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बोकारो। तेलंगाना जा रहे जामताड़ा (झारखंड) के 84 बच्चों को गुरुवार को प्रशासन ने बोकारो रेलवे स्टेशन पर उतार लिया था। इस मामले में बच्चों को तेलंगाना ले जा रहे तीनों उलेमा (मदरसा में पढ़ाने वाले) और एक रसोइया को राजकीय रेल पुलिस बोकारो ने बाल कल्याण समिति के आवेदन पर गिरफ्तार कर लिया है। उनको शनिवार को रांची रेल कोर्ट में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर सभी को न्यायिक हिरासत में रांची के होटवार जेल भेजा गया।पकड़े गए आरोपितों में शमशेर, गुलाम रसूल, मु. मुस्लिम और लाल मुहम्मद शामिल हैं। रेल पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा समिति अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंह ने की थी। इनका कहना है कि अलेप्पी एक्सप्रेस से सभी 84 बच्चों को गुप्त सूचना पर उतारा गया। चारों आरोपित इन बच्चों को अवैध तरीके से बिना आवश्यक कागजों के ले जा रहे थे। बाल कल्याण समिति ने प्रारंभिक जांच में पाया कि इन बच्चों के अभिभावकों को लालच देकर व्यक्तिगत स्वार्थ से तेलंगाना ले जाया जा रहा था।बच्चों के साथ मौजूद चारों लोगों ने अच्छी शिक्षा के लिए तेलंगाना ले जाने की बात कही। वहीं संदेह हुआ कि बच्चों को इतनी दूर बिना वैध कागजात के कैसे ले जाया जा रहा है। इसके बाद सभी को ट्रेन से उतारा गया। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज हो गई है।

मेदिनीनगर। गढ़वा जिले (झारखंड) के रमकंडा थाना क्षेत्र के रहने वाले 32 मजदूरों को पलामू पुलिस की पहल पर शनिवार की शाम डालटनगंज रेलवे स्टेशन से मुक्त करा लिया गया है। इसमें 17 किशोर-किशोरी भी शामिल हैं। पुलिस ने दलाल को भी गिरफ्तार कर लिया है। इसका नाम राहुल तिवारी बताया जाता है।छापेमारी टीम का नेतृत्व महिला थाना प्रभारी दुल्लर चौड़े कर रहीं थीं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी थी कि रेलवे स्टेशन पर नाबालिग किशोर-किशोरी मौजूद हैं। मामले की तहकीकात करने स्टेशन पहुंची तो पाया कि मजदूरों को दूसरे प्रदेश भेजने की तैयारी चल रही है। इस बीच छापेमारी करते हुए सभी लोगों को संरक्षा में ले लिया गया, साथ ही दलाल राहुल तिवारी को गिरफ्तार किया गया। 17 किशोर-किशोरियों को बाल सुधार गृह में भेज दिया गया है।उन्होंने बताया कि लड़कियों की उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच है। पूरे मामले की तहकीकात की जाएगी। वहीं गिरफ्तार दलाल ने पुलिस को बताया कि वह सभी को धनकटनी के लिए बिहार के रोहतास जिले में ले जा रहा था। इधर, मजदूरों ने बताया कि दलाल गांव से सभी 32 लोगों को ले जाने की बात कह उन्हें लेकर आया था। लेकिन रेलवे स्टेशन पर सभी को ले जाने से इन्कार कर दिया। कहने लगा कि महज 12 लोगों को ही ले जाएंगे, इस पर मजदूरों ने विरोध किया।

 

 

 

रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के रसायन विभाग की शोधार्थी ममता त्रिपाठी ने कैंसर से लड़ने के लिए एक नया फार्मूला इजात किया है। जिसमें ऐसा कम्पाउंड तैयार किया गया है जो पीड़ित के शरीर में दवा का फार्मूला लंबी अवधि तक रख कर कंपन के साथ किमोथेरेपी करेगा। इसे प्राथमिक तौर पर मेडिसिन साफ्टवेयर ग्रो मैक्स एन ए एमडी ने मानक क्षमता की स्वीकृति दे दी है।
चल रहा परीक्षण:-देश की नामी मेडिसिन लैब दुर्गा फार्मासिटिकल लैब (डीएसपी) में इसे मानव शरीर के लिए परिक्षण किया जा रहा है। ममता ने बताया कि इस तरह के शोध के बाद इस साफ्टवेयर में जांच से ही शोध की गुणवत्ता तय होती है। मैंने चार वर्षों के शोध के बाद यह फार्मूला तैयार किया।
इस तरह करता है कार्य:-फार्मूला इस तरह से तैयार किया गया है, कि कैंसर पीड़ित के शरीर में जाकर कंपन करे, ताकि कीमोथेरेपी में अच्छी तरह से सहायक बन सके और शरीर में कैंसर युक्त सभी जीवाणुओं को मार सके। कंपन के कारण फार्मूला शरीर में लंबे समय तक रहता है, जिससे जल्द कैंसर से निजात पाने में मदद मिल पाएगी।शोध को लेकर भविष्य में कैंसर के प्रभावी इलाज की अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। अभी यह साफ्वेयर में जांचा गया है। यदि मानव शरीर पर पूर्ण रूप से कार्य कर पाया तो जानलेवा बीमारी से छुटकारे के लिए एक बड़ा कदम होगा।

नई दिल्ली। सर्व रोग निवारिणी, ये नीम का दूसरा नाम है। कहते हैं कि ऐसा कोई रोग नहीं है जिसका इलाज नीम न कर सकती हो। भारतीय पेड़ों में नीम को चमत्कारी माना जाता है। हर जगह आसानी से उग जाता है और साल भर अपनी नेमत बरसाता है। इसके फल, फूल, पत्तियां, तना और छाल सबके अलग-अलग गुण हैं। हिंदू मान्यता के मुताबिक यह मां दुर्गा का स्वरूप है जो हर तकलीफ को दूर कर देता है। ये सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देता है और रोगाणुओं को खत्म करता है। अगर अपने आंगन या घर के आजू-बाजू एक नीम रोप दें तो बड़ा होकर समझ लीजिए एक डॉक्टर आपके परिवार की देखरेख खुद ब खुद कर रहा है। वैसे तो आप में से कई लोगों को नीम के गुणों के बारे में पता होगा, लेकिन शायद आपको ये नहीं मालूम होगा कि नीम कैंसर जैसी जटिल बीमारी का भी तोड़ है। कई तरह के कैंसर में नीम का प्रयोग किया जाता है, जो लाभकारी भी होता है। ऐसी ही कुछ नीम से जुड़े फायदेमंद गुणों की खान का लेखा-जोखा हम आपके लिए लेकर आए हैं।
नीम...गुणों की खान
- इसमें भरपूर मात्र में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो त्वचा पर उम्र के असर को कम करते हैं।
- नीम की पत्तियों और बीजों का सत्व डायबिटीज और रक्तचाप नियंत्रित करने में सक्षम है।
- नीम की पत्तियों के रस का सेवन करने से लिवर मजबूत रहता है।
- इसके बीज, फल, फूल में ट्यूमर रोधी गुण पाए जाते हैं जो कई प्रकार के कैंसर को खत्म करने में मददगार हैं।
- नीम की दातुन दांतों और मसूड़ों के लिए सबसे अच्छी दवा मानी जाती है।
- नीम की पत्तियों को उबालकर ठंडे किए गए पानी से नहाने से त्वचा हर प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रहती है।
- इस पानी से बाल धोने से डैंड्रफ की समस्या भी दूर होती है।
- नीम की सूखी पत्तियां जलाकर धुआं करने से मच्छर पास भी नहीं फटकते, जो इस मौसम में नाक में दम कर देते हैं।
- कपड़ों में नीम की पत्तियां या नीम के तेल की गोलियां रखने से कपड़े नमी से खराब नहीं होते।
- अनाज में नीम के पत्ते रखने से कीड़े नहीं लगते।
मिट्टी के लिए भी गुणकारी:-वानिकी और कृषि पर आधारित संस्कृत पुस्तक उपवन विनोद में नीम को बीमार मिट्टी, पौधों और मवेशियों के लिए गुणकारी बताया गया है। नीम के बीजों में से तेल निकालने के बाद जो खली बचती है उसे चारे के तौर पर पशुओं को खिलाया जाता है, जबकि इसकी पत्तियां मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाती हैं।
यथा नाम तथा गुण:-संस्कृत में इसके कई नाम हैं। अरिष्ट का अर्थ है संपूर्ण और अविनाशी। दूसरा नाम है निम्ब जिसे ‘निम्बति स्यास्थ्यमददाती’से लिया गया है जिसका मतलब है ‘अच्छी सेहत देना’। पिंचुमाडा नाम का मतलब है लकवे और त्वचा रोगों का इलाज करने वाला। नीम को ‘चालीस का पेड़’ नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह चालीस तरह के रोगों का प्रभावी इलाज करता है। यूनानी विद्वानों ने इसे शजर-ए-मुनारक यानी मुबारक पेड़ नाम दिया। फारसी विद्वानों ने इसे आजाद दरख्त ए हिंद यानी देश का आजाद पेड़ नाम दिया।
धार्मिक मान्यताएं:-कहते हैं कि देवराज इंद्र ने जब धरती पर अमृत छिड़का तो इससे नीम के पेड़ का जन्म हुआ और इसमें चमत्कारी गुण आ गए। दूसरी मान्यता है कि इसमें शीतला मां का निवास है।

नई दिल्ली। हम मानकर चलते हैं कि मजबूत कैरेक्टर्स के साथ बनाया गया पासवर्ड सुरक्षित है, लेकिन आज के हैकर्स इससे भी आगे की सोचते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक रिपोर्ट के मुताबिक अंगुलियों से कीबोर्ड पर छूटे हीट का इस्तेमाल करके हैकर्स आपके पासवर्ड को हैक कर सकते हैं। हैकर्स ने पासवर्ड चुराने का यह नया तरीक ईजाद किया है। इसमें थर्मल कैमरे की मदद से साधारण कीबोर्ड पर क्लिक किए गए कीज को कैप्चर कर पासवर्ड चुराया जाता है। इस तरह के अटैक को 'थर्मानेटोर' नाम दिया दिया गया है। इसका इस्तेमाल टेक्स्ट, कोड या बैकिंग पिन का एक्सेस पाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ और तरीके हैं, जिनका इस्तेमाल हैकर्स पासवर्ड चोरी करने के लिए करते हैं।
डिक्शनरी अटैक:-पासवर्ड हैकिंग का यह सबसे आसान तरीका है। इसकी मदद से हैकर आसान रखे गए पासवर्ड का पता लगात सकते हैं। डिक्शनरी में कुछ ऐसे आसान शब्द होते हैं, जिनका इस्तेमाल लोग अक्सर अपने पासवर्ड के रूप में करते हैं। वास्तव में यह डिक्शनरी एक छोटी फाइल है, जिसमें बेहद सामान्य पासवर्ड का कॉम्बिनेशन होता है, जैसे कि 123456, qwert, password, 66666, 55555, आदि। बेशक इस तरह के पासवर्ड के जरिए सिस्टम या एकाउंट को तेजी से ओपन करने में मदद तो मिलती है, लेकिन सामान्य पासवर्ड होने की वजह से हैकर्स के लिए इन्हें क्रैक करना काफी आसान हो जाता है।
कैसे रहें सेफ:-अगर थोड़े ज्यादा मजबूत पासवर्ड रखें, तो बेहतर हो सकता है। हर एकाउंट के लिए सिंगल यूज पासवर्ड रखें यानी एक एकाउंट के लिए एक पासवर्ड। इसके लिए पासवर्ड मैनेजमेंट एप्स लास्टपास, कीपास, कीपर आदि की मदद ली जा सकती है। इससे हर एकाउंट को मैनेज करना आसान हो जाएगा।
ब्रूट फोर्स अटैक:-आमतौर पर पासवर्ड को क्रैक करने के लिए हैकर हर संभावित कैरेक्टर्स के कॉम्बिनेशन को ट्राई करते हैं। इसमें अपर केस, लोअर केस, डेसिमल्स ऑफ पाइ आदी के कॉम्बिनेशन को भी ट्राइ किया जाता है। साथ ही, हैकर्स स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम की मदद भी लेते हैं। इसमें सॉफ्टवेयर की मदद से आप से जुड़े शब्दों, जैसे-बर्थडे, पेट्स के नाम आदि की मदद से पासवर्ड को क्रैक करने की कोशिश की जाती है। इसमें अक्सर लोगों को पता भी नहीं होता है कि हैकर्स उन्हें टारगेट कर रहा है। हैकर्स ऑनलाइन प्रोफाइल, जैसे-लिंक्डइन, फेसबुक, ट्विटर आदि की इंफॉर्मेशन का इस्तेमाल संभावित पासवर्ड का पता लगाने के लिए करते हैं।
कैसे रहें सेफ:-पासवर्ड बनाते समय एक जैसे कैरेक्टर की बजाय अलग-अलग कॉम्बिनेशन ($, &, {, or ]) का इस्तेमाल करें। आप जितने अलग-अलग तरक के कॉम्बिनेशल का इस्तेमाल करेंगे, उस पासवर्ड को क्रैक करना हैकर्स के लिए उतना ही मुश्किल होगा।
स्पाइडरिंग अटैक:-कभी-कभी हैकर्स आपसे संबंधित पर्सनल जानकारियां जुटाने की बजाय जॉब से संबंधित पासवर्ड पर अधिक फोकस करते हैं। वे जानते है कि कई बार लोग अपनी जॉब से संबंधितत पासवर्ड को रखना ज्यादा पसंद करते हैं। इसलिए वे कॉरपोरेट टर्मिनोलॉजी को लेकर स्टडी करते हैं और खास कंपनी से संबंधित फैक्ट्स जुटाते हैं। स्पाइडरिंग अटैक खासकर बड़ी कंपनियों के खिलाफ की जाती है, क्योंकि इससे जुड़ी बहुत सारी जानकारियां ऑनलाइन होती हैं। इसमें हैकर्स खासतौर पर वाईफाई पासवर्ड को एक्सेस करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि अधिकतर ऑफिस के राउटर सामान्य पासवर्ड से प्रोटेक्टेड हैं। ऐसे में हैकर्स बिना ज्यादा मेहनत के वाईफाई नेटवर्क को ब्रेक कर संवेदनशील डाटा को चोरी कर लेते हैं।
कैसे रहें सेफ:-अगर नेटवर्क सिक्योरिटी बहुत ज्यादा मजूबत होगी, तो फिर हैकर्स के लिए उसे क्रैक करना मुश्किल होता है। साथ ही, मजबूत और सिंगल यूज पासवर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए। पासवर्ड में पर्सनल, बिजनेस और ऑर्गेनाइजेशन से संबंधित चीजों को बिल्कुल भी शामिल नहीं करना चाहिए।
कीलॉगर्स अटैक;-यह मालवेयर का ही एक हिस्सा है। यह इंफेक्टेड अटैचमेंट के जरिए फैलता है। बिना अच्छे एंटीवायरस सॉफ्टवेयर की मदद से इसके बारे में पता लगाना बड़ा मुश्किल होता है। यह आपके फाइल सिस्टम में के अंदर तक चला जाता है और इंतजार करता है कि आप क्या टाइप कर रहे हैं। जैसे ही आप अपने कीबोर्ड पर टाइप करना शुरू करेंगे, कीलॉगर्स आपके हर कीस्ट्रोक कीजानकारी हैकर्स के पास भेजना शुरू कर देता है। इस तरह हैकर्स के पास वे सभी सूचनाएं होती हैं, जो उसे चाहिए होती हैं। कीलॉगर्स बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि यह आपकी गतिविधियों को उजागर भी कर सकता है।
कैसे रहें सेफ:-एंटीवायरस और एंटीमालवेयर सॉफ्टवेयर को नियमित तौर पर अपडेट करते रहें। जिस सोर्स से डाउनलोड कर रहे हैं, उसके प्रति सावधान रहें। इसके साथ स्क्रिपट ब्लॉकिंग टूल्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
शोल्डर सर्फिंग:-शोल्डर सर्फिंग एक आसान तरीका है, जिसके जरिए हैकर्स आसानी से इंफॉर्मेशन जुटा लेते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह इफेक्टिव भी है। जैसाकि नाम से ही पता चलता है, इसमें हैकर्स आपके शोल्डर (कंधे) की तरफ देखकर पासवर्ड औ दूसरी जानकारियां जुटा लेते हैं। इसका इस्तेमाल आमतौर पर एटीएम, क्रेडिट कार्ड मशीन और ऐसे डिवाइस के लिए किया जाता है, जिसमें पिन की जरूरत होती है। इससे बचने के लिए पासवर्ड सिक्योरिटी के तरीके को अपना सकते हैं।
ये भी तरीके अपनाएं जाते हैं
फिशिंग: इस तकनीक का इस्तेमाल हैकर यूजर्स की सभी पर्सनल जानकारियां हासिल करने के लिए करते हैं। इसमें यूजर्स से फेक ईमेल या फेक एप्स के जरिए उनकी पर्सनल डिटेल और पासवर्ड के बारे में पूछा जाता है। जैसे ही यूजर अपनी पर्सनल जानकारी देता है, वह हैकर्स के जाल में फंस जाता है।
ट्रोजन्स, वायरस: कई बार हैकर्स ऐसा प्रोग्राम बनाते हैं, जिनकी मदद से आपकी मशीन और उसके नेटवर्क को हैक करके आपकी सारी जानकारियां हासिल कर लेते हैं। इन्हीं प्रोग्राम्स की तकनीक को ट्रोजन्स और वायरस अटैक कहा जाता है।
पोर्ट स्कैन अटैक: इस तकनीक में सर्वर की कमजोरी ढूंढी जाती है। इसका इस्तेमाल उन जगहों पर ज्यादा होता है, जहां सिक्योरिटी को लेकर ज्यादा लापरवाही होती है।
रेनबो टेबल अटैक: यह एक तरह का ऑफलाइन पासवर्ड अटैक है। हैकर्स यूजर की लिस्ट और पासवर्ड तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन यह एनक्रिप्टेड होता है। एनक्रिप्टेड पासवर्ड ही हैश है, जो ओरिजनल दिखने वाले पासवर्ड से बिल्कुल अलग दिखता है। इसमें प्लेनटेक्सट लिस्ट को रन कर पासवर्ड चुरा लेते हैं।

श्योपुर। कुपोषण का गढ़ कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले का यह गांव छह साल पहले तक गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले बीपीएल कार्डधारियों का गांव था। 74 आदिवासी परिवारों के पास रोजगार का कोई साधन नहीं था। जिस दिन मजदूरी न मिलती, चूल्हा न जलता। जो भी थोड़ी बहुत जमीन और जेवर थे, गिरवी रखे हुए थे। गांव की सूरत अब बदल चुकी है। अब हर परिवार लखपति है और सरकार को बीपीएल कार्ड लौटाने जा रहा है।
महिलाओं को है गांव की तस्‍वीर बदलने का श्रेय;-मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के आदिवासी विकासखंड कराहल का दुबड़ी गांव इस बदलाव का श्रेय गांव की महिलाओं के स्वावलंबन को देता है। आदिवासियों ने गिरवी रखी जमीन और जेवर मुक्त करा लिए हैं। यह करिश्मा गांव की महिलाओं ने स्वसहायता समूहों से जुड़कर दिखाया। पूरे जिले में सिर्फ दुबड़ी गांव ही ऐसा है, जहां शतप्रतिशत महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) द्वारा गठित स्वसहायता समूहों की सदस्य हैं। समूहों से लोन लेकर महिलाओं ने खेती-बाड़ी, पशुपालन से लेकर लघु उद्योग शुरू किए। अब स्थिति यह है कि पूरा गांव विकास की राह पकड़ चुका है।
जीवन स्‍तर में आया बड़ा बदलाव:-जिन घरों में खाने के लिए अनाज जुटाना मुश्किल था, वहां जीवन स्तर सुधर चुका है। घरों में बाइक, टीवी, फ्रिज जैसे संसाधन मौजूद हैं। इस कहानी की सबसे अहम और प्रेरणाप्रद बात, जो ग्रामीण भारत के बदलाव का संकेत देती है, जो ग्राम्य विकास की राह प्रशस्त करती है, वह यह कि दुबड़ी गांव के सभी परिवार अब सरकार को अपना-अपना बीपीएल कार्ड लौटाने जा रहे हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को सरकार की ओर से दिया जाने वाला यह कार्ड खाद्य सुरक्षा योजना, स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अन्य जीवनोपयोगी सरकारी सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित करता है। कलेक्टर सौरभ कुमार को सूचना दे दी गई है, जो अब इस विशेष अवसर के लिए दिन निर्धारित करने में जुटे हुए हैं। श्योपुर में एनआरएलएम जिला प्रबंधक डॉ. एसके मुदगल के मुताबिक दुबड़ी गांव के आदिवासी परिवार अपने बीपीएल-राशनकार्ड लौटाने का मन बना चुके हैं। इसके लिए प्रशासन को सूचित कर दिया गया है।
बिजली को बनाया आय का जरिया;-सुकनी आदिवासी ने बजरंग स्वसहायता समूह की सदस्यता ली और 15 हजार रुपये का कर्ज लेकर सोलर सिस्टम लगाया। पूरा गांव बिजली विहीन था, इसलिए उसने 100 रुपये महीने में 40 घरों को एक-एक सीएफएल का कनेक्शन दिया।
गिरवी रखी जमीन छुड़ाई:-कालीबाई आदिवासी के पास 12 बीघा जमीन थी, जो 10 रुपये सैकड़ा के ब्याज पर गिरवी रखी थी। 11 साल से जो भी कमाते, साहूकार को दे देते। केवल ब्याज चुकता होता, मूल राशि जस की तस रहती। कालीबाई बैरागी समूह से 20 हजार का कर्ज लेकर साहूकार से जमीन मुक्त कराई।
गांव की सबसे उन्नत किसान बनीं:-बेस्सी बाई की 15 बीघा जमीन खाद-बीज के लिए भी पैसे न होने के कारण सालों से बंजर पड़ी थी। कई बार गांव से आटा मांगकर रोटियां बनाती थी। बेस्सी भी समूह से जुड़ी। 15 हजार रुपये का लोन लिया। कृषि विभाग ने खेत में बोर कराया। आज बेस्सी गांव की सबसे उन्नत किसान है। खेती में नए प्रयोग करती है। पूरे जिले में एक मात्र किसान है जो नेपीयर घास की खेती करती है, यह खास महानगरों को सप्लाई की जाती है।

नई दिल्‍ली। 'कल्पवृक्ष' का नाम आपने कहीं न कहीं जरूर सुना होगा। लेकिन मुमकिन है कि कभी देखा न हो। इसे देवलोक का वृक्ष माना जाता है। इसे कल्पद्रुप, कल्पतरु, सुरतरु देवतरु तथा कल्पलता जैसे नामों से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार समुद्रमंथन से प्राप्त 14 रत्नों में कल्पवृक्ष भी एक था। बाद में यह इंद्रदेव को दे दिया गया था और इंद्र ने इसकी स्थापना सुरकानन में कर दी थी। हिंदुओं का विश्वास है कि कल्पवृक्ष से जिस वस्तु की भी याचना की जाए, वही यह दे देता है। यही वजह है कि धरती पर इस वृक्ष को इच्‍छाओं की पूर्ति करने वाला वृक्ष माना जाता है।इसका नाश कल्पांत तक नहीं होता। 'तूबा' नाम से ऐसे ही एक पेड़ का वर्णन इस्लामी धार्मिक साहित्य में भी मिलता है जो सदा अदन (मुसलमानों के स्वर्ग का उपवन) में फूलता फलता रहता है। सिद्ध, नाथ और संत कल्पलता या कल्पवल्लरी संज्ञा 'उन्मनी' को देते हैं क्योंकि उनके मतानुसार सहजावस्था या कैवल्य की प्राप्ति के लिए उन्मनी ही एकमात्र साधन है जो न केवल सभी कामनाओं को पूरी करनेवाली है बल्कि स्वयं अविनश्वर भी है और जिसे मिल जाती हैं, उसे भी अविनश्वर बना देती है।
समुद्र मंथन से निकला वृक्ष:-पौराणिक धारणा है कि समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक कल्पवृक्ष को देवगण स्वर्ग ले गए थे और यह बाद मेंं इंद्र के नंदन वन की शोभा बना था। पांडवों ने अज्ञातवास के समय अपने तपोबल से इसे स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा था। अर्जुन ने अपने वाण से पाताल तक छिद्र कर इसे रोपित कर दिया था। देखने में कल्पवृक्ष काफी विशालकाय होता है। इसका तना काफी मोटा होता है। देखने में यह बरगद के वृक्ष के समान होता है। अगस्त माह में इसमें सफेद फूल आते हैं जो सूखने के उपरांत सुनहरे रंग के हो जाते हैं। इसके फूल कमल के फूल में मौजूद असंख्य कलियों जैसे होते हैं। इसका फल नारियल की तरह होता है जो वृक्ष की पतली टहनी के सहारे नीचे लटकता रहता है।
नहीं गिरते पत्ते फिर भी पतझड़ी वृक्ष:-पीपल की तरह कम पानी में ही यह वृक्ष फलता फूलता है। सदा बहार रहने वाले इस कल्पवृक्ष की पत्तियां कम हीं गिरती हैं। हालांकि इसके बावजूद इसको पतझड़ी वृक्ष कहा गया है। इसकी औसत जीवन अवधि दो हजार साल के आसपास मानी जाती है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार इसका दर्शन करने मात्र से ही जीवन से परेशानियों का नाश हो जाता है। इसको पहचानने वाले लोग कल्पवृक्ष का दर्शन करना अपना सौभाग्य समझते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष:-पुराणों में कल्पवृक्ष को स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष भी कहा गया है। इस वृक्ष में अपार सकारात्मक ऊर्जा होती है। ओलिएसी कुल के इस वृक्ष का वैज्ञानिक नाम ओलिया कस्पीडाटा है। यह यूरोप के फ्रांस व इटली में काफी पाया जाता है। इसके अलावा यह दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भी पाया जाता है। भारत में इसका वानस्पतिक नाम बंबोकेसी है। इसको फ्रांसीसी वैज्ञानिक माइकल अडनसन ने 1775 में अफ्रीका में सेनेगल में सर्वप्रथम देखा था, इसी आधार पर इसका नाम अडनसोनिया टेटा रखा गया। इसे बाओबाब भी कहते हैं। इसके पत्ते कुछ-कुछ आम के पत्तों की तरह होते हैं यह वृक्ष लगभग 70 फुट ऊंचा होता है और इसके तने का व्यास 35 फुट तक हो सकता है। अभी तक करीब 150 फीट तक इसके तने का घेरा नापा गया है। इस वृक्ष की औसत जीवन अवधि 2500-3000 साल है। कार्बन डेटिंग के जरिए सबसे पुराने फर्स्ट टाइमर की उम्र 6,000 साल आंकी गई है।
कहां पर है ये वृक्ष:-भारत में रांची, अल्मोड़ा, काशी, नर्मदा किनारे, कर्नाटक और यूपी आदि कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर ही यह वृक्ष पाया जाता है। पद्मपुराण के अनुसार परिजात ही कल्पवृक्ष है। यह वृक्ष उत्तरप्रदेश के बाराबंकी के बोरोलिया में आज भी विद्यमान है। कार्बन डेटिंग से वैज्ञानिकों ने इसकी उम्र 5,000 वर्ष से भी अधिक की बताई है। इसके अलावा ग्वालियर के पास कोलारस में भी एक कल्पवृक्ष है जिसकी आयु 2,000 वर्ष से अधिक की बताई जाती है। ऐसा ही एक वृक्ष राजस्थान में अजमेर के पास मांगलियावास में है और दूसरा पुट्टपर्थी के सत्य साईं बाबा के आश्रम में मौजूद है। इसके अलावा इष्टिकापुरी यानी इटावा में भी इसके दो पेड़ हैं।
इटावा समेत कई जगहों पर है ये वृक्ष:-इटावा के अलावा बाराबंकी के रामनगर रेंज व ललितपुर के एसएसपी आवास में भी कल्पवृक्ष मौजूद है। शहर के प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी के परिसर में पहला कल्पवृक्ष प्रवेश द्वार पर ही है। जबकि दूसरा डीएफओ के आवास में मौजूद है। आजादी से पहले इन वृक्षों की स्थापना यहां पर की गई थी। आसपास के रहने वाले लोग यहां पर नियमित तौर पर पूजा पाठ करने के लिए आते हैं और मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। समुद्र मंथन से निकला था कल्पवृक्ष वन विभाग परिसर में विभाग द्वारा जो शिला पट्टिका लगाई गई है उसमें कल्पवृक्ष के महत्व का उल्लेख किया गया है।
औषध गुणों से भरपूर:-आपको बता दें कि औषध गुणों के कारण भी इस वृक्ष की पूजा की जाती है। इसमें संतरे से 6 गुना ज्यादा विटामिन 'सी' होता है। गाय के दूध से दोगुना कैल्शियम होता है और इसके अलावा सभी तरह के विटामिन पाए जाते हैं।इसकी पत्ती को धो-धाकर सूखी या पानी में उबालकर खाया जा सकता है। पेड़ की छाल, फल और फूल का उपयोग औषधि तैयार करने के लिए किया जाता है। इस वृक्ष की 3 से 5 पत्तियों का सेवन करने से हमारे दैनिक पोषण की जरूरत पूरी हो जाती है। शरीर को जितने भी तरह के सप्लीमेंट की जरूरत होती है इसकी 5 पत्तियों से उसकी पूर्ति हो जाती है। इसकी पत्तियां उम्र बढ़ाने में सहायक होती हैं, क्योंकि इसके पत्ते एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं। यह कब्ज और एसिडिटी में सबसे कारगर है। इसके पत्तों में एलर्जी, दमा, मलेरिया को समाप्त करने की शक्ति है। गुर्दे के रोगियों के लिए भी इसकी पत्तियों व फूलों का रस लाभदायक सिद्ध हुआ है।
दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद:-इसके बीजों का तेल हृदय रोगियों के लिए लाभकारी होता है। इसके तेल में एचडीएल (हाईडेंसिटी कोलेस्ट्रॉल) होता है। इसके फलों में भरपूर रेशा (फाइबर) होता है। मानव जीवन के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व इसमें मौजूद रहते हैं। पुष्टिकर तत्वों से भरपूर इसकी पत्तियों से शरबत बनाया जाता है और इसके फल से मिठाइयां भी बनाई जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार हमारे शरीर में आवश्यक 8 अमीनो एसिड में से 6 इस वृक्ष में पाए जाते हैं।
पर्यावरण के लिए लाभदायक:-आपको यहां पर ये भी बता दें कि एक तरफ जहां ये वृक्ष्‍ा अपने औषधीय गुणों की वजह से जाना जाता है वहीं ये पर्यावरण के लिहाज से भी काफी लाभदायक है। यह वृक्ष जहां भी बहुतायत में पाया जाता है, वहां सूखा नहीं पड़ता। यह रोगाणुओं का डटकर मुकाबला करता है। इस वृक्ष की खासियत यह है कि कीट-पतंगों को यह अपने पास फटकने नहीं देता और दूर-दूर तक वायु के प्रदूषण को समाप्त कर देता है। इस मामले में इसमें तुलसी जैसे गुण हैं। पानी के भंडारण के लिए इसे काम में लिया जा सकता है, क्योंकि यह अंदर से (वयस्क पेड़) खोखला हो जाता है, लेकिन मजबूत रहता है जिसमें 1 लाख लीटर से ज्यादा पानी की स्टोरिंग केपेसिटी होती है। इसकी छाल से रंगरेज की रंजक (डाई) भी बनाई जा सकती है। चीजों को सोलिड बनाने के लिए भी इस वृक्ष का इस्तेमाल किया जाता है।

नई दिल्ली। देश का शहरी क्षेत्र योजनाकारों की भारी किल्लत से गुजर रहा है। इसके चलते शहरी क्षेत्रों का विकास बेतरतीब और अवैज्ञानिक तरीके से हो रहा है। लिहाजा समूचा शहरी क्षेत्र गंभीर संकट के दौर में है, जिसके चलते शहरी जन जीवन पर विपरीत असर पड़ रहा है। शहरी योजनाकारों की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर से मुश्किलें बढ़ी हैं। देश में तकरीबन आठ हजार से अधिक छोटे-बड़े शहर और कस्बे हैं, लेकिन शहरी योजनाकारों (टाउन प्लानर) की संख्या साढ़े पांच हजार तक ही सीमित है। बीस फीसद निकायों में तो टाउन प्लानर हैं ही नहीं।केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से संबंधित स्थायी संसदीय समिति की पिछली बैठक में शहरी योजनाकारों की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। शहरी विकास सचिव की ओर से समिति को लिखित जवाब भेजा गया, जिसके मुताबिक देशभर में कुल 5500 योजनाकार (टाउन प्लानर) हैं। उन्होंने बताया कि योजनाकारों की उपलब्धता व इनकी संख्या बढ़ाने को लेकर राज्यों से बातचीत चल रही है।शहरी नियोजन की सख्त जरूरत के बावजूद संतोषजनक बंदोबस्त न होने की वजह से ये शहरी व कस्बाई क्षेत्र बेतरतीब तरीके से झुग्गी झोपडि़यों में तब्दील हो रहे हैं। यहां जीवन जीने की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के इंतजाम तक नहीं हैं।पश्चिमी और अन्य एशियाई देशों में भी भारी बारिश होने से बाढ़ आती है। शहरी जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित जरूरत होता है, लेकिन बेहतर शहरी नियोजन से मुश्किलें कम होती है। भारत में शहरी विकास में योजनाकारों की कमी हमारी मुश्किलों व चुनौतियों को और बढ़ा देती हैं। बारिश के पानी की निकासी तो दूर देश के ज्यादातर शहरों में सीवर प्रणाली ही नहीं है।शहरी नियोजन में राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते योजनाओं पर अमल नहीं हो पाता है। हाल के वर्षो में देश में चक्रवात, भारी बारिश और बेमौसम बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के झोंके ने शहरी क्षेत्रों में जबरदस्त नुकसान किया है।

नई दिल्ली। हम आपको उन 5 बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो बताते हैं कि घर में रखे फ्रिज को बदलने का समय आ गया है।
पानी की लीकेज:-अगर आपके फ्रिज से लगातार पानी गिर रहा है और इसके रबर कोटिंग पर पानी जम जा रहा है, तो इसका मतलब है कि अब फ्रिज बदलने का समय आ गया है।
बर्फ का जमना:-फ्रिज का काम इसके अंदर के सामान को ठंडा करना है न कि खुद बर्फ का गोला बन जाना है। अगर आपके फ्रिज के अंदर डी फ्रास्ट करने के बाद भी लगातार बर्फ जम जा रहा है या आपके फ्रिजर में हद ये ज्यादा बर्फ का जमाव हो जा रहा है तो इसका मतलब आपको अपना फ्रिज बदल देना चाहिए
मोटर का लगातार चलते रहना:-जब भी हम अपने फ्रिज को खोलते हैं तो इसमें लगा मोटर चलने लगता है। इसके पीछे का कारण सीधा है कि मोटर फ्रिज के अंदर का तापमान सामान्य बनाने के लिए चलने लगता है। अगर फ्रिज का डोर बंद रहने के बाद भी लंबे समय तक मोटर चलता रहता है, तो इसका मतलब यह है कि मोटर आपके फ्रिज को ठंडा करने की लगातार कोशिश कर रहा है। मोटर का लगातार चलना बताता है कि अब फ्रिज को बदलने का समय आ गया है।
बिजली का बिल:-बिजली की खपत के अनुसाल हर: फ्रिज को रेटिंग दी जाती है। अगर किसी फ्रिज को 5 स्टार मिला है तो इसका मतलब यह कम बिजली की खपत करता है, वहीं 1स्टार रेटिंग वाला फ्रिज ज्यादा बिजली की खपत करता है। 5 स्टार रेटिंग वाला फ्रिज महंगा होता है, जबकि 1 स्टार रेंटिग वाला फ्रिज सस्ता। ऐसे में अगर आपके घर में पुराना फ्रिज है तो वो ज्यादा बिजली की खपत करेगा, लेकिन अगर आपका फ्रिज पिछले समय की तुलना में ज्यादा बिजली की खपत कर रहा है और यह लगातार बढ़ते ही जा रहा है, तो इसका मतलब है कि आपको अपना फ्रिज अब बदल देना चाहिए।
फ्रिज का गर्म होना;-फ्रिज के पीछा का हिस्सा हमेशा गर्म रहता है, जो की एक सामान्य बात है। फ्रिज के पीछे लगे क्वाइल इसे ज्यादा गर्म होने से बचाते हैं। ऐसे में अगर आपका फ्रिज ज्यादा गर्म हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपको अपना फ्रिज बदल देना चाहिए। किसी भी टेक्निशियन से अपने फ्रिज को चेक कराएं कि इसका गर्म होना क्वाइल के कारण है या फिर कोई दूसरी वजह है।

 

इंदौर। इंटरनेशनल चाइल्ड पोर्नोग्राफी वाट्सएप ग्रुप पर इंटरपोल भी नजर रखे हुए है। इंटरपोल को जानकारी मिली कि पुर्तगाल से संचालित एक ग्रुप का सदस्य धार इलाके में रहता है। इस ग्रुप की जांच ब्राजील पुलिस भी कर रही है। इंटरपोल ने जब साइबर सेल को सूचना दी तो टीम ने छापा मारकर आरोपित को धार के गोगांव से गिरफ्तार कर लिया।साइबर सेल एसपी जितेंद्र सिंह के अनुसार, ऑक्शन नामक इंटरनेशनल वाट्सएप ग्रुप बना हुआ है। इस ग्रुप में 18 साल से कम उम्र के लड़का-लड़की के अश्लील वीडियो और फोटो शेयर किए जाते हैं। इस ग्रुप की ब्राजील पुलिस भी जांच कर रही है। ग्रुप के एक सदस्य की लोकेशन धार जिले की है। मोबाइल नंबर रेवाबाई निवासी गोगांवा (जिला-धार) के नाम पर है। इसे विनोद पिता मोल्या बघेल निवासी गोगांवा चला रहा है।टीम जब विनोद को गिरफ्तार करने उसके गांव पहुंची तो उसने मोबाइल से वाट्सएप ग्रुप डिलीट करने की कोशिश की। हालांकि, टीम ने उसे कामयाब नहीं होने दिया। मोबाइल जब्त किया और उसे हथकड़ी लगाकर गांव से शहर ले आए। पूछताछ में उसने बताया कि एक लिंक के माध्यम से वह इस ग्रुप का सदस्य बना था।
आप भी रखें सावधानी:-एसपी का कहना है कि देश-विदेश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी के वाट्सएप ग्रुप बने हुए हैं, जो लिंक शेयर करके एक-दूसरे को भेजते हैं। इसी लिंक के माध्यम से लोग ग्रुप के सदस्य बनते हैं। गलती से भी अगर आप ग्रुप में जुड़ जाएं तो तत्काल एक्जिट हो जाएं। अन्यथा जाने-अनजाने आप भी अपराधी बन सकते हैं।

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