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नई दिल्ली। इस खूबसूरत दुनिया को देखने का एकमात्र जरिया आंखें ही हैं। इसलिए शरीर के इस नाजुक अंग को सहेजकर रखना बहुत जरूरी है। अस्वस्थ जीवनशैली व खानपान के चलते लोगों की आंखों की रोशनी कम हो रही है, जिसे चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस के जरिए ठीक कर लिया जाता है। रोज-रोज चश्मे व लैंस के झंझट से बचने के लिए आमतौर पर लोग लेसिक सर्जरी भी करवाते हैं, लेकिन इस क्रम में सवाल यह उठता है कि जिन लोगों की सर्जरी नहीं हो सकती और वह चश्मा भी नहीं लगाना चाहते, तो उनके लिए क्या विकल्प है?गौरतलब है कि अगर आपकी आंखों का कॉर्निया (आंखों की काली पुतली) बहुत पतला है, आंखों का नंबर लगभग माइनस 10 या इससे ज्यादा है, आंखें ड्राई रहती है या कोई अन्य समस्या है तो इस कारण आपकी लेजर सर्जरी संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में आपके लिए इंप्लांटेबल कॉन्टैक्ट लैंस (आईसीएल) बेहतर विकल्प हो सकता है।
क्या है आईसीएल:-आईसीएल बहुत पतला लेंस होता है जिसे आंख की पुतली के पीछे प्राकृतिक लेंस के आगे लगाया जाता है। इसलिए यह कॉन्टैक्ट लैंस की तरह दिखाई नहीं देता लेकिन यह काम बिल्कुल कॉन्टैक्ट लेंस की तरह ही करता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें आंखों के अंदरूनी भाग में कोई छेड़छाड नहीं की जाती। लगभग 20 से अधिक उम्र वाले लोग आईसीएल लगवा सकते हैं।
प्रक्रिया का समय:-यह बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है जिसे पूरा करने में करीब लगभग 20 मिनट लगता है, किंतु इसमें एक समय में एक आंख में ही लेंस लगाया जाता है। दूसरी आंख की प्रक्रिया करने के लिए कम से कम दो दिन का अंतराल होना जरूरी है। आईसीएल के बाद मरीज उसी दिन घर जा सकते हैं और करीब तीन से चार दिन में वे सामान्य रूटीन में आ सकते है।
हटवा सकते हैं कभी भी:-वैसे तो आईसीएल एक बार लगवाने के बाद इसे बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन अगर व्यक्ति इसे हटवाना चाहते हैं, तो वह इसे कभी भी हटवा सकते हैं। जिन रोगियों को उम्र के साथ मोतियाबिंद की समस्या हो जाती है तो मोतियाबिंद के इलाज में इसे हटा दिया जाता है क्योंकि अब मोतियाबिंद के लेंस में ही पॉवर का नंबर भी होता है।
ये लाभ हैं:- आईसीएल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से छुटकारा मिल जाता है और एक बार लगने के बाद इसे दोबारा लगवाने या हटाने की जरूरत नहीं पड़ती।
- आंखों के किसी भी भाग को नुकसान नहीं पहुंचता और किसी को पता भी नहीं चलता कि आपने लेंस पहने हैं।
- सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आईसीएल बहुत सुरक्षित है और इसके रखरखाव के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं होती।
- आईसीएल के बाद लोग आराम से कोई भी काम कर सकते हैं, जो सामान्य लोग करते हैं।

नई दिल्‍ली। इंटरनेट स्पीड के मामले में फिलहाल हम अपने पड़ोसी देश श्रीलंका और पाकिस्तान से भी पीछे हैं। ब्रिटेन की इंटरनेट स्पीड टेस्टर कंपनी ओपनसिग्नल के मुताबिक भारत के पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार) की 4G डाटा स्पीड भारत के मुकाबले दोगुनी तेज है। ये देश विकसित बाजारों के मामले में भले ही पीछे हो, लेकिन इंटरनेट स्पीड के मामले में ये दुनिया के अग्रणी देशों के करीब हैं। अगर दुनिया के विकसित देशों में इंटरनेट उपभोक्ताओं को मिल रही स्पीड की बात करें, तो अमेरिका, यूके और जापान में बेहतरीन स्पीड मुहैया हो रही है।
बफरिंग की समस्या भारत में आम:-आज हमारे देश में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां 4G से आगे बढ़कर अब 5G की बात करने लगी हैं। घरेलू ब्रॉडबैंड के लिए फाइबर-बेस्ड पर आधारित कंपनियां भविष्य में 100Mbps स्पीड देने का दावा कर रही हैं। भारत में इंटरनेट यूजर्स के लिए बफरिंग की समस्या आज भी आम है। दुनिया के दूसरे देशों में इंटरनेट यूजर्स के लिए बफरिंग की समस्या न के बराबर ही है, लेकिन हमारे देश में मोबाइल उपभोक्ता 4G नेटवर्क यूज करने के बावजूद अक्सर इंटरनेट में बफरिंग की समस्या से रूबरू होते हैं।
भारत में नेट की औसत स्पीड 6.1Mbps:-भारत में 4G लॉन्ग टर्म ईवॉल्यूशन की औसत स्पीड की बात करें, तो यह आज भी 6.1Mbps पर ही है, जबकि दुनिया के बाकी देश इंटरनेट स्पीड के मामले में हमसे कहीं आगे निकल चुके हैं। अपने देश में अगर हम इंटरनेट स्पीड की तुलना ग्लोबल स्पीड से करें, तो हम वैश्विक रूप से इस मामले में करीब एक तिहाई पीछे हैं। वैश्विक स्तर पर मोबाइल डाटा स्पीड का ग्लोबल एवरेज 17Mbps है।
दुनिया के 124 देशों की रैंकिंग लिस्ट:-अमेरिका की इंटरनेट स्पीड टेस्टर कंपनी ऊकला (Ookla) ने दुनिया के 124 देशों की रैंकिंग लिस्ट तैयार की है। इस सूची में भारत को 109वां स्थान मिला है। भारत करीब-करीब इस सूची के अंतिम पायदान के ही सबसे करीब दिखता है। ऊकला ने ये आंकड़े दुनिया भर में मौजूद 2G, 3G और 4G तकनीक पर टेस्ट कर अपने निष्कर्ष निकाले हैं। भारत में इंटरनेट डाउनलोडिंग की औसतन स्पीड 9.12Mbps है, जो वैश्विक औसत (23.54Mbps) से कहीं ज्यादा नीचे है।
भारत में स्‍पीड कम होने की प्रमुख वजह:-भारत में लगातार हर महीने कई लाख नए उपभोक्ता इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। इससे इंटरनेट की स्पीड बनाए रखने का दबाव बढ़ता है। जानकारों के मुताबिक भारत में इंटरनेट स्पीड के धीमा होने का प्रमुख कारण स्मार्टफोन के क्षेत्र में आ रही यही महाक्रांति है। देश में इंटरनेट की धीमी स्पीड का एक अन्‍य प्रमुख कारण यह भी है कि बड़े घनत्व में रहने वाली आबादी। यह आबादी इंटरनेट की स्‍पीड को धीमा बनाती है।
इंटरनेट उपभोक्ताओं को मिल रही स्पीड
- श्रीलंका : 13.95Mbps
- पाकिस्तान: 13.56Mbps
- म्‍यांमार : 15.56Mbps
- भारत - 6.1Mbps
अग्रणी देश
- अमेरिका : 16.31Mbps
- यूके : 23.11Mbps
- जापान : 25.39Mbps

भोपाल| मध्य प्रदेश में इन दिनों एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह उन लड़कों की मदद करने के लिए आगे आने की बात कह रही हैं, जो कुछ लड़कियों द्वारा ब्लैकमेल किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो की बड़ी चर्चा है। महिला को ग्वालियर के एक सामाजिक संगठन की प्रमुख बताया जा रहा है। वीडियो में महिला के पीछे एक बोर्ड लगा है, जिस पर 'ज्वाला शक्ति संगठन' लिखा दिख रहा है। महिला का कथित तौर पर नाम काजल बताया जा रहा है।इस वीडियो में महिला साफ तौर पर कह रही है, 'कुछ लड़कियां पहले दोस्ती करती हैं, वक्त गुजारती हैं और अपना स्वार्थ पूरा होने पर लड़कों को ब्लैकमेल करती हैं, ऐसे लड़कों की मदद के लिए वह आगे आई है।' वायरल हो रहे वीडियो पर उस महिला ने अपना फोन नंबर भी बताया है, जिससे संपर्क किया गया लेकिन बात नहीं हो सकी।ज्वाला शक्ति संगठन की संयोजक काजल जादौन राजस्थान के करौली की रहने वाली हैं। 2003 में ग्वालियर में उनका विवाह हुआ। पति प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे। शादी के तीन महीने बाद काजल ने भी नौकरी करना शुरू कर दिया। पति को उनकी नौकरी से एतराज नहीं था परंतु वे बेवजह मारपीट करते थे। इसीलिए 2014 में घर छोड़कर 12 साल के बेटे को लेकर अलग रहने लगी। कई घरों में पारिवारिक विवाद देखे तो अहसास हुआ कि आज-कल बहुएं ससुराल वालों को कानून का भय बताकर डराती है।वे कहती हैं- पांच साल में दहेज प्रताड़ना के जितने मामले देखे, उनकी गहराई में जाने पर 98 प्रतिशत झूठे साबित हुए। पुलिस थानों पर दुष्कर्म के 75 प्रतिशत और छेड़छाड़ के 90 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज होते हैं। महिलाओं द्वारा पुरुषों के खिलाफ कानून के दुरुपयोग के कारण युवक शादी नहीं करना चाहते। नई उम्र में युवक-युवती संपर्क में आते हैं, उनमें प्रेम संबंध स्थापित हो जाता है। बाद में विवाद होने पर युवक पर युवतियां दुष्कर्म का केस दर्ज करा देती हैं। यदि कानून सभी के लिए बराबर है तो फिर ऐसे मामलों में युवक ही जिम्मेदार क्यों? पुलिस को युवक-युवती दोनों के खिलाफ दुष्कर्म और छेड़छाड़ का मामला दर्ज करना चाहिए।

कोरबा। बच्चों को अच्छाई का पाठ पढ़ाने और बुराई से बचने की सीख देने की बजाय स्कूल में विवादित संत का वीडियो दिखाने का एक मामला सामने आया है। इसके लिए बकायदा इस सरकारी स्कूल में वीडियो प्रोजेक्टर की व्यवस्था भी की गई थी। जब मामला तूल पकड़ने लगा और इस तरह कानून की नजर में आरोपी बन चुके बाबा का वीडियो दिखाए जाने कीखबर वायरल होने के बाद आनन-फानन में हेडमास्टर ने स्कूल पहुंचकर यह सब बंद कराया।समाज और कानून ने जिसे एक अपराधी के तौर पर जेल की हवा खाने का हकदार माना है, उसी का वीडियो दिखाकर ग्रामीणों और बच्चों को गलत सबक सिखाने का यह मामला शासकीय प्राइमरी स्कूल बरपाली का है। करतला विकासखंड अंतर्गत स्कूल में विवादित संत रामपाल का वीडियो दिखाया जा रहा था।विवादित संत रामपाल इन दिनों हरियाणा की एक जेल में बंद है। विभिन्न आरोपों से घिरकर कानून के शिकंजे में फंस चुके संत रामपाल का वीडियो स्कूल में दिखाया जाना, आयोजकों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। जब स्कूल में वीडियो दिखाने की बात बाहर आई, तो सोशल साइट्स पर आलोचना शुरू हुई। खबर वायरल होने के बाद स्कूल प्रबंधन को जानकारी हुई और वीडियो प्रोग्राम बंद कराया गया।शिक्षा विभाग का कहना है कि हेडमास्टर या किसी अन्य ने सूचित नहीं किया था। नियमानुसार स्कूल या परिसर में इस प्रकार का कोई भी आयोजन करने उच्चाधिकारियों से अनुमति लेना या कम से कम उन्हें सूचित करना एक जरूरी प्रक्रिया है, पर ऐसा नहीं किया गया और प्रोजेक्टर लगाकर वीडियो दिखाने की व्यवस्था की गई थी। स्कूल के हेडमास्टर लालसिंह कंवर का कहना है कि वीडियो दिखाने का यह कार्यक्रम शाम के वक्त चल रहा था। डीईओ से सूचना मिलने पर वे रात करीब आठ बजे पहुंचे, जहां स्कूल के बाहर ही वीडियो दिखाया जा रहा था। उन्होंने तत्काल उसे बंद कराया।यह संभव है कि सांस्कारिक शिक्षा देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था कराई गई हो, लेकिन उससे पहले यह देखना भी उतना ही जरूरी है कि जिसके बारे में बताया जा रहा, वह स्वयं कितना सांस्कारिक है।

बालासोर। सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का ओडिशा के चांदीपुर सो सोमवार को सफल परीक्षण किया गया। भारी बारिश के बावजूद जमीन से जमीन पर प्रहार करने वाली प्रहार करने वाली मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सुबह 10:30 बजे बालेश्वर के चांदीपुर से परीक्षण किया गया। यह परीक्षण ब्रह्मोस के जीवनकाल बढ़ाने के लिए किया गया है। यह परीक्षण इस मिसाइल की एक्सपायरी डेट को 10 साल से बढ़ाकर 15 साल करने की कवायद का हिस्सा है। ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है।बता दें कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत के रक्षा शोध और विकास संगठन (डीआरडीओ) व रूस के एनपीओएम ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह मिसाइल ध्वनि की आवाज से भी तीन गुना अधिक रफ्तार से उड़ान भरती है। इस परीक्षण से सशस्त्र सेनाओं को अधिक समय के लिए मिसाइल मिल सकेगा।ब्रह्मोस को पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह मिसाइल 290 किमी मार करने की क्षमता रखती है। सेना में शामिल हो चुकी इस मिसाइल का विगत कई सालों से सफलता पूर्वक परीक्षण किया जाता रहा है।ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र है। क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र उसे कहते हैं जो कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडार की आँख से बच जाती है। ब्रह्मोस की विशेषता यह है कि इसे जमीन, हवा, पनडुब्बी और युद्धपोत से यानी कि लगभग कहीं से भी दागा जा सकता है। यही नहीं इस प्रक्षेपास्त्र को पारम्परिक प्रक्षेपक के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता है।ब्रह्मोस का विकास ब्रह्मोस कोर्पोरेशन किया जा रहा है। यह कम्पनी भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिशिया का सयुंक्त उपक्रम है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। रूस इस परियोजना में प्रक्षेपास्त्र तकनीक उपलब्ध करवा रहा है और उड़ान के दौरान मार्गदर्शन करने की क्षमता भारत के द्वारा विकसित की गई है।प्रक्षेपास्त्र तकनीक में दुनिया का कोई भी प्रक्षेपास्त्र तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकता। इसकी खूबियां इसे दुनिया की सबसे तेज़ मारक मिसाइल बनाती है। यहां तक की अमरीका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फिसड्डी साबित होती है।

नई दिल्ली। ईसा से पांच सौ साल पहले महान आयुर्वेदाचार्य चरक द्वारा लिखी चरक संहिता में एक मात्र जिस जड़ी- बूटी का बार-बार उल्लेख है, वह आंवला है। हमारे मनीषियों ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी पर अगर आंवले की पूजा का विधान किया है तो उसके पीछे यही कारण है कि आम नहीं, बहुत खास है आंवला। अमृत फल देने वाले इस आंवले के एक पेड़ को अगर घर के आंगन या आसपास लगा दिया जाए तो पूरे परिवार का वैद्य बन यह सेहत की जरूरतें पूरी करता है। ‘आओ रोपें अच्छे पौधे’ सीरीज के तहत आज आंवले के बारे में जानकारी दी जा रही है।
वैज्ञानिक नाम: फाइलैंथस एम्बलिका
पेड़ की लंबाई : 20 से 25 फीट
प्राप्ति स्थान : एशिया, यूरोप और अफ्रीका। भारत में आंवला के पेड़ खूब पाए जाते हैं। इसकी खेती भी की जाती है।
महात्म्य
धार्मिक : मान्यता है कि इसमें भगवान विष्णु का वास होता है। माना जाता है कि जब समुद्र मंथन में अमृत निकला तो देवों और असुरों के बीच छीनाझपटी में कुछ बूंदें गिर गईं जिससे आंवले की उत्पत्ति हुई।
वैज्ञानिक : यह फल विटामिन सी का प्रचुर स्नोत है। प्रकृति में पाई जाने वाले किसी भी चीज में इतना विटामिन सी नहीं पाया जाता। वैज्ञानिक शोधों में तमाम रोगों के उपचार करने की खूबियों का पता। विषाणुओं से शरीर के प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत बनाता है।
फल एक गुण अनेक स्वास्थ्य
- आयुर्वेद में आंवला कब्ज का रामबाण, रक्त शोधक, पाचक, रुचिवर्धक तथा अतिसार, प्रमेह, दाह, पीलिया, अम्ल पित्त, रक्त विकार, रक्त स्नाव, बवासीर,कब्ज, अजीर्ण, बदहजमी, श्वास, खांसी, रक्त प्रदर नाशक तथा आयुवर्धक है।
सौंदर्य
- निरंतर प्रयोग से बाल टूटना, रूसी, बाल सफेद होना रूक जाते हैं। नेत्र ज्योति तेज होती है। दांत मजबूत होते हैं।
- रोज एक आंवला खाने से त्वचा की नमी बरकरार रहती है, इससे त्चचा पर कांति आती है और पिंपल्स जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।
परंपरागत प्रयोग
- आंवला आयुर्वेद और यूनानी पैथी की प्रसिद्ध दवाइयों, च्यवनप्राश, ब्रह्म रसायन, धात्री रसायन, अनोशदारू , त्रिफला रसायन, आमलकी रसायन, त्रिफला चूर्ण, धात्ररिष्ट, त्रिफलारिष्ट, त्रिफला घृत आदि के साथ मुरब्बे, शर्बत, केश तेल आदि निर्माण में प्रयुक्त होता है। रक्तवर्धक नवायस लौह, धात्री लौह, योगराज रसायन, त्रिफला मंडूर आंवले से बनाए जाते हैं।
- मानव शरीर में सिर्फ ल्यूकोडर्मा में आंवला उपयोग नहीं होता। इसके अलावा सिर से पैर तक का कोई ऐसा रोग नहीं जहां आंवला दवा या खुराक के रूप में उपयोगी न रहता हो।
- भारतीय गृहिणी की रसोई में भी आंवला, चटनी, सब्जी, आचार, मुरब्बे के रूप में सदा से विराजमान है।
- इसके प्रयोग से शरीर की प्रतिरक्षी शक्ति सुरक्षित रहती है। बार-बार होने वाली बीमारियों से बचाव करने वाला आंवला ‘विटामिन सी’ का सबसे बड़ा भंडार है। इसका विटामिन ‘सी’ पकाने, सुखाने, तलने, पुराना होने पर भी नष्ट नहीं होता।

नालंदा। धूमधाम से बारात पहुंची और शहनाई की धुन के बीच शादी की रस्में निभाई जा रही थीं कि शादी में आए बारातियों ने खाने के बाद रसगुल्ला नहीं परोसे जाने को लेकर एेसा बवाल मचाया कि लाठी-डंडे निकले और दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस घटना की भगदड़ मचने के बाद शादी भी कैंसिल हो गई।घटना नालंदा जिले के बिहार थानाक्षेत्र की है जहां खाने में मिठाई नहीं मिलने से नाराज बारातियों ने लड़की वालों की जमकर पिटाई कर दी। इस घटना में लड़की के माता-पिता समेत करीब एक दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और सभी घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वधू पक्ष ने बताया कि बारात शेखपुरा जिले के मड़पसौना गांव से आई थी। दरअसल, बारातियों को खाना परोसने के दौरान कुछ युवक बार-बार रसगुल्ले की मांग कर रहे थे| कई बार मिठाई देने के बावजूद वे लोग नहीं माने तो लकड़ी पक्ष के लोगों ने उन्हें और मिठाई देने से इनकार कर दिया। बस क्या था बारातियों ने इसे लेकर हंगामा मचा दिया। इस बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई जिसके बाद बाराती के कुछ लोग चले गए। उधर शादी की रस्में की जा रही थीं। कुछ ही देर में हंगामा और भगदड़ मच गई। करीब दो दर्जन युवक लाठी-डंडे और रॉड लेकर शादी समारोह में पहुंचे और जो भी मिला उसे दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। बदमाशों ने महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा। इस मारपीट की सूचना वधूपक्ष ने पुलिस को दी। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी फरार हो गए। इस घटना में लड़की के माता-पिता समेत करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से तीन को गंभीर हालत में पटना रेफर कर दिया गया है। वहीं, इस घटना के बाद वधू पक्ष ने शादी कैंसिल कर दी और दूल्हे को वापस जाना पड़ा।

हेलसिंकी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में सोमवार को मिलने पर कहा कि हमारे पास बात करने के लिए बहुत अच्छे मुद्दे हैं। व्यापार से लेकर सैन्य और मिसाइलों तक चीन से परमाणु तक हम सब कुछ पर चर्चा कर रहे हैं। हम चीन, हमारे पारस्परिक मित्र, राष्ट्रपति शी के बारे में कुछ बात करेंगे।जून महीने में दुनियाभर के कूटनीतिक विशेषज्ञों की नजरें सिंगापुर की ओर लगी हुई थीं। 12 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से ऐतिहासिक बैठक कर रहे थे। अब एक माह बाद हेलसिंकी का नंबर है। सोमवार को फिनलैंड की राजधानी में ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने वाले हैं। यह इन दोनों नेताओं की पहली बैठक होगी। बैठक के लिए ट्रंप हेलसिंकी पहुंच चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल के आरोपों के मद्देनजर हर कोई जानना चाह रहा है कि दोनों नेताओं में क्या बातचीत होती है?यूरोप आने से पहले जब ट्रंप ने कहा था कि उनकी यात्रा का सबसे आसान हिस्सा हेलसिंकी प्रवास रहेगा, तो कई लोगों की भवें तन गई थीं। ब्रसेल्स और लंदन प्रवास के दौरान अब तक ट्रंप की यात्रा विवादों में रही है। इस बीच, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल का मामला फिर गरमा गया है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने में पुतिन ने ट्रंप की गुप्त रूप से मदद की थी। ऐसे में इसकी उम्मीद कम ही है कि बैठक में यह अकेला मुद्दा हावी रहेगा।रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वाशिंगटन और मॉस्को का द्विपक्षीय संबंध बेहद खराब है। हमें एक नई शुरुआत करनी होगी। हालांकि, हम ट्रंप को बातचीत के योग्य साझीदार मानते हैं।

जकार्ता। इंडोनेशिया में 48 वर्षीय सुगिटो की मगरमच्‍छ के काटने से मौत हो गई। पापुआ प्रांत में मृतक के अंतिम संस्‍कार के बाद गुस्‍साई भीड़ ने सैंकड़ों मगरमच्‍छों की जान ले ली।
आवासीय इलाके के पास है मगरमच्‍छों का फार्म;-पुलिस के अनुसार, मृतक सुगिटो अपने पशुओं के चारे के लिए घास ढूंढने के दौरान मगरमच्छों के बाड़े में गिर गया। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ ने मृतक सुगिटो के एक पैर को काट लिया था और एक मगरमच्छ के पिछले हिस्से से टकराकर उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि आवासीय इलाके के पास फार्म की मौजूदगी को लेकर गुस्साए सुगिटो के रिश्तेदार और स्थानीय निवासी स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे। स्थानीय संरक्षण एजेंसी के प्रमुख बसर मनुलांग ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि फार्म मुआवजा देने को तैयार है।
गुस्‍साई भीड़ ने 292 मगरमच्‍छों को मार डाला:-अधिकारियों ने बताया कि मौत के बाद गुस्‍साई भीड़ चाकू, छुरा और खुरपा लेकर फार्म पहुंच गई और 4 इंच लंबे बच्चों से लेकर दो मीटर तक के 292 मगरमच्छों को मार डाला। पुलिस और संरक्षण अधिकारियों का कहना था कि वह इस भीड़ को रोक पाने में असमर्थ थी। अधिकारियों ने कहा कि वे इसकी जांच कर रहे हैं और आपराधिक आरोप भी तय किए जा सकते हैं। इंडोनेशिया द्वीपसमूह में मगरमच्छों की कई प्रजातियों समेत विभिन्न वन्यजीव पाए जाते हैं। मगरमच्छों को संरक्षित जीव माना जाता है।दो साल पहले भी यहां एक रूसी पर्यटक की मौत भी मगरमच्‍छ के काटने के कारण हुई थी।

नई दिल्ली। आइसीसी ने कड़ा फैसला लेते हुए श्रीलंका के कप्तान दिनेश चांदीमल, कोच चंडिका हाथुरुषे और टीम मैनेजर असंका गुरुसिंहा को दो टेस्ट के बाद अब चार वनडे मैचों के लिए भी सस्पेंड कर दिया है। इन तीनों को आइसीसी का कोड ऑफ कंडक्ट तोडने के लिए ये सज़ा सुनाई गई है।दरअसल वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दूसरे टेस्ट में श्रीलंका के कप्तान दिनेश चांदीमल पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगा। जब अंपायर ने उन पर लगाया तो पूरी श्रीलंका टीम तीसरे दिन मैच पर उतरने के लिए राजी नहीं हुई। इसके बाद मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ और अंपायर इयान गोल्ड और अलीम दार के समझाने पर टीम मैदान में खेलने उतरी। इसके बाद इन तीनों ने आइसीसी के सामने अपना गुनाह कबूल कर था।बॉल टेंपरिंग की घटना के बाद चांदीमल, हाथुरुषे और गुरुसिंहा ने अपना गलती को मानते हुए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर होना की सज़ा को स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब आइसीसी ने उनकी सज़ा को बढ़ाते हुए उन्हें अगले चार वनडे मैचों से भी सस्पेंड कर दिया है। श्रीलंका के कप्तान दिनेश चांदीमल को गेंद से छेड़छाड़ करने के लिए आइसीसी ने उस मैच की भी 100 प्रतिशत मैच फीस काटी थी और वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्हे टेस्ट मैच से बाहर रखा गया था।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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