नेपाल में भक्तपुर समेत काठमांडू घाटी के विभिन्न हिस्सों में इन दिनों प्रसिद्ध बिस्केट जात्रा का आयोजन किया जा रहा है. नौ दिनों तक चलने वाला यह वार्षिक उत्सव नेपाली नव वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है.
नेपाली नया साल शुरू होने से चार दिन पहले बिस्केट जात्रा शुरू होती है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत मल्ल शासनकाल मे हुई. इस उत्सव से कई किंवदंतियां जुड़ी हैं. एक मान्यता के अनुसार स्थानीय राजकुमारी से जो भी विवाह करता था पहली ही रात को उसकी मृत्यु हो जाती. बाद में एक बहादुर युवक ने राजकुमारी से शादी की. रात में दो सांपों ने उस पर हमला किया, तो युवक ने उन्हें मार डाला.
बिस्केट जात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान भैरवनाथ की रथ यात्रा होती है. इसमें भैरवनाथ के तीन मंजिला रथ को भक्तपुर में घुमाया जाता है और शहर के ऊपरी तथा निचले हिस्से के लोगों के बीच रथ को अपनी-अपनी ओर खींचने के लिए रस्साकशी होती है. इसे देखने के लिए नेपाल के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी पहुंचते हैं.
नए साल की पूर्व संध्या पर मरे हुए सांपों के प्रतीक को एक विशाल लिंग यानि स्तंभ पर लटकाया जाता है. अगले दिन इस स्तंभ को गिरा दिया जाता है और इसके साथ ही नेपाली नए साल की औपचारिक शुरुआत होती है.

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