नई दिल्‍ली - सीरिया को लेकर दो सप्‍ताह पहले जिस खुशहाली के दौर के आने की संभावना जताई जा रही थी उस पर अब पूरी तरह से ग्रहण लग चुका है। इस माह की शुरुआत में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने सीरिया से अपनी फौज वापस बुलाने का ऐलान किया था। इसके बाद पूर्वी घोउटा को लेकर भी सीरियाई सरकार और विद्रोहियों में एक बड़ा समझौता हुआ था। इसके बाद माना जा रहा था कि सीरिया में अब शांति लौट सकती है। राजनीतिक और कूटनीतिक जानकार भी ऐसी ही उम्‍मीद लगाए हुए थे। लेकिन पहले सीरिया के घोउटा में हुए केमिकल अटैक ने इस पर ग्रहण डाला तो अब अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के संयुक्‍त हमले ने यहां पर खुशहाली लौटने की उम्‍मीद पर पानी फेर दिया है। फिलहाल यहां पर दुश्‍वारी के अलावा कुछ और नहीं है। शनिवार तड़के हुए हमले के दौरान सीरिया के दमिश्‍क में करीब 103 मिसाइलें दागी गईं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह टॉमहॉक मिसाइलें थीं। रूसी मीडिया की मानें तो इनमें से करीब 71 मिसाइलों को सीरिया के एयर डिफेंस सिस्‍टम ने इंटरसेप्‍ट भी किया।
अमेरिका-रूस में गहरी होती खाई
दमिश्‍क पर हुए इस हमले के बाद सीरिया ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्‍टम ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्‍ट किया था। वहीं रूसी मीडिया का कहना है कि यह मिसाइलें अमेरिकी युद्धपोत और विमानों से दागी गईं। इसके अलावा इस हमले में लाल सागर में तैनात दो अमेरिकी युद्धपोत शामिल थे जिन्‍हें बम वर्षक विमान रॉकवेल बी-1 का एयर सपोर्ट मिला हुआ था। रूसी मीडिया का कहना है कि दमिश्‍क से करीब 40 किमी दूर स्थित सीरियाई एयरबेस पर भी 12 मिसाइलें दागी गईं हैं। आपको बता दें कि सीरिया में रूस और अमेरिकी फौज की मौजूदगी काफी समय से बनी हुई है। रूस ने सीरिया में मिसाइल सिस्‍टम एस-300 भी तैनात कर रखा है। लेकिन रूस ने सीरिया में अपना एयर डिफेंस सिस्‍टम नहीं तैनात किया है, जिसकी वजह अमेरिक, फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा दागी गई मिसाइलों को पहचान कर समय पर नष्‍ट नहीं किया जा सका। रूस का कहना है कि इस संयुक्‍त हमले में फिलहाल किसी जवान या नागरिक की जान नहीं गई है। लेकिन यह बेहद साफ है कि इस हमले के बाद रूस समर्थित और अमेरिका समर्थित देशों के बीच खाई और गहरी हो गई है।
हमले के बाद रूस की यूएस को धमकी
दमिश्‍क पर हुए इस हमले के बाद रूस ने अमेरिका को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। यहां पर एक बात ध्‍यान देने वाली ये है कि डबल एजेंट के मामले से रूस के खिलाफ हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने अमेरिका का पूरा साथ दिया है। इसके अलावा इजरायल ने भी इस हमले को सही ठहराया है। वहीं ईरान और रूस ने पहले की ही तरह इस हमले के लिए अमेरिका को आड़े हाथों लिया है। आपको बता दें कि इसी सप्‍ताह अमे‍रिकी राष्‍ट्रपति ने रूस को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि सावधान रहो मिसाइलें आ रही हैं। इसके बाद रूस ने इसका जवाब देते हुए कहा था कि कहीं ये मिसाइलें पूर्वी घोउटा में हुए केमिकल हमले के सुबूत मिटाने के लिए तो नहीं दागी जाएंगी। रूस का साफतौर पर कहना था कि यह मिसाइलें पूर्वी घोउटा से केमिकल हमले के सुबूत मिटा देंगी। यही वजह है कि अमेरिका इसकी बात कर बचने के रास्‍ते तलाश कर रहा है। रूस ने अमेरिका पर अंगुली उठाते हुए यह भी कहा है कि सीरिया में हुए केमिकल हमले की जांच को आने वाली ओपीसीडब्‍ल्‍यू की टीम की घोषणा से पहले ही अमेरिका ने सीरिया पर हमले की घोषणा कर दी थी।
रूसी एयर डिफेंस जोन पर नहीं हुआ हमला
यहां पर एक चीज और ध्‍यान में रखने वाली है, और वो ये है कि अमेरिका ने रूसी एयर डिफेंस जोन की तरफ हमला नहीं किया। रूस की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि तार्तुस और खमीमिम एयरबेस रूस का एयर डिफेंस जोन है और यहां पर शील्‍ड फैसेलिटी मौजूद है। माना जा रहा है कि अमेरिका ने ऐसा इसलिए भी किया क्‍योंकि वह रूस से सीधे दो-दो हाथ नहीं करना चाहता है। वहीं दूसरी वजह ये भी है कि यहां पर किया हमला रूस के द्वारा नाकाम किया जा सकता था। हमले के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र के महासचिव एं‍टोनियो गुटेरेस ने सभी देशों से अपील की है कि वे इस पर एक साथ आएं और मामले को शांत करने के लिए कदम बढ़ाएं।
हवा में ही नष्‍ट कर दी गई कई मिसाइलें
रूसी मीडिया की मानें तो संयुक्‍त हमले के जवाब में सीरिया की तरफ से भी मिसाइलें दागी गईं। कुछ अमेरिकी मिसाइलों को हवा में ही नष्‍ट कर दिया गया। इसको लेकर रशियन टाइम्‍स ने कुछ वीडियो भी अपनी वेबसाइट पर डाली हैं। इस हमले को लेकर रूस ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह हमला संयुक्‍त राष्‍ट्र के नियमों का खुलेतौर पर उल्‍लंघन है। रूस ने इस हमले को लेकर संयुक्‍त राष्‍ट्र की आपात बैठक बुलाने की भी अपील की है।

 

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