अंकारा - तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एदोर्गन ने असफल सैन्य तख्तापलट की पहली बरसी पर इस्तांबुल में आयोजित एक रैली के दौरान लाखों लोगों को संबोधित किया। एदोर्गन ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, 'उस रात लोगों के हाथों में बंदूकें नहीं थीं, उनके हाथों में झंडे थे और सबसे अहम उनके साथ उनका विश्वास था।'
एदोर्गन ने कहा, 'मैं अपने देश के उन सभी लोगों का कृतज्ञ हूं जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश की रक्षा की। उन्होंने कहा कि 250 लोगों ने अपनी जान देकर देश का भविष्य सुरक्षित रखा। राष्ट्रपति एदोर्गन ने इसके बाद इस्तांबुल ब्रिज पर शहीद मेमोरियल का भी उद्घाटन किया। इस पुल का नाम बदलकर 'मार्टियर्स ऑफ जुलाई 15' कर दिया गया है।
तुर्की की सरकार ने नाकाम तख्तापलट के बाद लगभग डेढ़ लाख लोगों को बर्खास्त किया था। सरकार के अनुसार वह तख्तापलट का समर्थन करने वालों को दंडित कर रही है। तुर्की ने इस तख्तापलट के असफल प्रयास के लिए मुस्लिम धर्मगुरु फतेउल्लाह गुलेन को जिम्मेदार ठहराया था। जिसमें राष्ट्रपति तैय्यप एदोर्गन को सत्ता से हटाने का प्रयास किया गया था।
गौरतलब है कि सेना के एक धड़े ने गत वर्ष 15 जुलाई को तख्तापलट करने की कोशिश की थी। तख्तापलट की इस नाकाम कोशिश की लड़ाई में 250 से अधिक लोग मारे गए थे और 2,196 लोग घायल हुए थे।

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