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कोरबा। स्कूल में बच्चों को अच्छाई का पाठ पढ़ाया जाता है। संत महात्माओं की जीवनी पढ़ाकर और उनसे जुड़ी फिल्में दिखाकर उनकी नैतिक सोच को मजबूत करने का प्रयास होता है, लेकिन इन दिनों ढोंगी बाबाओं का ऐसा मोहपास फैला हुआ है कि इनके विभिन्न् अपराधों में लिप्त पाए जाने और इसके बाद जेल में सजा काटने के बावजूद इनके प्रति अनुयायियों की अंधश्रद्धा और मोह बना हुआ है।यही नहीं ऐसे लोग बच्चों को भी इनकी अंधश्रद्धा का शिकार बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें स्कूल में बच्चों को एक विवादित तथाकथित संत पर आधारित फिल्म देखने को विवश किया। इसके लिए बकायदा इस सरकारी स्कूल में वीडियो प्रोजेक्टर की व्यवस्था भी की गई थी।जब अभिभावकों को इसके बारे में पता चला और बाबा का वीडियो दिखाए जाने की खबर वायरल होने के बाद आनन-फानन में हेडमास्टर ने स्कूल पहुंचकर यह सब बंद कराया। बताया जा रहा है कि उक्त गांव के सरपंच सहित कई लोग व्यक्तिगत रूप से तथाकथित संत के अनुयायी हैं और उन्होंने उनके जीवन की कहानी को प्रेरक मानकर इसे बच्चों को दिखाना जायज समझा। गौरतलब है कि हरियाणा के तथाकथित संत रामपाल विभिन्न् जघन्य अपराधों में दोषी पाए जाने के बाद जेल की सजा काट रहे हैं। यह वीडियो कोरबा जिले में करतला विकासखंड के शासकीय प्राइमरी स्कूल बरपाली में दिखाया गया है।
बच्चों पर पड़ेगा गलत प्रभाव:-मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि समाज और कानून ने जिसे एक अपराधी के तौर पर जेल की हवा खाने का हकदार माना है, उसी को महिमामंडित करता वीडियो दिखाना बच्चों की मानसिकता पर सीधे तौर पर गलत प्रभाव डालेगा। इससे बच्चों में यह गलत धारणा बनेगी कि कानून अच्छे और निर्दोश लोगों को सजा देता है।
जेल में बंद हैं रामपाल:-विवादित तथाकथित संत रामपाल इन दिनों हरियाणा की एक जेल में बंद है। विभिन्न् आरोपों से घिरकर कानून के शिकंजे में फंस चुके संत रामपाल का वीडियो स्कूल में दिखाया जाना, आयोजकों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। जब स्कूल में वीडियो दिखाने की बात बाहर आई, तो सोशल साइट्स पर आलोचना शुरू हुई। खबर वायरल होने के बाद स्कूल प्रबंधन को जानकारी हुई और वीडियो प्रोग्राम बंद कराया गया।
विभाग को भी नहीं दी सूचना:-शिक्षा विभाग का कहना है कि हेडमास्टर या किसी अन्य ने सूचित नहीं किया था। नियमानुसार स्कूल या परिसर में इस प्रकार का कोई भी आयोजन करने उच्चाधिकारियों से अनुमति लेना या कम से कम उन्हें सूचित करना एक जरूरी प्रक्रिया है, पर ऐसा नहीं किया गया और प्रोजेक्टर लगाकर वीडियो दिखाने की व्यवस्था की गई थी। स्कूल के हेडमास्टर लालसिंह कंवर का कहना है कि वीडियो दिखाने का यह कार्यक्रम शाम के वक्त चल रहा था। डीईओ से सूचना मिलने पर वे रात करीब आठ बजे पहुंचे, जहां स्कूल के बाहर ही वीडियो दिखाया जा रहा था। उन्होंने तत्काल उसे बंद कराया। बताया जा रहा है कि पंचायत की ओर से स्कूल के हेडमास्टर से अनुमति ली गई थी, जबकि शिक्षा विभाग या आला अधिकारियों को सूचित करना जरूरी नहीं समझा गया।बरपाली के प्राइमरी स्कूल में इस तरह का वीडियो दिखाने संबंधी कोई सूचना मुझे नहीं मिली है। अगर ऐसा हुआ है तो हेडमास्टर ने विभागीय अनुमति भी नहीं ली थी। यह हो सकता है कि सांस्कारिक शिक्षा के नाम पर ऐसा किया गया हो। जांच कर संबंधितों पर कार्रवाई करेंगे।

 

नई दिल्ली। फोर्ब्स ने दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले 100 सितारों की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में अक्षय कुमार ने शाहरुख खान और सलमान खान को पछाड़ दिया है। सबसे ज्यादा कमाई करने वाली सूची में अक्षय कुमार और सलमान खान का नाम शामिल हैं, वहीं सबसे हैरानी वाली बात यह है कि इस सूची से शाहरुख खान का नाम गायब है। पिछली बार इस लिस्ट में शाहरुख का नाम भी शामिल था और वह 65वें नंबर पर मौजूद थे।फोर्ब्‍स की लिस्ट में बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार 76वें स्थान पर हैं, जबकि पिछली बार अक्षय कुमार इस लिस्ट में 80वें पायदान पर थे। सलमान खान जो कि पिछले बार 71वें स्थान पर थे, इस बार नीचे खिसक कर 82वें स्थान पर हैं। फोर्ब्‍स के अनुसार, 50 वर्षीय अक्षय कुमार ने पूरे साल 40.5 मिलियन डॉलर (करीब 277 करोड़ रुपये) की कमाई की।फोर्ब्स ने अक्षय कुमार कुमार की तारीफ करते हुए कहा है कि इस साल उन्होंने सामाजिक और संदेश देने वाली फिल्में कीं। उन्होंने सरकार की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान पर फोकस करते हुए 'टॉयलट: एक प्रेमकथा' और गांवों में कम कीमत पर सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने वाले शख्स पर 'पैडमैन' जैसी फिल्मों से अच्छी कमाई की और इसके अलावा उन्होंने 20 ब्रांड्स को इंडोर्स भी किया है। दूसरी ओर 58 वर्षीय सलमान खान ने 37.7 मिलियन डॉलर (करीब 258 करोड़ रुपये) कमाए। फोर्ब्स में कहा गया है कि बॉलीवुड के अभिनता लगातार फिल्में प्रोड्यूस कर रहे हैं और 'टाइगर जिंदा है' जैसी हिट फिल्मों से उन्होंने अच्छी कमाई की है।फोर्ब्‍स की इस लिस्‍ट में अमेरिकी मुक्केबाज फ्लॉयड मेवेदर ने बाजी मारी। उन्होंने 285 मिलियन डॉलर (करीब 1952 करोड़ रुपये) कमाए। अन्‍य दूसरे सबसे अधिक कमाने वाले एंटरटेनर्स में एक्‍टर जॉर्ज क्‍लूनी (दूसरे), रियल्‍टी टीवी स्‍टार और बिजनेस पर्सन काइली जेनर (तीसरे), फुटबाल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनॉल्‍डो (दसवें), पॉप स्‍टार केट पैरी (19वें), टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर (23वें), सिंगर बेयान्‍स (35), लेखिका जेके रोलिंग (42वें) और गोल्‍फर टाइगर वूड्स (66वें) नंबर पर रहे।

नई दिल्ली। ई-बुक्स, सेनिटरी नैपकिन और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। जीएसटी काउंसिल 21 जुलाई को होने वाली बैठक में इन चीजों पर दरों को तर्कसंगत बनाने पर विचार किया जा सकता है। काउंसिल होटलों के घोषित टैरिफ की जगह वास्तविक ट्रांजैक्शन के मूल्य पर जीएसटी लगाने का फैसला भी कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो होटल में ठहरना भी सस्ता हो जाएगा।सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में होने वाली जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में जीएसटी कानूनों में संशोधन के मसौदे और सिंगल रिटर्न के फॉरमेट पर भी चर्चा होने के आसार हैं। सूत्रों ने कहा कि काउंसिल की बैठक का एजेंडा तैयार कर राज्यों को भेजा जा रहा है।चीनी पर सैस लगाने तथा ईथनॉल पर जीएसटी की दर घटाने पर विचार कर रहे मंत्री समूह की रिपोर्ट पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है। साथ ही डिजिटल लेन-देन पर जीएसटी में दो फीसदी की छूट देने पर विचार कर रहे जीओएम की रिपोर्ट पर भी बैठक में चर्चा होगी। इसके अलावा लॉटरी और आइजीएसटी टैक्स पर बनी दो अलग-अलग टास्कफोर्स की रिपोर्ट भी काउंसिल के एजेंडे में शामिल कर चर्चा की जा सकती है।सूत्रों ने कहा कि काउंसिल की बैठक में कई उत्पादों और सेवाओं पर जीएसटी की दरें तर्कसंगत बनाने पर चर्चा की जाएगी। जिन आइटम पर जीएसटी की दरें कम हो सकती हैं उनमें ई-बुक्स और सेनिटरी नैपकिन प्रमुख हैं। ई-बुक्स को ऑनलाइन सेवा मानते हुए फिलहाल 18 प्रतिशत जीएसटी की श्रेणी में रखा गया है।माना जा रहा है कि सरकार डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के इरादे से ई-बुक्स को भी किताबों की तरह जीरो रेट के स्लैब या पांच प्रतिशत के स्लैब में रखा जा सकता है।

नई दिल्ली। अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले क्रिश्चियन माइकल जेम्स के खिलाफ सीबीआइ कोई भी साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। आरोपी ब्रिटिश मूल का है, लेकिन फिलहाल यूएई में रह रहा है। प्रत्यर्पण के लिए सीबीआइ को वहां की कोर्ट में माइकल के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य जमा कराने थे। उसके बाद ही अदालत को फैसला करना था।माइकल की वकील रोजमेरी डोस एंजोस का कहना है कि कोर्ट ने साक्ष्य जमा कराने की अंतिम तिथि 19 मई तय की थी। उसके बाद भी भारत सरकार को 45 दिन का समय दिया गया था। अलबत्ता इसमें से भी 30 दिन बीत चुके हैं और सरकार खामोश है। उनका दावा है कि माइकल के खिलाफ न तो इटली में कोई साक्ष्य है और न ही भारत व स्विटजरलैंड में। उन्होंने माना कि एक माह पहले उनके मुवक्किल से सीबीआइ ने पूछताछ की थी। ध्यान रहे कि ईडी ने जनवरी में माइकल के प्रत्यर्पण को लेकर यूएई की कोर्ट में अपील की थी।भारत की अदालतों में उसके खिलाफ सीबीआइ व ईडी आरोप पत्र दाखिल कर चुकी हैं। उसके गैर-जमानती वारंट भी जारी किए जा चुके हैं। सीबीआइ की अपील पर इंटरपोल उसके व दो अन्य आरोपियों कार्लो गेरोसा व गाइडो हसके के लिए रेड कार्नर नोटिस भी जारी कर चुकी है।आरोप है कि माइकल ने अगस्ता वेस्टलैंड सौदे को सिरे चढ़ाने की एवज में 235 करोड़ रुपये हासिल किए थे। भारत में उसका आना-जाना लगा रहता था और 1997 से 2013 तक वह तकरीबन 300 मर्तबा भारत आया था। उसे रिश्वत की रकम का भुगतान एक वेब कंपनी के जरिये किया गया था। यह रकम कंसलटेंसी के नाम पर दी गई थी।सीबीआइ ने अपने आरोप पत्र में वायु सेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी, उनके भतीजे संजीव त्यागी के साथ वायु सेना के तत्कालीन उप प्रमुख जेएस गुजराल व वकील गौतम खेतान को मुख्य आरोपी बनाया है। आरोप है कि सभी ने इस सौदे में रिश्वत ली थी।

 

रायपुर। संजीवनी एम्बुलेंस का दरवाजा नहीं खुलने के कारण मंगलवार को आंबेडकर अस्पताल के सामने एक दो महीने के बच्चे की जान चली गई। बच्चे के उपचार के लिए परिजन बिहार से उसे आंबेडकर अस्पताल ले कर आए थे। बच्चे को अस्पताल पहुंचने के लगभग आधा घंटे तक जद्दोजहद चलती रही। जब गेट नहीं खुला तो बच्चे को खिड़की से बाहर निकाला गया। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों ने पल्ला झाड़ा;-उधर, इस बारे में संजीवनी एंबुलेंस सेवा का संचालन कर रही कंपनी जीवीके के पीआरओ पंकज रहांगडाले का कहना है कि संजीवनी एम्बुलेंस का गेट खुलने में दिक्क्त आई, लेकिन दस से पंद्रह मिनट में बच्चे को खिड़की से निकाल लिया गया था। उसके बाद एम्बुलेंस को ड्रायवर गैरज ले गया। जिसके बाद गेट खुला, लेकिन दो घंटे तक एम्बुलेंस का गेट नहीं खुला और दम घुटना बच्चे की मौत का कारण है यह सही नहीं है। बच्चा पहले से ही गंभीर हालत में एम्बुलेंस में आया था।
बच्चे के दिल में था छेद:-मृत बच्चे के पिता बिहार निवासी अंबिका सिंह ने बताया कि उनके दो माह के बेटे कुंजराम के दिल में छेद था। वे बच्चे को लेकर एम्स दिल्ली गए थे, लेकिन वहां इलाज का खर्च ज्यादा बताया गया। उन्हें किसी डॉक्टर ने सलाह दी कि वे छत्तीसगढ़ जाएं, वहां नया रायपुर स्थित सत्य साईं अस्पताल में मुफ्त में इलाज होता है। जिसके बाद परिजन मंगलवार को सुबह ट्रेन से बच्चे को लेकर रायपुर पहुंच थे। बच्चे को रायपुर रेल्वे स्टेशन से संजीवनी एंबुलेंस की सहायता से पहले आंबेडकर अस्पताल लाया गया था, जहां से उसे श्री सत्य सांई हॉस्पिटल नया रायपुर लेकर जाना था।

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने अरब सागर में बनने वाली छत्रपति शिवाजी मेमोरियल की प्रतिमा का कद घटा दिया है। ऐसा करने का कारण इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत को कम करना है। यह जानकारी आरटीआइ की एक याचिका के जवाब में मिली है।नई डिजाइन में सरकार ने वीर मराठा महाराजा शिवाजी की विशालकाय प्रतिमा के कद में 7.5 मीटर की कटौती की जाएगी। हालांकि प्रतिमा के नए डिजाइन में अब शिवाजी की तलवार पहले की अपेक्षा अधिक बड़ी होगी। लेकिन इन बदलावों से शिवाजी की प्रतिमा के कुल कद में कोई कमी नहीं आएगी। यह प्रतिमा पूर्व निर्धारित ऊंचाई 121.2 मीटर की ही रहेगी।सरकार ने अपने जवाब में बताया है कि प्रतिमा के आधार से लेकर पूरे ढांचे की ऊंचाई 212 मीटर ही रहेगी। लेकिन इस कद को कायम रखने के लिए शिवाजी की तलवार को और लंबा कर दिया जाएगा। यह तलवार अब 38 मीटर के बजाय 45.5 मीटर रहेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का शिलान्यास दिसंबर 2016 में किया था। 2500 करोड़ रुपये की इस परियोजना का कांट्रैक्ट इसी साल मार्च में लार्सन एंड टूब्रो कंपनी को दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार के अनुसार इस पूरी परियोजना (प्रथम और द्वितीय चरण) की कुल लागत 3600 करोड़ रुपये है।

नई दिल्ली। स्मार्ट सिटी के तैयार होने से पहले ही देश में 151 स्मार्ट गांव विकसित कर लिये गये हैं। इन स्मार्ट गांवों के किसान तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्षम बना दिये गये हैं, जो मॉडल जलवायु स्मार्ट गांव हो गये हैं। पहले चरण में चयनित गांवों की सूची में उन गांवों को शामिल किया गया, जो सुदूर और कठिन जलवायु वाले क्षेत्रों में बसे हैं। इन्हें विकसित करने में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अहम है।मॉडल जलवायु स्मार्ट गांवों की लोकप्रियता को देखते हुए कई राज्यों ने इसकी तर्ज पर अपने यहां कारगर पहल की है। महाराष्ट्र की राज्य सरकार ने केंद्र की तकनीकी और विश्व बैंक की वित्तीय मदद से प्रदेश में पांच हजार गांवों को स्मार्ट जलवायु स्मार्ट गांव बनाने का निश्चय किया है। जबकि असम, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा ने भी अपने यहां गांवों को स्मार्ट बनाने की दिशा में पहल की है।विकसित स्मार्ट जलवायु मॉडल गांव ऐसे क्षेत्रों से चुने गये जो बरसात के मौसम में बाढ़ ग्रस्त और सूखाग्रस्त क्षेत्रों के हैं। इसके अलावा पालागस्त रहने वाले गांवों के साथ उन गांवों को सूची में रखा गया है, जहां भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। इन गांवों को विपरीत जलवायु वाली परिस्थितियों में गांवों के विकास करने की क्षमता को बढ़ाने की तकनीक प्रदान की गई है।ऐसे अनूठे और चुनौतीपूर्ण कार्यो को पूरा करने का दायित्व कृषि विज्ञान केंद्रों को सौंपा गया गया है। पहले चरण के 151 गांवों को स्मार्ट बनाने में कुल 121 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की भूमिका अहम रही है। इन केंद्रों के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों पर उन्नत प्रजाति की फसलों का प्रदर्शन किया है। फिलहाल देश में केवीके की संख्या बढ़कर सात सौ हो चुकी है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केवीके ने उम्दा प्रदर्शन किया है। किसानों तक सीधी पहुंच इन केवीके की होती है। उन्नत तकनीक और प्रजातियों को किसानों तक पहुंचाने के लिए इन केंद्रों को प्रवेश द्वार कहा जाता है।राजग सरकार ने सत्ता संभालते ही केवीके को कारगर बनाने के लिए 3900 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मुहैया कराई। चार सालों के दौरान कुल 70 केवीके और खोले गये। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कृषि मंत्रालय ने मॉडल स्मार्ट जलवायु गांव विकसित करने का फैसला किया। स्मार्ट मॉडल गांव को अपनाने के लिए ज्यादातर राज्यों ने इसे अपनाने का फैसला किया है।

 

 

 

नई दिल्ली। उत्तर रेलवे की लखनऊ डिवीजन के एक ट्रैकमैन धमेंद्र कुमार ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा है कि वह और उसके सहकर्मी अधिकारियों का घर नहीं बनाएंगे, बल्कि सिर्फ रेलवे के लिए काम करेंगे।मालूम हो कि पिछले साल सितंबर में रेल मंत्री का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद पीयूष गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अपने कनिष्ठों से घरेलू कामकाज न कराएं। रेल मंत्री ने साफ कहा था कि जिन अधिकारियों ने भी ऐसा करना जारी रखा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनके आदेश के बाद से गैंगमैन और ट्रैकमैन समेत ग्रुप-डी के करीब 10 हजार कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारियों के घरों से हटाकर संरक्षा और रखरखाव के कार्यों में लगाया जा चुका है। लेकिन इसके बावजूद धर्मेंद्र कुमार और उसके पांच सहकर्मियों को अभी तक रेलवे के कार्यों में नहीं लगाया गया है।13 जुलाई को लिखे इस पत्र में धर्मेंद्र कुमार ने कहा है कि उसके वरिष्ठ सीनियर सेक्शन इंजीनियर राजकुमार वर्मा ने उसे और उसके पांच सहकर्मियों को बाराबंकी में अपने निजी घर के निर्माण में लगाया हुआ है। जब उसने वहां काम करने से इन्कार कर दिया तो उसे निलंबित करने की धमकी दी गई और ड्यूटी से अनुपस्थित दिखा दिया गया। धर्मेद्र ने वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी, लेकिन किसी ने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है। उसने निर्माण स्थल पर कार्य कर रहे रेलकर्मियों का वीडियो भी बनाया है और अपने पत्र के साथ रेल मंत्री को भेजा है। राजकुमार वर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं, डिवीजनल रेलवे मैनेजर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन के संस्पाथक जेफ बेजोस आधुनिक इतिहास के सबसे अमीर शख्स बन गए हैं। उनकी कुल संपत्ति 150 अरब डॉलर के पार हो गई है, जो कि माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स की संपत्ति से 55 अरब डॉलर ज्यादा है। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर्स इंडेक्स की ओर से ये जानकारी दी गई है।
1982 के बाद अबतक के सबसे अमीर व्यक्ति;-हाल ही में 54 वर्षीय बेजोस को फोर्ब्स ने भी सबसे अमीर शख्स घोषित किया था। बता दें कि 1999 में बेजोस की संपत्ति कुछ समय के लिए 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गई थी। जिसकी आज के वक्त में करीब 149 अरब डॉलर कीमत है। इस तरह अमेजॉन के संस्थापक बेजोस 1982 से लेकर अब तक के इतिहास में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।
संपत्ति में 52 अरब डॉलर का इजाफा:-इस साल बेजोस की कुल संपत्ति में 52 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जो कि मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति से भी ज्यादा है। हाल में ही मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर शख्स भी बने हैं। बता दें कि मुकेश अंबानी की कुल जितनी संपत्त‍ि है उससे ज्यादा तो जोसेफ की एक साल में संपत्त‍ि (52 अरब डॉलर) बढ़ चुकी है। मुकेश अंबानी की कुल संपत्त‍ि 44.3 अरब डॉलर है।
बिल गेट्स दूसरे, वारेन तीसरे स्थान पर:-ब्लूमबर्ग इंडेक्स के मुताबिक अमीर आदमियों की इस लिस्ट में बेजोस के बाद बिल गेट्स 95.5 अरब डॉलर के साथ दूसरे और पूंजी बाजार निवेशक वारेन बफेट 83 अरब डॉलर संपत्त‍ि के साथ तीसरे स्थान पर हैं। हालांकि, इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है कि बिल गेट्स ने अगर अपनी संपत्त‍ि का बड़ा हिस्सा 'बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन' को दान न किया होता, तो उनकी भी संपत्त‍ि 150 अरब डॉलर से ज्यादा होती।

रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय अब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की जांच करेगा। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. शम्स परवेज के प्रोजेक्ट प्रस्ताव को स्वीकार किया है। वायुमंडलीय काला कार्बन और जलवायु परिवर्तन (एटमॉसफिरिक ब्लेक कार्बन एंड क्लाइमेट चेंज) पर देश स्तरीय रिसर्च विश्वविद्यालय के प्रोफेसर परवेज के नेतृत्व में होगा।डॉ. परवेज के प्रस्ताव को 60 लाख स्र्पये की राशि मिलेगी। इसके अंतर्गत दो शोधार्थी भी होंगे। इसके तहत भारत के चार तरह प्रकृति वाले इलाकों को चयनित करके ग्लोबल वार्मिंग पर पड़ रहे प्रभाव को जांचा जाएगा। इनमें हिमालय जहां पर आए दिन बादल फटने की क्या है। इसी तरह दिल्ली में अक्सर प्रदूषण के कारण यहां होने वाली दिक्कतें व वायुमंडल में असर जांचेंगे। रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. शम्स परवेज के मुताबिक मिनरल एंड कोल बेस्ड एरिया रायपुर होने के कारण यहां भी ग्लोबल वार्मिंग की जांच होगी और गोवा या विशाखापट्टनम में समुद्री तट के किनारे भी ग्लोबल वार्मिंग की जांच करेंगे।
मौसम की जानकारी आंकने के मिलेंगे यंत्र:-स्पेक्टोफोटो मीटर, वेदर की जानकारी, वेदर मीटर करने के लिए भी उपकरण मिलेंगे। बताया जाता है कि पृथ्वी का औसत तापमान अभी लगभग 15 डिग्री सेल्सियस है, हालांकि भूगर्भीय प्रमाण बताते हैं कि पूर्व में ये बहुत अधिक या कम रहा है, लेकिन अब पिछले कुछ वर्षों में जलवायु में अचानक तेजी से परिवर्तन हो रहा है। गर्मियां लंबी होती जा रही हैं, और सर्दियां छोटी। पूरी दुनिया में ऐसा हो रहा है। यही है जलवायु परिवर्तन। दिन और रात के तापमान में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। लिहाजा इस स्तर के रिसर्च के लिए रविवि के प्रोफेसर को प्रोजेक्ट मिलना बड़ी कामयाबी है।
रायपुर में इसलिए होगी जांच;-रायपुर में ग्लोबल वार्मिंग की जांच होने की प्रमुख वजह यहां शहर से लगे औद्योगिक क्षेत्र का होना है। विशेषज्ञों के मुताबिक राजधानी से लगे उरला और सिलतरा में चलने वाले केमिकल और स्पंज आयरन उद्योगों ने न केवल वायु बल्कि, जल प्रदूषण को भी बढ़ाया है। उद्योगों की चिमनी से निकलने वाले आर्गेनिक व ब्लैक कार्बन के कारण वायु में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है। इसी कारण यहां ठंड की तासीर कम होती जा रही है। ठंड में भी गर्मी का एहसास होने लगा है। इसका असर इतना खतरनाक है कि आसपास के रिहायशी इलाकों के मकानों की दीवारें काली पड़ गई हैं।

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