबादी 67 करोड़ की जनसंख्या गरीब है। सर्वे में कहा गया है कि इनकी आय में मात्र एक फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है। दावोस में सालाना विश्‍व आर्थिक मंच की शुरुआत के पहले इंटरनेशनल राइट्स ग्रुप ऑक्सफैम आवर्स के द्वारा यह सर्वे जारी किया गया है। सम्‍मेलन के लिए पीएम नरेंद्र मोदी रवाना हो चुके हैं।
WEF में होगी आय असामनता पर चर्चा
सर्वे के अनुसार, दुनियाभर में यह स्थिति काफी भयावह है। दुनियाभर में संकलित कुल आय में 82 फीसद योगदान अमीरों का है जबकि 3.7 अरब की आबादी का इसमें कोई हाथ नहीं है। वार्षिक ऑक्सफैम सर्वे की यह रिपोर्ट अभी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दावोस में शुरु होने जा रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में 'बढ़ती आय' और 'लिंग असामनता' पर चर्चा अहम माना जा रहा है। पिछले साल की रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि भारत के एक फीसद अमीरों की आबादी देश की कुल धन का 58 फीसदी उत्पन्न करते हैं, जो वैश्विक स्तर पर 50 फीसदी से भी ज्यादा है। इस साल के रिपोर्ट भी ये दर्शाते हैं कि एक फीसद अमीरों की आबादी की आय पिछले साल से 20.9 लाख करोड़ से बढ़ोत्तरी हुई है।
'रिवॉर्ड वर्क नॉट वेल्थ' सर्वे ने कहा- हर 2 दिन में बन रहा एक अरबपति
'रिवॉर्ड वर्क नॉट वेल्थ' नाम से जारी सर्वे में कहा गया है कि किस तरह से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमीरों का ही योगदान है, जबकि सैकड़ों मिलियन की गरीब आबादी किसी तरह बस अपना जीवन यापन कर रही है। 2017 की रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि हर दो दिन में एक अरबपति बन रहा है। 2010 से ही अरबपतियों का धन 13 फीसदी की दर से बढ़ा है। अध्ययन में कहा गया है कि भारत में अमीरों की आय के जितना धन कमाने में मिडिल क्लास के लोगों को 941 साल का समय लग सकता है।
CEOs के वेतन में 60 प्रतिशत कटौती का समर्थन
दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकेनॉमिक फोरम में भाग लेने जा रहे पीएम मोदी से ऑक्सफैम इंडिया ने अपील की है कि वे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सभी को मौका दें ना कि सिर्फ कुछ भाग्यशाली लोगों को। इस कड़ी में देश में अधिक से अधिक नौकरियां पैदा करने की बात की गई। सर्वे ने अमेरिका, ब्रिटेन और भारत जैसे देशों में सीईओ के लिए वेतन में 60 प्रतिशत कटौती का भी समर्थन किया है। भारत के बारे में यह कहा गया है कि पिछले साल 17 नए अरबपति बने जिसके साथ ही इनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई है।
अरबपतियों की बढ़ती संख्या असफल अर्थव्यवस्था का संकेत
कहा गया है कि भारतीय अरबपतियों की संपत्ति में 20.7 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जो किसी भी राज्य की शिक्षा बजट का 85 प्रतिशत धन है। ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ निशा अग्रवाल ने कहा कि यह चिंताजनक है कि भारत में आर्थिक विकास का लाभ कुछ ही लोगों के हाथों में है है। अरबपति की संख्या में बढ़ोत्तरी एक संपन्न अर्थव्यवस्था का संकेत नहीं है, बल्कि यह असफल आर्थिक व्यवस्था का एक लक्षण है। उन्होंने कहा कि बढ़ता विभाजन लोकतंत्र को कमजोर करता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। उन्होंने यह भी बताया कि दस अरबपतियों में से 9 पुरुष है जो लैंगिक भेदभाव को भी दिखाता है। भारत में केवल चार महिला अरबपति है जिसमें से तीन को विरासत में मिली है।


इस्लामाबाद - अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी के खिलाफ पाकिस्तान की सेना और उसकी सरकार को बदनाम करने वाली किताबें एवं लेख लिखने और नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। 'डॉनन्यूज ने बताया कि पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कोहाट जिले के दो पुलिस थानों में तीन लोगों द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकियों में हक्कानी का नाम है।
मोमिन, मोहम्मद असगर और शमसुल हक ने कैंटोनमेंट और बिलिटांग पुलिस थानों में तीन प्राथमिकियां दर्ज कराईं। शिकायकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व राजदूत ने देश को अपूरणीय क्षति पहुंचाई और उसे बदनाम किया। असगर ने प्राथमिकी में आरोप लगाया कि मेमोगेट घोटाले में हक्कानी शामिल था और उसने अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत के तौर पर सेवाएं देते समय ''सीआईए और भारतीय एजेंटों को वीजा जारी किए। उन्होंने अमेरिका में वर्ष 2008 से 2011 तक राजदूत के रूप में सेवाएं दीं। मेमोगेट विवाद में कथित भूमिका के लिए उन्हें पद से हटा दिया गया था।
पुलिस ने प्राथमिकियों में पाकिस्तान दंड संहिता की धाराओं 120 बी( आपराधिक षड़यंत्र रचने) और 121 ए (पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ना) का प्रयोग किया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि उचित प्रक्रिया के तहत हक्कानी को आत्मसमर्पण कर देना चाहिए अन्यथा उन्हें भगौड़ा घोषित किया जाएगा। वर्ष 1992 से 1993 तक श्रीलंका में पाकिस्तान के राजदूत के रूप में भी सेवाएं दे चुके हक्कानी की 'द वॉशिंगटन पोस्ट में छपे एक लेख के कारण संसद ने भी निंदा की थी। हक्कानी ने लिखा था कि उन्होंने अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के खात्मे में अमेरिकी बलों की मदद की जबकि सरकार और आईएसआई को इस खुफिया अभियान के बारे में अंधेरे में रखा गया था।

 


टोक्यो - उत्तर कोरिया से लगातार मिल रही परमाणु हमले की धमकी के मद्देनजर जापान की राजधानी में मंगलवार को मिसाइल हमले से बचने का अभ्यास किया गया। टोक्यो के एक एम्यूजमेंट पार्क में किए गए इस अभ्यास के दौरान द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुए परमाणु हमले की नकल करते हुए लाउडस्पीकर से चेतावनी दी गई।
पार्क के एक कर्मचारी ने लोगों को चेताया, 'हमें सूचना मिली है कि मिसाइल हमला कर दिया गया है। कृपया इमारतों या भूमिगत ठिकानों में छुप जाए।' यह घोषणा होते ही करीब 250 स्थानीय लोग और ऑफिस कर्मचारी बंकरों और करीब के भूमिगत स्टेशनों में छुप गए। कुछ देर बाद दूसरा संदेश दिया गया, 'मिसाइल निकल गई है। मिसाइल कांतो क्षेत्र के ऊपर से गुजरते हुए प्रशांत महासागर की ओर चली गई है।'
पिछले साल भी जापान के अन्य इलाकों में परमाणु हमले से बचने के लिए अभ्यास किया गया था। कुछ लोगों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह युद्ध को प्रोत्साहित करने वाला अभ्यास है। वहीं, अभ्यास में हिस्सा लेने वाले एक छात्र ने कहा, 'कुछ ना करने से अच्छा है कि इस तरह का अभ्यास कराया जाए।'
उल्लेखनीय है कि पिछले साल उत्तर कोरिया ने तीन मिसाइल परीक्षण किए थे। इस दौरान उसकी मिसाइल जापान के ऊपर से होते हुए समुद्र में जाकर गिरी थी।


सियोल - दक्षिण कोरिया के साथ तनावपूर्ण संबंध को खत्‍म करने की दिशा में उत्‍तर कोरिया तेजी से अग्रसर है। अगले महीने दक्षिण कोरिया में विंटर ओलंपिक शुरू होने जा रहा है और उत्‍तर कोरिया ने दोस्‍ती के नए युग की शुरुअात के लिए इसे ही चुना है। वहीं तैयारियों का जायजा लेने के लिए उत्‍तर कोरिया का एक प्रतिनिधि दल सियोल भी पहुंच चुका है। मगर इसके साथ दक्षिण कोरिया में विरोध का स्‍वर भी फूटने लगा है।
सोमवार को सियोल में 100 से ज्‍यादा की संख्‍या में प्रदर्शनकारियाें ने उत्‍तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की तस्‍वीर जलाकर अपना विरोध जताया। विंटर ओलंपिक में उत्‍तर कोरिया की भागीदारी को लेकर सियोल के सेंट्रल रेलवे स्‍टेशन के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया गया और इस जगह को इसलिए चुना गया क्‍योंकि वहां से उत्‍तर कोरियाई प्रतिनिधि दल गुजरने वाला था जिसका नेतृत्‍व किम जोंग उन की कथित पूर्व प्रेमिका हियान सॉन्‍ग वोल का, जो सियोल पहुंचे उत्‍तर कोरियाई प्रतिनिधि दल का नेतृत्‍व कर रही हैं।
हियान उत्‍तर कोरिया के मशहूर मोरंगबॉन्‍ग बैंड की हेड भी हैं। हियान के सियोल पहुंचने को लेकर भी मामला गरमाया हुआ है। प्रदर्शनकारियाें ने उनके सामने ही किम जोंग उन की तस्‍वीर में आग लगा दी। इसमें उत्‍तर कोरिया का झंडा भी जल गया।
हियान के सियोल दौरे को लेकर दक्षिण कोरिया की मीडिया में भी काफी उत्‍सुकता देखने को मिली। मगर उन्‍होंने किसी से बात नहीं की।
उत्तर और दक्षिण कोरिया खेल के मैदान में संयुक्त महिलाओं की आइस हॉकी टीम को एक साथ उतारेंगे। इसके अलावा उत्तर कोरिया के खिलाड़ी स्केटिंग और स्कींइग में भी उतरेंगे।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन के पद संभालने के बाद हुआ यह दौरा संभव हुआ है। मून उत्तर कोरिया के साथ बातचीत के पक्षधर हैं। दो सप्ताह पहले दोनों पड़ोसी देशों में बातचीत के बाद उत्तर कोरिया ओलंपिक में अपने एथलीटों और अधिकारियों का दल भेजने पर सहमत हुआ। दोनों कोरिया में हुए समझौते पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने शनिवार को मुहर लगा दी।
विंटर ओलंपिक नौ फरवरी से दक्षिण कोरिया के प्योंगचांग में शुरू होगा। इसमें दोनों कोरिया एक ही झंडे के तहत उद्घाटन समारोह में मार्च पास्ट करेंगे। महिला आइस हॉकी की उनकी संयुक्त टीम होगी। हियोन के नेतृत्व में 140 सदस्यीय ऑरकेस्ट्रा के दो कंसर्ट होंगे। दक्षिण कोरिया और ओलंपिक आयोजकों को उम्मीद है कि इस 'शांति के ओलंपिक' से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम होगा।

 


मॉस्को - रूस के विदेश मंत्री ने अमेरिका के द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर अपने बयान दिए हैं। रूसी विदेश मंत्री सरगेई लावरोव ने कहा, रूस पर अमेरिका के द्वारा लगाए जाने वाले प्रतिबंध निराधार हैं साथ ही ये मास्को की विदेश नीति को प्रभावित नहीं करेंगे। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक एक अखबार को दिए इंयरव्यू में लावरोव ने कहा, "हम मानते हैं कि जिन कारणों को लेकर रूस पर प्रतिबंध लगाए गए हैं वे बिना किसी आधार के हैं। उन्होंने आगे कहा कि रूस की नीति खुली, इमानदार और रचनात्मक है जो अमेरिका बदल नहीं सकता है।
लावरोव की ये टिप्पणी तब आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन के द्वारा उच्च रैंकिंग रूसी अधिकारियों और मॉस्को पर नई आर्थिक प्रतिबंध लागू करने की दो रिपोर्ट को जारी किया है। उन्होंने आगे कहा कि रूस की विदेश नीति देश के राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और वह किसी भी विदेशी दबाव में नहीं आने वाली है।
लावरोव ने आगे कहा, "हमारी विदेश नीति को समाज में व्यापक समर्थन प्राप्त है, इस बात का सबसे बड़ा सबूत यही है कि विदेशी राष्ट्र और कुछ कंपनियों हम पर दबाव डालकर हमारी विदेश नीति को बदलने का प्रयास कर रही है जो बेमतलब है।"
बता दें कि अगस्त 2017 में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों के एक नए पैकेज पर हस्ताक्षर किए थे। रूस और वाशिंगटन के बीच काफी समय से रिश्ते खटास हैं। सीरिया में युद्ध, यूक्रेन में संघर्ष और क्रेमलिन के कथित हस्तक्षेप में असहमति के बीच ही इन दोनों राष्ट्रों के बीच रिश्ते मधुर नहीं हैं। इसके 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के समय इन दोनों देशों के बीच तनाव उत्पन्न हुए थे।

वाशिंगटन - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन को सुझाव दिया है कि वह तथाकथित ‘परमाणु-विकल्प’ (न्यूक्लियर ऑप्शन) का इस्तेमाल करें, जिसमें 100 सदस्यों वाली सीनेट में 60 की बजाए साधारण बहुमत हासिल करने की जरूरत है। फिलहाल अमेरिका में पांच साल में पहली बार सरकारी कामकाज बंद होने को लेकर डेमोक्रेट्स के साथ गहन बातचीत का दौर जारी है।अमेरिकी कांग्रेस कार्रवाई में बमुश्किल इस्तेमाल होने वाला परमाणु या संवैधानिक…
दावोस - स्विटजरलैंड के दावोस में आयोजित होने जा रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग लेने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रवाना हो चुके हैं। इसको लेकर दावोस में रह रहे भारतीय मूल के लोगों खास तौर से कारोबारियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इन्हीं में से भारतीय मूल के एक कारोबारी मेहुल पटेल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) पर…
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यभार संभालने के विरोध में आयोजित मार्च में लाखों महिलाएं शामिल हुई। ठीक एक वर्ष बाद ट्रंप और उनके प्रशासन की नीतियों के खिलाफ समूचे अमेरिका के शहरों में प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए। समाचार एजेंसी एफपी के मुताबिक, इनमें से न्यूयॉर्क में सबसे विशाल मार्च निकाला गया। करीब 85,000 प्रदर्शनकारियों ने इंटरनेट पर इसके लिए पंजीकरण कराया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की वास्तविक संख्या इससे अधिक हो…
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में स्थानीय पुलिस को छापेमारी के दौरान एक ऐसा जानवर मिल गया, जिससे सभी पुलिसकर्मी चौंक गए। दरअसल, स्थानीय पुलिस हथियारों को ढूंढने के लिए एक संदिग्ध के घर के बेसमेंट में छापेमारी कर रही थी।पुलिस ने बताया कि अवैध हथियारों के कब्जे और तस्करी के मामले में पुलिस एक संदिग्ध के घर में छापेमारी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को बेसमेंट से मगरमच्छ मिल…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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