इस्लामाबाद - पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने सांसद की अयोग्यता संबंधी समय सीमा से जुड़े एक मामले में बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अयोग्यता का यह मामला पिछले साल तब सुर्खियों में आया था, जब पनामा पेपर मामले में नवाज शरीफ को संवैधानिक पद के अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
इसके बाद शरीफ को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तब इस बात पर बहस शुरू हो गई थी कि अयोग्यता आजीवन हो सकती है या नहीं?शीर्ष अदालत में यह मामला संविधान के अनुच्छेद 62 (1)(एफ) के तहत अयोग्यता की समय सीमा स्पष्ट नहीं होने के चलते पहुंचा था। इसकी समय सीमा निर्धारित करने की मांग को लेकर 17 याचिकाएं दायर की गई थीं।
इस मामले की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस साकिब निसार की अगुआई वाली पांच जजों की पीठ ने कई हफ्तों तक सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने कई वकीलों की दलीलें सुनीं। अटार्नी जनरल ने कहा कि संविधान में अयोग्यता के लिए समय सीमा नहीं दी गई है। इसका निर्धारण सिर्फ संसद ही कर सकती है। पीठ में शामिल जस्टिस एजाजुल अहसान ने कहा कि अयोग्यता आजीवन होनी चाहिए। इसे कोई सक्षम अदालत ही पलट सकती है।
वहीं चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर कानून में अयोग्यता की समय सीमा का जिक्र नहीं है तो इसे ताउम्र किया जाना चाहिए। अगर कोई अयोग्य घोषित किया गया है तो वह भला चुनाव कैसे लड़ सकता है। शरीफ ने पिछले महीने इस पीठ को लिखित में दिए बयान में कहा था कि उनकी अयोग्यता हमेशा के लिए नहीं है।

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