लंदन - वैज्ञानिकों ने पाया है कि जलरीछ (टार्डीग्रेड) नामक जीव सूर्य के खत्म होने तक जीवित रहेगा। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि जलरीछ तमाम खगोलीय विनाशों से बच निकलेगा। यह मानव जाति के मुकाबले कम से कम 10 अरब साल ज्यादा समय तक अपना अस्तित्व कायम रखेगा।
पृथ्वी का अनश्वर जीव : शोधकर्ताओं ने आठ पैरों वाले इस सूक्ष्म जीव को विश्व का अनश्वर जीव घोषित किया है। उन्होंने कहा, विभिन्न अध्ययनों में इस चीज पर ज्यादा ध्यान दिया गया है कि किसी विनाशकारी खगोलीय घटना का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। लेकिन इसको लेकर अब तक काफी कम जानकारी थी कि ऐसी किसी घटना का जलरीछ के अस्तित्व पर क्या असर होगा अथवा पृथ्वी से जीवन मात्र का ही नामोनिशान मिट जाएगा या बचा रहेगा। शोधकर्ताओं ने कहा, हमने पाया कि सूर्य के खत्म होने तक पृथ्वी पर जलरीछ का जीवन कायम रहेगा।
अन्य ग्रहों के लिए उम्मीद : शोधकर्ताओं के अनुसार, जलरीछ पृथ्वी पर जीवन का सबसे जिद्दी और सबसे लचीला रूप है। इसको देखने से यह भी स्पष्ट होता है कि एक बार इसका जीवन शुरू होने के बाद इसको नष्ट करना कठिन है। इस तरह यह अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना को जगा देता है। यह बिना भोजन-पानी के अर्से तक जीवित रह सकता है। यह अत्यधिक तापमान में रह सकता है। यह जितनी आसानी से गहरे समुद्र में रह सकता है उतनी ही आसानी से अंतरिक्ष के निर्वात में भी रह सकता है।
हर विनाश से बेअसर : शोधकर्ताओं ने कहा, इस बात की पूरी उम्मीद है कि जलरीछ के रूप में जीवन का अस्तित्व किसी भी खगोलीय विनाशकारी घटना में बचा रह जाएगा। उन्होंने अध्ययन में तीन खगोलीय विनाशकारी घटनाओं पर गौर किया। ये घटनाएं हैं किसी बड़े क्षुद्रग्रह का प्रभाव, सुपरनोवा के रूप में किसी तारे में विस्फोट या गामा किरणों की बौछार। शोधकर्ताओं ने कहा, क्षुद्रग्रह की टक्कर जैसी घटना कभी इतनी मजबूत नहीं होगी कि दुनिया के महासागरों को बिल्कुल खौला दे। ऐसे में जलरीछ बचा रह सकता है।
शोधकर्ता राफेल एल्वेस बटिस्टा ने कहा ने कहा, पृथ्वी पर जलरीछ जिस रूप में पाया जाता है उस रूप में वह लगभग अनश्वर है। संभव है कि ब्रह्मांड के किसी हिस्से में इसकी तरह प्रजातियां भी मौजूद हों। उन्होंने कहा, इस संदर्भ में मंगल ग्रह या सौरमंडल के अन्य हिस्सों में जीवन की संभावना की पड़ताल एक वास्तविक मसला है। अगर पृथ्वी पर जलरीछ जीवन का सबसे जिद्दी और सबसे लचीला रूप है तो कौन जानता है कि अन्यत्र ऐसा नहीं है।
30 साल तक बिना खाए-पीए आराम से रह सकता है
150 डिग्री सेल्सियस में भी जीवित रह सकता है
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता राफेल एल्वेस बटिस्टा ने कहा, हमें बचाने वाली तकनीक के बिना हम मानव बेहद संवेदनशील प्रजाति हैं। हमारे पर्यावरण में जटिल बदलाव नाटकीय तरीके से हम पर असर डालते हैं। लेकिन पृथ्वी पर हमारे मुकाबले अत्यधिक लचीली प्रजाति मौजूद है। इसलिए मनुष्य का अस्तित्व मिट जाने के काफी बाद तक पृथ्वी पर जीवन जारी रह सकता है।
1773 में जर्मन जीवविज्ञानी जे. ए. एप्राहिम गोएजे ने खोज की थी
60 साल तक जीवित रह सकता है और अधिकतम 0.5 मिमी लंबाई

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