Editor

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नई दिल्ली(hh)-असहिष्णुता संबंधी बयान पर विवादों में घिरे बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के साथ स्नैपडील भी अपना करार खत्म करने जा रही है। आमिर इस ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने "अतुल्य भारत" अभियान के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर भी अभिनेता की सेवाएं खत्म कर दी थीं।

मीडिया की खबरों के अनुसार, आमिर का स्नैपडील के साथ करार इसी महीने खत्म हो रहा है। कंपनी उनके साथ करार रिन्यू नहीं करेगी। पहले यह करार एक साल के लिए बढ़ाया जाने वाला था लेकिन असहिष्णुता पर बयान के बाद आमिर के खिलाफ विरोध को देखते हुए कंपनी ने करार खत्म करने का फैसला किया है। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

विज्ञापन बंद किया था: विवाद के चलते कई लोगों ने स्नैपडील के एप को भी डाउनगे्रड कर दिया था। बाद में कंपनी ने आमिर का दिल की डील वाला विज्ञापन भी दिखाना बंद कर दिया था।

ये विवाद है : आमिर ने एक कार्यक्रम में कहा था कि पिछले 6-8 महीने से असुरक्षा और डर की भावना समाज में बढ़ी है। यहां तक, मेरा परिवार भी ऐसा ही महसूस कर रहा है। मैं और मेरी पत्नी किरण ने पूरी जिंदगी भारत में जी है, लेकिन पहली बार उन्होंने मुझसे देश छोड़ने की बात कही। उन्हें अपने बच्चे के लिए डर लगता है। अपने बयान पर बढ़े विवाद के बाद में आमिर ने कहा था कि वह यहीं पैदा हुए हैं और यहीं मरेंगे। देश छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।

नई दिल्ली, बुलंदशहर(hh)-उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जिलाधिकारी के साथ जबरदस्ती सेल्फी लेने वाले युवक को जेल भेज दिया गया है। 

बिना अनुमति सेल्फी लेना उचित नहीं

बिना अनुमति किसी की भी सेल्फी लेना अनुचित है। खासतौर पर महिलाओं के साथ बगैर अनुमति सेल्फी लेना कानूनी अपराध है। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। समाज में बहन-बेटियों की अस्मिता पर कोई आंच न आए। गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में महिला और सामाजिक संगठन, प्रबुद्धवर्ग, वकील और शिक्षाविदें के संवाद में इस तरह के विचार वक्ताओं ने रखे। संवाद में वक्ताओं ने कहा कि मोबाइल से सेल्फी लेने का चलन कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। कुछ मनचले लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। इसलिए इस पर सभी को जागरूक रहना चाहिए।

डीएम बी.चंद्रकला ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कार्यालय में कार्य में व्यस्त होने के दौरान एक युवक ने उनकी सेल्फी लेने का भी प्रयास किया था। रोकने पर बाहर जाकर वह युवक सुरक्षाकर्मियों से भी उलझने लगा। यह महिला सुरक्षा और सम्मान के खिलाफ है।

एडीएम प्रशासन विशाल सिंह ने संवाद का संचालन करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान की रक्षा करना सभी का दायित्व है। इस दौरान सीडीओ चुनकूराम पटेल, प्रधानाचार्य डा.अनीता भारद्वाज, प्राचार्य डा.अंशु बंसल, अधिवक्ता इंदिरा गोयल, छवि गर्ग, रेणु चौधरी, महिला समिति की पदाधिकारी अनीता त्यागी, बार एसोसिएशन के महासचिव सुमन राघव, कु.रचना यादव, छत्रपाल सिंह, प्रियंका यादव, डा.ममता आदि मौजूद रहे। उधर, दूसरी ओर देर शाम महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए कलक्ट्रेट से कालाआम चौराहे पर कैंडल मार्च निकाला गया।

 

नई दिल्ली(hh)- टीम इंडिया का टी-20 वर्ल्ड कप का सफर 15 मार्च को न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच के साथ शुरू होगा। आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी-20 का आयोजन इस बार भारत में हो रहा है और दुनिया जानती है कि सरजमीं पर हम कैसी क्रिकेट खेलते हैं। 2011 का इतिहास दोहराने का सपना हर भारतीय फैन की आंखों में नजर आने लगा है।

वर्ल्ड कप खिताब जिताने का जिम्मा जिन 15 खिलाड़ियों के कंधों पर है उनके नाम का ऐलान हो चुका है। अब हम आपको बताते हैं 5 ऐसे बड़े कारण कि हम 2007 के बाद एक बार फिर आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी-20 की ट्रॉफी उठाएंगे।

1- टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का परफेक्ट कॉकटेलः टी-20 वर्ल्ड कप के लिए जिस टीम का चयन किया गया है उसमें युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन नजर आ रहा है। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में टीम में जोश भी नजर आ रहा है और होश भी। टीम में पवन नेगी नया चेहरा शामिल हुए हैं। जबकि हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह को भी ज्यादा अनुभव नहीं है लेकिन दोनों ने अपनी उपयोगिता साबित की है। युवराज सिंह, हरभजन सिंह और आशीष नेहरा के साथ टीम में अनुभवी खिलाड़ियों की भी वापसी हो चुकी है।

2- फिर चमकी है धौनी की किस्मतः धौनी के लिए मिडास टच का इस्तेमाल हमेशा से होता आया है लेकिन पिछले कुछ समय में कैप्टन कूल की कप्तानी में टीम इंडिया को लगातार हार मिली थी। ऐसे में उनकी कप्तानी पर आलोचकों की तलवार भी चलने लगी थी। कुछ क्रिकेट पंडितों ने तो धौनी से कप्तानी छोड़ने की बात भी कही। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन टी-20 मैचों की सीरीज में हमें फिर से पुराने वाले कैप्टन कूल की झलक नजर आई। धौनी की कप्तानी में हम 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 में वर्ल्ड कप जीत ही चुके हैं और अब बारी है 2016 टी-20 वर्ल्ड कप की। धौनी का फील्ड सेटेलमेंट और फिर टीम इंडिया की चुस्त फील्डिंग भी धौनी की कप्तानी को बल देती है।

3- होम कंडीशनः टी-20 वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत के हाथों में है ऐसे में टीम को फैन्स का पूरा सपोर्ट मिलेगा। होम कंडीशन में खेलना किसी भी टीम के लिए प्लस प्वॉइंट होता है। भारत को सरजमीं पर हराना किसी भी विरोधी टीम के लिए आसान नहीं होगा। अपेक्षाओं के दबाव को फैन्स अपने सपोर्ट से कम भी करेंगे। धौनी पहले ही कह चुके हैं तैयारी कर लो... तो फिर देर किस बात की आप भी तैयारी करके बैठिए हर जीत का जश्न मनाने की।

4- अश्विन और जडेजा की उंगलियों का जादूः आर अश्विन और रवींद्र जडेजा की जोड़ी किसी भी विरोधी टीम के बैटिंग ऑर्डर को ध्वस्त करने का माद्दा रखती है। गेंदबाजी लंबे समय से टीम इंडिया का सिरदर्द बनी हुई थी लेकिन अश्विन और जडेजा ने पिछले कुछ समय में बहुत प्रभावित किया है। अश्विन तो इन दिनों जबर्दस्त फॉर्म में हैं। जसप्रीत बुमराह तेज गेंदबाजी आक्रमण में जान फूंकते नजर आने लगे हैं। आशीष नेहरा के साथ मोहम्मद शमी की वापसी भी तेज गेंदबाजी को धार देती है।

5- बल्लेबाजों की 'बल्ले-बल्ले': टॉप ऑर्डर में शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली... मिडिल ऑर्डर में अजिंक्य रहाणे, सुरेश रैना, धौनी, युवराज सिंह, रवींद्र जडेजा और फिर लोअर ऑर्डर में हार्दिक पांड्या, आर अश्विन मौजूद रहेंगे। रोहित, धवन और कोहली तो खतरनाक फॉर्म में चल रहे हैं। धवन की फॉर्म की चिंता ऑस्ट्रेलिया दौरे के साथ खत्म हो गई। रही बात रैना, धौनी और युवी की तो ये तीनों ही बड़े मैच के खिलाड़ी हैं। तीनों ही शानदार फिनिशर हैं और किसी भी समय विरोधी टीम के मुंह से जीत छीन सकते हैं। ऐसे बल्लेबाजी ऑर्डर के साथ हम वर्ल्ड कप जीतने का सपना तो देख ही सकते हैं।

 

 

डिब्रूगढ़(hh)-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बाधा के लिए गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि वे लोकसभा चुनाव में हार का बदला ले रहे हैं। विपक्ष में ऐसे नेता हैं जो संसद को चलने देना चाहते हैं जबकि वे मेरा विरोध करते हैं, लेकिन एक परिवार राज्यसभा को न चलने देने पर अड़ा है।

वहीं डिब्रूगढ़ में प्रधानमंत्री ने और रोजगार सजन के लिए प्राकतिक संसाधनों के मूल्यवर्धन और सहयोगी इकाइयां बनाने का आह्वान किया है ताकि आयात घटे और रोजगार के मौके पैदा हों। मोदी ने यहां 10,000 करोड़ रपए के पेट्रोरसायान संयंत्र का उद्घाटन किया जो कच्चे तेल की रिफाइनरी में प्लास्टिक के लिए कच्चा माल और वैक्स बनाने वाली इकाई बनाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता पूर्वोत्तर का विकास करना है, क्योंकि वह देश के सर्वोन्मुखी विकास में भरोसा करती है। उन्होंने राज्य के युवाओं को इन दो परियोजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि वे छोटी फैक्ट्रियां स्थापित करें जिससे देश के लिए मूल्यवर्धन हो और संपत्ति सृजन हो।

मोदी ने कहा, आज डिब्रूगढ़ में दो प्रमुख परियोजनाओं का उदघाटन किया जा रहा है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे प्राकतिक संसाधनों में मूल्यवर्धन होगा और युवाओं के लिए रोजगार के कई मौके पैदा होंगे। ब्रहमपुत्र क्रैकर एंड पॉलीमर लिमिटेड की परिकल्पना असम शांति प्रस्ताव के अंग के तौर पर की गई थी जिस पर समझौता तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में हुआ था और इसकी बुनियाद 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रखी थी।

मोदी ने परियोजनाओं की परिकल्पना में देरी और फिर इसकी घोषणा एवं इसकी बुनियाद रखने तथा इसे पूरा करने में विलंब पर अफसोस जताते हुए कहा कि इससे लागत में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, यदि परियोजना की स्थापना 25 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री कर देते तो मुझे इस परियोजना का उद्घाटन करने का मौका नहीं मिला होता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अटकी हुई कई परियोजनाओं को मुक्त किया है और वह प्रगति की निगरानी और अड़चनें दूर करने के लिए हर महीने राज्यों के मुख्य सचिवों से व्यक्तिगत तौर पर बातचीत कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि इन परियोजनाओं को देश को समर्पित करने से देश भर में आनंद और असम में सर्वानंद होगा।

ब्रहमपुत्र क्रैकर एंड पॉलीमर लिमिटेड पेट्रोरसायन परिसर की स्थापना 10,000 करोड़ रपए की लागत से की गई हैं जिसकी सालाना पालीमर उत्पादन क्षमता 2.80 लाख टन है। गेल इसकी प्रमुख प्रवर्तक कंपनी है जिसके पास 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि असम सरकार, ऑयल इंडिया और नुमालीगढ़ रिफाइनरी की कंपनी में 10-10 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

इस अलावा प्रधानमंत्री ने असम में नुमालीगढ़ रिफाइनरी की वैक्स उत्पादन इकाई का भी उदघाटन किया जिसकी सालाना क्षमता 50,000 टन है। मोदी ने कहा, हमारी सरकार सभी अटकी परियोजनाओं को पूरा करने और लोगों के सपने पूरा करने का प्रयास कर रही है।

 

 

*201 मरीज मोतियाबिंद के पाए गए

*1451 मरीजों को वितरित किए गए चश्में 

*2016 मरीजों की हुई रजिस्ट्रेशन

न्यूयॉर्क (हम हिन्दुस्तानी)-समाजसेवा एवं धार्मिक कार्यों में अग्रणी श्री वैष्णो सेवा समिति (यू.एस.ए.) के संरक्षण में मरवाड़ी युवा मंच भदरा की ओर से महाराजा अग्रसेन भवन (नजदीक) चाराम्पा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन भद्राक (उड़ीसा) में विशाल आंखों के जांच का कैम्प आयोजित श्री वैष्णो सेवा समिति की ओर से 18 से 20 जनवरी तक किया गया। इस 3 दिवसीय आंखों की जांच के कैम्प में 2016 मरीजों की रजिस्ट्रेशन की गई तथा जिनमें से 1451 मरीजों का चश्में वितरित किए गए जबकि 201 मरीजों की आंखों में मोतियाबिंद होने की पुष्टि हुई। जिनके आप्रेशन श्री वैष्णो सेवा समिति (यू.एस.ए.) के संरक्षण में मरवाड़ी युवा मंच भदरा द्वारा आप्रेशन कैम्प आयोजित करके विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा किए जाएंगे। इस  नि:शुल्क कैम्प की विशेष बात यह रही कि मरीजों के लिए खाने का भी विशेष रूप से प्रबंध किया गया था। श्री वैष्णो सेवा समिति की ओर निधि बलदेवा ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री वैष्णो सेवा समिति की ओर से भविष्य में भी इस तरह के कैम्प आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा समिति की ओर से धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर योगदान डाला जाता रहा है और इन कार्यों को भविष्य भी जारी रखा जाएगा। 

 

-जार्ज अब्राहिम

हमारी भावनाएं दोयम दर्जे की हो गई हैं। हमारा प्रेम बनावटी है। हमारी मान्यताएं झूठी हैं। हमारी मौलिकता वैध है सिर्फ कृत्रिम कला के जरिए। एक वोट तक, एक आदमी महज एक आंकड़ा बन गया है। ये है रोहित वेमुला के लिखे सुसाइड नोट का कुछ अंश। रोहित न कहते-कहते बहुत कुछ कह गया। रोहित जिंदा रहते हुए जो पत्र में लिख गया शायद मरने के बाद वह सच हो रहा है।  हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की कथित आत्महत्या की घटना ने देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया। इस छात्र की आत्महत्या को राजनीतिक रंग देते हुए विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी संवेदना भी व्यक्त कर दी। कहा जा रहा है कि इस विश्वविद्यालय में अब तक नौ दलित छात्रों द्वारा अपना जीवन समाप्त करने की घटनायें हो चुकी हैं। यह कैसी विडंबना है कि राजस्थान के कोटा जिले के छात्रों के आत्महत्या का गढ़ बनने और पंजाब तथा विदर्भ सहित विभिन्न क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं पर राजनीतिक दल और इनके नेता चुप्पी लगाये हुए हैं। पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में केन्द्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और विश्वविद्यालय के कुलपति सहित चार व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। केन्द्र सरकार ने सारे मामले की न्यायिक जांच का आदेश भी दे दिया है। रोहित की आत्महत्या को हालांकि उसकी जाति से जोडऩे का प्रयास किया गया है। हालांकि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वास्तव में वह किस वर्ग का सदस्य था क्योंकि इस मुद्दे पर निरंतर परस्पर विरोधी खबरें सामने आ रही हैं। इस घटना को राजनीतिक रंग दिया जाना चिंता की बात है। वैसे तो किसी भी परिवार के सदस्य द्वारा आत्महत्या करना या असामायिक मृत्यु होना बहुत ही पीड़ादायक है लेकिन राहुल वेमुला की आत्महत्या की घटना को राष्ट्रीय शर्म बताने वाले नेताओं का कोटा जिले के छात्रों की आत्महत्या का गढ़ बनने और सूखे की वजह से फसल बर्बाद होने और कर्ज से परेशान किसानों की आत्महत्या की घटनाओं के प्रति दृष्टिकोण चिंताजनक है।

रोहित वेमुला की आत्महत्या को नया मोड़ देने का जो नया तरीका हमारे नेताओं ने निकाला वह सचमुच ही हैरानीजनक था। हमारे नेताओं के इस घटिया तरीके को पूरी दुनिया ने देखा। आलम यह था कि उसकी जाति को लेकर सवाल उठाने लगे, वह किस जाति का था? दलित था भी या नहीं? अगर दलित था तो उसने दाखिला दलित कोटे से क्यों नहीं लिया? रोहित की मौत के बाद दलित वर्ग को लेकर सब गंभीर दिखाई दे रहे हैं। 'गंभीर' से आप समझ गए होंगे कि मैं क्या कह रहा हूं। ऐसे व्यवहार किया जा रहा है जैसे दलित शब्द कहीं ऊपर से टपक गया है और जबरन हमारे ऊपर थोप दिया गया है लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। 

समाज के इस घटियाली आंसु के पीछे कहीं न कहीं घटिया मानसिकता छिपी हुई है। यह वही समाज है दलित को अपने समाज का हिस्सा नहीं मानता है। दलित के आंसू तो बहाते हैं लेकिन उसे भी रोने के लिए मजबूत कर देते हैं। हमारे राजनेता दलित के दर्द को समझते तो हैं लेकिन इस समझ और नासमझी के बीच एक सोची-समझी वोट बैंक की राजनीति छिपी होती है। ''रोहित ने अपने पत्र में यही लिखा है कि उसका जन्म एक घातक हादसा था, वह अपने बचपन के अकेलपन से कभी बाहर नहीं निकल सका। अपने छोटेपन से निकल नहीं सका। इसका अहसास तो इसी समाज ने ही दिया है? अगर यह अहसास नहीं होता तो शायद रोहित आज जिन्दा होता।''

दादरी प्रकरण की तरह ही रोहित के मामले में भी पीडि़त परिवारों को समुचित मुआवजा और अन्य सुविधाएं देने की सरकारों ने घोषणा भी की है। यदि सरकार ने किसानों को भी इसी अनुपात में मुआवजा देने के लिए कोई नीति तैयार की होती तो शायद आज देश में इतनी बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या नहीं करते। खबरों के अनुसार बड़े औद्योगिक घरानों पर बकाया करोड़ों रुपए के कर्ज माफ किए जा चुके हैं या फिर उन्हें बट्टे खाते में डाल दिया गया है। यदि इसी कर्ज की राशि में से दस से बीस फीसदी भी किसानों की समस्याओं पर खर्च करने की दिशा में कदम उठाए गए होते तो आज किसानों को इस दौर से नहीं गुजरना पड़ता। एक अनुमान के अनुसार हमारे देश में हर साल एक लाख से अधिक व्यक्ति विभिन्न कारणों से आत्महत्या करते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार पिछले एक दशक में भारत में आत्महत्या के मामलों में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आत्महत्या करने वालों में दक्षिण भारत के लोगों की संख्या अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत में 5650 किसानों ने आत्महत्या की। आत्महत्या करने वाले किसानों में विदर्भ के किसानों की संख्या कहीं अधिक है और इसकी वजह फसलों का बर्बाद होना है।

रोहित की मौत के बाद राजनेताओं को एक मौका मिल गया। हमेशा की तरह एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक घृणा की राजनीति सामने आ रही है। रोहित ने तो अपने पत्र में यही सब लिखा है, कैसे हम सब बनावटी बन गए हैं, कैसे हमारी भावनाएं दोयम दर्जे की हो गई हैं। वोट के लिए क्या-क्या नहीं करना चाहते हैं। रोहित के नाम पर कैसे राजनेता एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं। एक तरह तो प्रधानमंत्री भी रोहित की आत्महत्या लेकर काफी चिंतित नजर आते हैं तो दूसरी तरफ स्मृति ईरानी गलत तथ्य पेश करते हुए अपना पल्ला झाड़ लेती हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हैदराबाद तो पहुंच जाते हैं लेकिन वहां भी उन्हें नरेंद्र मोदी ही दिखाई देते हैं। बोलते-बोलते नरेंद्र मोदी पर हमला कर बैठते हैं। दिल्ली की राजनीति को हैदराबाद तक पहुंचा देते हैं।

जरा सोचिए उन राजनेताओं के बारे में जो अपने आपको दलित समाज का ठेकेदार मानते हैं। चुनाव के दौरान अपने समाज के सामने एक ऐसे रूप पेश होते हैं जैसे समाज उन के लिए नहीं बल्कि वह दलित समाज के लिए बने हैं। लेकिन कितने दलित नेता हैं जो हैदराबाद यूनिवॢसटी पहुंचे हैं। ज्यादातर वही नेता पहुंचे होंगे जो भाजपा के विरोधी नेता हैं। लोकसभा में भाजपा के कई दलित सांसद हैं। क्या आपने देखा है इन सांसदों को हैदराबाद पहुंचते हुए या खुलकर इस मुद्दे पर बात करते हुए।

रोहित की आत्महत्या के बाद छात्र राजनीति का असली चेहरा भी सामने आ रहा है। मुम्बई से लेकर दिल्ली तक छात्र संगठन प्रोटैस्ट कर रहे हैं। लेकिन सच यह है कि छात्र संगठन रोहित के नाम पर अपनी राजनीति को चमकाने में लगे हुए हैं। रोहित के मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दफ्तर पर हमला हो जाता है, इस हमले को राजनैतिक रूप भी दिया जाता है। लेकिन इस हमले का जिम्मेदारी कोई नहीं लेता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के सामने बैठे छात्रनेता अपने हाथ में रोहित की तस्वीर तो लेकर बैठे हैं लेकिन इस तस्वीर के नीचे अपने संगठन का नाम लिखना नहीं भूले। प्रोटैस्ट के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारे दूर-दूर तक सुनाई दे रहे हैं। इस छात्र राजनीति की बात तो रोहित ने ही की थी। कैसे छात्र-राजनीति यूनिवर्सिटी के माहौल को खराब कर रही है। जो छात्र नेता जब रोहित जिन्दा था उसके साथ खड़े नहीं हुए आज मरने के बाद उसके नाम पर राजनीति कर रहे हैं।

रोहित इस दुनिया को समझ नहीं पाया, प्यार को समझ नहीं पाया। लेकिन क्या हम सब रोहित को समझ पाए उसके खत में लिखे हुए दर्द को समझ पाए। मुझे नहीं लगता अगर समझ गए होते तो नासमझ की तरह बात करते, रोहित को लेकर कम से कम राजनीति नहीं करते। हमारे नेताओं को भी इस बात को अब भली-भांति समझ लेना चाहिए अन्यथा उन्हें भी भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जब कोई भी मामला धारणा के अनंत आकाश में घूमने लगे तब थोड़ा रुक जाना चाहिए। रोहित वेमुला की आत्महत्या से जो सवाल उठे हैं और जो भी परिस्थितियां रही हैं, सब वहां से काफी आगे निकल चुके हैं। कोई मंत्री के पुराने रिकार्ड तक जा पहुंचा है तो कोई दूसरी घटनाओं में इस घटना के सूत्र ढूंढने लगा है। हो सकता है कि बातें सही भी हैं लेकिन इस मोड़ पर बेहतर यही है कि तथ्यों की बात की जाए। तथ्यों का पता लगाया जाए और उसे ही सामने लाया जाए। 

 

*लेखक पूर्व चीफ टैक्नोलॉजी ऑफिसर एवं इंडियन नैशनलओवरसीज कांग्रेस (यू.एस.ए. के चेयरमैन हैं)

 

Nandita Pandey (Astro-Vastu-Tarot Consultant)

Mob. : +91-93127-11293, E-mail : nandita.pandey@gmail.com

 

ARIES : (22nd March- 21st April)

Matters of heart shall be pleasant and romantically inclined the whole week through. Planetary position favours you in your love life. Financial setbacks are high and one needs to be careful about any documentations and communications one makes in this front. Your family will be a huge support system for you the whole week through. Professionally new projects shall be favourable and bring in desired growth. Travels are best avoided in this phase of your life. The week ends on a positive note. Legal matters tune in your favour as the week progresses.   LUCKY DATES:  7,8,11,13.

TAURUS (22nd April – 21st May)

Professionally there are positive reflections and creative ventures shall bring in excellent gains. Your PR activities and charming personality also eases out a lot of blockages in your life. Subtle improvements in matters of heart are indicated as the week progresses for you. Financially you will undergo few setbacks during this week and this might be more due to sudden reckless decisions in life. Spending some quiet qualitative time and meditating for a while shall be extremely rejuvenating for the mind, body and soul. Home bound journeys shall be favourable and enjoyable. A woman helps you in your endeavours as the week comes to its end. LUCKY DATES: 8,10,11,13.

GEMINI (22nd May- 21st June)

You might be a little confused initially in any changes that you want in matters of heart. The Tarot however guides you to take charge of your love life and take courageous decisions if any in this front. This will only help in strengthening the bonds of love eventually. Professionally, you shall ride high on victorious chariot and will bring in growth and accolades in life. Financial matters will blossom only if you follow your intuitive instincts. Minor muscular pains and bone aches might occur creating discomfort in life. Emotional anxieties shall be high when it comes to your family matters. Travels are best avoided in this front. A focussed attention towards your goal helps you in achieving success in life as the week comes to its end.LUCKY DATES: 7,8,13.

CANCER:  (22nd June - 21st July)

Financially there will be a roller coaster ride that you might witness in this week. ups and down might be more due to an careless and carefree attitude towards life. Subtle romance seeps in love life as the week progresses. Professionally you need to work with more diligence as slowly and steadily situations shall improve upon in this week. Health keeps you in a fit shape and boosts your immunity. Communication should be more flexible when dealing with matters of your family. Being firm in your decisions helps you in achieving further success in life as the week comes to its end. LUCKY DATES : 7,10.

LEO:  (22nd July - 21st August)

Professionally there are huge transitions that one will witness in this phase of your life. Matters of heart improve upon softly and subtly during this period. Promises made in financial matters might not get fulfilled unless or until you make efforts from your end and take quick decisions. Travel restrictions are witnessed in this phase and should be avoided. Family matters resolve subtly as the week progresses. Health keeps you in a fit shape all through this period.  LUCKY DATES:  8,10.

VIRGO (22nd August- 21st September)

Professionally situations shall turn in your favour as the week progresses. Your juniors shall support you in your endeavours during this week. Health will keep you in a fit shape all week through. There are sudden romantic developments in the latter half phase of the week. Financially there are possibilities of few setbacks in your investments. Emotional anxieties ride high in matters of your family. The Tarot guides you to avoid any confrontations while on a journey in this period as it might lead on to further chaos in life. These are all but transient moments and you shall soon overcome this phase as the week comes to its end. LUCKY DATES : 8,10,13.

LIBRA (22nd September- 21st October)

New beginnings in matters of heart shall be pleasant and one might witness extremely romantic turn of events as the week progresses. Professional success knocks your door from the beginning of the week. a partnership shall be extremely favourable in this week. However, there are few setbacks and disappointments that you might have to undergo in financial matters. Spending time in the company of children shall turn out to be very therapeutic. Family matters resolve subtly and softly. A woman who has an excellent knack of finances helps you in your travel ventures. There is a feeling of sadness that seeps in life as the week comes to its end. LUCKY DATES : 7,8,10,12.

SCORPIO (22nd October- 21st November) 

Matters of heart shall be romantically inclined and you would and to spend some quiet and quality time along with your loved one. Divine blessings fall on your love life and help you achieve peace and contentment. Financially there is good news that knocks your door as the week progresses. Professional disappointments might put you in a back foot for some time. A youngster in your work place might be a cause of concern. Health keeps you in a fit shape and an expert guidance in this area helps you in creating more peace and happiness in life. Family reunions shall be pleasant and memorable. Travels bring in success and happiness though you would want more out of it. A feeling of being ignored and left out in life is high in your mind as the week comes to its end. LUCKY DATES :  7,9,10,11.

SAGITTARIUS:  (22nd November- 21st December)

Financial gains will come through easily and shall reflect as a growth in your investments. Matters of heart however, breaks your heart as there are disappointments and anxieties that crop up in life. Avoid taking any major professional decisions during this week as there are chances of sudden setbacks in life. Health improves upon as the week progresses. There will be a number of options that come across you to resolve your family matters in this phase of your life. Travels made in this period shall be favourable and growth oriented.  LUCKY DATES :  9,10,12.

CAPRICORN:  (22nd December- 21st January)

Professionally there are celebrations and growth that comes from unexpected quarters. Your colleagues and your family help you in manifesting success in your projects. Financially the more you are obsessed about your investments the sadder the state is. Being involved in some charitable activities helps in achieving success in this front as well. Matters of heart shall be pleasant and romantically inclined though a little subtle than your expectations. A woman’s advice especially an advice of a female doctor shall help you in achieving good health in life. A youngster in the family helps you in your endeavours as the week progresses. Travels shall be favourable and memorable.   LUCKY DATES:  8,10,11,12.

AQUARIUS:  (22nd January- 21st February)

Travels made during this phase of your life shall be pleasant and enjoyable. However, this is a week when you should lie low and take it easy. Subtle positive changes in matters of heart shall be romantically inclined and will make you happy. Professional promises are meant to be dealt with quick responses and alternative back up plans from your end. Financial transitions if any should be avoided in this week. You need to be more realistic in your health issues. Minor abdominal problems might surface up if diet patterns are not rescheduled and monitored. Be careful of sudden emotional outbursts as it can hurt your near and dear ones. One needs to learn to be more proactive in life to achieve success as even a little careless approach from your end might bring in disappointments. LUCKY DATES :  12.

PISCES:  (22nd February- 21st March)

A woman who has a very practical approach in life helps you in matters of your heart. Professionally, you need to keep up with consistent approach towards your project as then and then only shall you achieve success in life. Financial matters might turn out to be very expensive especially if you are unable to monitor your emotions. Avoid unnecessary confrontations as it can affect your health adversely. Travels are best avoided in this week too. An extra effort from your end helps in resolving the family matters. Subtle positive changes takes place as the week comes to its end.  LUCKY DATES : 7,8,13.

मुंबई: टीवी पर इशिता के नाम से पॉपुलर हो चुकीं एक्ट्रैस दिव्यंका त्रिपाठी ने हाल ही में अपने को-एक्टर विवेक दाहिया से सगाई कर ली है। सगाई के बाद वह समय को पूरी मस्ती के साथ बिता रही हैं।

आप देख सकते हो कि दिव्यांका त्रिपाठी ने अपने मंगेतर विवेक ACP अभिषेक के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। इसमें विवेक दिव्यांका के पीछे हैं।

और अपने बाइसेप्स (बॉडी) दिखा रहे हैं जबकि आगे से देखने पर लगता है कि यह पूरी तस्वीर दिव्यांका की ही है। रियल में यह तस्वीर काफी फनी और प्यारी लग रही है।

मुंबई:-बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर का बनाया गया खाना फिल्म 'की एंड का' के क्रू मेंबर्स को काफी पसंद आया।

अर्जुन कपूर की फिल्म 'की एंड का' प्रदर्शित होने जा रही है। आर.बाल्की के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अर्जुन कपूर के अपोजिट करीना कपूर हैं। अर्जुन कपूर लेबनीज खाने के बेहद शौकीन हैं और जब उन्हें फिल्म के एक दृश्य के लिए एक डिश बनाने को कहा गया तो उन्होंने अपने पसंदीदा लेबनीज रेस्तरां के शेफ को सेट पर बुलाकर उनसे यह डिश बनाना सीखा।

अर्जुन ने शूटिंग के दौरान न केवल लेबनीज डिश बनाने पर हाथ आजमाया, बल्कि फिल्म के कलाकारों और सहकर्मियों को उसके स्वाद का लुत्फ उठाने का मौका भी दिया। अर्जुन ने अपने हाथों से 'सेवन स्पाइस अरेबिक चिकन' बनाया। अर्जुन को व्यंजन बनाते फिल्माया गया, जिसके बाद फिल्म से जुड़े सभी लोगों ने उसका भरपूर मजा उठाया।

फिल्म में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन ने अतिथि भूमिका निभायी है। यह फिल्म एक अप्रैल को रिलीज होगी।

नई दिल्ली:-‘लेडीज वर्सिज रिकी बहल’, ‘लुटेरा’, ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के साथ ही आलोचकों की प्रशंसा पाने वाले बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह का कहना है कि वह खुद को नहीं अपने काम को गंभीरता से लेते हैं।

फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ में दिल्ली के एक युवक के किरदार से बॉलीवुड में अभिनय की पारी की शुरुआत करने वाले रणवीर का कहना है कि बॉलीवुड में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था।

करियर की शुरुआत के दौरान कास्टिंग काउच का शिकार होने की बात स्वीकार कर चुके रणवीर राजधानी में मंगलवार को ‘एनडीटीवी इंडियन ऑफ द ईयर अवॉर्ड 2015’ का पुरस्कार ग्रहण करने आए थे।

अपने अब तक के फिल्मी सफल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा और कई कड़वे घूंट पीने पड़े। आगे बढ़ने के लिए आपको अपने सम्मान के साथ समझौता करना पड़ता है और कुछ हद तक गिड़गिड़ाना भी पड़ता है। हालांकि अब हालात बदल रहे हैं और चीजें व्यवस्थित हो रही हैं।’’

अपनी सफलता के मंत्र के बारे में रणवीर ने कहा, ‘‘मैं खुद को नहीं अपने काम को गंभीरता से लेता हूं।’’

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