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-लेखिका अनीता वर्मा (अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार)

समकालीन परिप्रेक्ष्य में एशिया के दो वैश्विक वृद्धि केंद्र एक दूसरे के अत्यधिक निकट आए है।इससे दोनों देशों(भारत और जापान) के मध्य आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक संबंध काफी घनिष्ठ हुए है। इसकी घनिष्ठता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 13 सितंबर 2017 को जब जापानी प्रधानमंत्री अहमदाबाद में बल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे तो उनका भव्य स्वागत किया गया।इसके पश्चात प्रधानमंत्री शिंजो अबे ,उनकी पत्नी और भारतीय प्रधानमंत्री ,भारतीय परिधान में आठ किलोमीटर रोड शो कर साबरमती आश्रम पहुंचे।जापानी प्रधानमंत्री के स्वागत हेतु आठ किलोमीटर में भारत के 28 राज्यों के अतिरिक्त विभिन्न सांस्कृतिक रंगों की खूबसूरत झलक देखने को मिली।इसे सांस्कृतिक रोड शो कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। साबरमती आश्रम के पश्चात 20 वींं सदी में अहमदाबाद की पहचान रही सैय्यद सीरी मस्जिद भी गए। दरअसल इस मस्जिद का निर्माण 16 वीं सदी में सुल्तान शम्सुद्दीन मुजफ्फरशाह के शासन काल के दौरान अफ्रीकी देश इथियोपिया के हब्शी सीदी सैय्यद ने बनवाया था। इससे पूर्व जब दिसंबर 2015 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे भारत के दौरे पार आए थे तो उनका भव्य स्वागत किया गया।वे भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी भी गए और गंगा जी की भव्य आरती में भी हिस्सा लिए।आरती में हिस्सा लेना उनके भारतीय संस्कृति से गहन लगाव को प्रदर्शित करता है। दोनों देशों के मध्य कई अहम समझौते हुए जिसमें एक बुलेट ट्रेन भी है।जब भारतीय प्रधानमंत्री नवंबर 2016 में जापान के दौरे पर गए ,उनका भी जापान में भव्य स्वागत हुआ।प्रधानमंत्री का यह दौरा बुलेट ट्रेन के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा क्योंकि जापान के प्रधानमंत्री ने तत्परता दिखाते हुए कहा था कि इस साल के अंंत में मुम्बई और अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे परियोजना का डिजाइन शुरू किया जाएगा।दरअसल देश की पहली बुलेट ट्रेन हेतु मुंबई और अहमदाबाद के मध्य कॉरिडोर का बनाया जाना है।भारतीय प्रधानमंत्री ,जापानी प्रधानमंत्री के साथ बुलेट ट्रेन से ही टोक्यो से कोबे की यात्रा की और कावासाकी भारी उद्योग केन्द्र का भी दौरा किया। दरअसल कावासाकी ने जापान के विकास को बुलेट ट्रेन के माध्यम से गति प्रदान की है।भारतीय प्रधानमंत्री के जापान दौरे के दौरान कहा गया था कि इस परियोजना का शिलान्यास 2017 में हो सकता है, लेकिन अब वो पल भी आ गया कि पुनः जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे 13-14 सितंबर की दो दिवसीय भारत की यात्रा की है। इस याात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शिंंजो अबे 12 वां भारत जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने से पहले भारतीय प्रधानमंत्री के साथ बुलेट ट्रेन परियोजना का साबरमती में शिलान्यास किया। दरअसल देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण अहमदाबाद से मुम्बई के मध्य प्रस्तावित है।शिलान्यास करने के पश्चात दोनों प्रधानमंत्रियों ने महात्मा गांधी की स्मृतियों से संबंधित गांधी नगर में स्थित भारत का सबसे बडा़ म्यूजियम दांडी कुटीर की भी यात्रा की जो गांधी जी के मूल्यों के प्रति आदर भाव को प्रदर्शित करता है।

भारत और जापान के मध्य बारहवां शिखर सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण रहा। दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय वार्ता के पश्चात 15 विभिन्न क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर हुए जो दोनों देशों के संबंधों को अत्यधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगें। दोनों देशों के मध्य हुए15 समझौते निम्नलिखित है।आपदा जोखिम प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग और अनुभव,ज्ञान और नीतियों को साझा करना,भारत में जापानी निवेश को बढ़ाने हेतु समझौता, कौशल विकास के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ बनाना और भारत में जापानी भाषा की शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग,भारत में जापानी भाषा की शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग,भारत के उत्तर पूर्वी हिस्से में संपर्क बढ़ाना और प्रभावी और कुशल तरीके से विकास परियोजनाओं का संवर्द्धन, भारत में जापानी प्रवासियों हेतु ठंडे बक्सों में जापान से ताजे खाद्य पदार्थ भेजने हेतु 'कूल ईएमएस' सेवा का कार्यान्वयन, गुजरात के मंडल बेचराज खोरज क्षेत्र में बुनियादी विकास कार्यक्रमों में सहयोग, विज्ञान प्रौद्योगिकी के तहत नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजी पर समझौता, स्पोर्ट्स अथॉरिटी अॉफ इंडिया व यूनिवर्सिटी अॉफ त्कुसुबा के मध्य खेलकूद विकास पर समझौता, लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट अॉफ फिजिकल एजुकेशन व जापानी यूनिवर्सिटी निप्पोन स्पोर्ट्स साइंस यूनिवर्सिटी में समझौता, एक दूसरे के चयनित शहरों के मध्य असीमित संख्या में दोनों देशों की एयरलाइनों की उड़ान,शोध क्षमता और शोध निष्कर्षों की प्रभावशीलता बढ़ाने हेतु समझौता, यूनिवर्सिटी ऑफ त्कुसुबा एकेडमिक थिंक टैंक पर काम करेगी इत्यादि।
भारत जापान के मध्य 12 वां वार्षिक शिखर सम्मेलन बेहद अहम रहा क्योंकि इस सम्मेलन में दोनों देशों ने एशिया और एशिया के बाहर अपने रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की बात कही ।जापानी प्रधानमंत्री भारत के साथ रिश्तों को और अधिक मजबूत करने हेतु काफी उत्सुक दिखे।उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को कुछ इस प्रकार कहा - जापान का जेए और इंडिया का आई मिलकर' जय' बनता है। अर्थात जय जापान और जय भारत की बात की जिससे दोनों देशों के मध्य बने मजबूत रिश्तों की झलक दिखती है।जापानी प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ताकतवर जापान भारत के हित में है और ताकतवर भारत जापान के हित में है।इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के संबंध भविष्य में और मजबूत होगें।दोनों देशों के मध्य भारत और जापान के अतिरिक्त वैश्विक मुद्दों पर भी वार्ता हुई। जैसे आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, उत्तर कोरिया आदि। साझा घोषणा पत्र में पाकिस्तान को पठानकोट और मुंबई हमले के दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही गई और उत्तर कोरिया द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की निंदा भी की गई है।

 भारत और जापान के संबंध तो काफी प्राचीन है और हमेशा से मधुर रहे है। कुछ मामलों को छोड़ दिया जाए जैसे भारत ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया तो दोनों के मध्य संबंधो में खटास आई क्योंकि जापान निःशस्त्रीकरण का समर्थक है।ध्यातव्य हो कि भारत ने परमाणु परीक्षण शांतिपूर्ण उद्देश्यों हेतु किया था। जिसका सिद्धांत ही नो फर्स्ट उपयोग पर आधारित है।जापान भी इस बात को समझा और धीरे धीरे भारत के नज़दीक आते चला गया। भारत में दिल्ली मेट्रो का निर्माण जापान के सहयोग से ही हुआ है जो वर्तमान में दिल्ली की जीवन रेखा बनी हुई है।भारत में जापान की 1200 से ऊपर कंपनियां कार्यरत है।जिसमें 80 कंपनियां गुजरात में कार्यरत है।
हाल के कुछ वर्षों में जापान ,भारत के बेहद करीब आया है।उसको इस प्रकार समझा जा सकता है।
ध्यातव्य हो कि जापान और भारत के मध्य 11 नवंबर 2016 को असहयोग परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर होना भारत के लिहाज से मील का पत्थर है क्योंकि इससे भारत में जापानी कंपनियों के परमाणु रिएक्टर स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया।वैसे तो भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की प्राप्ति हेतु अमेरिका से भी असैन्य परमाणु समझौता किया है लेकिन उसको यर्थाथ के धरातल पर उतरने में व्यावहारिक कठिनाई थी क्योंकि भारत ने जिन अमेरिकी कंपनियों से असैन्य परमाणु समझौता किया है ,उनको भी जापानी कंपनियां ही तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराती है।इस प्रकार देखा जाए तो भारत- जापान और भारत -अमेरिका के मध्य हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौता एक दूसरे के पूरक है।जापान का भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग करना ,भारत पर विश्वास को ही प्रदर्शित करता है क्योंकि भारत ने एन.पी.टी पर हस्ताक्षर नहीं किया है।
हाल के दिनों में जापान भारत के डोकलाम रुख का सर्मथन किया ।दरअसल डोकलाम सिक्किम, तिब्बत और भूटान के तिराहे पर स्थित वो स्थान है जहाँ पर चीन अपनी महत्ताकांक्षी नीतियों के कारण सड़क का निर्माण करना चाह रहा था ,लेकिन मजे की यह थी कि डोकलाम भूटान का भूभाग है।भूटान सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने इस मुद्दे पर दखल दिया तो भारत और चीन की सीमा 73 दिनों तक आमने सामने खड़ी रही।जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की काफी आलोचना हुई।कई देशों ने भारत के रुख का समर्थन किया जिसमें जापान भी एक था जिसके कारण चीन ,जापान से चिढ़ गया था।अंत में चीन को डोकलाम से सैनिकों को हटाना ही पड़ा।
वर्तमान में दक्षिण चीन सागर जो विश्व समुदाय के समक्ष ज्वलंत मुद्दा चीन की नीतियों के कारण बना हुआ है। उस पर भी भारत और जापान एक रुख रखते है।इसी कारण भारतीय प्रधानमंत्री के जापान दौरे के समय दोनों प्रधानमंत्रियों के मध्य इस मसले भी बातचीत हुई थी जिससे चीन चिढ़ गया।चीन का कहना था कि जापान पूर्वी सागर में स्थित है ।ऐसे में पडोसियों के मामले में यह हस्तक्षेप है।चूंकि दक्षिण चीन सागर प्रमुख वैश्विक व्यापारिक मार्गों में से एक है ऐसे में भारत और जापान संयुक्त राष्ट्र संधि के तहत समुद्री कानून पर आधारित निर्बाध नौवहन की स्वतंत्रता की वकालत करते है।
वर्तमान में चीन जिस प्रकार एशिया में अपना दबदबा बढ़ाने में लगा हुआ है एशिया में शांति स्थापित करने हेतु चीन को प्रतिसंतुलित करना आवश्यक हो जाता है क्योंकि इस क्षेत्र में चीन का एकतरफा अत्यधिक ताकतवर होना एशियाई देशों के हित में नहीं होगा। इस प्रकार चीन कारक भी जापान और भारत को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।चीन के प्रभुत्व को कुछ उदाहरणों से समझा जा सकता है।जैसे अंर्तराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले का उल्लंघन कर चीन ने लगातार दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों का निर्माण जारी रखा और हाल के दिनों में मिसाइलों की तैनाती से लेकर सिनेमा हॉल का निर्माण किया।हाल के दिनों में उत्तर कोरिया ने कई परमाणु परीक्षण किए।कोई मिसाइल जापान के ऊपर होकैडो से गुजरी ,तो कोई जापान सागर में गिरी।उत्तर कोरिया संकट के पीछे चीन और रूस की मौन सहमति भी रही।
वर्तमान में विश्व के समक्ष आंतकवाद, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा की प्राप्ति जैसे मुद्दों पर भी दोनों देश एक ही प्रकार का रुख रखते है।ज्ञात हो कि जापान समुद्र में द्वीपों पर बसा हुआ देश है जिसके ऊपर भी ग्लोबल वार्मिंग का खतरा है।ग्लोबल वार्मिंग की समस्या संपूर्ण विश्व हेतु खतरे की घंटी है।इसके कारण उष्णकटिबंधीय तूफानों की आवृत्ति में काफी वृद्धि देखी गई है।जैसे हाल में हार्वे और इरमा उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान अमेरिकी महाद्वीप के समक्ष संकट बना हुआ है और काफी जान माल को नुकसान पहुंचाया है लेकिन समुद्री द्वीपों के साथ एक समस्या यह भी है कि यदि समुद्री जलस्तर में भविष्य में बढ़ोत्तरी होगी तो उनके डूबने का भी खतरा है अर्थात उस राष्ट्र के अस्तित्व पर ही गंभीर खतरा है।
प्रधानमंत्री शिंजो अबे की भारत यात्रा से बहुध्रुवीय विश्व मेें भारत जापान के आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संंबंधो को और मजबूती मिलेगा और उम्मीद है कि दोनों देश दीर्घकाल तक एक दूसरे के साथ घनिष्ठता बनाए रखेंगें और सतत विकास के पथ पर अग्रसर रहेंगे।


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-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ)


उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच टकराव में लगातार वृद्धि हो रही है।
कल संंयुक्त राष्ट्र को संबोधित करतेे हुए ट्रंप ने धमकी दी कि यदि उत्तर कोरिया नहीं सुधरता है तो अमेरिका संपूर्ण उत्तर कोरिया को नस्तनाबूत कर देगा।इससे एक दिन पूर्व सोमवार 18 सितंबर को उत्तर कोरियाई आसमान में अमेरिका ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया।उत्तर कोरिया के 3 सितंबर के हाइड्रोजन बम परीक्षण के जवाबी कार्यवाई के रुप में इसे देखा जा रहा है।आज शक्ति प्रदर्शन करते हुए अमेरिका ने 4 F-35 बी फाइटर जेट और दो बी-1बी बम वर्षक विमानों के साथ उड़ान भरे।एफ-35 बी फाइटर जेट और दो बी-1बी बम वर्षक विमानों ने प्रायद्वीप के ऊपर उड़ान भरे।इस दौरान दक्षिण कोरियाई एफ-15 बमवर्षक विमानों ने भी हमले में साथ देने का अभ्यास किया।स्टील्थ विमान अपनी विशिष्ट बनावट के चलते रडार की पकड़ में नहीं आते हैं।टकराव के बढ़ते खतरे के बीच चीन और रूस की नौसेनाओं ने सोमवार से क्षेत्र में अभ्यास शुरू कर दिया।इस घटनाक्रम से ही कोरियाई प्रायद्वीप के अभूतपूर्व तनाव को समझा जा सकता है।इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के तमाम प्रतिबंधों और वैश्विक लामबंदी को धता बताते हुए उत्तर कोरिया ने शुक्रवार 15 सितंबर को फिर से बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया।यह मिसाइल जापान के होकाइडो द्वीप के ऊपर से होती हुई उसके पूर्व में दो हजार किमी दूर प्रशांत महासागर में गिरी।शुक्रवार सुबह अचानक जापान के होकाइडो द्वीप पर अफरातफरी मच गई।खतरे के सायरन बजने के बाद लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।सबसे महत्वपूर्ण यह है कि 11 सितंबर को ही उत्तर कोरिया पर सबसे कठोर प्रतिबंध लगाने के बाद उत्तर कोरिया ने प्रत्युत्तर के तौर पर यह कार्यवाई करते हुए अमेरिका को यह संकेत दिया कि वह अमरीकी द्वीप गुआम पर हमला करने में सक्षम है।इस घटना के एक दिन पूर्व ही उत्तर कोरिया ने जापान को परमाणु हमला कर डुबा देने तथा अमेरिका को राख में तब्दील कर देने की धमकी भी दी थी।
इस मामले की गंभीरता को इससे ही समझा जा सकता है कि बैलस्टिक मिसाइल के परीक्षण करते ही शुक्रवार मध्य रात्रि को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाकर उत्तर कोरिया के इस कार्यवाई के लिए चेतावनी दी गई।लेकिन इस महत्वपूर्ण घटना पर सबसे चिंतित करने वाली स्थिति यह है कि उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण पर महाशक्तियाँ स्पष्टतः विभाजित हो चुकी हैं।ज्ञात हो कि 11 सितंबर को महाशक्तियों ने एकजुट होकर उत्तर कोरिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया था।अमेरिका ने कहा है कि उत्तर कोरिया को समझाने की जिम्मेदारी रूस और चीन की है।लेकिन चीन ने कहा है कि अमेरिका अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है,जबकि रूस ने अमेरिका के ही बयान की निंदा की है।वहीं उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच काफी तीखी बयानबयाजी हुई है।शनिवार को उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह उत्तर कोरिया को आँख दिखाने की कोशिश नहीं करे,क्योंकि सैन्य लिहाज से वह भी अमेरिका के बराबर पहुँच गया है।साथ ही किम जोंग उन ने कहा है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम को पूरा किए बिना रुकने वाला नहीं है।तमाम अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद भी उत्तर कोरिया का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरा होने वाला है।वहीं शनिवार 16 सितंबर को ही ट्रंप ने उत्तर कोरिया एवं उसके सहयोगियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उत्तर कोरिया पर सैन्य कार्यवाही पर भी विचार किया जा रहा है।प्योगयांग पर हमला बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि आसमान में हमारे विमानों से शत्रु कांपते हैं।जब दुश्मन आसमान में एफ-35 इंजन की आवाज सुनते हैं,तो केवल डरते नहीं हैं अपितु एफ -35 की गर्जना से शत्रुओं की आत्मा तक कांप जाती है और उन्हें पता चल जाता है कि अब हिसाब किताब लिखने का दिन आ गया।उत्तर कोरियाई हाइड्रोजन बम विस्फोट के बाद मिसाइल परीक्षण और चेतावनियों के इन दौरों से संपूर्ण विश्व में खलबली मच गई है।
वहीं उत्तर कोरिया की सैन्य तैयारियों को देखते हुए इसी माह अमेरिका अपने मित्र देशों दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मिलकर मिसाइल चेतावनी व्यवस्था को बेहतर बनाने का अभ्यास करेगा।यह अभ्यास अक्टूबर तक चलेगा।ट्रंप उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य कार्यवाई को विचारणीय विकल्प बताते हैं,जबकि रूस और चीन टकराव टालने के लिए बातचीत को श्रेष्ठ विकल्प मानते हैं।लेकिन उत्तर कोरिया अब तक इस संपूर्ण मामले में किसी को भी सुनने के लिए तैयार नहीं है।वह इसे आत्मरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बता रहा है।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिर उत्तर कोरिया का गहराता संकट किस ओर जा रहा है?क्या इस संपूर्ण मामले में कूटनीति की भूमिका घटती जा रही है?
कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु संकट को टालने के लिए भारतीय समयानुसार मंगलवार सुबह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर अब तक का सबसे कठोर प्रतिबंध प्रस्ताव संख्या 2375 के द्वारा लगाया है।इन प्रतिबंधों के कठोरता को इससे ही समझा जा सकता है कि इसके समुचित क्रियान्वयन से उत्तर कोरिया के 90% निर्यात तथा तेल आपूर्ति पर 30% की कटौती हो सकेगी।लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सुरक्षा परिषद में चीन और रूस के दबाव में अमेरिका ने पहले के जो कठोरतम प्रतिबंध का प्रस्ताव दिया था,उसमें संशोधन करते हुए प्रतिबंधों में कई छूट दी। इसमेें किम जोंग उन के परिसंपत्तियों को जब्त करने और उनके यात्रा प्रतिबंध को वापस लिया जाना शामिल है।इसके अतिरिक्त तेल आयात पर पूर्व प्रस्ताव में 80% कटौती होती,लेकिन अब लगभग 30% कटौती होगी।अब प्रश्न उठता है कि क्या अमेरिका के पूर्व प्रस्ताव से नरम रुख रखने वाले इस आर्थिक प्रतिबंधों से विश्व को परमाणु संकट से बचाया जा सकेगा?क्या इसके कारण उत्तर कोरिया अब नए परमाणु अथवा मिसाइल परीक्षण नहीं करेगा?ये प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि क्योंकि इससे पहले पिछले माह 5 अगस्त को भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाए थे,जबकि प्रतिक्रिया में उत्तर कोरिया ने 3 सितंबर को हाइड्रोजन बम का परीक्षण ही कर लिया।इसके बाद कोरियाई प्रायद्वीप में अब भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।स्थिति के गंभीरता को इससे ही समझा जा सकता है कि अमेरिका दक्षिण कोरिया में "थाड" डिफेंस सिस्टम की तैनाती में लगा हुआ है।जापान,दक्षिण कोरिया और अमरीकी द्वीप गुआम में लोगों को परमाणु हथियारों से बचाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।उत्तर कोरिया ने सीमावर्ती क्षेत्रों में एंटी बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती की है।वहीं अमेरिका भी लगातार कोरियाई क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाता जा रहा है।
15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद मेंं सर्वसहमति से कोरिया प्रतिबंध के प्रस्ताव के पारित होने पर
प्रथमदृष्टया तो ट्रंप के कूटनीतिक जीत की पुनरावृत्ति दिखती है,परंतु जिस तरह सुरक्षा परिषद में मतदान पूर्व अमेरिका ने कई प्रस्तावित प्रतिबंधों को वापस लिया,उससे चीन और रूस के महत्वपूर्ण स्थिति को समझा जा सकता है।मंगलवार के सबसे कठोर आर्थिक प्रतिबंध के महत्वपूर्ण घटक हैं-तेल आयातों तथा टैक्सटाइल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध,उत्तर कोरियाई विदेशी श्रमिकों के अतिरिक्त कॉन्ट्रैक्ट पर रोक,उत्तर कोरियाई स्मगलिंग तथा उत्तर कोरिया के साथ संयुक्त उद्यम पर रोक इत्यादि।जैसा मैंने पहले ही कहा था कि इसमें अमेरिका ने चीन और रूस को संतुष्ठ करने के लिए पूर्व प्रस्ताव में कई बदलाव किए ।अब इन बदलावों तथा इनके प्रभावों को देखते हैं।
उत्तर कोरिया ने मंगलवार 19 सितंबर को चेतावनी देते हुए कहा है कि ज्यादा प्रतिबंधों और दबाव से उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा अपितु वह अपने परमाणु कार्यक्रमों को और गति प्रदान करेगा।उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट के नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है।उत्तर कोरिया ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के नए प्रतिबंध विद्वेषपूर्ण, अनैतिक, अमानवीय और शत्रुतापूर्ण कदम है।उत्तर कोरिया का स्पष्ट कहना है कि वह इन दबावों के आगे नहीं झुकने वाला।

इस संपूर्ण मामले में आखिर अमेरिका इतना कमजोर क्यों नजर आ रहा है??
चाहे उत्तर कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे महाद्वीपीय मिसाइल परीक्षण हो या हाइड्रोजन बम परीक्षण इसने संपूर्ण दुनिया में दशहत पैदा किया है ।एक तरह से उत्तर कोरिया जहाँ मिसाइल एवं परमाणु परीक्षणों के साथ अपने क्षमता में वृद्धि कर रहा है,वहीं उसका यह पैटर्न 1960 के दशक वाला ही है।इस पैटर्न के अंतर्गत उत्तर कोरिया युद्ध उन्माद भड़काता भी रहा है और शक्ति संतुलन की ओर भी अग्रसर हो रहा है।
उत्तर कोरिया का दावा है कि अब उसके मिसाइलों के दायरे में अमेरिका भी है।माना ज उत्तर कोरिया की जद में में अमेरिका का अलास्का आया है।अलास्का का आना प्रतीकात्मक और व्यवाहरिक दोनों कसौटियों पर स्पष्ट रुप से गेमचेंजर है।पहली बार जुलाई 2017 में अमरीकी राष्ट्रपति ने भी इसे स्वीकार करते हुए कहा कि "उत्तर कोरिया संकट वास्तविक और वर्तमान"खतरा है।"यह खतरा न केवल उत्तर पूर्वी एशिया और अमेरिकी मित्रों के लिए खतरा है बल्कि स्वयं अमेरिका के लिए भी खतरा है।इस संपूर्ण मामले में ट्रंप केवल चेतावनी देते नजर आए ,जबकि अपनी रक्षात्मक तैयारी भी नहीं की।

यूएसए का विन्सन कार्ल बैटल की तैनाती भी उत्तर को डरा नहीं पाया-
ट्रंप ने उत्तर कोरिया से निपटने के लिए कोरियाई प्रायद्वीप में शुरुआती कदम के तहत जहाजी बेड़े की तैनाती की।इसके अंतर्गत ट्रंप ने यूएसएस विंसन कार्ल ग्रुप को तैनात किया।इसकी तैनाती का कोई गौरवशाली इतिहास भी नहीं रहा है।यही कारण रहा कि इसके तैनाती से ट्रंप उत्तर कोरिया को डराने में पूर्णतः विफल रहा।वास्तव में अमेरिका दुनिया सबसे शक्तिशाली देश है,जबकि उत्तर कोरिया बिल्कुल छोटा- सा देश है।परंतु उत्तर कोरिया में अमेरिका का कोई भय नहीं दिखना ही ट्रंप की सबसे बड़ी समस्या है।


अमेरिका के लिए युद्ध के विकल्प का चयन करना आसान नहीं---
वास्तविकता यह है कि अमेरिका के पास उत्तर कोरिया के खिलाफ तत्काल कदम उठाने के सीमित विकल्प हैं।उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य कार्यवाई भी आसान नहीं है।अंतत: वह अब परमाणु शक्ति संपन्न देश बन चुका है।रिपब्लिकन सीनेटर्स जॉन मैक्केन और लिंडसे ग्राहम की युद्धकारी सिफारिशों के बावजूद अमेरिका के लिए युद्ध का जोखिम उठाना आसान नहीं है।उत्तर कोरिया पर प्रथमत: सैन्य कार्यवाई का विकल्प चयन ही कठिन है।साथ ही इस विकल्प के चयन के बाद कोरियाई प्रायद्वीप युद्ध के समय की स्थितियाँ अमेरिका के नियंत्रण में रहे,यह भी काफी मुश्किल है।

कोरिया संकट में अमेरिका के लिए कूटनीतिक विकल्प भी सीमित हैं---
3 सितंबर के हाइड्रोजन बम परीक्षण के बाद 13 सितंबर को उत्तर कोरिया पर लगा आर्थिक प्रतिबंध भी बेअसर रहा।उत्तर कोरिया अब तक संयुक्त राष्ट्र के कई प्रतिबंधों के बीच भी मिसाइल और आणविक तकनीक में प्रगति करता रहा है।ये प्रतिबंध उत्तर कोरिया को अभी भी रोकने में सक्षम नहीं हैं,जब तक चीन और रूस का समर्थन उसे प्राप्त है।उत्तर कोरिया का पूर्ण प्रयास होगा कि वह जल्द से जल्द परमाणु शक्ति संपन्न देश के दर्जे के बाद अमेरिका से वार्ता के टेबल पर जाए।वास्तव में इन प्रतिबंधों के बाद उत्तर कोरिया अपने परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रमों को और गति प्रदान करेगा।अमेरिका ने स्वयं रूस पर कई प्रतिबंध लगाएं है,ऐसे में रूस क्या इस अमरीकी इच्छा वाले प्रतिबंध को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करेगा??इसके साथ ही इस प्रतिबंध में उत्तर कोरिया के अधिकृत 90 % निर्यात को रोकने का प्रावधान है।उत्तर कोरिया 2006 से संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।इसलिए संभव है कि उसने निर्यात के कई बड़े घटकों को प्राधिकृत रूप से नहीं दिखाया हो।ऐसे में वे उत्पाद भी प्रतिबंध से बाहर रह सकते हैं।इससे स्पष्ट है कि आर्थिक प्रतिबंध जैसे कूटनीतिक विकल्प भी अमेरिका के पास नहीं रहे।
इसके अतिरिक्त कूटनीतिक वार्ता का विकल्प भी काफी सीमित है।यहाँ बातचीत भी पूर्णतः एकतरफा होती है।अभी हालात भी उत्तर कोरिया के पक्ष में है,ऐसे में वह अमेरिका के साथ बात क्यों करेगा।जैसा मैंने पहले भी कहा है कि उत्तर कोरिया अपने शक्तियों मेंं यथोचित वृद्धि करके ही वार्ता के लिए तैयार होगा।उत्तर कोरिया लगातार अपने सैन्य आधुनिकीकरण में संलग्न है।

लगातार मिसाइल परीक्षणों तथा परमाणु परीक्षणों से आत्मविश्वास में उत्तर कोरिया--
उत्तर कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे परमाणु एवं मिसाइल परीक्षणों से तानाशाह किम जोंग उन का हौसला और भी बुलंद हुआ है।उत्तर कोरिया को जोखिम उठाने का साहस मिला है।ऐसे में सैन्य अस्थिरता बढ़ेगी।यहाँ सैन्य अस्थिरता बढ़ने का मतलब है कि अनुमान के उलट परिघटनाओं का सामने आना।इससे अमेरिका को बेहद अरूचिकर दशाओं का सामना करना पड़ सकता है।साथ ही अमेरिका को भी बार-बार यह लग रहा है कि उत्तर कोरिया बातचीत की सभी संभावनाओं को स्वयं खत्म कर रहा है।अगर ऐसे में ट्रंप इस मामले को अभी टालने अथवा नजरअंदाज करने का प्रयास करते हैं तो संभव है कि अभी तत्काल अमेरिका इस संकट से बाहर जा सकता है,परंतु इससे दीर्घकाल में समस्या और भी गंभीर बन जाएगी,जिसे सुलझाना अभी से भी कई गुणा कठिन होगा।

क्या अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासोंपर चीन और रूस का जमीनी समर्थन मिलेगा??
चीन और रूस ही उत्तर कोरिया के सबसे बड़े व्यापार साझीदार हैं।उत्तर कोरिया का 89% व्यापार चीन के साथ है,जबकि रूस द्वितीय सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है।दोनों ही देश उत्तर कोरिया में तेल सप्लाई करते हैं और इन दोनों के पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो की शक्ति शामिल है।रूसी राष्ट्रीय पुतिन का कहना है कि उनका देश उत्तर कोरिया को 40 हजार टन तक ही तेल की सप्लाई करता है,जो कि बहुत ही कम मात्रा है।उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया पर और अधिक प्रतिबंध लगाना कोई उपाय नहीं है।उन्होंने कहा था,"उत्तर कोरिया घास खाकर गुजारा कर लेगा,लेकिन अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा।पुतिन ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की आलोचना करते हुए भी उसका बचाव करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के लोग इराक में सद्दाम हुसैन के कथित हथियार बढ़ाने के कार्यक्रम को लेकर उस पर हुए अमरीकी हमलों को नहीं भूले हैं और इसलिए उन लोगों को लगता है कि अपनी सुरक्षा के लिए उसे परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाना होगा।चीन और रूस दोनोंं ने ही सुरक्षा परिषद में इसे पूर्ण समर्थन दिया है,लेकिन जमीनी स्तर पर समर्थन देंगे,इसकी संभावना कम ही है।
लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन और रूस ने जन दबाव में इस कठोर प्रतिबंध का समर्थन
किया है,तब भी वास्तव में वे क्या इसे क्रियान्वित करेंगे?यह मूल प्रश्न अब भी बना हुआ है।पिछले बार के कठोर प्रतिबंधों के असफल होने के कारण यही रहा कि आंतरिक तौर पर उत्तर कोरिया को रूस और चीन का समर्थन प्राप्त रहता है।यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों एवं वैश्विक गोलबंदी के बावजूद उत्तर कोरिया अनियंत्रित ही है।वास्तव में जब तक महाशक्तियाँ अपने स्वार्थों से अलग होकर निशस्त्रीकरण जैसे मामलों पर गंभीर नहीं होंगे,तब तक कोरियाई संकट का समाधान संभव नहीं है।

 

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-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ)

मैक्सिको सिटी में कल देर रात शक्तिशाली भूकंप के झटकें आए,जिसमें 2 करोड़ की आबादी वाला यह शहर थर्रा उठा।32 वर्ष पूर्व भी 19 सितंबर 1985 को इसी दिन मेक्सिको का सबसे भयंकर भूकंप आया था।32 साल बाद फिर से भूकंप के तबाही का खौफनाक मंजर मैक्सिको सिटी में फैला हुआ है।अब तक 275 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।काफी इमारतों जमींदोज हो गई हैं।राहतकर्मी मलबों में जीवित बचे लोगों को तलाश रहे हैं।मृतकों की संख्या और भी वृद्धि होने की पूरी संभावना है।रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता के इस भूकंप के बाद मैक्सिको सिटी के अतिरिक्त मोरलियोस और पुएब्ला प्रांतों में भारी तबाही मचाई है।भूकंप का केन्द्र पूएब्ला प्रांत के मध्य में 52 किमी नीचे था।भूकंप के बाद कई मकानों में भयानक आग की लपटें भी देखी गई।इस तरह लोगों को भूकंप के दौरान आग से संघर्ष करते हुए भी देखा गया ।भारतीय समयानुसार भूकंप रात 11:45 में आया था।इसके पूर्व 8 सितंबर को भी दक्षिणी मैक्सिको में भूकंप आया था,जिसमें 90 लोग मारे गए थे।ऐसे में सवाल उठता है कि अगर भारत में इस तरह के भूकंप आते हैं,तो हम इनसे निपटने के लिए कितना तैयार हैं??

भारत भूकंप के लिए कितना तैयार?
भूकंप के विनाशलीला की कल्पना मात्र से ही दिल दहलने लगता है।अभी काठमांडू के भूकंप के हादसों के दृश्य मन मस्तिष्क से हटा भी नहीं था कि आज टीवी पर मैक्सिको के भूकंप के खतरनाक दृश्यों के बाद पुन: सवाल उठता है कि हम भूकंप के लिए कितने तैयार हैं?भूकंप को हम रोक नहीं सकते लेकिन जापान के तरह भूकंप से बचने के प्रयास तो कर ही सकते हैं।हिमालय पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई वाला और जोशीमठ से ऊपर वाला हिस्सा ,उत्तर पूर्व में शिलांग ,कश्मीर और कच्छ व रण का इलाका भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जोन-5 में आते हैं।इसके अलावा राजधानी दिल्ली,जम्मू और महाराष्ट्र तक का देश का काफी बड़ा हिस्सा भूकंपीय जोन-4 में आता है,जहाँ भूकंप का गंभीर खतरा सदैव बना ही रहता है।भुज,लातूर इत्यादि के भूकंपों से लगा था कि भारत भूकंप को लेकर गंभीर होगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ।देश की राजधानी दिल्ली समेत सभी महानगरों में गगनचुंबी इमारतों की श्रृंखला शुरू हो गई।आज देश के महानगर कंक्रीट के जंगल में बदल गए हैं।इनमें से 2% ही भूकंपरोधी तकनीक से बनाई गई है। यहाँ पर निर्माण में नियम कानूनों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन हुआ है।यही बहुमंजिली इमारतें भूकंप आने के स्थिति में व्यापक जन हानि का कारण बनते हैं।
मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहर भूकंपीय जोन-3 में आते हैं,लेकिन दिल्ली न केवल जोन-4 में है,अपितु हिमालय के निकट भी है,जो भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना था।दिल्ली में तो 70-80% इमारतें भूकंप का औसत से बड़ा झटका झेलने में सक्षम नहीं है।यमुना नदी के पूर्वी और पश्चिमी तट पर स्थिति और भी गंभीर है,क्योंकि यहाँ की मिट्टी बहुत ढीली है।दिल्ली में अगर रिक्टर 7 स्केल का भूकंप आया तो भारी नुकसान हो जाएगा।वैसे भी दिल्ली से थोड़ी दूर स्थित पानीपत इलाके के पास भूगर्भ में फॉल्ट लाइन है,जिससे भूकंप की संभावनाएं और तीव्र ही होती है। इसके अतिरिक्त दिल्ली में पुराने जर्जर मकान काफी समीप-समीप बने हुए हैं।अगर एक इमारत गिरती है तो ,तो कई अन्य इमारतों को भी गिरा देगी।
इसी तरह पर्वतीय इलाकों में बने अवैध निर्माण भी भूकंप के विनाशलीला को बढ़ाने वाले हैं।प्राय: ये पर्वतीय अवैध निर्माण बाढ़ और भूकंप के त्रासदी में विनाशलीला को व्यापक बनाते हैं। हमारे यहाँ अशिक्षा,गरीबी,बढ़ती आबादी के आलम में आधुनिक निर्माण संबंधी जानकारी,जागरूक व जरूरी कार्यकुलता का अभाव है।इससे जनजीवन की हानि का जोखिम और बढ़ गया है।भूकंप संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आवश्यक है कि भवन निर्माण से पहले भूकंपरोधी इंजीनियरिंग निर्माण दिशा-निर्देशिका का अध्ययन करें व भवन निर्माण इसी के आधार पर करें।इसमें मात्र 5 फीसदी ही अधिक धन खर्च होगा।
भूकंप जैसे संकट के बचाव का सर्वश्रेष्ठ माध्यम पहले से उसकी तैयारी है।हमें इसके सबसे पहले सरवाइवल किट तैयार करना चाहिए।भूकंप आने पर सबसे पहले सुरक्षित क्षेत्र की ओर जाना चाहिए ।अगर ऐसा संभव नहीं हो तो दरवाजे के चौखट के सहारे बीच में,पलंग मेज के नीचे छिप जाए,जिससे ऊपर से गिरने वाले मलवा से बच सकें।यदि वाहन पर सवार हैं तो उसे सड़क के किनारे खड़ा कर खतरा टलने तक इंतजार करें।
भारत ,जापान से बुलेट ले रहा है,उससे भी ज्यादा आवश्यक है कि हम जापान से भूकंप से बचाव करना सीखें।कई बार जापान में रिक्टर स्केल -8 की तीव्रता में भी जान माल को कोई नुकसान नहीं होता।वहीं भारत में इसी तीव्रता के भुज के भूकंप में क्या हुआ था,हम लोग जान ही रहे हैं।अगर दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ हमलोग चक्रवात से निपट सकते हैं,तो भारत इसी सफलता को भूकंप में भी दोहरा सकता है।यद्यपि भूकंप का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता,लेकिन भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों पर आवश्यक तैयारी की जा सकती है।


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नई दिल्ली - मुंबई में आज फिर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। अगले 24 घंटों में मायानगरी में भयावह बारिश होगी। मौसम विभाग ने 12 बजे हाई टाइड का अलर्ट जारी किया है। कल रात से बारिश की वजह से स्कूल-कालेज बंद का ऐलान किया गया था और आज रेल व हवाई सेवा पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।
शहर के कई इलाकों में पानी भर गया है। छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल टर्मिनल में भी विमानों की सेवा पर असर पड़ा है। मुंबई एयरपोर्ट का मेन रनवे बंद है, 56 विमानों को डायवर्ट किया गया है, दूसरा रनवे चालू कर दिया गया है। वेस्टर्न रेलवे की सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, सेंट्रल रेलवे की कई ट्रेनें कैंसल कर दी गई है। मुंबई से दिल्ली आने वाली 13 फ्लाइट देर से चल रही है और 15 फ्लाइट कैंसल हो गई है।
मौसम विभाग के अफसर अजय कुमार ने कहा, आज 24 घंटे बारिश होगी लेकिन फिर बारिश में नरमी आएगी, लेकिन हल्की बारिश होती रहेगी।
आईएमडी मुंबई के मुताबिक अगले 24 घंटे में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार रात को घोषणा की थी कि मुंबई में बुधवार को भारी बारिश होगी और मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) में स्कूलों और कॉलेज बंद रहेंगे।
मुंबई के बोरिवली, कांदिवली, अंधेरी, भांडुप और दक्षिणी मुंबई में देर रात तक तेज बारिश हो रही थी। इससे पहले महानगर में 29 अगस्त को 300 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। परिवहन सेवा बुरी तरह प्रभावित हो गई थी और जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया।

 


चंडीगढ़ - पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को रेयान समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेयान पिंटो, उनके पिता एवं संस्थापक अध्यक्ष आगस्टिन पिंटो और उनकी मां एवं समूह की प्रबंध निदेशक ग्रेस पिंटो ने अग्रिम जमानत पर सुनवाई करते हुए कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पिंटो परिवार को गिरफ्तारी से कोई राहत नहीं दी जा सकती है। इससे पहले हाईकोर्ट के न्यायाधीश ए बी चौधरी ने मंगलवार को खुद को इस मामले से अलग कर लिया था।
हाईकोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है और इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है। वहीं प्रद्युम्न के परिवार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील ने बताया कि इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी। कोर्ट ने कहा है कि ये गंभीर मामला है और बिना सभी पक्षों को सुने बिना फैसला नहीं लिया जा सकता है।
आपको बता दें कि पिंटो परिवार ने पिछले हफ्ते हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को रेयान ट्रस्ट्रियों के वकील अर्शदीप सिंह चीमा ने कहा, इस मामले को सुनवाई के लिए किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। अग्रिम जमानत याचिका 16 सितंबर को हाईकोर्ट रजिस्ट्री में दायर की गई थी लेकिन मामले में अदालत रजिस्ट्री द्वारा जताई गईं कुछ आपत्तियों को हटाए जाने के बाद इसे फिर से दायर किया गया था।
बंबई हाईकोर्ट ने बच्चे की हत्या के संबंध में रेयान समूह के तीनों न्यासियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं 14 सितंबर को खारिज कर दी थीं सात साल के प्रद्युमन की हत्या के मामले में स्कूल पर लापरवाही का आरोप लगाया गया था। इसके बाद मुंबई में रहने वाले पिंटो परिवार ने गिरफ्तारी की आशंका के कारण बंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। स्कूल के कक्षा दो के छात्र प्रद्युमन की आठ सितंबर को स्कूल के शौचालय में गला रेत कर हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में स्कूल बस के कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार किया गया है।


लखनऊ - समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि प्रदेश सरकार का श्वेत पत्र सफेद झूठ है। इसे पहले एक माह के अंदर ही आना था लेकिन तैयार करने में छह माह लग गए। सरकार की 6 माह की उपलब्धियों का बखान भी धोखा है। किसानों के साथ इससे बड़ा धोखा नहीं हो सकता। किसान, सरकार का दिया प्रमाणपत्र फाड़ रहे हैं।
अखिलेश ने कहा, देर रात तक प्रेजेंटेशन देखने वाले सीएम और उनके मंत्रियों को एक बार प्रमाणपत्र भी देख लेना चाहिए था। पूर्व सीएम अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि सरकार में पिछड़ी जाति के भी एक उप मुख्यमंत्री हैं। वह हर बार पिछड़ ही जाते हैं। एक बार उन्होंने एनेक्सी में अपने नाम का बोर्ड लगवा दिया था जिसे उखड़वा दिया गया। यह बात भी श्वेत पत्र में आनी चाहिए थी।
अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि मैंने गोरखपुर में 500 बेड के अस्पताल का निर्माण शुरू कराया था। मुख्यमंत्री अपने जिले के इस अस्पताल को ही नहीं पूरा करवा पा रहे हैं।
अखिलेश ने कहा, शिक्षा मित्र इससे पहले कभी अपमानित नही हुए होंगे जितना इस सरकार में हुए हैं। हमने 18 लाख लैपटॉप बांटे हैं। आप बच्चों से पूछो कि क्या हमने जाति के आधार पर लैपटॉप बांटे। बीजेपी के लोग सिर्फ आरोप लगा सकते हैं। बीजेपी के लोग दूसरे लोगों का सपना अपनी आंख में देखते हैं।
उन्होंने कहा, गांव में बिजली आ रही है कि नहीं, ये तो सीएम ने बताया ही नहीं है। लखनऊ में ही बिजली कई बार आती और जाती है। इस सरकार में बिजली का कितना कोटा बढ़ा बताइये।


चंडीगढ़ - पंजाब के संगरूर जिले में मंगलवार शाम एक पटाखा गोदाम में जोरदार विस्फोट में कम से कम चार लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य घायल हो गए।
फिलहाल, आग के कारणों का पता नहीं चल पाया है। आग की वजह से विस्फोट हुआ। डीएसपी (दिरबा) योगेश कुमार ने बताया, गोदाम में विस्फोट के कारण इमारत की छत क्षतिग्रस्त हो गयी और उसके मलबे के भीतर कुछ लोग फंसे हो सकते हैं।
उपायुक्त अमर प्रताप सिंह विर्क ने बताया कि विस्फोट में चार लोगों की मौत हो गयी और तीन अन्य घायल हो गए। घायलों को पटियाला अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनमें से एक की हालत गंभीर है।
इससे पहले संगरूर के एसएसपी मनदीप सिंह ने एजेंसी को फोन पर बताया कि दमकल कर्मी मौके पर पहुंच गए हैं और आग पर काबू पाने की कोशिश हो रही है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने संगरूर के उपायुक्त को निर्देश दिया है कि घायलों से अस्पतालों में शुल्क नहीं वसूला जाए और इमारत से लोगों को निकालने के लिए समुचित व्यवस्था की जाए।


नई दिल्ली - भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का नाम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पद्म भूषण अवॉर्ड के लिए प्रस्तावित किया है। धौनी दुनिया के इकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिनकी कप्तानी में टीम ने तीनों आईसीसी ट्रॉफी जीती हों। धौनी ने हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ 300 वनडे खेलने का रिकॉर्ड बनाया था। इसी के साथ वनडे में 100 स्टंपिंग करने वाले वो दुनिया के इकलौते विकेटकीपर भी हैं।
धौनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने 2007 आईसीसी वर्ल्ड टी20, 2011 वर्ल्ड कप और 2013 आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब जीता है। धौनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी पांच मैचों की सीरीज के पहले वनडे में भी एक ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। इस मैच में उन्होंने मुश्किल हालात में पचासा जड़ा, जो उनके करियर का 100वां इंटरनेशनल पचासा था।
तीन आईसीसी ट्रॉफी जिताने वाले इकलौते क्रिकेटर
धौनी की ही कप्तानी में टीम इंडिया टेस्ट में नंबर-1 बना था। उन्होंने 2014 के अंत में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। इसी साल की शुरुआत में उन्होंने वनडे और टी-20 टीम की कप्तानी छोड़ दी थी।
बीसीसीआई के एक अधिकारी के मुताबिक, 'इस फैसले को लेकर बीसीसीआई में कोई मतभेद नहीं था। धौनी की कप्तानी में भारत ने 2011 का वर्ल्ड कप और 2007 का आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी-20 जीता है। धौनी 10,000 वनडे रन के करीब हैं, 90 से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके हैं और इस समय उनसे बेहतर कोई विकल्प हो ही नहीं सकता।' धौनी को इससे पहले भी खेल रत्न, पद्म श्री और अर्जुन अवॉर्ड भी मिल चुका है। अगर धौनी का नाम पद्म भूषण के लिए चुना जाता है, तो वे ये अवॉर्ड पाने वाले 11वें क्रिकेटर होंगे।
धौनी से पहले 10 क्रिकेटरों को मिल चुका है ये सम्मान
धौनी से पहले सचिन तेंदुलकर, कपिल देव, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, चंदू बोर्डे, प्रोफेसर डीबी देवधर, कर्नल सीके नायडू और लाला अमरनाथ को ये सम्मान दिया जा चुका है। धौनी अभी तक 302 वनडे मैच में 9737 रन बना चुके हैं, धौनी का वनडे में औसत 52.34 है। उनके नाम 10 वनडे सेंचुरी हैं।

 


नई दिल्ली - पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास सेना के गश्ती दल पर गोलीबारी की जिसमें एक सैनिक शहीद हो गया। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तानी गोलीबारी का जरूरी और समुचित जवाब दिया जा रहा है। पहले सेना के अधिकारी ने कहा था कि पाकिस्तानी सैनिकों ने सुबह नियंत्रण रेखा पर बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की। घटना में एक सैनिक घायल हुआ है।
घायल हुए जवान को गंभीर हालत में हेलीकॉप्टर से श्रीनगर स्थित अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तानी गोलीबारी का जरूरी और समुचित जवाब दिया जा रहा है। पहले सेना के अधिकारी ने कहा था कि पाकिस्तानी सैनिकों ने सुबह नियंत्रण रेखा पर बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की। टना में एक सैनिक घायल हुआ है। घायल हुए जवान को गंभीर हालत में हेलीकॉप्टर से श्रीनगर स्थित अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

 


हैदराबाद - हैदराबाद पुलिस ने पुलिस ने कॉन्ट्रेक्ट मैरिज कराने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो मध्य पूर्व और खाड़ी देश के पुरुषों के साथ यहां की स्थानीय महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की शादी कराते हैं।
हैदराबाद पुलिस ने पहले भी पुराने नगर क्षेत्र में कई ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ किया है जो जाली दस्तावेजों के जरिए ऐसी शादियां करवाते थे। उन्होंने कहा था कि शादी के वक्त, दुल्हन को तलाक के कोरे बॉन्ड पेपर पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जाता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने इस मामले में 20 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है जिसमें आठ विदेशी नागरिक शामिल हैं। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण मंडल) वी सत्यनारायण ने बताया कि पुलिस ने तीन काजियों (शादी कराने वाले लोग), चार मकान मालिकों और पांच एजेंटों (दलालों) को गिरफ्तार किया है जो इस तरह की शादी संपन्न कराते हैं।
उन्होंने बताया, हमने कॉन्ट्रेक्ट मैरिज (छोटी अवधि की शादी) कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है और अरब, ओमान और कतर के आठ शेखों के स्थानीय लड़कियों से शादी करने के प्रयास को विफल कर दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, दो नाबालिग लड़कियों को छुड़ाया गया। प्राथमिक जांच से सामने आया है कि कॉन्ट्रेक्ट मैरिज पर की गई इन शादियों के जरिए यह लोग कम से कम 20 महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की तस्करी की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा कि गिरोह के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है।

 

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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