लंदन। किचन की सिंक में नल से पानी गिरने के दौरान आपने पानी को नाली में बहने से पहले थोड़ा ऊपर उठते देखा होगा। ऐसा विज्ञान के एक सिद्धांत हाइड्रोलिक जंप के कारण होता है। इसकी खोज 1500 ईसवी में इटली के प्रसिद्ध खोजकर्ता और पेंटर लियोनार्डाे द विंची ने की थी।हालांकि इसकी वजह आज तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य ही रही है। इसे लेकर वैज्ञानिकों ने समय-समय पर कई थ्योरी दीं, लेकिन एक भारतीय शोधार्थी ने हाइड्रोलिक जंप का सही कारण खोजने का दावा किया है। हाइड्रोलिक जंप की ये प्रक्रिया केवल सिंक में नहीं सभी जल स्रोतों खासकर नदी और बांध से निकलने वाले पानी में भी होती है। इसे गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत, ऊर्जा सिद्धांत से परिभाषित किया गया है।ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज में सेंट जोंस कॉलेज के शोधार्थी राजेश भगत ने हाइड्रोलिक जंप का कारण पृष्ठ तनाव बताया है। उनका कहना है कि 1820 से वैज्ञानिक गुरुत्वाकर्षण को इसका कारण मानते आ रहे हैं, लेकिन जनरल ऑफ फ्लुइड मेकेनिक्स में प्रकाशित अध्ययन से यह थ्योरी गलत साबित हुई है।
क्या है हाइड्रोलिक जंप:-बता दें कि जब पानी तेज बहाव से कम बहाव की की ओर चलता है तो कम बहाव वाली सतह पर पानी थोड़ा ऊपर उठ जाता है। लियोनार्डा द विंची ने इस प्रकार पानी के ऊपर उठने को हाइड्रोलिक जंप कहा। माना जाता है कि ऐसा पानी की गतिज ऊर्जा के स्थितिज ऊर्जा में बदलने के कारण होता है। सिंक में इसका कारण गुरुत्वाकर्षण माना गया।
पृष्ठ तनाव थ्योरी:-राजेश भगत ने अपने प्रयोग में पानी की तेज धार को ऊपर की ओर फेंका और तिरछी सतह पर बहाया। उन्हें भी समान परिणाम प्राप्त हुए। इस पर उन्होंने हाइड्रोलिक जंप का कारण पृष्ठ तनाव और श्यानता को माना है। पानी की गति को कम ज्यादा करके उन्होंने हाइड्रोलिक जंप का सही आकार भी खोजा। राजेश ने इसे वृत्ताकार हाइड्रोलिक जंप नाम दिया है।यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के प्रोफेसर पॉल लिंडन ने राजेश की खोज को ग्राउंड ब्रेकिंग करार दिया है। उनका कहना है कि हाइड्रोलिक जंप की पृष्ठ तनाव थ्योरी से पतली सतह वाले द्रवों की गति समझने में मदद मिलेगी।
कार की सफाई में मिलेगी मदद:-भगत का कहना है कि उनके सिद्धांत से उन उद्योगों को फायदा होगा जहां पानी का अत्यधिक मात्र में उपभोग किया जाता है। हाइड्रोलिक जंप की सीमा को बदलकर हम उद्योगों में पानी के प्रयोग का घटा सकते हैं। इसके अलावा कार की सफाई और घर में कई कार्य करने के दौरान होने वाले पानी का उपभोग कम से कम करने में भी इस सिद्धांत से मदद मिलेगी।

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